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cg weather update: प्रदेश में लगातार ठंड में बढ़ोतरी हो रही है, मौसम विभाग ने कई जिलों में शीतलहर चलने का अलर्ट जारी किया है…

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छत्तीसगढ़ में ठंड का प्रकोप बढ़ते जा रहा है। प्रदेश में लगातार ठंड में बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में इस बार रिकॉर्ड तोड़ ठंड पड़ रही है। लगातार बढ़ रही ठंड के बीच मौसम विभाग ने एक और हैरान करने वाला अपडेट दिया है। दरअसल, मौसम विभाग ने प्रदेश के 15 से ज्यादा जिलों में शीतलहर चलने का अलर्ट जारी किया है।

इन जिलों में चलेगी शीतलहर

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, दुर्ग, बालोद, कबीरधाम, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और बेमेतरा जिले में शीतलहर चलेगी। मौसम विभाग के अनुसार, शीतलहर चलने से इन जिलों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है।

राजधानी में कैसा रहेगा मौसम का हाल?

वहीं, मौसम विभाग ने प्रदेश भर में अगले दो दिनों में और भी ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने बताया कि, उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ में शीतलहर का प्रभाव बना रहेगा। राजधानी रायपुर में सुबह से धुंध छाए रहेगी। वहीं राजधानी में अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पिछले दो वर्षों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई…

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एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पिछले दो वर्षों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 90 शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी की ओर से औसतन हर माह छह रिश्वतखोरों को रंगे हाथ पकड़ा गया। इस दौरान सबसे अधिक मामले पटवारियों से जुड़े सामने आए और कुल 25 पटवारी गिरफ्तार किए गए। लगभग सभी मामलों में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए जा चुके हैं और प्रकरणों की सुनवाई जारी है।

10 पटवारियों की गिरफ्तारी

फैक्ट फाइल के अनुसार, वर्ष 2024 में 53 सरकारी अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए। इस दौरान 20 स्थानों पर तलाशी ली गई और 10 पटवारियों की गिरफ्तारी हुई। वहीं वर्ष 2025 में 37 रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। इस साल 40 स्थानों पर छापेमारी की गई और 15 पटवारियों को गिरफ्तार किया गया।

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सूरजपुर जिले में सबसे अधिक 11 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार हुए। इनमें जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक अभियंता, एसडीओ, उपनिरीक्षक, सहकारी निरीक्षक और दो पटवारी शामिल हैं। रायपुर जिले में दो वर्षों के दौरान कुल 10 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए, जिनमें संयुक्त संचालक मछली पालन, महिला थाने की निरीक्षक, सहायक अधीक्षक, सचिव, सरपंच और दो पटवारी शामिल रहे।

सरगुजा जिले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक अभियंता और दो पटवारियों सहित कुल आठ गिरफ्तारियां हुईं। मुंगेली में छह ट्रैप मामलों में नौ आरोपितों को पकड़ा गया। रायगढ़ जिले में एनटीपीसी के महाप्रबंधक सहित नापतौल और आबकारी विभाग के पांच कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। बलरामपुर में पांच पटवारियों को एसीबी ने अपनी कार्रवाई में पकड़ा।

इन जिलों में सबसे अधिक छापेमारी और गिरफ्तारी

सूरजपुर: 10 केस, 10 आरोपित

रायगढ़: नौ केस, नौ आरोपित

मुंगेली: छह केस, नौ आरोपित

रायपुर: पांच केस, 12 आरोपित

अधिकारियों का क्या कहना है

अमरेश मिश्रा, एसीबी-ईओडब्ल्यू चीफ, छत्तीसगढ़ का कहना है कि “एसीबी के अनुसार, बीते दो वर्षों में 69 ट्रैप मामलों में 90 सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया है। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस नीति के तहत कार्रवाई लगातार जारी है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।”

अंडों में नाइट्रोफ्यूरान मिलने के बाद छत्तीसगढ़ में एफएसएसएआई सख्त, जांच के निर्देश…

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कर्नाटक की एक कंपनी के अंडों में प्रतिबंधित रसायन नाइट्रोफ्यूरान पाए जाने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने देशभर में अंडों की जांच के निर्देश जारी किए हैं।

इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से अंडों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजने को कहा गया है। जांच में यदि खतरनाक केमिकल की पुष्टि होती है तो संबंधित बैच से लीगल सैंपल लेकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विभाग के अनुसार कर्नाटक में एगोज कंपनी के अंडों में प्रतिबंधित एंटीबायोटिक नाइट्रोफ्यूरान समूह की दवाओं के अवशेष मिलने का दावा किया गया है। इसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। रायपुर सहित प्रदेश के शहरी और ग्रामीण बाजारों से रेंडम सैंपलिंग के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले अंडों की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच की जा सके।

रायपुर में रोज पांच लाख अंडों की खपत

ठंड के मौसम में अंडों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। अकेले रायपुर में प्रतिदिन करीब पांच लाख अंडों की खपत होती है। ऐसे में सप्लाई चेन के किसी भी स्तर पर मिलावट या प्रतिबंधित दवाओं के उपयोग की स्थिति में बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।

