Home Blog Page 406

“मॉनसून आज फिर दिखाएगा दम; जमकर बरसने वाले हैं बदरा, इन राज्यों में अलर्ट जारी”

0

देश के विभिन्न हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तूफानी हवाओं की संभावना है। उत्तर अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है, जो 22 सितंबर तक उत्तर बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा, 25 सितंबर के आसपास म्यांमार-बांग्लादेश तट के पास बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 25 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश होगी। इस दौरान गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है, जिसमें कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी भारत में अगले 4-5 दिनों तक 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और अन्य राज्यों में 23 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भारी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में तेज हवाएं चलने का अनुमान है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 25 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश के संकेत हैं। वहीं, राजधानी दिल्ली का मौसम मॉनसून के अंतिम चरण में है। आज गर्मी और हल्की वर्षा का मिश्रण देखने को मिलेगा। अधिकतम तापमान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा, जिससे दिन भर उमस भरी गर्मी महसूस होगी। आकाश आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे।

अरुणाचल प्रदेश में आज भारी बारिश आईएमडी ने पूरे अरुणाचल प्रदेश में 23 सितंबर तक व्यापक वर्षा का अनुमान जताया है। इसके तहत कई जिलों में गरज के साथ मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। इस अवधि के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में छिटपुट वर्षा और गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। आईएमडी ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है, जिसमें कई स्थानों पर गरज के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई। इस परामर्श में शामिल जिलों में वेस्ट कामेंग, पापुम पारे, लोअर सुबनसिरी, कामले, वेस्ट सियांग, लेपा राडा, ईस्ट सियांग, दिबांग वैली, चांगलांग, तिरप और लोंगडिंग शामिल हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के निवासियों से आग्रह किया कि वे भारी वर्षा के दौरान स्थानीय स्तर पर बाढ़ और भूस्खलन के प्रति सतर्क रहें। शनिवार को पापुम पारे, लोअर सुबनसिरी, तथा पूर्वी और पश्चिमी कामेंग सहित मध्य और तराई क्षेत्रों के जिलों में बारिश होने का अनुमान है। सियांग बेल्ट और पूर्वी जिलों के कुछ हिस्सों में तेज वर्षा हो सकती है। रविवार को राज्य के बड़े हिस्से में व्यापक स्तर पर बारिश होने का अनुमान है।

तेज बारिश होने से बेंगलुरु में भरा पानी बेंगलुरु में रातभर हुई भारी बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया और प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित रहा। आईएमडी ने बेंगलुरु के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। यहां हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने और कुछ स्थानों पर 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने का अनुमान है। विजयपुरा, बीदर, कलबुर्गी, तुमकुरु, कोलार और चिक्कबल्लापुरा भी अलर्ट के दायरे में हैं। पूरे कर्नाटक में भारी बारिश दर्ज की गई। आईएमडी ने चेतावनी दी कि भारी बारिश के कारण अस्थायी रूप से बिजली गुल हो सकती है, जलभराव हो सकता है और कमजोर पेड़ों की शाखाएं उखड़ सकती हैं। सुरक्षित स्थान में आश्रय लें, पेड़ों के नीचे न खड़े हों। बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तुरंत बंद कर दें। जल निकायों से बाहर निकलें और बिजली वाली वस्तुओं से दूर रहें। अगर आप यात्रा कर रहे हैं तो सावधानी से वाहन चलाएं।

आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में अगले 24 घंटों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 23 सितंबर को भारी बारिश का अनुमान जारी किया गया है। विभाग के अनुसार तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा में अगले सात दिनों में हल्की से लेकर मध्यम बारिश हो सकती है। इन्हीं क्षेत्रों में बिजली कड़कने से साथ अगले पांच दिनों में 30-40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। दक्षिणी पश्चिमी मॉनसून तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में सामान्य है, लेकिन रायलसीमा में सक्रिय है। पिछले 24 घंटों में रायलसीमा के चित्तूर जिले में भारी बारिश हुई है। तटीय आंध्र प्रदेश और यानम और रायलसीमा के कुछ जगहों पर भी सामान्य बारिश हुई है।

