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हासिल की बड़ी सफलता जब्त की करोड़ों की विदेशी सिगरेट,DRI ने

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विदेशी सिगरेट की रैकेट का भंडाफोड़ करने में राजस्व विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। जब्त की गई सिगरेट की कीमत 1.62 बताई जा रही है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) की कोलकाता जोनल यूनिट की टीम ने विदेशी सिगरेट की तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 1.62 करोड़ रुपये मूल्य की सिगरेट जब्त की। इस सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। डीआरआइ की ओर से जारी बयान में बताया गया कि विदेशी सिगरेट की यह खेप सिलीगुड़ी, कोलकाता और गुवाहाटी से पकड़ी गई। जांच में यह भी पता चला है कि विदेशी सिगरेट की खेप को म्यांमार से अवैध रूप से तस्करी कर मणिपुर के रास्ते लाया गया था। गुप्त सूचना के आधार पर डीआरआइ की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर छापामारी कर इसे जब्त किया।

अधिकारियों ने बताया कि तीनों स्थानों से अलग-अलग ब्रांडों- विन, पेरिस, रुउली रिवर, एस्से गोल्ड व गुडांग गरम के पैकेटों में बंद कुल 16.27 लाख पीस विदेशी सिगरेट जब्त की गई है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 1.62 करोड़ रुपये है। ये सिगरेट इंडोनेशिया, चीन, कोरिया व म्यांमार मूल की हैं।

डीआरआइ के अनुसार सर्वप्रथम सिलीगुड़ी के बाहरी इलाके में एक ट्रक को रोककर 1.04 करोड़ रुपये मूल्य की 10.43 लाख पीस से अधिक सिगरेट बरामद की गई। इस सिलसिले में शंकर यादव नामक वाहन चालक को गिरफ्तार किया गया है। उसने पूछताछ में बताया कि सिगरेट को म्यांमार से तस्करी कर मणिपुर के मोरेह में अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते से लाया गया था। यादव ने पूछताछ में यहां से भेजे गए दो और खेप के बारे में जानकारी दी, जिसे कोलकाता व गुहावाटी भेजा गया था।

इसके आधार पर कार्रवाई करते हुए डीआरआइ की टीम ने कोलकाता के बड़ाबाजार इलाके में एक गोदाम में छापामारी कर 51.22 लाख रुपये मूल्य के पांच लाख पीस से अधिक विदेशी सिगरेट जब्त की। छापामारी के दौरान गोदाम में मौजूद दो लोगों राहुल सिंह व विकास कुमार जैन को भी गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद गुवाहाटी में छापामारी कर 7.2 लाख रुपये मूल्य की 70 हजार पीस से अधिक सिगरेट जब्त की गई। प्राथमिक जांच में पता चला है कि विदेशी सिगरेट की तस्करी के रैकेट में शामिल एक ही गिरोह ने तीनों जगहों पर सिगरेट की खेप भेजी थी। इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। इधर, एक अधिकारी ने बताया कि सिगरेट पर 72.9 फीसद आयात शुल्क और आइजीएसटी ड्यूटी लगती है इसलिए कर चोरी करने के लिए अक्सर विदेशी सिगरेट की तस्करी की जाती है। 

फूलन देवी की कहानी देखकर उन्‍होंने पूछा था, ‘का मर्दवा, मजा आवा?

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आज फूलन देवी की पुण्‍यतिथि है और आज एक बार फिर मैं ये कहानी सुनाना चाहती हूं.

कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिसे लिखकर भी हम उससे मुक्‍त नहीं हो पाते. वो बार-बार लौट-लौटकर आती हैं. जितनी बार जिस भी संदर्भ में फूलन देवी का नाम आए, मुझे याद आता है कि बड़े होते हुए मेरे आसपास की दुनिया ने कैसे उस औरत से मेरा परिचय करवाया था और बड़े होकर मैंने कैसे उस औरत को जाना. दोनों में इतना फांक है कि जितना अंधेरे और उजाले में होगा, जितना सांस लेने और सांस रुक जाने में है.

