Home Blog Page 2927

52 टन का चुंबक लगा था इस मंदिर में जो खींच लेता था जहाज़ों को

0

भारत में प्राचीन समय से ही ऐसी अद्भुत चीजें रहीं हैं जिन्हें देखकर आज भी दुनिया आश्चर्य करती है. ऐसा ही एक मंदिर भारत में है जहां पहले 52 टन का चुंबक लगा था जो समुद्र से आने वाले जहाजों को अपनी ओर खींच लेता था। कोणार्क का सूर्या मंदिर कई कारणों के पूरी दुनिया में मशहूर है। 52 टक का चुंबक, अद्वीतूय मूर्ती कला और कई कहानियां इस मंदिर को खास बनाती है।

आइए आपको बताते हैं भारत के ऐसे मंदिर के बारे में जिसके गर्भगृह में स्थापित सूर्य भगवान को आप साक्षात देख सकते हैं। भारत के इस प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को ने विश्व-धरोहर के रूप में संजोया है। यह भारत का एकमात्र भव्य सूर्य मंदिर है। चूंकि सूर्य स्वयं साक्षात देव हैं, जिनके बिना इस सृष्टि का संचालन नहीं हो सकता, लिहाजा इस मंदिर में स्थापित भगवान के हम साक्षात दर्शन करते हैं।

कुछ लोग कहते है कि सूर्य मन्दिर के शिखर पर 52 टन का चुम्बकीय पत्थर लगा था। मंदिर इस चुंबक की वजह से समुद्र की कठोर परिस्थितियों को सहन कर पाता था। पहले, मुख्य चुंबक के साथ अन्य चुंबकों की अनूठी व्यवस्था से मंदिर की मुख्य मूर्ति हवा में तैरती रहती थी। इसके प्रभाव से, कोणार्क के समुद्र से गुजरने वाले जहाज इस ओर खिंचे चले आते हैं, जिससे उन्हें भारी क्षति हो जाती है। इसलिए अंग्रेज़ इस पत्थर को निकाल ले गये। इस पत्थर के कारण दीवारों के सभी पत्थर संतुलन में थे। इसके हटने के कारण, मंदिर की दीवारों का संतुलन खो गया और वे गिर पड़ीं।

इस मंदिर में सूर्य भगवान की तीन प्रतिमाएं हैं, बाल्यावस्था-उदित सूर्य- जिसकी ऊंचाई 8 फीट है, युवावस्था जिसे मध्याह्न सूर्य कहा जाता है, इसकी ऊंचाई 9।5 फीट है, जबकि तीसरी अवस्था है प्रौढ़ावस्था, जिसे अस्त सूर्य भी कहा जाता है, जिसकी ऊंचाई 3।5 फीट है। यह मंदिर इतना खूबसूरत है कि इसका बाह्य आवरण और नक्काशी किसी भी पुरातात्विक वास्तुशिल्पीत के विद्वान और शिल्पकला व नक्कावशी के कलाकार को दांतो तले अंगुलियां दबाने के लिए मजबूर कर देंगी।

इस मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। रथ में बारह जोड़े विशाल पहिए लगे हैं और इसे सात शक्तिशाली घोड़े तेजी से खींच रहे हैं। 7 घोड़े सप्ताह के सातों दिनों के प्रतीक हैं। 12 जोड़ी पहिए दिन के चौबीस घंटे दर्शाते हैं, वहीं इनमें लगी 8 तीलियां दिन के आठों प्रहर की प्रतीक स्वरूप हैं। कुछ लोगों का मानना है कि 12 जोड़ी पहिए साल के बारह महीनों को दर्शाते हैं। पूरे मंदिर में पत्थरों पर कई विषयों और दृश्यों पर मूर्तियां बनाई गई हैं। लाल बलुआ पत्थर और काले ग्रेनाइट पत्थर से 1236- 1264 ई.पू. में गंग वंश के राजा नृसिंहदेव द्वारा बनवाया गए इस मंदिर की पूरी दुनिया में चर्चा होती है। दरअसल, यह भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। इसे यूनेस्को द्वारा सन 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।

