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छत्तीसगढ़ : किसकी बनेगी सरकार, कांग्रेस लौटेगी या BJP…

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छत्तीसगढ़ : दो चरणों में मतदान हुआ था. पहले चरण की 20 सीटों पर 7 नंवबर को वोटिंग हुई थी. पहले चरण में यहां 78 फीसदी मतदान हुआ था.

17 नवंबर को दूसरे फेज में 70 सीटों पर वोटिंग हुई थी. दूसरे फेज में भी 75 फीसदी से ज्यादा यहां मतदान हुआ था. तीन दिसंबर को रिजल्ट आएंगे. मगर इससे पहले सभी को एग्जिट पोल का इंतजार है.

आज शाम 5.30 बजे के बाद कभी भी एग्जिट पोल आ जाएंगे. इसके साथ लोगों का इंतजार भी खत्म हो जाएगा. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस लौटेगी या बीजेपी फिर से सत्ता हासिल करेगी. एग्जिट पोल में पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस को लगातार दूसरी बार जीत दिलाने की कोशिशों में लगे हैं . ”भारतीय जनता पार्टी भी फिर से सत्ता पर वापसी…

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छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस को लगातार दूसरी बार जीत दिलाने की कोशिशों में लगे हैं . ”भारतीय जनता पार्टी भी फिर से सत्ता पर वापसी होना चाहती है.

कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में जीत के लिए भूपेश बघेल पर पूरा भरोसा है. वहीं विपक्षी दलों की ओर से भूपेश बघेल को कड़ी चुनौती देने की कोशिश की जा रही है.

भूपेश बघेल दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और विपक्षी दलों की ओर से भी उन्हें चुनौती दी जा रही है.

भारतीय जनता पार्टी ने भूपेश बघेल के भतीजे और पूर्व विधायक विजय बघेल को मैदान में उतारा है. दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई मुकाबले हो चुके हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे और कांग्रेस छत्तीसगढ़-जोगी (जेसीसीजे) के नेता अमित जोगी भी पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में भूपेश बघेल के सामने अपनी सीट बचाने का बड़ा दबाव भी रहेगा.

पूजा के बाद आखिर क्यों की जाती है आरती? जानिए इसका महत्व और सही तरीका

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हिंदू धर्म में मंदिरों व घर में सुबह-शाम भगवान की पूजा व आरती होती है. कहते हैं कि इससे घर में पॉजिटिविटी और भगवान भी प्रसन्न होते हैं. जिस घर पर भगवान की कृपा होती है वहां सुख-समृद्धि व खुशहाल का वास होता है.

भगवान की पूजा करते समय आरती अवश्य की जाी है और मान्यता है कि आरती के बिना पूजा या अनुष्ठान पूरा नहीं होता. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर पूजा के दौरान भगवान की आरती क्यों की जाती है? तो आइए जानते हैं आरती का महत्व और आरती करने का सही तरीका.

पूजा के बाद क्यों करते हैं आरती? स्कंद पुराण के मुताबिक, भगवान विष्णु ने स्वंय कहा है कि ‘जो व्यक्ति अनेक बत्तियों से युक्त और घी से भरे हुए दीप को जलाकर मेरी आरती उतारता है, वह कोटि कल्पों तक स्वर्गलोक में निवास करता है. जो प्राणी मेरे आगे होती हुई आरती का दर्शन करता है, वह अंत में परमपद को प्राप्त होता है. जो मेरे आगे भक्तिपूर्वक कपूर की आरती करता है, वह मनुष्य मुझ अनंत में प्रवेश कर जाता है. यह सब तभी संभव है जब मंत्रहीन और क्रियाहीन मेरा पूजन किया जाए. लेकिन मेरी आरती कर देने पर सर्वथा परिपूर्ण हो जाता है.’ यानि सनातन धर्म में मन की शांति और भगवान के प्रति अपने विश्वास को प्रकट करने का सबसे सरल तरीका आरती है. धर्म पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरती करते समय व्यक्ति स्वंय को भगवान के नजदीक महसूस करता है और अपने जीवन में आ रही मुश्किल से राहत पाने की प्रार्थना करता है. इसलिए पूजा के बाद आरती का विशेष महत्व माना गया है.

