Home Blog Page 109

Blinkit-Swiggy की बढ़ी टेंशन? अंबानी ने क्विक कॉमर्स में कर दिया वो कम

0

आजकल हम सभी की आदत बदल गई है. दूध का पैकेट हो या स्नैक्स, हम दुकान पर जाने के बजाय फोन उठाकर 10 मिनट में डिलीवरी देने वाले ऐप्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी जल्दी सामान पहुंचाने की होड़ में ये कंपनियां पैसा कैसे कमाती हैं?

सच तो यह है कि क्विक कॉमर्स के बाजार में मुनाफे तक पहुंचना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है. लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अब जो दावा किया है, उसने बाजार के समीकरण बदल दिए हैं. रिलायंस ने साफ कर दिया है कि उसका क्विक कॉमर्स और एफएमसीजी (FMCG) बिजनेस अब पैसा कमाने लगा है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कहना है कि उनका क्विक कॉमर्स बिजनेस अब हर ऑर्डर पर मुनाफा कमा रहा है, जिसे कारोबारी भाषा में ‘कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव’ होना कहते हैं.

मुनाफे का गणित समझ लें

अक्टूबर 2024 में रिलायंस ने अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की थी. इतने कम समय में कंपनी ने वो हासिल कर लिया है, जिसके लिए दूसरी कंपनियां सालों से संघर्ष कर रही हैं. कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उनका एफएमसीजी कारोबार, जिसे शुरू हुए तीन साल हो चुके हैं, वह भी अब मुनाफे (Ebitda Positive) की स्थिति में आ गया है.

रिलायंस रिटेल के सीएफओ दिनेश तलुजा ने इसके पीछे की वजह समझाई है. दरअसल, रिलायंस भारत में किराना और ग्रोसरी का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. इस वजह से वे एफएमसीजी कंपनियों से सबसे ज्यादा सामान खरीदते हैं. जब आप थोक में इतना बड़ा ऑर्डर देते हैं, तो स्वाभाविक है कि आपको सामान सस्ती दरों पर मिलता है. इसी ‘सोर्सिंग पावर’ का फायदा रिलायंस को क्विक कॉमर्स में मिल रहा है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ रहा है.

खाने-पीने की चीजों से हो रही असली कमाई

रिलायंस की इस सफलता के पीछे एक और बड़ा कारण है ग्राहकों की पसंद को समझना. तलुजा ने बताया कि फूड और बेवरेज (F&B) कैटेगरी में सबसे ज्यादा मार्जिन होता है. रिलायंस के क्विक कॉमर्स पर आने वाले हर तीन में से एक ऑर्डर इसी कैटेगरी का होता है.

आमतौर पर किराना दुकानों में खाने-पीने की चीजों की बर्बादी (वेस्टेज) 30 से 35 प्रतिशत तक होती है, जिससे मुनाफा घट जाता है. लेकिन रिलायंस ने अपने सप्लाई चेन मैनेजमेंट से इस बर्बादी पर लगाम लगा दी है. यही कारण है कि वे ग्राहकों को अच्छी कीमत भी दे पा रहे हैं और खुद भी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही, कंपनी अब सिर्फ राशन ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन के सामान भी डिलीवर कर रही है, जिससे कमाई का दायरा बढ़ रहा है.

दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले कहां खड़ी है रिलायंस?

रिलायंस के पास करीब 3,000 आउटलेट्स हैं जो क्विक कॉमर्स से जुड़े हैं, जिनमें से 800 डार्क स्टोर्स (जहां से सिर्फ डिलीवरी होती है) हैं. कंपनी का कहना है कि वे अपने पहले से मौजूद स्टोर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत कम आती है. आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर 2025 की तिमाही में रिलायंस को हर दिन 16 लाख (1.6 मिलियन) ऑर्डर मिल रहे थे. ऑर्डर्स की संख्या में तिमाही दर तिमाही 53% की बढ़ोतरी देखी गई है. कंपनी का लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स खिलाड़ी बनना है.

फिलहाल इस रेस के सबसे बड़े खिलाड़ी ब्लिंकिट (Blinkit) और स्विगी (Swiggy) अभी भी कुल मिलाकर घाटे में ही चल रहे हैं. ब्लिंकिट कुछ शहरों में मुनाफा कमा रहा है, लेकिन नए शहरों में विस्तार के कारण उनका खर्च बढ़ा हुआ है. स्विगी का घाटा भी कम हुआ है, लेकिन वे अभी पूरी तरह मुनाफे में नहीं आए हैं.