1994, इलाहाबाद
एक दिन अखबार में एक स्‍त्री डाकू की तस्‍वीर छपी थी. वो 11 साल बाद जेल से रिहा हुई थी. प्रदेश में सपा की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्‍यमंत्री थे. उन्‍होंने उस महिला डाकू पर लगे सारे आरोप खारिज कर दिए थे और उसे आजाद कर दिया था. इस खबर के साथ बॉक्‍स में उस औरत की पूरी कहानी लिखी थी. उसने बहमई के 22 ठाकुरों को गोली मार दी थी. कहानी में लिखा था कि उन ठाकुरों ने उसके साथ रेप किया था और गांव में नंगा घुमाया था. उत्‍तर प्रदेश के हिंदी अखबार में वो कहानी कुछ ऐसे नहीं छपी थी कि याद रह जाए. लेकिन तथ्‍यों को पढ़कर मन में जो एक चित्र बना, वो ये था कि एक औरत थी. गांव की गरीब, कमजोर, छोटी जात वाली औरत. ऊंची जात वाले मर्दों ने उसके साथ रेप किया. फिर एक दिन वो बंदूक लेकर गई और उन सबको गोली से उड़ा दिया. अगर आप एक लड़की हैं, भले ही सिर्फ 13 साल की हैं, लेकिन लड़की हैं और एक ऐसी दुनिया में बड़ी हो रही हैं, जहां 13 साल की उम्र तक ये कई बार हो चुका है कि भीड़ में, मेले में, घर में, गांव में, भीड़ भरे टैंपो में मर्दों ने इधर-उधर छूने की कोशिश की, छाती पर हाथ मारा तो भले आपको रेप का ठीक-ठीक मतलब न पता हो, लेकिन उस डाकू औरत की ये कहानी पढ़कर ‘अच्‍छा सा’ महसूस होगा. मुझे भी हुआ था. वरना तो आए दिन अखबार में ऐसी खबरें छपती ही थीं कि ‘महिला के साथ रेप, गांव में नंगा करके घुमाया.’ लेकिन इसके पहले कब ऐसी खबर छपी थी कि ‘महिला ने नंगा करके घुमाने वालों को गोली से उड़ाया.’ गोली से उड़ाने वाली उस डाकू का नाम फूलन देवी था, जिसे 2011 में टाइम मैगजीन ने इतिहास की 16 सबसे विद्रोहिणी स्त्रियों की सूची में रखा था. टाइम ने जिसे इतनी इज्‍जत बख्‍शी, उसका अपना मुल्‍क उसे किस तरह देख रहा था?

गंगा घाट पर बसा वो रसूलाबाद मोहल्‍ला यादवों का गढ़ था, जहां गली के आखिरी छोर पर एक यादव जी के बड़े से मकान में हम किराएदार थे. उस गली में जौनपुर और आासपास के इलाकों से आए कॉम्‍पटीशन की तैयारी कर रहे ढेर सारे यादव लड़के रहते थे. नजदीक के सिनेमा हॉल अवतार में वो फिल्‍म लगी थी, ‘बैंडिट क्‍वीन’, जिसके बारे में मुझे सिर्फ इतना पता था कि वो फूलन देवी पर बनी है. एक दिन मैंने छत पर चार यादव लड़कों को बात करते सुना कि ‘का मर्दवा, ऊ फिल्‍म देख आए. मजा आवा.’ फिर उनके जोर के ठहाकों की आवाज. दबे-छिपे कई बार आसपास के मर्दों को उस फिल्‍म की बात करते सुना, लेकिन हर बार उस बात में एक विचित्र बेशर्म हंसी होती. यहां मैंने बार-बार उन लड़कों के यादव होने का जिक्र इसलिए किया है कि कास्‍ट आइडेंटिटी और पॉलिटिक्‍स से भी ये मेरा शुरुआती साबका था. उस गली का हर व्‍यक्ति अपनी जाति का तमगा अपने माथे पर सजाए घूमता था. ‘मिले मुलायम-काशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम’ के नारों से पूरी गली गूंजी थी. बैंडिट क्‍वीन का कास्‍ट कनेक्‍शन तो मुझे कई साल बाद जाकर समझ में आया. और ये भी कि अपनी सारी पिछड़ी पहचान के बावजूद मर्द आखिर मर्द है. जाति के जिस तार से वो मर्द दूसरे मर्दों के साथ जुड़ाव महसूस करते थे, फूलन के लिए नहीं किया. फूलन की कहानी देखकर भी अपने दूसरे मर्द दोस्‍त से यही कहा, ‘का मर्दवा, मजा आवा.’ और दूसरी ओर आज भी अनेकों बार अपने प्रिवेलेज्‍ड कास्‍ट की गाली खाने वाली मैं थी, जो 14 साल की उम्र में फूलन की कहानी के साथ ‘का मर्दवा, मजा आवा’ सुनकर डर गई थी. ये ऐसा ही था कि घर में किसी के मरने पर शहनाई बजाई जा रही हो.