“भारत की मार से पाकिस्तान को बचा पाएगा सऊदी अरब? कितनी ताकतवर है इस मुस्लिम देश की सेना”

0

मध्य पूर्व की तनावपूर्ण राजनीति और दक्षिण एशिया के संघर्षों के बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक ऐसा रक्षा समझौता किया है, जो न केवल दोनों देशों की पुरानी दोस्ती को मजबूत करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।

17 सितंबर को रियाद के अल-यमामा पैलेस में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा साइन किए गए “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट” (एसएमडीए) के तहत किसी भी देश पर हमले को दोनों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता इजरायल के कतर पर हालिया हमले के बाद आया है, लेकिन इसका असर भारत-पाकिस्तान तनाव पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सऊदी अरब की सेना कितनी ताकतवर है और क्या यह भविष्य में भारत की मार से पाकिस्तान को बचा पाएगी? आइए विस्तार से समझते हैं।

सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्ते दशकों पुराने हैं। 1960 के दशक में जब यमन में मिस्र का युद्ध छिड़ा, तो पाकिस्तानी सैनिक सऊदी की रक्षा के लिए तैनात हुए। 1979 में मक्का के ग्रैंड मस्जिद पर कब्जे के दौरान पाकिस्तानी स्पेशल फोर्सेस ने सऊदी सेना की मदद की। 1982 के द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने 8,000 से अधिक सऊदी सैनिकों को ट्रेनिंग दी।

आर्थिक रूप से, सऊदी पाकिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है। 1998 में पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण के बाद सऊदी ने 3.4 अरब डॉलर की तत्काल मदद की, जो उसके दूसरे परीक्षण को संभव बनाने वाली साबित हुई।

आज सऊदी 2025-26 में पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर से अधिक का ऋण देने वाला है। लेकिन रक्षा समझौता इस रिश्ते को नया आयाम देता है। समझौते के मुताबिक, “किसी भी आक्रामकता को दोनों देशों पर आक्रामकता माना जाएगा।” पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम सऊदी के लिए उपलब्ध होगा।

यह समझौता इजरायल के 9 सितंबर को दोहा पर हमले के बाद तेजी से फाइनल हुआ, जहां हमास नेताओं को निशाना बनाया गया। सऊदी को अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर भरोसा कम हो रहा है, इसलिए वह पाकिस्तान जैसे परमाणु शक्ति संपन्न सहयोगी की ओर रुख कर रहा है। लेकिन दक्षिण एशिया के संदर्भ में, यह भारत के लिए चिंता का विषय है।

भारत-पाकिस्तान तनाव: मई का संघर्ष और नया खतरा 2025 की शुरुआत से ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंचा। अप्रैल में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत ने मिसाइल हमले किए, जिसमें पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। चार दिनों तक चले इस संघर्ष ने दोनों परमाणु शक्तियों को पूर्ण युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया। भारत ने जहां मन किया वहां पाकिस्तान को निशाना बनाया और उसके कई एयरबेस तबाह कर दिए।

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के अनुसार, भारत दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर सेना है, जबकि पाकिस्तान 12वें स्थान पर है। वहीं सऊदी अरब इस मामले में 24वें नंबर पर है। भारत का रक्षा बजट 81 अरब डॉलर है, जो पाकिस्तान के 10 अरब डॉलर से आठ गुना अधिक। भारत की वायुसेना में राफेल और सुखोई जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं, जबकि पाकिस्तान का फोकस चाइनीज जे-10 और एफ-16 पर है। नौसेना में भारत के दो एयरक्राफ्ट कैरियर पाकिस्तान को समुद्री चुनौती देते हैं। मई के संघर्ष में भारत ने सटीक मिसाइल हमलों से पाकिस्तानी ठिकानों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन पाकिस्तान ने ड्रोन और आर्टिलरी से जवाब दिया जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। ऐसे में सऊदी का हस्तक्षेप पाकिस्तान के लिए “बचाव” साबित हो सकता है?