Hyundai का बड़ा प्लान, 2026 में लॉन्च होंगे एडवांस फीचर्स

0

2025 में कई शानदार मॉडल्स को लॉन्च करने के बाद अब Hyundai ने 2026 की तैयारी शुरू कर दी है. इस साल कंपनी बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक कई नई गाड़ियों को लॉन्च करने की तैयारी में है, सबसे पहला लॉन्च 2026 की दूसरी तिमाही में होने की उम्मीद है.

चलिए आपको अब उन चार गाड़ियों के बारे में बताते हैं जो इस साल लॉन्च हो सकती हैं.

पहला लॉन्च: ये गाड़ी करेगी एंट्री

ग्लोबल मार्केट की तरह कंपनी तीन साल के प्रोडक्ट लाइफसाइकिल को फॉलो करते हुए, हुंडई इस साल 6th जेनरेशन Verna के फेसलिफ्ट वर्जन को लॉन्च कर सकती है. मार्च 2023 में ओरिजिनल मॉडल को लॉन्च किया गया था और इस साल अप्रैल में इस एसयूवी के अपडेटेड मॉडल को लॉन्च किया जा सकता है.

नई वरना का फ्रंट लेटेस्ट Sonata से इंस्पायर्ड होगा और यह ज्यादा शार्प और एग्रेसिव दिखेगी. इसमें कई नए फीचर्स होंगे, जिसमें कस्टमाइज़ेबल मोड्स वाला 12.3 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और वायरलेस Apple CarPlay और वायरलेस Android Auto के साथ 12.3 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल है. इस गाड़ी के इंजन में किसी भी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है.

दूसरा लॉन्च: आएगा फेसलिफ्ट वर्जन

साल की दूसरी तिमाही में, Hyundai Exter का फेसलिफ्ट अवतार लॉन्च हो सकता है.नई Exter में 12.9 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और 9.9 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलेगा. फेसलिफ्ट में नया बंपर, बदले हुए हेडलैंप और टेल लैंप के अलावा 15 इंच के नए अलॉय व्हील्स भी मिल सकते हैं. इस कार के इंजन या ट्रांसमिशन में कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है.

तीसरा लॉन्च: बड़ी बैटरी के साथ आएगी ये EV

जून या जुलाई में, हुंडई नई Ioniq 5 को लॉन्च कर सकती है. इस गाड़ी को कंपनी ने मार्च 2024 में इंटरनेशनल लेवल पर पेश किया था. इस फेसलिफ्ट मॉडल के डिजाइन में बदलाव के अलावा इसमें रियर विंडशील्ड वाइपर और वॉशर, डिजिटल की 2, थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और ccNC-बेस्ड 12.3 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 12.3 इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम मिल सकता है. बेहतर और लंबी ड्राइविंग रेंज के लिए इस इलेक्ट्रिक गाड़ी में 84kWh की बड़ी बैटरी मिल सकती है.

चौथा लॉन्च: Venue से ऊपर प्लेस होगी ये SUV

इस साल फेस्टिव सीजन के आसपास, कंपनी शायद साल का अपना सबसे महत्वपूर्ण लॉन्च करेगी. Bayon, फिलहाल ये गाड़ी अभी डेवलपेमेंट स्टेज में है, ये सब 4 मीटर एसयूवी होगी जो वेन्यू से ऊपर पोजीशन की जाएगी. ये गाड़ी ज्यादा स्पोर्टी लुक के साथ आ सकती है. ये गाड़ी 4th जेनरेशन i20 के प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी और इसमें हुंडई का हाइब्रिड-रेडी 1.2 लीटर टर्बोचार्ज्ड 4 सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है.

BJP और शिंदे सेना आपस में लड़े, उसमें हमें न घसीटे. BMC मेयर चुनाव

0

महाराष्ट्र में बीएमसी के मेयर पद को लेकर महायुति की दो सहयोगी पार्टियों के बीच खींचतान के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने अपने को अलग रखने की बात कही है. बीएमसी चुनाव में भाजपा के 89 और शिवसेना शिंदू गुट के 29 पार्षद विजयी हुए हैं.