हालांकि तब तक भी मुझे पता नहीं था कि वो फिल्‍म आखिर है क्‍या.

मैं यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी. उस दिन क्लास करने का मन नहीं था. मैं और मेरी एक दोस्त क्लास बंक करके सिविल लाइंस के राजकरन पैलेस सिनेमा हॉल पहुंचे एक फिल्म देखने- ‘बैंडिट क्वीन’. तब मैं सिर्फ साढ़े अठारह साल की थी.

गेटकीपर ने हमें रोका. बोला, ‘आपके देखने लायक नहीं है.’ हम दोनों थोड़ा घबराए हुए भी थे. एक बार को लगा कि लौट चलें. लेकिन हम लौटे नहीं. हिम्मत जुटाई और कहा,
‘नहीं हमें देखनी है फिल्म.’
‘एक सीन बहुत खराब है मैडम.’
‘कोई बात नहीं.’

जानकर रोगंटे खड़े हो जाएंगे, शादी के बाद यहां नई दुल्हनों से कराया जाता है शर्मनाक काम

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शादी को लेकर हर लड़की के मन में हजारो सपने पलते हैं.. अपने होने वाले जीवनसाथी से लेकर अपने ससुराल में अपने भावी जीवन के लिए कई सारे सपने सजाती है। एक लड़की के लिए उसकी शादी जीवन की सबसे बड़ी एक रस्म होती है और उम्मीद होती है कि इसके बाद उसके जीवन में खुशियां ही खुशियां आएंगी । लेकिन आज हम आपको एक ऐसे समुदाय के बारे में बताने जा रहे हैं जहां शादी के बाद लड़कियों के हिस्से में खुशियां नहीं बल्कि दुश्वारियां आती है । दरअसल यहां शादी के अगले ही दिन नई नवेली दुल्हन से ससुराल वाले वो काम करवाते हैं जिससे उनका जीवन नर्क बन जाता है।

वैसे तो परम्पराओं के नाम पर बहुत सारी गलत हरकते आज भी हमार समाज में हो रही हैं। लेकिन जो काम इस समुदाय में परम्परा के मान पर किया जाता है वो वाकई बेहद शर्मनाक है । दरअसल हस बात कर रहें हैं देश की राजधानी दिल्ली के उस इलाके कि जहां घर की दुल्हनों को शादी के बाद जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया जाता है और खुद ससुराल वाले ही उनके लिए ग्राहक ढूंढ़ कर लाते हैं। जी हां, शायद ये सुनकर आपको यंकीन ना होगा लेकिन मीडिया रिपोर्टो की माने तो दिल्ली के नफजगढ़ के प्रेमनगर बस्ती में रहने वाले इस समुदाय में ये काम सालों से होता चला आ रहा हैं।

परना समुदाय’ के नाम से जाने वाले इस समुदाय में 12 से 15 साल की उम्र में ही लड़कियों की शादी करा दी जाती है। लेकिन उससे बड़ी ज्यादती इन लड़कियों के साथ ये होती है कि शादी के बाद इन्हे घर के काम-काज के साथ ही गैर मर्दों के साथ सम्बन्ध भी बनाने पड़ते हैं। इसके लिए यहां कि औरते और लड़कियां रात में ही घर का सारा काम निपटा लेती हैं और फिर दिन में वो धंधे के लिए निकल पड़ती है। ऐसा करना इनके लिए हर दिन का दिनचर्या बन चुका है और अगर कोई लड़की इसे करने से मना करती है तो उसे उसके घर वाले प्रताड़ित करते हैं। ऐसे में मजबूरी में औरते अपने समुदाय के इस वाहियात परम्परा का पालन करती चली आ रही हैं।

