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“UN महासभा में पाकिस्तानी सियासत की एंट्री, शहबाज शरीफ के भाषण के दौरान लगे नारे; जांच शुरू”

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है। विजिटर्स गैलरी से राजनीतिक नारेबाजी को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, यह नारा शरीफ के समर्थक ने लगाया था, जिससे यूएन के सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना 26 सितंबर को न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में हुई, जब शहबाज शरीफ अपने 25 मिनट के भाषण में वैश्विक चुनौतियों जैसे संघर्ष, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय मुद्दों पर बोल रहे थे। भाषण के बीच में गैलरी से एक व्यक्ति ने “शहबाज शरीफ जिंदाबाद” का नारा लगाया, जो पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के समर्थक के रूप में पहचाना गया। यह नारा इतना जोरदार था कि हॉल में मौजूद प्रतिनिधियों का ध्यान भटक गया।

यूएन सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी मिशन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और व्यक्ति को शांत करने में मदद की। हालांकि, नारा लगाने वाले व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया, लेकिन यूएन अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। एक वरिष्ठ यूएन अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यूएन महासभा जैसे संवेदनशील मंच पर कोई भी राजनीतिक गतिविधि अस्वीकार्य है। हम गैलरी में प्रवेश प्रक्रिया और सुरक्षा चूक की जांच कर रहे हैं।”

संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार, दर्शक दीर्घा में प्रवेश सख्त नियंत्रण के अधीन है और केवल किसी सदस्य देश के राजनयिक मिशन के माध्यम से प्राप्त पास के जरिए संभव है। अब संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि संबंधित व्यक्ति को प्रवेश पास कैसे प्राप्त हुआ और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति से जुड़े नारे महासभा हॉल में क्यों उठाए गए।

पाकिस्तानी मीडिया में वायरल हो रही इस घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने इसे “पाकिस्तानी चुनावी रैली” बताकर मजाक उड़ाया, जबकि अन्य ने शरीफ सरकार की छवि पर सवाल उठाए। एक्स पर एक पोस्ट में लिखा गया, “शहबाज अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यूएनजीए में नारे लगाने के लिए ले आए थे।” एक अन्य पोस्ट में कहा गया, “यह घटना यूएन की सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़ी करती है।”

यह पहली बार नहीं है जब यूएन महासभा में ऐसी घटना घटी हो। इतिहास में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक के कार्यकाल के दौरान विपक्षी नेताओं ने गैलरी से लोकतंत्र के समर्थन में नारे लगाए थे।

“क्या है सिंगापुर संधि, जो सुलझाएगी जुबिन गर्ग की मौत की गुत्थी; गुवाहाटी से दिल्ली तक क्यों हलचल”

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केंद्र सरकार ने असम के मशहूर गायक जुबिन गर्ग की मौत की जाँच में मदद के लिए भारत-सिंगापुर संधि को फिर से सक्रिय करने का फैसला किया है, ताकि इस मौत की गुत्थी सुलझाई जा सके। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि केंद्र ने दोनों देशों के बीच साल 2005 में हुए परस्पर कानूनी सहायता संधि (MLAT) के तहत गायक जुबिन गर्ग की मौत की जांच में दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश सिंगापुर से औपचारिक रूप से सहयोग का अनुरोध किया है।

असम सरकार ने सोमवार को गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था और सिंगापुर में गायक की मौत के संबंध में देश के साथ संधि के प्रावधानों की मदद लेने मांग की थी। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”गृह मंत्रालय ने अब हमारे प्रिय जुबिन के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के संबंध में असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर परस्पर कानूनी सहायता संधि के तहत औपचारिक रूप से सहयोग मांगा है।”

असम के अधिकारी सिंगापुर पहुंचे

सरमा ने सोमवार को कहा था कि एमएलएटी के प्रावधानों का उपयोग होने पर सिंगापुर के अधिकारियों से पूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा, मामले के विवरण तक पहुंच प्राप्त होगी और आरोपियों को वापस लाने एवं न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। असम सरकार ने गायक की मौत की जांच के लिए विशेष पुलिस महानिदेशक (DGP) एमपी गुप्ता के नेतृत्व में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। सरमा ने कहा कि असम पुलिस के दो अधिकारी सिंगापुर में संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने के लिए पहले ही सिंगापुर पहुंच गये थे।