नाइट्रोफ्यूरान क्यों है खतरनाक

नाइट्रोफ्यूरान एक सिंथेटिक एंटीमाइक्रोबियल दवा है, जिसका पहले मुर्गी, मछली और झींगा जैसे खाद्य पशुओं में बीमारियों की रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया जाता था। भारत सहित कई देशों में खाद्य पशुओं में इसका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह रसायन शरीर में टूटता नहीं, बल्कि जमा होता है। पशुओं को यह दवा देने पर इसके अवशेष मांस, अंडे और मछली में रह जाते हैं, जो भोजन के जरिए इंसानों तक पहुंचते हैं।

सेहत पर गंभीर खतरा

नाइट्रोफ्यूरान के अवशेषों का लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर का खतरा, लिवर को नुकसान, किडनी डैमेज, आंतों और पाचन तंत्र की समस्याएं, इम्यून सिस्टम कमजोर होना और जीन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी कारण प्रतिबंधित एंटीबायोटिक का पाया जाना जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे की घंटी माना जा रहा है।

अधिकारियों का क्या कहना

दीपक अग्रवाल, नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि रायपुर सहित प्रदेशभर के बाजारों से रेंडम सैंपलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले अंडों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

महापौर परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले, पेंशन, पाइपलाइन विस्तार, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण को मिली स्वीकृति

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राजनांदगांव। महापौर श्री मधुसूदन यादव की अध्यक्षता में महापौर परिषद की बैठक आज नगर निगम कार्यालय के महापौर कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में शहर की विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पाइपलाइन विस्तार, डामरीकरण कार्य, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण और वार्षिक निविदाओं को स्वीकृति दी गई।

महापौर श्री यादव ने बताया कि बैठक में राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को सहायता राशि का भुगतान किए जाने की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए लोक सेवा केंद्र से प्राप्त पात्र आवेदनों पर चर्चा की गई, और इन आवेदनों को स्वीकृति देने की अनुशंसा की गई।

बैठक में शहर के विभिन्न हिस्सों में पाईप लाइन विस्तार का भी निर्णय लिया गया। मोहारा फिल्टर प्लांट से गंज चौक तक तथा नंदई चौक से इंदिरा नगर टंकी तक 600 एमएम राइजिंग मेन पाईप लाइन विस्तार के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी। इसके अलावा शहर में विभिन्न स्थानों पर डामरीकरण कार्य की स्वीकृति भी दी गई, जिसमें न्यूनतम दरों की अनुशंसा की गई।

महापौर ने बताया कि शहर के रेल्वे स्टेशन और टेलीफोन ऑफिस के पास निगम स्वामित्व वाली भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए स्वीकृति दी गई है। इससे शहर में वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापारियों को भी फायदा होगा।

इसके अतिरिक्त, 15वें वित्त आयोग अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही विभिन्न विभागों में वार्षिक निविदाओं को आमंत्रित करने की स्वीकृति भी दी गई।

बैठक में महापौर परिषद के प्रभारी सदस्य श्री सावन वर्मा, श्री सुनील साहू, श्री राजेश जैन रानू, श्रीमती बिना ध्रुव, श्रीमती शैंकी बग्गा, श्रीमती केवरा विजय राय, श्रीमती वर्षा शरद सिन्हा, श्री आलोक श्रोती, श्री डीलेश्वर प्रसाद साहू, श्री राजा माखीजा सहित निगम अध्यक्ष श्री टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री दीपक खाण्डे, प्र. कार्यपालन अभियंता श्री प्रणय मेश्राम, सहायक लेखा अधिकारी श्री राकेश नंदे, प्र. स्वास्थ्य अधिकारी श्री राजेश मिश्रा, और अन्य निगम अधिकारी उपस्थित थे।

कमला कॉलेज रोड में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही, 5 ठेले हटाए, बांस-बल्ली उखाड़ी

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राजनांदगांव। नगर निगम द्वारा शहर के अतिक्रमण की समस्या पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा के निर्देश पर गठित अतिक्रमण हटाने वाली टीम ने आज कमला कॉलेज रोड पर अतिक्रमण करने की तैयारी कर रहे 5 ठेले हटाए और वहां लगे बांस-बल्ली को उखाड़ दिया। निगम ने यह कार्यवाही शिकायतों के आधार पर की, जिससे यातायात में रुकावट और दुर्घटनाओं की संभावना को खत्म करने का प्रयास किया गया है।

नगर निगम आयुक्त ने बताया कि शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और सड़कों पर कई स्थानों पर अनधिकृत रूप से ठेले-खोमचे और पसरे लगाकर व्यवसाय किया जा रहा है। इससे न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है। इसी वजह से निगम द्वारा लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है और ठेला-खोमचा लगाने वालों को समझाईस दी जा रही है।