यह मंदिर भारत के पूर्वी राज्य उड़ीसा के पुरी जिले में 21 मील उत्तर पूर्व की ओर चंद्रभागा नदी के किनारे कोणार्क में स्थित है। इसे कोणार्क का मंदिर या कोणार्क का सूर्य मंदिर कहा जाता है। मंदिर अपनी विशालता, निर्माण, वास्तु और मूर्तिकला के समन्वय के लिए अद्वितीय है और उड़ीसा की वास्तु और मूर्तिकलाओं की चरम सीमा प्रदर्शित करता है। एक शब्द में यह भारतीय स्थापत्य की महत्तम विभूतियों में है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस मंदिर की कहानी सीधे भगवान श्री कृष्ण से जुड़ती है। दरअसल, यह मंदिर सूर्यदेव (अर्क) को समर्पित था, जिन्हें स्थानीय लोग बिरंचि-नारायण कहते थे। यह जिस क्षेत्र में स्थित था, उसे अर्क-क्षेत्र या पद्म-क्षेत्र कहा जाता था। पुराणानुसार, श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को उनके श्राप से कोढ़ रोग हो गया था। साम्ब ने मित्रवन में चंद्रभागा नदी के सागर संगम पर कोणार्क में, बारह वर्ष तपस्या की और सूर्य देव को प्रसन्न किया। सूर्यदेव, जो सभी रोगों के नाशक थे, ने इसका रोग भी अन्त किया। उनके सम्मान में, साम्ब ने एक मंदिर निर्माण का निश्चय किया।

बीएसएफ के नए महानिदेशक बनाए गए वीके जौहरी

0

मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी वीके जौहरी को बीएसएफ का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। वे बीएसएफ के वर्तमान महानिदेशक रजनी कांत मिश्रा के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद 31 अगस्त को अपना पद संभालेंगे। रजनी कांत मिश्रा उत्तर प्रदेश 1984 कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वहीं जौहरी मध्यप्रदेश कैडर के 1984 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी है। वर्तमान में कैबिनेट सचिवालय के तहत बाहरी खुफिया एजेंसी RAW में विशेष सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

वर्तमान महानिलजौहरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) पर एक अधिकारी के रूप में तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है। समिति की तरफ से कहा गया कि श्री वीके जोहरी 30 सितंबर 2020 तक बीएसएफ का महानिदेशक नियुक्त किया जाता है।

बीएसएफ के पास वर्तमान में लगभग 2.5 लाख कर्मियों की ताकत है। बीएसफ देश का सबसे बड़ी सीमा सुरक्षा बल है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोर्चों को सुरक्षित करने का काम करती है।

रिपोर्ट में हुआ खुलासा, देशभर में 21 केंद्रीय विद्यालयों की इमारतें हैं असुरक्षित

0

देशभर में 20 से अधिक केंद्रीय विद्यालयों की इमारतें आंशिक या पूरी तरह असुरक्षित पाई गई। ऑडिट की रिपोर्ट में हुए खुलासे के तुरंत बाद मानव संसधान और विकास ने निर्देश जारी किए। इन इमारतों में स्कूल संचालित नहीं किए जाने और इन दशकों पुरानी इमारतों में सबसे पुरानी इमारतों में सबसे पुरानी 8 महाराष्ट्र और 3 असम में हैं।

एचआरडीमंत्रालय के अधिकारों के अनुसार महाराष्ट्र की 8 में से 3 इमारतें 1960 में बनाई गई थी। उत्तरप्रदेश, गुजरात में दो- दो, त्रिपुरा, मेघालय, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश और सिक्क्म में ऐसी एक -एक इमारत हैं। ऑडिट रिपोर्ट में 21 इमारतों को असुरक्षित 18 आंशिक रूप से असुरक्षित जबकि 3 पूरी तरह से असुरक्षित है जो 3 इमारतें पूरी तरह से असुरक्षित पाई गई वह गुजरात और महाराष्ट्र में है।

अधिकारी ने कहा कि असुरक्षित स्कूलों के प्रतिस्थापन के काम को चार केवी में मंजूरी दी गई है। जिसमें से एक गुजरात में और तीन महाराष्ट्र में हैं। बाकी 17 केंद्रीय विद्यालयों में मरम्मत या प्रतिस्थापन का काम निर्माण एजेंसियों से अनुमान प्राप्त करने और फंड की उपलब्धता के आधार पर लिया जा सकता है।