कैसे करनी चाहिए आरती? पूजा के आरती करने का एक तरीका होता है. पूजा करने के बाद आरती की थाली को खास तरीके से सजाया जाना चाहिए. इसके लिए तांबे, पीतल और चांदी की थाली का उपयोग कर सकते हैं. आरती की थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, ताजे पुष्प और प्रसाद रखा जाता है. इसके अलावा इसमें दीपक रखा जाता है और उसमें शुद्ध घी या कपूर रखते हैं. आप आरती के लिए आटे का दीया भी रख सकते हैं. आरती करते समय पूजा की थाली में दीपक जलाकर उसे भगवान के चरणों से शुरू किया जाता है. भगवान के चरणों में चार बार, फिर नाभि के पास दो बार और सात बार भगवान के मुख की आरती करनी चाहिए.

दूर होता है वास्तुदोष माना जाता है कि जिस घर पर प्रतिगिन आरती की जाती है वहां आस-पास नकारात्मक ऊर्जा नहीं रहती हैं. ऐसी जगहें सकारात्मकता से भरी होती हैं. इससे जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और पूजा का पूरा फल मिलता है. डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं.

Google Drive से गुम हो रही फाइलें, शिकायत होने पर अब जांच में जुटी कंपनी

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गूगल ने कहा है कि वह गूगल ड्राइव यूजर्स की उन रिपोर्टों से संबंधित मुद्दे की जांच कर रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि उनकी निजी फाइलें क्लाउड सेवा से अप्रत्याशित रूप से गायब हो गई हैं.

कंपनी ने सोमवार को एक नए गूगल समुदाय समर्थन थ्रेड में लिखा, “हम डेस्कटॉप उपयोगकर्ताओं के लिए ड्राइव के एक सीमित उपसमूह को प्रभावित करने वाले मुद्दे की रिपोर्ट की जांच कर रहे हैं और अधिक अपडेट के साथ आगे बढ़ेंगे.”

टेक दिग्गज ने नोट किया कि यह गूगल ड्राइव डेस्कटॉप संस्करण 84.0.0.0 से 84.0.4.0 के लिए एक सिंक समस्या है. गूगल समुदाय सहायता साइट के उपयोगकर्ताओं में से एक ने मई से अब तक अपना डेटा खोने की सूचना दी है. उपयोगकर्ता ने लिखा, “नमस्ते, मेरी गूगल ड्राइव फ़ाइलें अचानक गायब हो गईं. मई 2023 में ड्राइव सचमुच उसी स्थिति में वापस आ गई। मई से आज तक का डेटा गायब हो गया, और फ़ोल्डर संरचना मई में वापस स्थिति में आ गई. “

उपयोगकर्ता के अनुसार, गूगल की सहायता टीम ने उन्हें डेटा पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के माध्यम से निर्देशित किया, जिसमें ड्राइवएफएस फ़ोल्डर का बैकअप लेने और पुनर्स्थापित करने का प्रयास शामिल था, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली.

एक उपयोगकर्ता ने कहा कि उनका “आईटी आदमी” फाइलों का कोई सबूत नहीं खोज सका, जबकि दूसरे ने उल्लेख किया कि गूगल ने उनके ड्राइव डायग्नोस्टिक डेटा के निर्यात का अनुरोध किया है. गूगल ड्राइव टीम के एक सदस्य ने एक चेतावनी पोस्ट की, इसमें उपयोगकर्ताओं को डेस्कटॉप के लिए Google ड्राइव के भीतर “डिस्कनेक्ट अकाउंट” पर क्लिक न करने की सलाह दी गई.

इस बीच, कंपनी ने घोषणा की है कि 2 जनवरी, 2024 से गूगल ड्राइव को फ़ाइलें डाउनलोड करने के लिए तृतीय-पक्ष कुकीज़ सक्षम करने की आवश्यकता नहीं होगी. गूगल क्रोम और अन्य ब्राउज़रों ने उपयोगकर्ता की गोपनीयता की बेहतर सुरक्षा के लिए तृतीय-पक्ष कुकीज़ को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना शुरू कर दिया है.

‘कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद विदेश दौरा’

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद विदेश दौरे पर जा रहे हैं.

राहुल गांधी इंडोनेशिया , सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम का दौरा करेंगे. सिंगापुर और मलेशिया में वह प्रवासी भारतीयों से मुलाकात करेंगे. इंडोनेशिया में वह राजनयिकों से मुलाकात करेंगे, उनकी वियतनाम कम्युनिस्ट पार्टी से भी मुलाकात होने की संभावना है.