कहते हैं कि इस समुदाय में पैदा होने वाली हर लड़की को ट्रेनिंग के लिए दलालों को सौंप दिया जाता है और वास्तव में देखा जाए तो इस समुदाय में होने वाली शादी आम शादियों जैसी नही होती है बल्कि यहां जो भी लड़की की सबसे ज्यादा बोली लगाता है उसे लड़की पक्ष अपनी लड़की सौंप देते हैं।इस तरह ये शादी, शादी ना होकर सौदा होता है जो पहले लड़की और लड़के पक्ष वाले आपस में करते हैं और उसके बाद हर रोज लड़के वाले यानी ससुराल करते हैं । यहां अपने घर की दुल्हनों के लिए खुद ही ससुराल वाले ग्राहक ढूंढते हैं।

वैसे तो इस समुदाय और इसकी शर्मनाक परम्परा के बारे में मीडिया में बहुत कुछ खुलास हो चुका है लेकिन फिर भी आज तक इसमें कोई बदलाव नही आया । ना ही किसी समाजसेवी संगठन ने इसके लिए कोई कदम उठाया और ना ही स्त्री सशक्तिकरण का आवाज बुलंद करने वाले देश के हुक्मरानों ने इनके लिए कुछ किया। इसे देख तो यही कह सकते हैं आधी अबादी को वास्तव में आजादी नही मिली है।

ऐश्वर्या राय से भी खूबसूरत है उनकी भाभी क्या कभी आपने देखा है , देखिए

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अक्सर आप लोग बचे फैमिली के बारे में ही चर्चा सुनते हैं और बच्चे फैमिली के बारे में बच्चा बच्चा जानता है ऐश्वर्या राय की फैमिली के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं एक भाई और एक भी है।

ऐश्वर्या के भाई का नाम आदित्या राय है आदित्या मरचेंट नेवी में इंजिनियर थे वह फिल्म ‘दिल का रिशता’ के प्रोड्यूसर रह चुके हैं जिसमें ऐश्वर्या लीड एक्ट्रेस का रोल निभाती हुई नज़र आई थी।

ऐश्वर्या की भाभी का नाम श्रीमा राय है लोग कहते हैं कि श्रीमा ईश्वर या से भी खूबसूरत है आराध्या के चट्टे जन्मदिन के मौके पर पूरा परिवार एक साथ था।

इस मौके पर उनके भाई और भाभी जी आए थे श्रीमा वैसे तो हाउस वाइफ हैं पर वह फैशन-ब्लॉगिंग पर काम करती हैं।

वहीं बात करें ऐश्वर्या की तो मिस वर्लड ऐश्वर्या दुनिया की सबसे खुबसुरत महिला है। प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पदुकोण भले ही हाॅलीवुड में एंट्री कर चुकी हों पर दुनिया की सबसे पहली महिला ऐश्वर्या ही थी।

पत्नी बोली- दो बच्चों की मां से इश्क लड़ा रहा है बेशर्म पति..

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परिवार परामर्श केंद्र में एक दंपती के विवाद का रोचक मामला आया है। सुनवाई के दौरान पत्नी ने कहा कि पति को शर्म भी नहीं है। वह दो बच्चों की मां से इश्क लड़ा रहा है। जिस पर पति गुस्सा हो गया। इस पर पत्नी पति और उसकी प्रेमिका का फोटो निकालकर केंद्र के परामर्शदाताओं के सामने रख दिया।

केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार शहर की एक महिला ने आवेदन दिया था कि उसके पति के दूसरी औरत से प्रेम संबंध है। जिस पर गुरुवार को दोनों को सुनवाई के लिए बुलाया गया।

पत्नी ने कहा कि उसका पति घर में कम रहता है। परिवार का खर्च भी नहीं उठाता। पति की हरकतों से वह परेशान है। पति को शर्म भी नहीं है। वह दो बच्चों की मां से इश्क लड़ा रहा है। जबकि घर में पत्नी और बच्चे भी हैं।

यूपी की बेटी ने देश की सेवा के लिए छोड़ी फिल्म इंडस्ट्री , नेवी के इस पद पर हुआ सेलेक्‍शन