जानिए खासियत, सात हाथियों से भी नहीं हिल पाया था ये रहस्यमयी पत्थर

0

ये रहस्यमयी पत्थर लगभग 20 फीट ऊंचा और करीब 15 फीट चौड़ा है।

संसार में ऐसी अनेक चीजें हैं, जिनके रहस्य को आज तक कोई नहीं समझ सका है। एक ऐसा ही रहस्य है तमिलनाडु के शहर महाबलिपुरम में उपस्थित अति प्राचीन पत्थर, जो किसी आश्चर्य से कम नहीं है। मान्यता है कि ये पत्थर लगभग 1200 वर्ष पुराना है।

ये रहस्यमयी पत्थर लगभग 20 फीट ऊंचा और करीब 15 फीट चौड़ा है। ये एक ढलान पर आश्चर्यजनक रूप से टिका हुआ है, जो न तो कभी हिलता है एवं न ही कभी लुढ़कता है।यहां आने वाले लोग 250 टन वजनी इस पत्थर को देखकरदंग रह जाते हैं कि आखिर यह कैसा चमत्कार है।

बता दें कि, कुछ लोग इस पत्थर को श्रीकृष्ण के माखन की गेंद भी बोलते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में यहां पर कुछ माखन गिरा दिया था, जो अब एक बड़े पत्थर का रूप ले चुका है। इस पत्थर को पूर्व बार वर्ष 1908 में तलाश किया गया था।

बताया जाता हैं कि एक बार इस पत्थर को नीचे लाने हेतु सात हाथियों के जरीर बांधकर खिंचवाया गया था, किन्तु ये पत्थरअपने स्थान से जरा सा भी नहीं हिल पाया।

ये पत्थर किसी इंसान के जरिए यहां पर खड़ा किया गया है या प्रकृति के जरिए, इस प्रश्न का सही उत्तर आज तक किसी को नहीं मिल पाया है।

भारत में विख्‍यात हुईं ये 3 आध्यात्मिक विदेशी महिलाएं जो

0

भारत एक महान देश है इसके दर्शन, धर्म और वातावरण से प्रभावित होकर कई लोग यहां चले आते हैं। हालांकि कई महिलाएं ऐसी भी थीं जिनके भारत आने के और भी कई कारण थे। वर्तमान में हजारों की संख्या में विदेशी महिलाएं भारत में रह रही हैं। आओ जानते हैं ऐसी 3 विदेशी महिलाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी जानकारी जिन्होंने हिन्दू धर्म का सम्मान बढ़ाया।

1.एनी बेसेंट-

आध्यात्मिक और राजनीतिक रूप से सोए हुए भारत को जगाने के लिए भारत को अपना घर कहने वाली एनी बेसेंट ने दुनियाभर के धर्मों का गहन अध्ययन किया। उन धर्मों को जाना-परखा और बाद में समझा कि वेद और उपनिषद का धर्म ही सच्चा मार्ग है। एनी का जन्म 1 अक्टूबर 1847 को लंदन में हुआ। उनका जन्म नाम एनी वुड था। वे थियोसॉफी सोसाइटी से जुड़ी हुई थी जिसे मादाम ब्लावाटस्की ने प्रारंभ किया था। 24 दिसंबर 1931 को अड्यार में अपना अंतिम भाषण दिया। 20 सितंबर 1933 को शाम 4 बजे, 86 वर्ष की अवस्था में, अड्यार, चेन्नई में देह त्याग दी। 40 वर्ष तक भारत की सेवा करके उसे आध्यात्मिक और राजनीतिक रूप से जगाने के लिए उन्हें धन्यवाद।

2.सिस्टर निवेदिता-स्वामी विवेकानंदजी की शिष्या सिस्टर निवेदिता पूरे भारतवासियों की स्नेहमयी बहन थीं। सिस्टर निवेदिता का असली नाम मार्गरेट एलिजाबेथ नोबुल था। 28 अक्टूबर 1867 को आयरलैंड में जन्मी मार्गरेट नोबुल बचपन से ही ईसा मसीह के उपदेश रोम-रोम में बसे थे लेकिन बाद में ईसाई मत के सिद्धांतों के लिए उनके दिल में कुछ संदेह पैदा हो गए थे। कुछ बड़ी हुईं तो बुद्ध साहित्य पढ़ने पर बेहद प्रभावित हुईं।