बीएमसी में महायुति को बहुमत मिला है, लेकिन मेयर पद को लेकर दोनों पार्टियों में घमासान मचा हुआ है. इस बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान सामने आया है कि यदि बीएमसी में बीजेपी का मेयर बनता है, तो उनके पार्षद मतदान के दौरान अनुपस्थित रहेंगे.

भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे का यह बयान सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा था और कहा जा रहा था कि इससे भाजपा को बैकडोर से मदद मिलेगी.

आपस में लड़े, हमें न घसीटे… यूबीटी प्रवक्ता

लेकिन अब शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता हर्षल प्रधान का ट्वीट सामने आया है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि सत्ता की लालच के लिए साथ आई भाजपा और शिंदे सेना आपस में लड़े, उसमें हमें न घसीटे.

उन्होंने लिखा कि भाजपा और शिंदे गुट जैसे सत्ता-लोलुप, समान विचारधारा वाले दलों को अपनी आपसी लड़ाइयां खुद ही लड़नी चाहिए. मिंधे गुट और भाजपा को एक-दूसरे से जरूर भिड़ना चाहिए, लेकिन हमें इस संघर्ष में घसीटा नहीं जाना चाहिए.

15 जनवरी को राज्य के 29 नगर निगम चुनावों में हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. भाजपा ने कई नगर पालिकाओं में अकेले दम पर सत्ता हासिल की, लेकिन बीएमसी के मेयर पद को लेकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में घमासान मचा हुआ है.

मुंबई के मेयर को लेकर सियासी घमासान

मुंबई नगर निगम का मेयर कौन बनेगा? इस पर खूब चर्चा हो रही है. मुंबई नगर निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक है. इसके बाद शिवसेना ठाकरे समूह और शिवसेना शिंदे समूह के पार्षद आते हैं. कहा जा रहा है कि चूंकि भाजपा से अधिकतम पार्षद चुने गए हैं, इसलिए मेयर भाजपा के ही होंगे. हालांकि, देखा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे ने पासा पलटते हुए खेल का रुख ही बदल दिया है.

शिवसेना (शिंदे) गुट की मदद के बिना भाजपा के लिए मुंबई नगर निगम में सत्ता बनाना मुश्किल है. किसी भी हालत में उन्हें शिवसेना के शिंदे गुट की मदद लेनी ही पड़ेगी. शिंदे ने यह शर्त रखी कि भाजपा के मेयर ढाई साल तक रहेंगे और शिवसेना के शिंदे गुट के भी ढाई साल तक मेयर रहेंगे. हॉर्स ट्रेडिंग के भय से नवनिर्वाचित पार्षदों को फाइल स्टार होटल में ठहराया है.

यूबीटी ने मेयर चुनाव से बनाई दूरी

इस बीच, ऐसी जानकारी आई थी कि मेयर चुनाव के दौरान भाजपा ने शिवसेना ठाकरे समूह से सीधा संपर्क किया है. कहा जा रहा है कि ठाकरे समूह के 65 पार्षद महापौर चुनाव प्रक्रिया में अनुपस्थित रहेंगे. 2017 के महापौर चुनाव में भाजपा ने शिवसेना ठाकरे समूह के पक्ष में अपना नाम वापस ले लिया था.

इस बार कहा जा रहा है कि इसकी भरपाई शिवसेना करेगी और शिवसेना ठाकरे समूह के पार्षद महापौर चुनाव में अनुपस्थित रहेंगे. हालांकि, भाजपा नेता प्रवीण दारेकर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है. वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता हर्षल प्रधान ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है.

नितिन नबीन का BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय

0

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो रही है. सोमवार 19 जनवरी को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे.

नितिन नबीन के नामांकन में सभी राज्यों से एक-एक प्रस्ताव मंगाया गया है. राज्यों के अलावा नितिन नवीन के प्रस्तावक के रूप में बीजेपी संसदीय दल की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह सरीखे पार्टी के प्रमुख नेता भी होंगे.

दोपहर बाद 2 से 4 बजे के बीच में नितिन नबीन अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इसके बाद शाम 4 से 5 बजे के बीच नामांकन पत्रों की जांच होगी और शाम 5 से 6 बजे के बीच नाम वापस लिए जा सकेंगे. हालांकि नाम का आधिकारिक ऐलान कल यानी कि 20 जनवरी को ही किया जाएगा.