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उत्तर प्रदेश की एक बेटी ने ये फिर से साबित कर दिया है कि देश सेवा से बढ़कर कुछ नहीं. वरना बहुत ढूंढ़ने के बाद भी हमें ऐसे उदाहरण मिलना मुश्किल है, जब किसी अभ‌िनेत्री का करियर शुरू हो जाए, उसके बाद एक अभिनेत्री फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दे. यही नहीं, यूपी की बेटी ने फिल्म जगत को ठुकरा कर जो दूसरा करियर चुना है, वो है भारतीय नौसेना में शामिल होकर देश की रक्षा करना. इस यूपी की बेटी का नाम है, रिश्मा भारद्वाज. नौसेना के इस पद पर तैनात होंगी रिश्मा भारद्वाज 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिश्मा भारद्वाज का चयन भारतीय नौसेना के सब लेफ्टिनेंट पद पर हुआ है. इसमें बेहद अहम बात ये है कि रिश्मा ने इस पद को प्राप्त करने के लिए पहली कोशिश में ही बाजी मार ली है.

रिश्मा भारद्वाज, मुकेश भारद्वाज की बेटी हैं. मुकेश का परिवार उत्तर प्रदेश के मथुरा से ताल्लुक रखता है. मुकेश खुद ही भारतीय वायुसेना में हैं. हाल ही में उनके काम को देखते हुए उन्हें ग्रुप कैप्टन पर पदोन्नति मिली है. ऐसे में बेटी को भी सेना में पद मिल जाना उनके परिवार के लिए दोहरी खुशी लेकर आया है.

रिश्मा पढ़ने में बेहद तेज-तर्रार हैं. उन्होंने महज 20 साल की उम्र में अपना बीटेक पूरा कर लिया था. इसके बाद उनका चयन मशहूर आईटी कंपनी इंफोसिस में सेलेक्‍शन हो गया. यह नौकरी करने के दौरान उनका वास्ता दक्षिण के सिनेमा से पड़ा.

डेब्यू फिल्म में मिला था मुख्य अभिनेत्री का किरदार
पढ़ाई में तेज होने के साथ रिश्मा का अभिनय में भी रुझान है. नौकरी के दौरान ही उनकी कुछ मुलाकातें फिल्मकारों से हुईं. रिश्मा के अभिनय में रुझान देखते हुए तमिल फिल्म निर्देशक एआर कृष्‍णा मोहन ने उन्हें अपनी तमिल फिल्म नगाल में मुख्य अभिनेत्री के किरदार के लिए चुना.

तमिल फिल्म नगाल साल 2018 में आई थी. इस फिल्म में रिश्मा के साथ शिव शक्ति मुख्य किरदार में थे. यह एक स्काई-फाई थ्र‌िलर फिल्म थी. इसका म्यूजिक एफएस फैजल ने दिया था.

महिलाओं की शर्ट का बटन बाईं ओर क्यों होता है?

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शायद आपने ध्यान दिया हो। पुरुषों की शर्ट में बटन दाईं ओर होता जबकि महिलाओं की शर्ट में बांयी ओर। प्रश्न यह है कि ऐसा क्यों होता है। क्या इसका कोई कारण है या सिर्फ इसलिए कि पुरुषों का दांयी ओर होता है तो महिलाओं ने बांयी ओर बटन लगाना शुरू कर दिए ताकि पति या भाई उनकी शर्ट का उपयोग ना कर पाए।

इसके पीछे करीब एक दर्जन तर्क दिए जाते हैं। तमाम तर्कों को बताने से पहले हम यह बताना चाहते हैं कि यह परंपरा 1850 के दशक में शुरू हुई। कई इतिहासकार सोचते हैं कि पुरुषों के लिए बटन दाईं ओर और महिलाओं की शर्ट के बटन बाईं ओर होने का निम्न कारण है।:-

क्योंकि पुरुष हथियार रखते थे

पुरुषों की शर्ट में दाईं ओर बटन होती है क्योंकि वे दाहिने हाथ से हथियार रखते थे और बाएं हाथ का उपयोग करके शर्ट का बटन खोलते थे और इसमें अधिक सुविधा होती थी।

स्तनपान में सुविधा होती है

एक सिद्धांत कहता है कि चूंकि ज्यादातर लोग दाएं हाथ के होते हैं और महिलाएं आमतौर पर शिशुओं को अपनी बांहों में रखती हैं, इसलिए बाईं ओर बटन रखने से शर्ट को मुक्त हाथ से स्तनपान करने में आसानी होती है।