सऊदी सेना: ताकत, कमजोरियां और क्षेत्रीय महत्व सऊदी अरब की सेना दुनिया की 24वीं सबसे ताकतवर है। इसका रक्षा बजट 80 अरब डॉलर है, जो जीडीपी का 7% है। सक्रिय सैनिक 2.25 लाख, कुल सैन्य बल 3.5 लाख। सऊदी की ताकत अमेरिकी हथियारों में है। उसके पास 1,500 एम-1A2 अब्राम्स टैंक, 7,000 से अधिक बख्तरबंद वाहन, और 1,000 आर्टिलरी हैं।

वायुसेना में 300 से अधिक एफ-15, यूरोफाइटर टाइफून और टॉरनेडो लड़ाकू विमान हैं। नौसेना में गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स और कोरवेट्स का मजबूत बेड़ा है। लेकिन कमजोरियां भी हैं: 2015-2022 के यमन युद्ध में हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमलों से सऊदी को भारी नुकसान हुआ, जो उसकी कमजोर हवाई रक्षा को उजागर करता है।

सऊदी सेना विदेशी (पाकिस्तानी, अमेरिकी) सलाहकारों पर निर्भर है, और आंतरिक प्रशिक्षण की कमी है। ताजा रक्षा समझौते के तहत सऊदी पाकिस्तान को वित्तीय मदद दे सकता है, जबकि पाकिस्तान परमाणु ढाल प्रदान कर सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह “सिग्नलिंग” ज्यादा है – वास्तविक युद्ध में सऊदी की भागीदारी सीमित रहेगी।

भारत के लिए खतरा या संतुलन? भारत ने समझौते पर सतर्क प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने कहा, “हम इसका अध्ययन करेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव देखेंगे।” सऊदी के साथ भारत के रिश्ते मजबूत हैं: 2025 में मोदी की तीसरी यात्रा हुई, और द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर से अधिक है। सऊदी भारत को 20% से अधिक कच्चा तेल निर्यात करता है। अप्रैल 2025 में दोनों ने रक्षा सहयोग समिति बनाई, जिसमें संयुक्त अभ्यास शामिल हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी भारत के साथ “संतुलन” बनाए रखेगा। स्टिमसन सेंटर के फैसल मीर ने कहा, “सऊदी पाकिस्तान की जंग नहीं लड़ेगा, लेकिन ईरान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से निपटने में मदद करेगा।” अगर भारत-पाकिस्तान फिर भिड़ते हैं, तो सऊदी आर्थिक दबाव डाल सकता है, लेकिन प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप असंभव है।

“भारत की रेंज में आया पूरा PoK, आतंकी बदलने लगे ठिकाना; पाक सरकार भी कर रही मदद”

0

भारत की सेना द्वारा मई 2024 में चलाए गए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी संगठनों की गतिविधियों का नक्शा तेजी से बदल रहा है। खुफिया इनपुट्स के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिद्दीन (HM) जैसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन अब अपने ठिकानों को खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।

इसे केवल भारतीय हमलों के बाद की मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।

क्यों बदल रहे हैं ठिकाने? विशेषज्ञों के अनुसार, PoK अब भारतीय सटीक हमलों की चपेट में अधिक असुरक्षित माना जा रहा है। दूसरी ओर खैबर पख्तूनख्वा भौगोलिक गहराई, अफगान सीमा की निकटता और अफगान युद्ध से चले आ रहे पुराने जिहादी ठिकानों के कारण आतंकियों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प लगता है। यही कारण है कि आतंकी संगठनों ने अपनी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा वहां शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।

खुफिया सूत्र बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी भी मददगार बनी हुई है। JeM जैसे संगठनों को खुलेआम सभाएं करने दी जा रही हैं और पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यहां तक कि राजनीतिक-धार्मिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) भी इन गतिविधियों में पर्दे के पीछे शामिल है।