सभी राज्यों के सीएम और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया

नितिन नबीन के नामांकन के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों को आज दोपहर 2 बजे पार्टी मुख्यालय में रहने को कहा गया है. नितिन नबीन के नामांकन में सभी राज्यों से प्रस्ताव मंगाया गया है, जिस से ये संदेश जाए कि सभी राज्यों से नए अध्यक्ष को समर्थन है. इसके साथ साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े नेता प्रस्तावक के रूप में रहेंगे.

सभी राज्यों से मांगे गए प्रस्तावक

बीजेपी के संविधान के मुताबिक देखा जाए तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम कम से पांच राज्यों से प्रस्ताव आना जरूरी होता है. जिसमें एक एक सेट में 20 प्रस्तावक होते हैं. लेकिन, बीजेपी ने सभी राज्यों से प्रस्ताव मंगाया है. जिस से सबके समर्थन का एक बड़ा संदेश दिया जा सके.

सभी राज्यों को प्रस्तावकों के लिए एक एक फॉर्म भेजा गया है. जिसमें सभी राज्यों द्वारा हर फॉर्म में 20 प्रस्तावकों के नाम भरने हैं. प्रस्तावकों के हस्ताक्षर करवा कर 18 जनवरी तक वो फॉर्म वापस दिल्ली भेजा गया है. 19 तारीख को नामांकन से पहले सभी फॉर्मेलिटी पूरी कर ली जाएं.

कल होगा नाम का औपचारिक ऐलान

20 जनवरी को औपचारिक रूप से नितिन नबीन की अध्यक्ष के रूप में घोषणा कर दी जाएगी. 20 जनवरी को इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत सभी वरिष्ठ नेता, सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल होंगे. चुनाव की प्रक्रिया बीजेपी मुख्यालय में पूरी कराई जाएगी. इस मौके पर प्रधानमंत्री संबोधित भी कर सकते हैं.

21 तारीख को नितिन नबीन करेंगे बड़ी बैठक

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद 21 जनवरी को नितिन नबीन सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक भी करेंगे. इस बैठक में सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ साथ प्रदेशों के अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी भी शामिल होंगे. इस मौके पर सभी पदाधिकारियों को नितिन नबीन संबोधित भी करेंगे.

तीन राज्यों में नहीं हुआ बीजेपी में बदलाव

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए जारी की गई मतदाता सूची में 5708 मतदाताओं के नाम है. ये मतदाता सूची 30 राज्यों के संगठन चुनाव के आधार पर तैयार की गई है. जहां राज्य परिषद और केंद्रीय परिषद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. हालांकि अभी 30 राज्यों में ही संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई है दिल्ली, हरियाणा, त्रिपुरा ,कर्नाटक जैसे राज्यों में संगठन चुनाव बाकी हैं.

“त्रिपुरा में 48वें कोकबोरोक दिवस पर उत्साह का माहौल, खड़गे ने दी शुभका”

0

त्रिपुरा में 48वें कोकबोरोक दिवस के अवसर पर सोमवार को उत्साह और गर्व का माहौल है। यह दिन 19 जनवरी को हर साल मनाया जाता है, जो 1979 में कोकबोरोक भाषा को त्रिपुरा की आधिकारिक भाषा के रूप में पहली मान्यता मिलने की याद दिलाता है।

कोकबोरोक त्रिपुरा के मूल निवासी त्रिपुरी समुदाय की प्राचीन और जीवंत भाषा है, जो हजारों वर्षों से बोली जा रही है। इस अवसर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने त्रिपुरा के लोगों को शुभकामनाएं दी।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पोस्ट में लिखा, “कोकबोरोक दिवस के अवसर पर त्रिपुरा के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह खास दिन कोकबोरोक भाषा का जश्न मनाता है। यह एक प्राचीन, सांस्कृतिक रूप से जीवंत स्वदेशी भाषा है जो हजारों सालों से बोली जा रही है और यह भारत की विविधता और साझा मूल्यों की समृद्धि को उजागर करती है।”

कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल ने एक पोस्ट में लिखा, “हम कोकबोरोक दिवस पर त्रिपुरा में अपने बहनों और भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। यह दिन 1979 में कोकबोरोक को आधिकारिक भाषा के रूप में मिली शुरुआती मान्यता की याद दिलाता है। यह दिन एकता लाए और हमारी विविध संस्कृतियों और समृद्ध विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा दे।”

त्रिपुरा के जनजातीय कल्याण मंत्री विकास देववर्मा ने लिखा, “कोकबोरोक दिवस के अवसर पर त्रिपुरा के सभी लोगों को प्यार और शुभकामनाएं। यह दिन राज्य में खुशियां और समृद्धि लाए। 48वें कोकबोरोक दिवस के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। कोकबोरोक हमारे लोगों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और पहचान को दर्शाता है। इस महत्वपूर्ण दिन पर, आइए हम इस कीमती भाषा को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराएं। साथ मिलकर, हम गर्व और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ते हैं।”

“ग्रामीणों ने 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन का ऐलान किया, प्रशासन”

0

पिछले करीब चार महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने अब 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। यह कदम प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से समस्याओं के समाधान में उदासीनता के खिलाफ ग्रामीणों का सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने उनकी मांगों को लगातार अनदेखा किया। उन्होंने बताया कि सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी के कारण पिछले महीनों से उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की उपेक्षा और लापरवाही के कारण उन्हें अब यह महाआंदोलन शुरू करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे, लेकिन जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन को अभी से कार्रवाई करनी होगी, नहीं तो आंदोलन जिला और राज्य स्तर पर तेज़ और व्यापक रूप ले सकता है।

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ग्रामीणों के स्थानीय संगठन और पंचायत के प्रतिनिधि कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में महिला और युवा वर्ग भी पूरी सक्रियता से भाग लेंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो यह आंदोलन सामाजिक और राजनीतिक रूप से बड़ा संकट बन सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वे समन्वय और संवाद के जरिए मामले का तुरंत निपटारा करें।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों ने सभी पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि 28 जनवरी के बाद किसी भी तरह की बाधा या लापरवाही को वे सीधे प्रशासन के खिलाफ संघर्ष मानेंगे।

प्रशासन ने अब तक किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जिला अधिकारी ग्रामीण नेताओं से बातचीत के लिए बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनका प्रयास रहेगा कि महाआंदोलन से पहले समाधान निकालने का प्रयास किया जाए।

ग्रामीणों के इस ऐलान से इलाके में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि आंदोलन सफल होता है, तो यह अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी विरोध के स्वर बढ़ाने वाला कदम साबित हो सकता है।

इस प्रकार, चार महीनों से चल रहे विरोध के बाद ग्रामीणों द्वारा अनिश्चितकालीन महाआंदोलन का ऐलान प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के लिए चेतावनी के समान है। अब यह देखने वाली बात होगी कि प्रशासन समय रहते समाधान निकालेगा या आंदोलन को और व्यापक होने दिया जाएगा।

“BMC मेयर की कुर्सी पर संग्राम: शिवसेना ने कर दी ये बड़ी डिमांड, भाजपा”

0

महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में बीजेपी और शिवसेना को बड़ी जीत मिली है। बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने मुंबई में BMC चुनाव भी जीत लिया है। हालांकि, BMC का मेयर कौन होगा, यह अभी साफ नहीं है।

इस बीच, शिवसेना ने अपने 29 पार्षदों को मुंबई के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने पार्षदों से मुलाकात की है। मुंबई मेयर के पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, और इसी बीच एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना ने BMC मेयर का पद एक साल के लिए मांगा है।

शिवसेना की क्या मांग है

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना चाहती है कि मुंबई मेयर का पद पहले साल के लिए उन्हें दिया जाए। शिवसेना का तर्क है कि 23 जनवरी को बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी है। इसलिए, बालासाहेब को श्रद्धांजलि के तौर पर, मुंबई मेयर का पद पहले साल के लिए शिवसेना को दिया जाना चाहिए। पहले, शिवसेना मेयर पद के लिए ढाई साल का कार्यकाल मांग रही थी, लेकिन जब उन्हें लगा कि यह मांग पूरी नहीं होगी, तो उन्होंने यह नई मांग रखी।