घुड़सवारी के कारण

चूंकि महिलाएं पारंपरिक रूप से दाईं ओर सवार होती हैं, इसलिए बाईं ओर शर्ट के बटन लगाने से घुड़सवारी करते समय महिलाओं के टॉप में हवा का बहाव कम होता है और हवा के कारण बटन टूटने की संभावना कम रहती है।

दासियों के कारण

क्योंकि उच्च वर्ग की महिलाएं अपने कपड़े खुद नहीं पहनती थी- पहले दासी महिलाओं को पोशाक पहनाने में मदद करती थी और उन्हें बायीं तरफ बटन लगाना आसान होता था।

पुरुष साथी को परेशानी ना हो

ताकि रोमांस के समय पुरुष साथी को परेशानी ना हो। वो आसानी से शर्ट के बटन खोल सके और आनंद के क्षणों में कोई विध्न पैदा ना हो।

राजनीतिक घमासान के बीच सुमित्रा महाजन ने की CM कमलनाथ से मुलाक़ात : MP

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एक तरफ बीजेपी की ओर से कमलनाथ सरकार गिराने की धमकी दूसरी ओर ताई की सीएम कमलनाथ से मुलाकात.पल पल बदल रही मध्यप्रदेश की राजनीति के बीच पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सीएम कमलनाथ से मुलाक़ात की तो उसके कई मायने निकाले जाने लगे. दोनों के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई.

50 मिनट की मुलाकात

ताई सुमित्रा महाजन बुधवार को भोपाल में सीएम कमलनाथ मिलीं. मध्य प्रदेश में सियासी पारा इस वक्त इतना गर्म है कि हर मुलाक़ात और बात के मायने निकाले जा रहे हैं. दोनों के बीच 50 मिनट तक चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में इंदौर में प्रस्तावित अहिल्या स्मारक सहित ताजा राजनैतिक घटनाक्रम पर दोनो के बीच बातचीत हुई. ताई इनकम टैक्स विभाग के एक कार्यक्रम में शामिल होने भोपाल गयी थीं, उसके बाद वो कमलनाथ से मिलीं.

इंदौर में अहिल्या स्मारक बनाने का प्रस्ताव विधान सभा चुनाव से पहले इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से शासन को भेजा था.पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्ताव पर मौखिक सहमति प्रदान की थी. तब से मामला अटका हुआ है.महाजन ने कहा कि माता अहिल्या बाई के गौरवशाली इतिहास से लोगों को परिचय कराने के लिए एक स्मारक बनाने का प्रस्ताव है. स्मारक में अहिल्या बाई के कार्यों की पूरी प्रदर्शनी, भित्ति चित्र और एक मिनी ओपन थिएटर की कल्पना की गई है.

सीएम कमलनाथ ने सुमित्रा महाजन के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की और आवश्यक निर्देश भी दिए. बताया जा रहा है सुमित्रा महाजन और कमलनाथ के बीच लगभग 50 मिनट तक चली मुलाक़ात में विकास के अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई.कमलनाथ सरकार के लिए क्रॉस वोटिंग करने वाले BJP MLA पर पहरा!

अगर सरकार ने उठाया ये कदम तो 25 रुपए तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल

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पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों को एक बार फिर से जीएसटी में लाने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. उद्योग मंडल एसोचैम ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी में शामिल करने एवं स्टांप शुल्क जैसे कुछ स्थानीय एवं कुछ राज्य टैक्स को भी इसमें शामिल करने की मांग की है. अगर ऐसा होता है तो पेट्रोल के दामों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है.

आपको बता दें कि IOC की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 35.56 रुपये वैट और एक्साइज ड्यूटी के तौर पर चुकाए जाते है. ऐसे में अगर सरकार ये फैसला लेती है तो पेट्रोल 25 रुपए तक सस्ता हो सकता है.

आइए जानें पेट्रोल कितना हो सकता है सस्ता…
IOC की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 35.56 रुपये वैट और एक्साइज ड्यूटी के तौर पर चुकाए जाते है. इसके अलावा औसतन डीलर कमीशन 3.57 रुपये प्रति लीटर और डीलर कमीशन पर वैट करीब 15.58 रुपये प्रति लीटर बैठता है.