ऑपरेशन सिंदूर की मार 7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में भारतीय वायुसेना और थलसेना ने पाकिस्तान और PoK में कुल 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसमें बहावलपुर का ‘मरकज सुब्हानअल्लाह’ (जैश का हेडक्वार्टर और रिक्रूटमेंट सेंटर) तथा मुरिदके का ‘मरकज तैयबा’ (लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय) भी शामिल था। इन ठिकानों पर हुए हमलों में कम से कम 100 आतंकी मारे गए थे।

मरकज तैयबा वही कैंप है जहां से मुंबई हमलों के आरोपी अजमल कसाब और डेविड हेडली ने प्रशिक्षण लिया था। इसके अलावा सियालकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भिंबर और अन्य इलाकों में भी भारतीय सेना ने आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए। 7 से 10 मई के बीच भारतीय बलों ने पाकिस्तान के 13 सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर भी हमले किए।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के मानसेहरा जिले के गढ़ी हबीबुल्लाह में बड़ा सार्वजनिक भर्ती अभियान चलाया। खास बात यह है कि यह कार्यक्रम भारत-पाकिस्तान एशिया कप क्रिकेट मैच शुरू होने से कुछ घंटे पहले आयोजित किया गया।

इस रैली को धार्मिक जलसे का रूप दिया गया, लेकिन वास्तव में यह नए लड़ाकों की भर्ती का अभियान था। इसमें जैश और JUI के कार्यकर्ताओं ने मिलकर भीड़ जुटाई। मंच पर जैश का केपीके प्रमुख मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ अबु मोहम्मद मौजूद था, जो भारत के लिए वांछित आतंकियों की सूची में है और संगठन के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी माना जाता है।

खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसेहरा स्थित जैश के ट्रेनिंग सेंटर ‘मरकज शुहदा-ए-इस्लाम’ के लिए नए आतंकियों की भर्ती करना था। यह कैंप हाल ही में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद और अधिक विस्तार दिया जा रहा है।

“कनाडा के NSA और मंत्री ने दी थी भारत से विवाद को हवा, अब दिल्ली आकर रिश्ते सुधारने में जुटे”

0

लगभग 11 महीने पहले कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) नथाली ड्रौइन और डिप्टी विदेश मंत्री डेविड मॉरिसन ने आरोप लगाया था कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों को निशाना बनाने के पीछे भारत के गृहमंत्री अमित शाह का हाथ है।

अब यही दोनों अधिकारी भारत आए और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल तथा विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की। इतना ही नहीं, कनाडाई अधिकारियों ने इस मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संवाद तंत्र को फिर से सक्रिय करने के कदमों पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए कहा, “कनाडा की NSA ने हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ वार्ता की। यह बैठक 18 तारीख को हुई। यह दोनों देशों के बीच नियमित सुरक्षा परामर्श का हिस्सा है। साथ ही यह जी7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच मुलाकात के बाद हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी था।”

विवाद का केंद्र क्या है? 29 अक्टूबर 2024 को ड्रौइन और मॉरिसन ने स्वीकार किया था कि उन्होंने अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट को एक जानकारी लीक की थी। इन्होंने अखबार से कहा था कि खालिस्तानियों को निशाना बनाए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के पीछे अमित शाह का हाथ है। मॉरिसन ने कनाडाई संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति को बताया था कि उन्होंने अखबार को अमित शाह का नाम “कन्फर्म” किया था। ये दोनों ही उस समय तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो की सरकार का हिस्सा थे। भारत ने 2 नवंबर 2024 को कड़ा विरोध जताते हुए इन आरोपों को “निराधार और बेतुका” करार दिया था।

भारत-कनाडा संबंधों में तनाव की असली शुरुआत सितंबर 2024 में हुई थी, जब तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने यह आरोप लगाया था कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकार की “संभावित भूमिका” हो सकती है। भारत ने इसे “बेतुका और प्रेरित” बताया था।

जी7 और हालिया वार्ता भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि जी7 सम्मेलन के दौरान मॉरिसन ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की थी, जिसके बाद पीएम मोदी और पीएम मार्क कार्नी की बैठक हुई। चर्चाओं में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-कनाडा संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के सम्मान और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