गठबंधन की भावना का हवाला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना यह तर्क दे रही है कि उसने केंद्र और राज्य स्तर पर मुश्किल समय में हमेशा बीजेपी का साथ दिया है। इसलिए, क्योंकि इस साल बाल ठाकरे की 100वीं जयंती है, गठबंधन की भावना को देखते हुए, मेयर का पद पहले साल के लिए शिवसेना के पास होना चाहिए, और बाकी चार साल बीजेपी के पास होना चाहिए।

बीजेपी ने भी अपने पार्षदों को बड़ा आदेश दिया

इस बीच, मुंबई बीजेपी ने भी अपने नए चुने गए पार्षदों को एक बड़ा आदेश जारी किया है, जिसमें उन्हें अगले 10 दिनों तक मुंबई नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है। अगर किसी इमरजेंसी के कारण शहर छोड़ना जरूरी है, तो पार्टी के सीनियर नेताओं को पहले से सूचित करना होगा। इस आदेश के पीछे का कारण मेयर का चुनाव है। नए मेयर के चुनाव में लगभग 8-10 दिन लग सकते हैं। बीजेपी के पास 89 पार्षद हैं और शिवसेना के पास 29। मेयर चुनने के लिए 114 पार्षदों की जरूरत होती है। महागठबंधन के पास बहुमत से सिर्फ़ चार वोट ज़्यादा हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर बीजेपी मेयर चुनाव होने तक सभी कॉर्पोरेटरों को मुंबई में ही रखना चाहती है।

बिहार की राजनीति में नया सियासी समीकरण! कांग्रेस के छह विधायक जदयू

0

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और इस बार चर्चा के केंद्र में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) है। राजनीतिक गलियारों में जोर-शोर से यह चर्चा चल रही है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक जल्द ही जदयू की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो यह राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर माना जाएगा। हालांकि इस संभावित दल-बदल की कहानी नई नहीं है, बल्कि इसके संकेत चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ही मिलने लगे थे।

चुनाव नतीजों के बाद ही कांग्रेस विधायकों को जदयू में शामिल कराने की कवायद शुरू हो गई थी। उस समय यह माना जा रहा था कि कांग्रेस के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है और विधायकों का झुकाव सत्ताधारी दल की ओर बढ़ रहा है। लेकिन तब यह पूरी कवायद महज चर्चाओं तक ही सीमित रह गई थी। वजह यह थी कि कांग्रेस के कुछ विधायक उस समय पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित नजर आ रहे थे और खुलकर किसी तरह की बगावत सामने नहीं आई थी।

अब एक बार फिर कांग्रेस विधायकों के टूटने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार मामला सिर्फ कयासों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर मजबूत राजनीतिक बैटिंग कर ली गई है। बताया जा रहा है कि संभावित दल-बदल को लेकर रणनीति काफी हद तक तैयार है और कांग्रेस विधायक भी इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट बताए जा रहे हैं। सत्ता में भागीदारी, राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों को लेकर उन्हें आश्वासन दिए गए हैं।

हालांकि इसी बीच इस पूरे दल-बदल कार्यक्रम में एक गजब का ट्विस्ट आ गया है। यह ट्विस्ट क्या है, इसे लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह अड़चन कानूनी, संगठनात्मक या शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हो सकती है। दल-बदल कानून, पार्टी की आंतरिक सहमति या गठबंधन की मजबूरियां इस प्रक्रिया को जटिल बना रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस विधायकों का एकसाथ जदयू में शामिल होना आसान नहीं होगा। इसके लिए न केवल विधायकों की सहमति जरूरी है, बल्कि कानूनी प्रावधानों और राजनीतिक संतुलन को भी साधना होगा। यदि प्रक्रिया में थोड़ी भी चूक होती है, तो मामला उलटा भी पड़ सकता है।

वहीं कांग्रेस खेमे में भी इस संभावित टूट को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। पार्टी नेतृत्व विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है और अंदरखाने संवाद तेज कर दिया गया है। दूसरी ओर, जदयू खेमे में फिलहाल सतर्कता बरती जा रही है और किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचा जा रहा है।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। कांग्रेस के छह विधायकों का भविष्य, जदयू की रणनीति और इस पूरे घटनाक्रम में आया “ट्विस्ट” आने वाले दिनों में राज्य की सियासी दिशा तय कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह चर्चा हकीकत में बदलती है या फिर एक बार फिर राजनीतिक अफवाह बनकर रह जाती है।