इसी बीच 1893 में जब स्वामीजी विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने शिकागो पहुंचे तो वहां उनके विचारों से प्रभावित होकर मार्गरेट एलिजाबेथ नोबुल ने मन ही मन स्वामीजी को अपना गुरु मान लिया। स्वामी जी के प्रभाव से वे जनवरी 1898 में भारत आईं। यहाँ आकर कलकत्ता के बेलूर आश्रम में रहने लगीं और उन्होंने यहां की जनता की तन, मन, धन से नि:स्वार्थ सेवा की। 25 मार्च 1898 के दिन मार्गरेट नोबुल का नामकरण संस्कार हुआ और उनका नाम निवेदिता रखा गया। सिस्टर निवेदिता ने जिस छोटे से विद्यालय की नींव रखी थी आज यह विद्यालय ‘रामकृष्ण शारदा मिशन भगिनी निवेदिता बालिका विद्यालय’ के नाम से जाना जाता है। 13 अक्टूबर 1911 को पर चिरनि‍द्रा में लीन हो गई।

3.श्रीमाता-फ्रासंसी मूल की श्रीमाता का जन्म नाम मीर्रा अल्फासा था। वह श्री अरविंदों की शिष्या थीं। वे अरविंदों के पुद्दुचेरी आश्रम में रहती थीं। श्रीमां का जन्म 1878 में पैरिस में हुआ था। उनके पिता टर्किस इहुदी मरिस तथा मा‍ता माथिलडे इजिप्टियन थीं। 1914 में वह अरविंदों आश्रम आ गई। 1920 में वह अरविंदों आश्रम की मार्गदर्शक बन गई थीं।

यहां पर 40 सालों तक सरोवर में आराम करते हैं विष्णु भगवान, बेहद ही अद्भुत है ये मंदिर

0

तमिलनाड़ु के कांचीपुरम में अथि वरदराजा पेरूमल मंदिर स्थित है, जो कि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा अथि वरदार के रुप में की जाती है। इस मंदिर से जुड़ी खास बात ये है कि भगवान अथि वरदार की प्रतिमा के दर्शन करने का मौका 40 साल में एक बार मिलता है। दरअसल भगवान अथि वरदार की प्रतिमा 40 सालों के लिए एक पवित्र तालाब में रखी जाती है और 40 साल के बाद ही इनकी प्रतिमा को तालाब से निकाला जाता है। हर 40 वर्ष में इस मंदिर में वरदार उत्सव का आयोजन किया जाता है और इस आयोजन के दौरान भक्त इस मंदिर में आकर भगवान की इस प्रतिमा के दर्शन कर पाते हैं। भगवान की ये प्रतिमा अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है। जिसकी वजह से इस मूर्ति का नाम अथि वरदार रखा गया है। संस्कृति में अथि का अर्थ अंजीर होता है। ऐसी मान्यता है कि इस मूर्ति को भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाया गया था।

40 सालों बाद जब भगवान अथि वरदार की प्रतिमा को अनंत सरोवर से बाहर निकाला जाता है तो मंदिर में वरदार उत्सव का आयोजन किया जाता है। जो कि 48 दिनों तक चलता है और 48 दिन पूरे होने के बाद इस मूर्ति को फिर से तालाब में छिपा दिया जाता है। इस उत्सव के दौरान 40 दिनों तक भगवान अथि वरदार की प्रतिमा को लेटी अवस्था में रखा जाता है, जबकि आखिरी के आठ दिनों में ये प्रतिमा खड़ी मुद्रा में रहती है। भगवान की इस मूर्ति को एक सदी में केवल दो बार ही तालाब से निकाला जाता है। जिसकी वजह से भक्त अपने जीवन में इस मूर्ति के दर्शन अधिकतम दो बार ही कर सकते हैं।

1 जुलाई से शुरू हुआ वरदार उत्सव

पिछली बार ये मूर्ति साल 1979 में तालाब से बाहर निकाली गई थी और इस साल इस मूर्ति को तालाब में रखे हुए 40 साल हो गए हैं। ये मूर्ति 1 जुलाई को तालाब से बाहर निकाली गई है और 1 जुलाई से वरदार उत्सव की शुरूआत हो गई है जो कि 9 अगस्त तक चलने वाला है। इस उत्सव की तैयारों पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