साथ ही, 0.31 रुपये प्रति लीटर माल-भाड़े के रूप में चार्ज किए जाते हैं. इस लिहाज से 16 जुलाई को तय हुई एक लीटर पेट्रोल की कीमतों पर लगने वाले टैक्स और कमीशन नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं.

अब अगर पेट्रोल जीएसटी में आता है तो क्या होगा- एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि पेट्रोल की कीमत होती है लगभग उतना ही टैक्स भी लगता है. कच्चा तेल खरीदने के बाद रिफाइनरी में लाया जाता है और वहां से पेट्रोल-डीज़ल की शक्ल में बाहर निकलता है. इसके बाद उस पर टैक्स लगना शुरू होता है. सबसे पहले एक्साइज़ ड्यूटी केंद्र सरकार लगाती है. फिर राज्यों की बारी आती है जो अपना टैक्स लगाते हैं. इसे सेल्स टैक्स या वैट कहा जाता है.
>> इसके साथ ही पेट्रोल पंप का डीलर उस पर अपना कमीशन जोड़ता है. अगर आप केंद्र और राज्य के टैक्स को जोड़ दें तो यह लगभग पेट्रोल या डीजल की वास्तविक कीमत के बराबर होती है. उत्पाद शुल्क से अलग वैट एड-वेलोरम (अतिरिक्त कर) होता है, ऐसे में जब पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते हैं तो राज्यों की कमाई भी बढ़ती है.

>> अगर पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो आम लोगों की मौज तय है. लेकिन केंद्र और राज्य सरकार को इससे नुकसान हो सकता है.

>> आसिफ कहते हैं कि अगर 25 जुलाई के दाम देखें तो साफ़ है कि अगर टैक्स न लगें तो पेट्रोल के दाम काफ़ी नीचे आ जाएंगे. 73.27 रुपए प्रति लीटर का दाम टैक्स (एक्साइज़ ड्यूटी और वैट) हटने पर 37.70 रुपए प्रति लीटर रह जाएगा.

और अगर इसमें 28% की दर से जीएसटी जोड़ लिया जाए तो भी ये 48.25 रुपए प्रति लीटर बैठेगा.

>> अगर एक लीटर पेट्रोल 73 रुपए के बजाय 48 रुपए में बिकने लगे तो ये कितनी बड़ी राहत होगी, इसका अंदाज़ा लगाना आसान है.

लेकिन क्या पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाना इतना आसान है? शायद नहीं! अर्थशास्त्री का कहना है कि अब ये फ़ैसला सिर्फ केंद्र सरकार नहीं कर सकती है. क्यों राज्य भी जीएसटी काउंसिल की बैठक का प्रमुख हिस्सा है.

उसके ही मंगेतर ने कर दिया रेप, युवती की सदमे में गई आवाज

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दिल्ली में दिनों दिन महिलाओं के प्रति अपराध कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है. अब एक मंगेतर ने अपनी होने वाली पत्नी का ही रेप कर दिया. इस वारदात के बाद से ही युवती इतने सदमे में हैं कि वह कुछ भी नहीं बोल पा रही है. युवती के परिजन के अनुसार इस घटना के बाद से ही उसकी आवाज चली गई है. साथ ही परिजन ने आरोप लगाया है कि बलात्कार करने के बाद युवक ने शादी से भी इनकार कर दिया.

मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज होंगे बयान
मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि युवती के लिखित बयान जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करवाए जाएं. यह बयान 7 दिन में दर्ज करवाने के आदेश दिए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार मामले में कोर्ट ने पीड़िता से इशारों में बात कर मामला समझने का प्रयास किया. इस दौरान युवती ने कोर्ट को इशारों में ही सभी सवालों का जवाब भी दिया.

लिख सकती है पीड़िता

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता सदमे में है और इसके चलते वह बोल नहीं पा रही है. लेकिन वह लिखित बयान दर्ज करवाने में सक्षम है. इसलिए अब इस मामले में और देरी न करते हुए जल्द से जल्द कानूनी प्रक्रिया को अपना या जाए. पुलिस जल्द ही मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता के लिखित बयान दर्ज करवाए.