मालूम हो कि देश में इस समय पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में चुनाव हो चुके हैं और तेलंगाना में 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. सभी राज्यों के चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे.

Manipur violence: सुप्रीम कोर्ट मणिपुर में मुर्दाघरों में रखे शवों को दफनाने या दाह-संस्कार करने के लिए निर्देश जारी…

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सुप्रीम कोर्ट मणिपुर में मुर्दाघरों में रखे शवों को दफनाने या दाह-संस्कार सुनिश्चित करने के लिए आज मंगलवार को निर्देश जारी किए हैं.

पूर्वोत्तर राज्य में मई में भड़की जातीय हिंसा में कई लोग मारे गए थे. पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि 175 शवों में से 169 की पहचान कर ली गई है और छह की पहचान नहीं हो पाई है. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने उल्लेख किया कि शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों की सर्व-महिला समिति द्वारा दायर रिपोर्ट में मणिपुर में मुर्दाघरों में पड़े शवों की स्थिति का संकेत दिया गया है.

169 शवों में से 81 पर उनके परिजनों ने दावा किया रिपोर्ट में उल्लेख किया कि पहचाने गए 169 शवों में से 81 पर उनके परिजनों ने दावा किया है, जबकि 88 पर दावा नहीं किया गया है. पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने 9 स्थलों की पहचान की है, जहां दफन या दाह संस्कार किया जा सकता है. इसने कहा, “इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मणिपुर राज्य में मई 2023 में हिंसा हुई थी, जिन शवों की पहचान नहीं हुई है या जिन पर दावा नहीं किया गया है, उन्हें मुर्दाघर में अनिश्चितकाल तक रखना उचित नहीं होगा.

अंतिम संस्कार 9 में से किसी भी स्थान पर किया जा सकता है शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें राहत और पुनर्वास के उपायों के अलावा हिंसा के मामलों की अदालत की निगरानी में जांच की मांग भी शामिल है. पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि परिवार के सदस्यों द्वारा पहचाने गए या दावा किए गए शवों का अंतिम संस्कार किसी भी अन्य पक्ष की बाधा के बिना 9 में से किसी भी स्थान पर किया जा सकता है.

अंतिम संस्कार करने की अनुमति, परिजनों को सूचित किया जाएगा पीठ ने कहा कि यह अभ्यास 4 दिसंबर या उससे पहले किया जाना चाहिए. “उन शवों के संबंध में जिनकी पहचान कर ली गई है, लेकिन जिन पर दावा नहीं किया गया है. राज्य प्रशासन सोमवार को या उससे पहले उनके परिजनों को एक संचार जारी करेगा, जिसमें उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा कि उन्हें आवश्यक शर्तों के साथ अंतिम संस्कार करने की अनुमति है. इसके बाद एक सप्ताह की अवधि के भीतर चिन्हित नौ दफन/दाह संस्कार स्थलों में से किसी पर भी धार्मिक अनुष्ठान किया जाएगा. ”

पुलिस अधीक्षक कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए के लिए स्वतंत्र इसमें कहा गया है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी उचित कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दफन या दाह संस्कार व्यवस्थित तरीके से हो.

दावा नहीं किया जाता है, तो राज्य अंतिम संस्कार करेगा शीर्ष अदालत ने कहा, “यदि शव परीक्षण के समय डीएनए नमूने नहीं लिए गए हैं, तो राज्य दफन/दाह संस्कार की प्रक्रिया से पहले ऐसे नमूने लेना सुनिश्चित करेगा.” शीर्ष कोर्ट ने कहा, “राज्य को एक सार्वजनिक नोटिस जारी करने की अनुमति है, जिसमें यह दर्शाया गया हो कि यदि पहचाने गए शवों पर नोटिस जारी होने की तारीख से एक सप्ताह की अवधि के भीतर दावा नहीं किया जाता है, तो राज्य अंतिम संस्कार करेगा… जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए एक सप्ताह की अवधि तय की है.

रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर 4 दिसंबर को सुनवाई करेगी पीठ ने कहा कि वह पीड़ितों के परिजनों को अनुग्रह राशि की स्वीकृति के बारे में समिति की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर 4 दिसंबर को सुनवाई करेगी. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शालिनी पी जोशी और आशा मेनन भी शामिल हैं.