इस मंदिर से जुड़ी कथाइस मंदिर से एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा और सरस्वती के बीच लड़ाई हो गई थी और ब्रह्मा जी से नाराज होकर सरस्वती मां इस जगह आई थीं। इस जगह पर आने के बाद सरस्वती मां वेगवती नदी बनकर यहां बहने लगीं। सरस्वती मां को मनाने के लिए ब्रह्मा इस जगह पर आए और उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया। सरस्वती मां ने इस अनुष्ठान को नष्ट करने की कोशिश लेकिन तभी अग्नि से भगवान विष्णु वरदराज के रुप में प्रकट हुए। विष्णु भगवान ने सरस्वती मां को समझकार उनका क्रोध शांत करवाया। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा ने इस जगह पर भगवान विष्णु की मूर्ति बनाई।

ऐसा कहा जाता है कि मुगलों के आक्रमण से इस मूर्ति को बचाने के लिए मंदिर के पंडितों ने ये मूर्ति तालाब में छिपा दी थी और करीब 40 साल तक ये प्रतिमा तालाब में रही थी। 40 साल बाद इस मूर्ति को पंडितों के पुत्रों ने तालाब से बाहर निकाला। लेकिन 48 दिन के बाद ये मूर्ति अपने आप तालाब में चले गई। तब से इस प्रतिमा को 40 साल में एक बार ही तालाब से निकाला जाता है। ऐसा कहा जाता है कि तालाब के अंदर देवगुरु बृहस्पति पूजा इस मूर्ति की पूजा करते हैं।

तमिलनाडु : अन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने जब्त किया 53.2 लाख रुपये का सामान

0

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के अन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने दो अलग-अलग मामलों में सोना, विदेशी मुद्रा, लेपटॉप और सिगरेट बरामद किया है। बरामद किए गए सामान की कीमत 53.2 लाख रुपये बताई जा रही है।

सीमा शुल्क आयुक्त के कार्यालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक जांच के दौरान सोने की तस्करी के तीन मामले और विदेशी मुद्रा के दो मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने इस संबंध में फिलीप (51) और सीगर (61) नामक दो विदेशी नागरिकों काे हिरासत में लिया। इन दोनों के पास फ्रांसीसी पासपोर्ट के अलावा ओसीआई कार्ड भी है। ये दोनों दुबई जा रहे थे। उनके बैग की तलाशी लेने के बाद अधिकारियों ने 24540 यूरो बरामद किए जिसकी कीमत 18.64 लाख रुपये है।

इसके अलावा शुक्रवार रात को नासर दीन (55), बहुरुद्दीन (25) और मोहम्मद नजीबुल्ला (25) नामक तीन यात्रियों को इंडिगो फ्लाइट से गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से सोने की तीन ईंटें बरामद की जिसका कुल वजन 843 ग्राम और कीमत 30.38 लाख रुपये बताई गई है, जबकि इसके अलावा उनके पास से सोने के 131 ग्राम के बिस्कुट भी बरामद किए गए जिसकी कीमत 4.72 लाख रुपये थी। इसके अलावा उनके पास से सिगरेट के 2640 पैकेट भी मिले जिसकी कीमत 26,400 रुपये है। उनके पास से चार लेपटॉप भी मिले।

प्रियंका में ‘नैचुरल लीडर’, कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने के लिए फरफेक्ट : शशि थरूर

0

राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस पार्टी को लंबे समय से अपने अध्यक्ष की तलाश है. कांग्रेस वर्किंग कमिटी अभी तक इस पद के लिए कोई नाम तय नहीं कर पाई है. ऐसे में पार्टी के सीनियर नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस के लिए नए अध्यक्ष का नाम सुझाया है. थरूर के मुताबिक, प्रियंका गांधी इस पद के लिए फरफेक्ट हैं. वो नैचुरल करिश्माई नेता हैं. थरूर ने ये भी कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नेतृत्व को लेकर ‘स्पष्टता की कमी’ पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है. ऐसे में नए अध्यक्ष को लेकर और ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए.