दोनों देशों ने जून 2025 से अब तक हुई प्रगति का स्वागत किया, जिसमें एक-दूसरे की राजधानियों में हाई कमिश्नरों की वापसी शामिल है। समझौते के तहत दोनों देशों ने संतुलित और रचनात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने, और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, सुरक्षा व कानून प्रवर्तन, क्रिटिकल मिनरल्स, अंतरिक्ष, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में संवाद तंत्र को फिर से सक्रिय करने पर सहमति जताई।

भारतीय मिशनों की सुरक्षा पर चिंता MEA प्रवक्ता ने कनाडा में भारतीय मिशनों को निशाना बनाने वाली खालिस्तानी गतिविधियों पर कहा, “यह जिम्मेदारी मेजबान सरकार की है कि जहां भी हमारे राजनयिक प्रतिष्ठान हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। जब भी कोई चिंता होती है, हम कनाडा सरकार के साथ इस विषय को उठाते हैं ताकि हमारे राजनयिक परिसरों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।” भारत और कनाडा के बीच हालिया संवाद ने संकेत दिया है कि दोनों देश पिछले विवादों को पीछे छोड़कर सहयोग और विश्वास बहाली की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहे हैं।

“भारत से युद्ध हुआ तो पाक की तरफ से उतर पड़ेगा सऊदी अरब? शहबाज के मंत्री ने दिया जवाब”

0

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। दोनों देशों ने एक समझौते पर साइन किए हैं जिसमें कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला दूसरे पर भी माना जाएगा।

जानकारों का कहना है कि भारत के लिहाज से यह समझौता बेहद अहम है। NATO के आर्टिकल 5 में भी इसी तरह का समझौता किया जाता है जो कि किसी एक देश पर हमले को पूरे समूह पर हमला मानता है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब से यह समझौता करके भारत के खिलाफ बड़ा दांव चला है। हालांकि पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसपर गोलमोल जवाब दिया है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने क्या दिया जवाब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह आपसी सहयोग का समझौता है। उनसे जब पूछा गया कि अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है तो क्या सऊदी अरब पाकिस्तान की तरफ से शामिल होगा? इसपर खावाजा आसिफ ने कहा, इसमें कोई शक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक देश का नाम नहीं लिया गया है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि आक्रमण किसी पर भी हो और किसी भी तरफ से हो, जवाब मिलकर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह किसी तरह का आक्रामक समझौता नहीं बल्कि रक्षा के लिए किया गया समझौता है। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई में तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत ने पहले पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। जब बौखलाया पाकिस्तान भारत पर हमले करने लगा तो कम से कम 11 एयरबेस को भारत ने भी निशाना बनाया। इसके बाद सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का यह समझौता भारत के लिए बेहद अहम है।

ख्वाजा आसिफ ने कहा, इस समझौते का इस्तेमाल किसी के खिलाफ आक्रामक रूप से नहीं किया जाएगा। लेकिन अगर किसी भी देश के लिए चुनौती खड़ी होती है तो मिलकर इसका सामना किया जाएगा। ख्वाजा आसिफ ने यहां तक कहा की पाकिस्तान के परमाणु हथियार भी सऊदी अरब के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होंगे।

सऊदी अरब के एक अधिकारी से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उसने कहा कि यह एक तरह का मिलाजुला समझौता है जिसका मतलब केवल युद्ध नहीं बल्कि अन्य तरह के सहयोग भी हैं। बता दें कि इसी सप्ताह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब गए थे। इसी दौरान इस रक्षा समझौते पर साइन किए गए।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि रक्षा समझौते में दूसरे देश भी शामिल हो सकते हैं। जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ मिलकर परमाणु हथियार के क्षेत्र में काम करना चाहता है। ऐसे में यह समझौता सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनों के लिए अहम है। पाकिस्तान के पास पैसे की कमी है तो वहीं सऊदी अरब परमाणु हथियार संपन्न नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि अरब के अन्य देश भी आगे इस समझौते का हिस्सा बन जाएं।