52 वर्षीय गायक गर्ग की 19 सितंबर को सिंगापुर में एक नौका यात्रा के दौरान समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी। उन्हें वहां अगले दिन श्यामकानु महंत द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर भारत महोत्सव में प्रस्तुति देनी थी लेकिन उससे एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गई थी। बुधवार को उनकी तेरहवीं है।

क्या है भारत-सिंगपुर संधि?

जब कभी किसी भारतीय नागरिक की या भारत से संबंधित कोई आपराधिक गतिविधि विदेशों में घटित होती है तो उस देश के साथ हुई कानूनी सहायता संधि के जरिए भारत वहां से साक्ष्यों को जुटाता है। इस संधि के तहत विदेशों में संदिग्ध मौत, धोखाधड़ी, साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग या मादक पदार्थों की तस्करी समेत किसी भी अपराध के मामले में जांच एजेंसियों के उस देश से सबूत जुटा सकती हैं। इस प्रक्रिया में जांच टीम गवाहों के बयान दर्ज कर सकती हैं, फॉरेंसिक रिपोर्ट इकट्ठी कर सकती हैं, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज जो जांच में सहायक हैं, उसे पाने के लिए इस सहायता संधि का इस्तेमाल करती हैं।

भारत और सिंगापुर के बीच साल 2005 में इन्हीं उद्देश्यों को हासिल करने के मकसद से एक पारस्परिक संधि हुई थी, जो दोनों देशों के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस इन क्रिमिनल मैटर्स (MLAT) का ढांचा तैयार करता है। जुबिन गर्ग की सिंगापुर में हुई संदिग्ध मौत के मामले में यह संधि प्रासंगिक हो गई है क्योंकि इसी के जरिए दोनों देशों के सक्षम प्राधिकार मामले की जांच कर सकेंगे और न्याया सुनिश्चित हो सकेगा।

संधि कैसे करेगा काम?

इस संधि की मदद से सिंगापुर गए असम के अधिकारी वहां से साक्ष्य जमा कर सकेंगे। वहां संबंधित लोगों का बयान दर्ज कर सकेंगे। इसके अलावा वहां सर्च या सीजर की कार्रवाई कर सकेंगे। किसी व्यक्ति की उपस्थिति का अनुरोध या हिरासत में व्यक्ति के ट्रांजिट की व्यवस्था कर सकेंगे। इतना ही नहीं किसी भी तरह के कानूनी दस्तावेज या रिकॉर्ड प्रोडक्शन का ऑर्डर भी हासिल कर सकेंगे। इस संधि के जरिए विदेशी जब्ती आदि के आदेश पर अमल में भी मदद मिलेगी।

“रूस पर क्या है ट्रंप की नई पॉलिसी-180? और भड़क सकती है यूक्रेन जंग; टॉमहॉक मिसाइलों पर भी बड़ा अपडेट”

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भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को रोकने का अनगिनत बार दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में विफल रहे हैं। वह इसके लिए दोनों ही पक्षों से कई दौर की बैठकें और फोन पर वार्ता कर चुके हैं।

बावजूद इसके राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ कुछ ठोस हाथ नहीं लग सका है। ऐसे में ट्रंप ने रूस पर अब अपनी पॉलिसी बदल ली है। 180 डिग्री पर घूम चुकी ट्रंप की नई पॉलिसी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि कीव रूस में अंदर तक घुसकर हमला कर सके।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप सरकार की नई पॉलिसी के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ट्रंप सरकार यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइल देने के मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप इस पर जल्द ही अंतिम निर्णय लेंगे।

बयान क्यों अहम?

यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यूक्रेन में ट्रंप के दूत कीथ केलॉग ने भी उसी दिन कहा था कि उनका मानना ​​है कि यूक्रेन के पास रूस में अंदर घुसकर हमला करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन गहरी मार करने की क्षमता का इस्तेमाल करे। युद्ध में पनाहगाह जैसी कोई चीज़ नहीं होती।” हालांकि बाद में केलॉग ने अपनी टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी सिर्फ़ जेडी वेंस और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सार्वजनिक बयानों का संदर्भ था, न कि वाइट हाउस की सोच पर किसी नई जानकारी के संदर्भ में थी।

क्या है पॉलिसी-180?

बहरहाल, रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की टीम टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह ट्रंप के डेढ़ महीने पहले उठाए गए कदम के ठीक उलट है। बता दें कि 43 दिन पहले 16 अगस्त को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अलास्का में स्वागत करने के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था। उस दिन ट्रंप और पुतिन के बीच करीब पांच घंटे की मुलाकात हुई थी। हालांकि, यह मीटिंग बिना किसी नतीजे पर पहुंचे अचानक खत्म हो गई थी।

अब अमेरिका क्रेमलिन के सबसे बड़े दुश्मन यानी यूक्रेन को रूस के अंदर घुसकर मार करने वाली टॉमहॉक मिसाइल देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके बारे में सिर्फ़ सात महीने पहले ट्रंप ने कहा था कि उसके पास ऐसा कोई हथियार नहीं है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट पर यह भी कहा है कि यूक्रेन सभी कब्ज़े वाले क्षेत्रों को वापस ले सकता है। बता दें कि यूक्रेन-रूस जंग पर ट्रंप की यह भी एक नई पॉलिसी-180 है, जो उनके नीतिगत बदलाव को दर्शाता है। इनके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

क्या है टॉमहॉक मिसाइल?

टॉमहॉक अमेरिकी नौसेना का एक सबोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 2500 किलोमीटर तक है। यानी कीव से लॉन्च होने के बाद यह मॉस्को समेत रूस के कई शहरों में टारगेट पर हमला कर सकता है। यह अपने साथ 450 किलो वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। यह जहाजों, पनडुब्बियों और जमीनी लॉन्चरों से दागी जा सकती है और 1,000 मील दूर लक्ष्य को सटीक निशाना बना सकती है। यह कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मनों के राडार से बचने में भी सक्षम है।

टॉमहॉक का ब्लॉक IV (TACTOM) संस्करण सबसे एडवांस है, जिसमें दो-तरफा डेटा लिंक है, जो उड़ान के दौरान लक्ष्य बदलने की अनुमति देता है। 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान पहली बार टॉमहॉक मिसाइल प्रसिद्ध हुआ था। अमेरिका ने अपने सबसे करीबी सहयोगियों ब्रिटेन और जापान के लिए इसे सुरक्षित रखा है।

“मैं तो कार्टून बनकर खड़ा रहा.एशिया कप में भरे मंच पर जलील होने पर मोहसिन नकवी ने निकाली भड़ास”

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एशियन क्रिकेट काउंसिल यानी एसीसी के चीफ मोहसिन नकवी और बीसीसीआई के अधिकारियों के बीच मंगलवार 30 सितंबर जमकर तनातनी एशिया कप की ट्रॉफी को लेकर हुई। भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन और पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने का फैसला किया था, जो एसीसी के इस समय चेयरमैन हैं।

इस पर अब रिपोर्ट सामने आई है कि मोहसिन नकवी इस से नाराज हैं कि उन्हें मंच पर एक कार्टून की तरह खड़ा रहना पड़ा और भारतीय टीम ट्रॉफी लेने नहीं आई।