शशि थरूर ने रविवार को एक चैनल के साथ इंटरव्यू में ये बातें कही. उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के उस सुझाव पर सहमति जताई कि पार्टी का अध्यक्ष युवा नेता होना चाहिए. थरूर ने कहा, ‘प्रियंका पार्टी अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं. वो कांग्रेस की सर्वोत्तम अध्यक्ष हो सकती हैं. उनमें नैचुरल करिश्मा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ता और वोटर प्रेरित होंगे.’

थरूर ने उम्मीद जताई कि जब पार्टी अध्यक्ष के चुनाव होंगे, तो वह अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होंगी. साथ ही थरूर ने कहा कि यह गांधी परिवार पर निर्भर है कि प्रियंका अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगी या नहीं.

शशि थरूर ने पार्टी की मौजूदा स्थिति के प्रति निराशा जाहिर की है. उन्होंने माना कि कांग्रेस जिस संकट से गुजर रही है, उसका कोई समाधान नहीं मिल रहा है. कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘यह बिल्कुल सही है कि पार्टी के शीर्ष स्तर पर स्पष्टता के अभाव से कार्यकर्ताओं और समर्थकों को कष्ट हो रहा होगा. इनमें कई लोगों को पार्टी अध्यक्ष का अभाव खटक रहा होगा, जिससे महत्वपूर्ण फैसलों, आदेशों के साथ-साथ प्रेरणा एवं ऊर्जा के लिहाज से उम्मीद लगाई जा सके और इसके पीछे एकजुट होकर कदम बढ़ाए जा सकें.’

पार्टी अध्यक्ष पद के लिए खड़े होने के सवाल पर थरूर ने कहा, ‘मैं ईमानदारी से कहूं कि मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर अटकलें लगाने की दूर-दूर तक भी कोई संभावना है.’ बता दें कि राहुल गांधी ने 25 मई को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि पार्टी कार्यसमिति ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया.

कब से खाली है कांग्रेस अध्यक्ष पद?
लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर में कांग्रेस सहित विपक्ष का पूरी तरह से सफाया हो गया. बीजेपी 303 सीटों के साथ सत्ता में एक बार फिर वापसी की है, जबकि राहुल गांधी के नेतृत्व में उतरी कांग्रेस को जबरदस्त हार का मुंह देखना पड़ा. कांग्रेस 52 सीटों पर सिमट गई. लोकसभा चुनाव की करारी हार को स्वीकार करते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी. उसके बाद से अध्यक्ष पद खाली है.

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, नए अध्यक्ष की रेस में सुशील कुमार शिंदे, मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, अशोक गहलोत और सचिन पायलट का नाम भी विचार किया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो संगठन के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर पार्टी ने अशोक गहलोत के नाम पर मोहर लगाने का मन बना लिया है. लेकिन इसपर कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है.

लोकसभा चुनाव में राहुल ने जी-जान से की थी मेहनत
बता दें कि कांग्रेस की खोई सियासी जमीन को तलाशने के लिए राहुल गांधी ने एड़ी चोटी का जोर लगाया. लोकसभा चुनाव में 2 माह 8 दिन के चुनाव प्रचार में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने 148 रैलियां की थीं. इस दौरान उन्होंने करीब 1.25 किमी की यात्राएं कीं, लेकिन देश भर में कांग्रेस को 52 सीटें आईं.

राहुल गांधी ने सबसे अधिक 21 रैली उत्तर प्रदेश में की है और पार्टी महज एक सीट जीत सकी है. मध्य प्रदेश में 18 रैली की एक सीट आई, राजस्थान में 13 रैली कोई सीट नहीं मिली. केरल में 12 रैली की 15 सीटें मिलीं. बिहार में 8 रैली की और एक सीट मिली. झारखंड में 4 रैलियां किया और एक सीट ही जीत सके.

सूत्रों के मुताबिक, राहुल अगले एक से डेढ़ साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे, बताया जा रहा है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने ही ये बीच का रास्ता राहुल गांधी के लिए निकाला है. इस दौरान राहुल गांधी बिना किसी पद के देशभर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे.