मई में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी मई में हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद मणिपुर में अराजकता और अनियंत्रित हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें राज्य सरकार को गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था.

170 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सौ घायल इस आदेश के कारण बड़े पैमाने पर जातीय झड़पें हुईं थीं. 3 मई को जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की एसटी दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया था. राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 170 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सौ अन्य घायल हुए हैं. 

‘छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इंडिया गठबंधन को होगा सफाया’, पीएम नरेंद्र मोदी का दावा’

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छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (I.N.D.I.A) का सफाया हो जाएगा.

इन तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं.

तेलंगाना के तूपरान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इन तीन राज्यों में अपने चुनाव प्रचार अभियान को याद किया. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने तीन राज्यों में देखा है कि वहां ‘इंडी अलायंस’ (इंडिया’ गठबंधन) का सफाया हो जाएगा. वहां की महिलाएं, किसान कांग्रेस पार्टी को उखाड़ फेंकने वाले हैं.’’

कांग्रेस और बीआरएस एक-दूसरे की कार्बन कॉपी
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने पूछा कि क्या तेलंगाना को ऐसे मुख्यमंत्री की जरूरत है, जो लोगों से नहीं मिलते. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हो या बीआरएस, उनकी पहचान भ्रष्टाचार, परिवारवाद और खराब कानून व्यवस्था है और वे एक-दूसरे की ‘कार्बन कॉपी’ हैं. उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस, केसीआर एक समान, दोनों से रहो सावधान.’’

वादे कर तोड़ देते हैं केसीआर- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने केसीआर पर हमला करते हुए कहा, ”केसीआर की आदत झूठे वादे कर उसे तोड़ देने की है. केसीआर ने दलित सीएम का वादा करके तोड़ दिया, केसीआर ने दलित बंधु योजना का वादा कर तोड़ दिया, दो बेड रूम वाले घर का वादा कर तोड़ दिया. युवाओं का रोजगार का वादा कर तोड़ दिया. केसीआर ने किसानों को पानी का वादा कर तोड़ दिया. स्किल का वादा किया और केवल स्कैम दिया.”

केसीआर ने फार्महाउस से चलाई सरकार- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा, ”तेलंगाना को ऐसा सीएम चाहिए जो कि सचिवालय भी न जाए. 10 साल तक फार्महाउस से सरकार चलाने वाले केसीआर के लिए तेलंगाना के फार्मर ने तय कर लिया है कि उनको स्थायी तौर पर फार्महाउस भेज देंगे.” तेलंगाना में 30 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा. मतगणना तीन दिसंबर को होगी.

छत्तीसगढ़ : लोक सेवा आयोग ने जारी की नोटिफिकेशन, पी.एस.सी. (PSC) 242 पदों पर निकाली भर्ती…

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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने परंपरा के अनुसार राज्य सेवा परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. पीएससी (PSC) ने इस बार सीट बढ़ाई है और 242 पदों पर भर्ती निकाली गई है.

इसमें डिप्टी कलेक्टर,जेल अधीक्षक,राज्य वित्त सेवा अधिकारी जैसे 17 अलग अलग विभाग के पद शामिल हैं. 11 फरवरी 2024 को प्रीलिम्स का एग्जाम आयोजित किया जाएगा. इसके बाद मुख्य परीक्षा की संभावित तारीख भी जारी की गई है. इसके अनुसार अगले वर्ष 13,14,15,16 जून को मुख्य परीक्षा होंगे.

छत्तीसगढ़ में संविधान दिवस के दिन हर बार पीएससी राज्य सेवा परीक्षा के लिए वेकेंसी जारी करती है. चुनावी आचार संहिता के बाद भी वेकेंसी जारी किया गया है. इसके लिए अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसकी तारीख भी पीएससी ने जारी की है. प्रारंभिक परीक्षा के लिए 1 दिसंबर की दोपहर 12 बजे से 30 दिसंबर की रात 11.59 बजे तक अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करने के लिए psc.cg. gov.in की साइट पर जाना होगा.