मोहसिन नकवी ट्रॉफी और विनिंग मेडल्स के साथ मंच पर थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी और कप्तान ट्रॉफी लेने नहीं पहुंचे। ऐसे में नकवी मंच से उतरे और स्टेडियम से बाहर चले गए। ट्रॉफी और मेडल भी उन्हीं के साथ उनके होटल में ले जाए गए। अब पीटीआई की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि मोहसिन नकवी मेडल और ट्रॉफी भारतीय खिलाड़ियों को देने के लिए तैयार थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी नहीं आए। मंच पर वे काफी देर खड़े रहे और उन्हें ऐसा लगा कि मंच पर कार्टून की तरह वे खड़े हैं। सूत्र ने नकवी के हवाले से बताया कि वे खुद को “कार्टून जैसा” महसूस कर रहे थे और मंच पर विजयी भारतीय टीम का इंतजार करते हुए शर्मिंदा थे।

बीसीसीआई की ओर से एसीसी की मीटिंग में आशीष शेलार और राजीव शुक्ला ने हिस्सा लिया। दोनों ने मोहसिन नकवी पर दबाव बनाया। शुक्ला और शेलार ने तर्क दिया कि एसीसी को ट्रॉफी अपने कार्यालय में रखनी चाहिए और बीसीसीआई उसे वहां ले जाएगा। उन्होंने कहा, “हम ट्रॉफी वैध विजेता के रूप में चाहते हैं।’ नकवी ने इस पर ना कहने के बजाय, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। एसीसी की मीटिंग में ऑनलाइन तरीके से शामिल हुए बीसीसीआई के नुमाइंदों ने यह स्पष्ट कर दिया गया कि बीसीसीआई आईसीसी से शिकायत करेगा और शेलार कुछ देर के लिए बैठक से चले गए।

“क्या है चीन का K वीजा प्रोग्राम, जिसने मचाई हलचल; अमेरिका के लिए भी होगी टेंशन”

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चीन की ओर से नए वीजा प्रोगाम की शुरुआत की गई है। इसे K वीजा नाम दिया गया है, जिसकी तुलना अमेरिकी के एच-1बी वीजा से की जा रही है। चीन का मानना है कि इससे दुनिया भर की प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी ताकि साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया में वह तरक्की कर सके।

अमेरिका की ओर से एच-1बी वीजा फीस बढ़ने के बाद दुनिया भर के टैलेंट के लिए इसे उम्मीद की किरण के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा फीस बढ़ाने का फैसला करने से पहले ही चीन ने इस प्रोग्राम को लॉन्च कर दिया था।

अब अमेरिका का एच-1बी वीजा लेने के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर की रकम चुकानी होगी। भारतीय करेंसी के तौर पर देखें तो यह रकम 80 लाख के करीब होती है। ट्रंप के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही माना जा रहा है। अमेरिका के इस वीजा प्रोग्राम के तहत जाने वालों में 70 फीसदी भारतीय ही होते थे। चीनी K वीजा की आज से शुरुआत हो रही है। इसका ऐलान चीन ने 7 अगस्त को ही कर दिया था।

क्या है चीन के K वीजा का मकसद?

चीन की सरकार का उद्देश्य यह है कि दूसरे देशों से भी तकनीक और साइंस के क्षेत्र में महारत रखने वाली प्रतिभाओं को आकर्षित किया जाए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि इस वीजा प्रोग्राम का उद्देश्य है कि साइंस, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के मामले में नॉलेज एक्सचेंज को बढ़ावा मिले। हम चाहते हैं कि दूसरे देशों से आने वाली श्रेष्ठ प्रतिभाओं को भी मौका मिल सके। विदेशियों के लिए चीन को अधिक आकर्षित स्थान के तौर पर पेश करने के लिए यह कदम उठाया गया है। एक चीनी एक्सपर्ट ने कहा कि हम 1980 से लेकर 2010 तक बड़े पैमाने पर अपने टैलेंट को खो चुके हैं। अमेरिका जैसे देशों में चीनी प्रतिभाएं जाकर बस गई हैं।