इस दौरान क्या करेंगे राहुल गांधी?
राहुल की जिद के आगे झुके कांग्रेस नेताओं ने यह बीच का रास्ता निकाला है, जिसमें राहुल गांधी की बात भी रह जाए और कांग्रेस का अध्यक्ष पद भी खाली न रहे. राहुल बिना किसी जवाबदेही के देशभर में घूमकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलकर संवाद कर सकते हैं. वह बिना पद के मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ खुल कर आलोचना कर सकेंगे. पद नहीं रहने पर सत्ता पक्ष के निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष होंगे न कि राहुल गांधी. इस प्रयोग के साथ राहुल गांधी उन राज्यों को ज्यादा समय दे सकेंगे जहां कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपना वर्चस्व खो चुकी है.

विराट कोहली से पूछा- दुनिया में आपको किस धर्म पर है ज्यादा विश्वास, जवाब जानकर होगी खुशी

0

आपको बता दो जैसा कि भारतीय टीम विश्व कप के बाद अब वेस्टइंडीज दौरा करने जा रही है जहां पर भारतीय टीम को तीन वनडे टीम ट्वेंटी-20 और दो टेस्ट मैच खेलने हैं यह दौरा भारतीय टीम का अगले महीने 3 अगस्त से शुरू होने वाला है।

ऐसे में दोस्तों आज हम आप लोगों को बताने वाला हूं कि वेस्टइंडीज दौरे से पहले भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली को एक इंटरव्यू में बुलाया गया जिसमें उनसे काफी सारे सवाल पूछे गए, जिन सवालों के उन्होंने आसानी से जवाब दिए।

कोहली से पूछा गया कि देखा जाए तो अभी तक आपकी जिंदगी पूरी तरह से क्रिकेट के इर्द गिर्द ही घूमती नजर आई है. ऐसे में आप धर्म के बारे में क्या कहेंगे, क्या आप धर्म को मानते हैं? इसका जवाब देते हुए कोहली ने कहा- मैं धार्मिक नहीं हूं. मैं अपने आपको धर्म के दायरे में कैद नहीं करता. वैसे मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।

ट्रंप ने किया ट्वीट : कैलिफोर्निया के वार्षिक फूड फेस्टिवल में गोलीबारी, पांच लोगों की मौत

0

अमेरिका के कैलिफॉर्निया में एक फूड फेस्टिवल में गोलीबारी की घटना में पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हैं। बताया जा रहा है कि कैलिफोर्निया में वार्षिक गिलरॉय गार्लिक महोत्सव (फूड फेस्टिवल) में गोलीबारी हुई। ‘एनबीसी न्यूज’ की खबर के अनुसार घटना में कम से कम पांच लोग मारे गए। जबकि कई लोग घायल हैं। बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर दुख जताते हुए ट्वीट किया, ‘कानूनी एजेंसिया कैलिफोर्निया के गिलरॉय में हुई गोलीबारी की घटना पर नजर बनाए हुए हैं। अभी तक शूटर पकड़ा नहीं गया है। सावधान और सुरक्षित रहें!’

अमेरिकी 2020 राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों की दौड़ में शामिल सीनेटर कमला हैरिस ने घटना पर ट्वीट करते हुए कहा, गिलरॉय में मौके पर पहुंचे पहले दल (फसर्ट रिस्पॉन्स) की शुक्रगुजार हूं और ऐसी संवेदनहीन हिंसा में घायल हुए लोगों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार महोत्सव में मौजूद एक शख्स ने अचानक गोलीबारी करनी शुरू कर दी। क्रिसमस हिल पार्क में हो रहे कार्यक्रम से एम्बुलेंस के द्वारा कम से कम 11 लोगों को अस्पताल भेजा गया है। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि गोली की आवाज सुनकर महोत्सव में भगदड़ मच गई। लोग इधर से उधर जान बचाने के लिए भागने लगे। गोलीबारी की इस घटना के बाद पुलिस अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल को चारों ओर से घेर लिया और छानबीन शुरू कर दी।

चश्मदीदों के मुताबिक वहां कई राउंड फायरिंग हुई जिसमें कई लोगों के घायल होने की आशंका है। लोगों ने बताया कि हमलावर राइफल के साथ था और सेना की वर्दी जैसे कपड़े पहन रखे थे। आसपास के लोगों को शुरू में पटाखे जैसी कोई आवाज सुनाई दी।

बाद में लोगों तो पता चला कि फायरिंग हुई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। बता दें कि तीन दिन तक चलने वाले इस महोत्सव का यह आखिरी दिन था।