डिप्टी कलेक्टर के 8 और नायब तहसीलदार के 42 पोस्ट
पीएससी के नोटिफिकेशन के अनुसार डिप्टी कलेक्टर के 8 पद हैं. छत्तीसगढ़ राज्य वित्त सेवा अधिकारी के 6 पद, सहायक संचालक के 3 पद,जिला आबकारी अधिकारी के 11, महिला और बाल विकास विभाग के सहायक संचालक और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के 6, वाणिज्य कर विभाग के जिला पंजीयक 1,राज्य कर सहायक आयुक्त के 6, अधीक्षक जिला जेल के 6, आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग के सहायक संचालक के10, सहकारिता विभाग के सहायक पंजीयक के 14,जिला सेनानी के 11,मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) के 10, बाल विकास परियोजना अधिकारी के 7,छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा अधिकारी के 23, नायब तहसीलदार के 42,राज्य कर निरीक्षक के 34 और सहकारिता निरीक्षक और सहकारिता विस्तार अधिकारी के 44 पदों पर पीएससी ने वेकेंसी जारी किया है.

छत्तीसगढ़ के स्थानीय अभ्यर्थियों को नहीं लगेगा एग्जाम फीस
पीएससी ने राज्य सेवा परीक्षा के 242 पोस्ट पर वेकेंसी जारी किया है. इसमें 94 पोस्ट अनारक्षित है,35 अनुसूचित जाति और 83 अनुसूचित जनजाति के लिए है. वहीं अति पिछड़ा वर्ग के लिए 30 आरक्षित है. वहीं प्रारंभिक परीक्षा के लिए पीएससी ने राज्य के 28 जिलों का चयन किया है और मुख्य परीक्षा रायपुर, बिलासपुर,अंबिकापुर ,दुर्ग -भिलाई और जगदलपुर में होगी. इसके अलावा आवेदन फॉर्म शुक्ल की बात करें तो राज्य के स्थानीय निवासियों को कोई भी शुक्ल नहीं लिया जाता है. लेकिन राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों को 400 रुपए आवेदन के लिए शुक्ल देना पड़ेगा.

Cyber Security Alert! इस्तेमाल करते हैं ये वेब ब्राउज़र को लेकर अलर्ट जारी’

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Cyber Security Alert: इंटरनेट की दुनिया में बहुत तेजी से फ्रॉड बढ़ रहे हैं, और अब एक और नए खतरे की जानकारी सामने आई है. भारत सरकार के तहत आने वाली एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) लगातार वेब ब्राउज़र को लेकर अलर्ट जारी करती आई है ,और अब इस हफ्ते फिर से सीईआरटी-इन ने ज़्यादा सिक्योरिटी के लिए अलर्ट किया गया है.

इस बार यह मोज़िला के फायरफॉक्स वेब ब्राउजर से संबंधित है. सुरक्षा एजेंसी ने अपने रिपोर्ट में बताया है कि फायरफॉक्स में एक नहीं बल्कि कई सिक्योरिटी समस्याएं हैं, जिससे हैकर्स यूज़र के डिवाइस में आसानी से अपनी जगह बना सकते हैं.

वेब ब्राउज़र में मौजूद परेशानियों के चलते हैकर्स यूज़र को अपना निशाना बना सकते हैं, जो कि काफी जोखिम भरा हो सकता है. लेकिन अब सवाल ये उठता है कि फायरफाक्स के कौन से वर्जन सुरक्षा समस्या से प्रभावित हैं और कौन से प्लेटफॉर्म खतरे में हैं?

सिक्योरिटी एजेंसी का कहना है कि अगर आप Firefox ESR versions before 115.5.0, Firefox iOS versions before 120 या Mozilla Thunderbird version before 115.5 का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान रहने की सख्त ज़रूरत है.

कैसे रखें खुद को सेफ?
अब जब CERT-In ने फायरफॉक्स में सुरक्षा मुद्दों के लिए अलर्ट जारी किया है, तो इसके साथ एजेंसी ने उन चीज़ों की एक लिस्ट भी शेयर की है जो यूज़र्स को अपने ब्राउज़र और डिवाइस को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं.

सिक्योरिटी एजेंसी का कहना है कि फायरफॉक्स ब्राउज़र को तुरंत अपडेट करें जो आपके डिवाइस को इन समस्याओं से सुरक्षित करने में मदद करता है. इसके अलावा कहा गया है कि सुनिश्चित करें कि आपके डिवाइस पर फायरफॉक्स ब्राउज़र के लिए ऑटोमैटिक अपडेट एक्टिवेटेड है.