उन्होंने कहा कि अब हमने कदम उठाया है कि लोकल टैलेंट को बनाए रखा जाए। इसके अलावा वैश्विक प्रतिभाओं को भी आकर्षित किया जाए। चीनी अधिकारियों ने कहा कि K वीजा प्रोग्राम दुनिया भर के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के ग्रैजुएट्स के लिए खुला रहेगा। इसके तहत लोगों को आवेदन करने में आसानी होगी। माना जा रहा है कि चीन की ओर से कोशिश है कि अमेरिका को तकनीक के मामले में टक्कर दी जाए और चीन को वैश्विक केंद्र के तौर पर पेश किया जाए। इसी रणनीति के तहत उसने ऐसा फैसला लिया है।

CG: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश के विकास कार्यों को गति दे रहे हैं, ग्रामीण अंचलों में बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक और बड़ी सौगात…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश के विकास कार्यों को गति दे रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में उन्होंने एक और बड़ी सौगात दी है। जशपुर जिले में आधा दर्जन से अधिक सड़कों के निर्माण और सुधार के लिए कुल 13 करोड़ 63 लाख रुपए की लागत को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सड़कों के निर्माण से हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा और आवागमन की सुविधा सुगम होगी।

इन सड़कों के लिए 13 करोड़ 63 लाख रुपए की मिली मंजूरी

स्वीकृत सड़क में फरसाटोली से करवाजोर मार्ग 4 किलोमीटर लंबाई की इस सड़क के लिए 4 करोड़ 30 लाख रुपए स्वीकृत किए गएहैं। इसी प्रकार कांसाबेल के जुमाइकेला बाजारडांड से खेदाटोली मार्ग 2.40 किलोमीटर के लिए लागत 2 करोड़ 53 लाख रुपए, जड़ासर्वा से डूमर टोली मार्ग 2 किलोमीटर के निर्माण के लिए लागत 2 करोड़ 46 लाख रुपए की मंजूरी किया गया है।

बूढ़ाडांड से नवापारा होते हुए सामरबहार मार्ग 2.50 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए लागत 1 करोड़ 97 लाख रुपए, मुड़ेकेला एनएच से मुड़ेकेला गोर्रापारा होते हुए सुरेशपुर मार्ग 1.50 किलोमीटर सड़क के लिए लागत 1 करोड़ 62 लाख रुपए, लोकेर की पक्की सड़क से राईडांड मार्ग इस सड़क के लिए 75 लाख रुपए की मंजूरी मिली है।

लोगों को मिलेगा लाभ

इन सड़कों के निर्माण से न केवल ग्रामीण इलाकों में आवागमन की सुविधा बेहतर होगी बल्कि कृषि उत्पादों की ढुलाई, बच्चों के स्कूल-कॉलेज तक पहुंच और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में भी आसानी होगी। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन सड़कों के निर्माण से लंबे समय से चली आ रही कठिनाइयाँ दूर होंगी और विकास की नई राह खुलेगी।

 

 

CG: बाल विवाह उन्मूलन केवल सरकारी अभियान नहीं, सामाजिक परिवर्तन का संकल्प – मुख्यमंत्री साय…

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 27 अगस्त 2024 को शुरू किए गए “बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। राज्य का बालोद जिला पूरे देश का पहला जिला बन गया है, जिसे आधिकारिक रूप से बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा सकता है। बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतों और 09 नगरीय निकायों को विधिवत प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है।

बालोद बना राष्ट्रीय उदाहरण

विगत दो वर्षों में बालोद जिले से बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया। दस्तावेजों के सत्यापन और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिले के सभी पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त का दर्जा मिल गया है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ बालोद जिला पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है।

बालोद जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने सभी पंचायतों और नगरीय निकायों को इस प्रयास में सक्रिय सहयोग देने के लिए धन्यवाद भी दिया।

सूरजपुर की 75 ग्राम पंचायतें भी बाल विवाह मुक्त

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया गया। विगत दो वर्षों में इन पंचायतों से भी बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। इसे राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

बाल विवाह उन्मूलन केवल सरकारी अभियान नहीं, सामाजिक परिवर्तन का संकल्प – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमारा लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकल्प है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिन जिलों में पिछले दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहां शीघ्र ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।