ट्रंप की नए टैरिफ धमकी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल

0

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। कीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदना शुरू कर दिया।

सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया।

वहीं, खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 2,438 रुपए यानी 1.71 प्रतिशत बढ़कर 1,44,955 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 13,062 रुपए यानी 4.54 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,00,824 रुपए प्रति किलो हो गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में तेज उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड 1.6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और बाद में 4,670 डॉलर के आसपास स्थिर हुआ। इस दौरान सोने ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी छुआ।

सोने और चांदी में तेजी तब और बढ़ गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक यूरोप के आठ देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाएगा, जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती। इस बयान के बाद यूरोपीय संघ के देशों ने अमेरिका को मनाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने बताया कि दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर सवाल और लगातार चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की कीमतों को सहारा दे रहे हैं।

बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में आगे कटौती की उम्मीद भी सोने और चांदी की कीमतों को ऊपर बनाए हुए है, खासकर 2025 में अच्छे प्रदर्शन के बाद।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी वजह डॉलर की कीमतों में अस्थिरता और अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर आने वाला फैसला है।

विश्लेषकों ने बताया कि सोने को 1,41,650 से 1,40,310 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,44,150 से 1,45,670 रुपए के बीच इसमें रेजिस्टेंस आ सकती है। चांदी के लिए 2,85,810 से 2,82,170 रुपए का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2,94,810 से 2,96,470 रुपए पर रेजिस्टेंस है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स चांदी भी मजबूत बनी हुई है और 93 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है। हाल ही में यह 94.30 डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी। विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती मांग के चलते चांदी की कीमतों को लंबे समय तक मजबूती मिल सकती है।

ऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में कुछ निवेशक मुनाफा वसूली कर सकते हैं, जिससे चांदी की कीमत 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक नीचे आ सकती है। इसके बाद कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

वर्ष 2030 तक ‘अपर मिडिल इनकम’ वाले देशों में शामिल हो सकता है भारत

0

भारत अगले चार वर्षों यानी 2030 तक प्रति व्यक्ति आय (पर कैपिटा इनकम) में 4,000 डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। इसके साथ ही भारत ‘अपर मिडिल इनकम कंट्री’ की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां अभी चीन और इंडोनेशिया जैसे देश मौजूद हैं।

सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को आजादी के बाद 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में करीब 60 साल लगे, जबकि देश ने सिर्फ 7 साल में 2 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा 2014 में छू लिया।

इसके बाद भारत ने 2021 में 3 ट्रिलियन डॉलर और 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का स्तर हासिल किया। यानी समय के साथ भारत की आर्थिक रफ्तार और तेज होती गई है।

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने बताया कि भारत अगले दो वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2009 में आजादी के 62 साल बाद पहली बार 1,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय हासिल की थी। इसके बाद 2019 में 2,000 डॉलर और 2026 में 3,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुंचने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहतर रही है। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत हुई है और वह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।

डॉ. घोष ने कहा कि यदि भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत उच्च आय वाला देश बनना है, तो प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) को हर साल औसतन 7.5 प्रतिशत की सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि पिछले 23 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति जीएनआई करीब 8.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जिससे यह लक्ष्य संभव लगता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उच्च आय वाले देश बनने की सीमा (थ्रेशहोल्ड) बढ़ सकती है। यदि यह सीमा 13,936 डॉलर से बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए प्रति व्यक्ति आय को और तेज, यानी करीब 8.9 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ाना होगा।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर जनसंख्या वृद्धि और महंगाई को ध्यान में रखा जाए, तो अगले 23 वर्षों तक भारत को डॉलर के हिसाब से अपनी नॉमिनल जीडीपी करीब 11.5 प्रतिशत की दर से बढ़ानी होगी।

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि भारत को आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रखनी होगी, ताकि तेजी से विकास हो सके और देश उच्च आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंच सके।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए अपर मिडिल इनकम देश बनना पूरी तरह संभव है, जहां प्रति व्यक्ति आय की सीमा करीब 4,500 डॉलर होती है। इसके लिए जरूरी 11.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि पहले भी हासिल की जा चुकी है, खासकर कोरोना महामारी से पहले के वर्षों में।