साथ ही कहा है कि मैसेज या ईमेल के माध्यम से अनजान सेंडर के लिंक और अटैचमेंट पर क्लिक न करें. बता दें पिछले कुछ हफ्तों में, CERT-In ने एंड्रॉयड पर Chrome और Adobe के कुछ ऐप्स के साथ होने वाली सुरक्षा समस्याओं के लिए चेतावनी जारी की थी.

‘आपत्ति’ और ‘विपत्ति’ में क्या अंतर है, क्या दोनों का अलग है अर्थ?

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हिन्दी कितनी सरल और वैज्ञानिक भाषा ये तो हिन्दी बोलने वाले जानते ही हैं, पर इस भाषा में भी कई ऐसे शब्द हैं जो एक दूसरे से काफी ज्यादा मिलते-जुलते हैं पर उनका अर्थ अलग होता है. इस लिहाज से कई बार ये भाषा भी लोगों को जटिल लगने लगती है.

अब इन दो शब्दों को ही ले लीजिए, आपत्ति और विपत्ति. इन दोनों शब्दों के अर्थ (Aapatti aur Vipatti mein fark) एक जैसे हैं, पर काफी अलग हैं. चलिए इनके बारे में जानते हैं.

हिन्दी की सीरीज ‘अजब-गजब नॉलेज’ के तहत हम आपके लिए लाते हैं ऐसी अनोखी जानकारियां, जिसके बारे में लोगों को कम ही पता होगा. आज हम बात करेंगे, हिन्दी के दो शब्दों, आपत्ति और विपत्ति (Meaning of Aapatti and Vipatti) के बीच अंतर की. दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोरा पर हाल ही में किसी ने सवाल किया- “आपत्ति और विपत्ति में क्या अंतर है?” इस रोचक सवाल का कई लोगों ने जवाब दिया है, जिससे आपको इसका यही उत्तर पता लग सकता है.

कोरा पर लोगों ने क्या दिया जवाब?
नवनीत कुमार नाम के यूजर ने लिखा- “आपत्ति और विपत्ति दोनों ही शब्दों का अर्थ किसी प्रकार की बाधा या कठिनाई से है, लेकिन दोनों में कुछ अंतर हैं. आपत्ति का अर्थ है कोई ऐसा विरोध जो किसी कार्य या योजना को बाधित करे. आपत्ति का उद्देश्य किसी कार्य या योजना को रोकना या उसमें बाधा डालना होता है. आपत्ति किसी व्यक्ति, समूह या संस्था से हो सकती है. विपत्ति का अर्थ है कोई ऐसी दुर्घटना या संकट जो किसी व्यक्ति या समूह को भारी नुकसान पहुंचाए. विपत्ति का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समूह को नुकसान पहुंचाना होता है. विपत्ति प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय त्रुटियों या युद्धों से हो सकती है.

आशीष नाम के एक शख्स ने कहा- “आपत्ति का अर्थ यदि आप किसी के विचारों से सहमत न हों. विपत्ति का अर्थ है मुसीबत. आपत्ति मतलब ऐतराज और विपत्ति मतलब संकट. सानिया नाम की यूजर ने कहा- “आपत्ति और विपत्ति में मुख्य अंतर यह है कि आपत्ति एक छोटी सी परेशानी है, जबकि विपत्ति एक बड़ी और गंभीर समस्या है. आपत्ति को अक्सर एक अस्थायी समस्या के रूप में देखा जाता है, जबकि विपत्ति को अक्सर एक लंबे समय तक चलने वाली या स्थायी समस्या के रूप में देखा जाता है.”

विश्वस्नीय सोर्सेज क्या कहते हैं?
रेख्ता डिक्शनरी के अनुसार विपत्ति का अर्थ होता है- “ऐसी घटना या स्थिति जिसके फल-स्वरूप कष्ट, चिन्ता या हानि अधिक मात्रा में होती हो या होने की संभावना हो.” वहीं आपत्ति के अनुसार किसी बात का एतराज करना, या फिर किसी चीज का विरोध करना होता है. इस हिसाब से कोरा पर लोगों ने जो उत्तर दिए हैं, वो काफी हद तक सही हैं.