समाज और सरकार की साझेदारी से संभव हुआ बाल विवाह उन्मूलन: महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि बालोद की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। सूरजपुर की उपलब्धि भी इस दिशा में एक मजबूत कदम है। इस अभियान में यूनिसेफ का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। संगठन ने तकनीकी सहयोग, जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने में मदद की।

छत्तीसगढ़ की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर एक मील का पत्थर माना जा रहा है। “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” को गति देने में यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा को केंद्र में रखकर काम किया जाए तो देश से बाल विवाह जैसी कुप्रथा का पूर्ण उन्मूलन संभव है।

राज्य सरकार अब चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों को भी बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी कर रही है। 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य न केवल राज्य, बल्कि देश को बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प के और निकट ले जाएगा।

CG: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोरबा में राम कथा महोत्सव में हुए शामिल…

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”मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन माटी माता कौशल्या का मायका है तथा हमारे आराध्य भगवान राम का ननिहाल भी।”

”यहां प्रभु श्री राम ने माता सीता एवं भाई लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के दौरान अधिकांश समय व्यतीत किया।”

”मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोरबा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान कोरबा नगरीय क्षेत्र स्थित भवानी मंदिर परिसर में आयोजित राम कथा महोत्सव में शामिल हुए।”

”राम कथा वाचन हेतु पधारे श्री श्री 1008 जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।”

”मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन माटी माता कौशल्या का मायका है तथा हमारे आराध्य भगवान राम का ननिहाल भी।”

”मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में मोदी की गारंटी को पूरा करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।”

 

”छत्तीसगढ़ के इन जिलों में होगी भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट”

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छत्तीसगढ़ मौसम विभाग ने आज यानी बुधवार को होने वाली बारिश के लिए अलर्ट जारी किया है।

छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल चुका है। मंगलवार की रात राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के आस-पास के इलाकों में जमकर बारिश हुई। अचानक हुई बारिश के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिल गयी है। इसके साथ ही प्रदेश में अब धीरे-धीरे ठंड ने भी दस्तक देना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने आज यानी बुधवार को होने वाली बारिश के लिए अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, राजनांदगांव, बिलासपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, दुर्ग, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़, बिलाईगढ़, बस्तर, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, रायगढ़, कोंडागांव और कांकेर में बारिश होने की संभावना जताई है। इतना ही नहीं मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने की भी संभावना जताई है।

मौसम विभाग ने बताया कि, प्रदेश के कई ऐसे इलाके हैं जिनमे बारिश के साथ-साथ तेज आंधी-तूफ़ान भी चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगो से बेवजह घर से निकलने से बचने की सलाह दी है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने बारिश के दौरान खुले में ना रहने की सलाह भी लोगों को दी है।

नहीं बढ़ेगी आपकी EMI, आरबीआई से मिली राहत भरी खबर, रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट¥ में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे 5.5 फीसदी पर बरकरार रखा है. तीन दिन तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने आज मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी दी. पिछली एमपीसी बैठक में भी ब्‍याज दरों को यथावत रखा गया था. एमपीसी ने मौद्रिक नीति की के स्‍टॉस को भी ‘तटस्थ’ बनाए रखने का फैसला किया. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जीएसटी तर्कसंगतीकरण का महंगाई पर संयमित असर रहेगा और यह खपत और विकास को बढ़ावा देगा.

गर्वनर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि कुल मिलाकर महंगाई का परिदृश्य अधिक अनुकूल हो गया है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है. इस वजह से ही केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष के लिए औसत हेडलाइन महंगाई दर अनुमान को 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया गया है. उन्‍होंने कहा कि पहले से लागू की गई नीतिगत कार्रवाईयों के प्रभाव दिखाई देने लगे हैं. वैश्विक अनिश्चितताएं और टैरिफ-संबंधी बाधाएं इस वर्ष वृद्धि को धीमा कर सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि मौद्रिक नीति कमेटी ने अगले कदम तय करने से पहले नीतिगत उपायों के प्रभाव का इंतजार करने का निर्णय लिया है.