”राज्य सरकार ने नये मंत्रियों को सौंपा जिलों का प्रभार”

0

”राज्य सरकार ने नये मंत्रियों को सौंपा जिलों का प्रभार”

”राज्य सरकार ने नये मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा है। गजेन्द्र यादव को राजनांदगांव, गुरू खुशवंत साहेब को सक्ती. राजेश अग्रवाल को गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले का प्रभारी बनाया गया है।”

”छत्तीसगढ़ के नए तीन मंत्रियों को मिला इन जिलों का प्रभार, डिप्टी CM को भी बनाया 3 जिलों का प्रभार मंत्री, छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में तीन नए मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा है, उन्हें पिछले महीने अगस्त में ही कैबिनेट में शामिल किया गया था.”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को तीन नए मंत्रियों को जिले का प्रभारी बनाया है. स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को राजनांदगांव जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है. वहीं, गुरु खुशवंत साहेब को शक्ति जिले और राजेश अग्रवाल को गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले का प्रभारी मंत्री बनाया है.ये तीनों मंत्री हाल ही में सीएम साय की कैबिनेट में शामिल हुए थे, जिन्होंने 20 अगस्त को मंत्री पद की शपथ ली थी और विभागों का बंटवारा हुआ था. अब शुक्रवार को इन्हें जिलों का प्रभार भी सौंप दिया है.

मंत्रियों को मिला इन जिलों का जिम्मा

इसके अलावा डिप्टी सीएम विजय शर्मा को दुर्ग, बालोद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और बस्तार का प्रभार मिला है. स्वासथ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को बलौदा बाजार और भाटापारा का प्रभार सौंपा है, जबकि लक्ष्मी राजवाड़े के पास बलरामपुर रामानुजगंज का प्रभार रहेगा.

”CG: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर एक बार फिर निशाना साधा”

0

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर एक बार फिर निशाना साधा है. बीजेपी छत्तीसगढ़ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक कार्टून पोस्ट किया, जिसमें भूपेश बघेल और दीपक बैज पर गुस्सा होते हुए सचिन पायलट दिख रहे हैं. पोस्ट में बीजेपी ने कांग्रेस की रैली में भीड़ नहीं जुटने पर तंज कसा है.

रैली में रुपये बांटने का BJP ने लगाया आरोप

बीजेपी छत्तीसगढ़ ने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक कार्टून के साथ पोस्ट भी लिखा है, “छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मची रार, कांग्रेस की रैली में रुपए बांटने के बाद भी नहीं जुट रही भीड़.” इस कार्टून पोस्टर में भूपेश बघेल और दीपक बैज पर सचिन पायलट गुस्सा होते हुए दिख रहे हैं. छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मची रार, कांग्रेस की रैली में रुपए बांटने के बाद भी नहीं जुट रही भीड़।

छत्तीसगढ़ बीजेपी ने जारी किया कार्टून पोस्टर 

कार्टून में भूपेश बघेल और दीपक बैज के बीच सचिन पायलट दिख रहे हैं, जिसमें वो काफी गुस्से में दिख रहे हैं, जबकि भूपेश बघेल और दीपक बैज के पसीने छूट रहे हैं. पायलट गुस्से में कहते हैं, “इतना पैसा दबाकर बैठे हो, भीड़ कैसे नहीं आई?” वहीं पृष्ठभूमि में लिखा है कि कांग्रेस के रैली में नहीं आई भीड़.

बीजेपी का कांग्रेस पर आरोप– ‘पायलट की रैली में पैसे देकर भीड़ बुलाई

बता दें कि इससे पहले 18 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी ने अपने सोशल मीडिया में एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें रुपये देकर रैली में भीड़ बुलाने का आरोप कांग्रेस पर लगाया था. इस पोस्ट में बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस को अपनी रैली के लिए लोग नहीं मिल रहे तो वे रुपये देकर रैली में भीड़ बुला रही है. यह वीडियो कांग्रेस के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली के दौरान का बताया गया है.

छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में बड़ा झटका! शिक्षा विभाग में पदस्थ दो अफसरों की सेवा समाप्त../

0

राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ दो अफसरों की सेवा समाप्त कर दी हैं। ये अफसर साक्षरता मिशन प्राधिकरण में सहायक संचालक की जिम्मेदारी निभा रहे थे। दोनों अफसर संविदा पर कार्यरत थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने प्रशांत कुमार पाण्डेय और दिनेश कुमार टॉक की सेवाएं समाप्त कर दी है। मिशन संचालक ने आदेश के मुताबिक परिपत्र के प्रावधानों और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 के तहत की गई है। मिशन संचालक ने अपने आदेश में कहा कि प्राधिकरण ने आवश्यकता और प्रदर्शन का आकलन करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भूतलक्षी प्रभाव से लागू किया गया है।

CG: लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की 2021-22 की भर्ती परीक्षाओं में घोटाले से जुड़े मामले में सीबीआइ ने पूर्व आइएएस समेत पांच लोगों को गिरफ्तार…

0

छत्तीसगढ़ में लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की 2021-22 की भर्ती परीक्षाओं में घोटाले से जुड़े मामले में सीबीआइ ने पूर्व आइएएस समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सीजीपीएससी की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक पूर्व सचिव व सेवानिवृत्त आइएएस जीवन किशोर ध्रुव उनके बेटे सुमित ध्रुव निशा कोसले और दीपा आदिल को शुक्रवार को विशेष कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया।

छत्तीसगढ़ में लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की 2021-22 की भर्ती परीक्षाओं में घोटाले से जुड़े मामले में सीबीआइ ने पूर्व आइएएस समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

इनमें सीजीपीएससी की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पूर्व सचिव व सेवानिवृत्त आइएएस जीवन किशोर ध्रुव, उनके बेटे सुमित ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल को शुक्रवार को विशेष कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया।

अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया

इनमें सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। इससे पहले भी सीबीआइ कई बार आरती वासनिक व जीवन किशोर को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। मामले में अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

राज्य में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के दौरान सीजीपीएससी भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को 48 शिकायतें भेजी गई थीं। आरोप था कि प्रभावशाली राजनेताओं और अधिकारियों के करीबियों का डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च पदों पर चयन किया गया है।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा कोई जांच नहीं करने पर भाजपा नेता ननकी राम कंवर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने 18 अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी।

2021 में जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन

सीजीपीएससी की ओर से भर्ती के लिए 2021 में विज्ञापन जारी किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा में 171 पदों के लिए 2,565 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। 26 से 29 मई 2022 को मुख्य परीक्षा में 509 उम्मीदवार सफल रहे। साक्षात्कार के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई थी।

भर्ती में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप

भर्ती में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सह सोनवानी, सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एक और एफआइआर दर्ज की गई थी। वर्तमान विष्णु देव साय सरकार के अनुरोध पर इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई।

 

मौसम विभाग कि चेतावनी, कुछ हिस्सों में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना, जानें आज कैसा रहेगा मौसम!

0

छत्तीसगढ़ में इन दिनों मानसून कमजोर पड़ गया है। हालांकि अगले सप्ताह से रफ्तार एक बार फिर बढ़ने की संभावना है। बीते 24 घंटों में सरगुजा और बिलासपुर संभाग के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि रायपुर, दुर्ग और बस्तर में केवल बूंदाबांदी से ही लोग तर-बतर हुए। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि शनिवार को कुछ हिस्सों में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय द्रोणी रेखाएं और द्रोपिकाएं छत्तीसगढ़ के मौसम को प्रभावित कर रही हैं। फिलहाल बारिश की गतिविधियों में अगले कुछ दिनों तक कमी रहेगी, लेकिन उसके बाद प्रदेशभर में वर्षा का दौर फिर तेज़ हो सकता है।

राजधानी रायपुर में शनिवार को आसमान बादलों से घिरा रहेगा और दोपहर या शाम को मेघगर्जन के साथ बरसात हो सकती है। अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।