निगम आयुक्त श्री विश्वकर्मा ने कहा कि हाल के दिनों में गौरव पथ और अन्य क्षेत्रों से अतिक्रमण की कई शिकायतें मिली थीं, जिन्हें लेकर नगर निगम का अमला लगातार जांच और कार्यवाही कर रहा है। कमला कॉलेज रोड पर आज की कार्यवाही के दौरान उप अभियंता श्री अनुप पाण्डे, श्री तिलक राज ध्रुव, समयपाल श्री चिराग मेश्राम, उद्यान सह.प्रभारी श्री दिलीप गिरी और प्र.पटवारी श्री मिलिन्द रेड्डी के नेतृत्व में टीम ने यह कार्रवाई की।

श्री विश्वकर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे चौक-चौराहों और सड़कों पर पसरा या ठेला-खोमचा न लगाएं, क्योंकि इससे यातायात में रुकावट उत्पन्न होती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जाएगी, और यदि किसी ने इसे स्वेच्छा से नहीं हटाया तो उसे जुर्माना भरना पड़ेगा।

ममता नगर क्षेत्र में पाइपलाइन जांच कार्य का आयुक्त ने किया निरीक्षण, टंकी की सफाई व सफाई अभियान चला

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राजनांदगांव। ममता नगर वार्ड में नल में गंदा पानी आने की शिकायत के बाद नगर निगम ने तत्काल सफाई अभियान शुरू किया और पाइपलाइन की जांच कर प्रभावित क्षेत्र में पानी सप्लाई करने के लिए टैंकर भेजे। इस कार्य की आज सुबह निरीक्षण करने नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा पहुंचे और क्षेत्र की टंकी की सफाई कराने के निर्देश दिए।

गली नं. 3 और 5 में गंदा पानी आने की शिकायत के बाद नगर निगम का अमला अलर्ट हुआ और पाइपलाइन की जांच, सफाई सहित अन्य आवश्यक कार्य किए गए। इस पर पहले महापौर श्री मधुसूदन यादव ने निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, आयुक्त श्री विश्वकर्मा ने स्थिति का जायजा लिया और साफ-सफाई कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रवासियों से भी संवाद किया और उन्हें पानी उबालकर तथा छानकर पीने की सलाह दी।

इस दौरान आयुक्त ने ठा. प्यारेलाल स्कूल स्थित टंकी की सफाई के साथ-साथ गली नं. 3, 4, 5 और 7 की पाइपलाइन की सफाई करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, रेलवे ट्रैक के पास पुराने पाइपलाइन को बंद कर दिया गया। श्री विश्वकर्मा ने कहा कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, पीएचई विभाग द्वारा पानी के सैंपल की जांच की जाएगी और निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी।

आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग से विशेष सफाई अभियान चलाने, दवाओं का छिड़काव करने, गड्ढों में भरे पानी की निकासी की व्यवस्था करने और लोगों को सावधानी बरतने की भी अपील की। साथ ही, प्रभावित क्षेत्र में टैंकर से पानी सप्लाई जारी रखने की बात कही।

सीवरेज सिस्टम और जल आपूर्ति की सफाई अभियान के तहत, नगर निगम ने यह सुनिश्चित किया कि स्वास्थ्य एवं तकनीकी अमला अपने दायित्वों का पालन करते हुए स्थिति को नियंत्रण में लाए और किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या का सामना न करना पड़े।

छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ ने 17 जनवरी के जिलास्तरीय आंदोलन का किया खुला और नि:शर्त समर्थन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ने आगामी 17 जनवरी 2026 को प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन और आंदोलन का आयोजन करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन में प्रदेश के करीब 69 हजार सहायक शिक्षक शामिल होंगे। आंदोलन की मुख्य मांगें वेतन विसंगति दूर करना, एक लाख अस्सी हजार शिक्षक एलबी संवर्ग को क्रमोन्नति वेतनमान देना, पुरानी पेंशन बहाल करना, और प्रथम सेवा गणना के आधार पर समस्त लाभ देना हैं।

जागरूक शिक्षक संघ का समर्थन
इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ ने खुला और नि:शर्त समर्थन दिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने आंदोलन की सार्थकता और महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह शिक्षकों के लंबे समय से पेंडिंग मामलों को हल कराने के लिए एक अहम कदम है। साथ ही, उन्होंने सभी शिक्षक साथियों से अपील की है कि वे आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

समर्थन देने वाले प्रमुख नेता
संघ के अन्य प्रमुख नेता, जैसे प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र साहू, प्रदेश महासचिव भोजराम साहू, प्रदेश सचिव राजेंद्र लाडेकर, और प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र तिवारी ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए शिक्षकों की मांगों को जायज ठहराया है।

मुख्य मुद्दे

वेतन विसंगति को समाप्त करना

एलबी संवर्ग के एक लाख अस्सी हजार शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान देना

पुरानी पेंशन की बहाली

प्रथम सेवा गणना कर समस्त लाभ देना

संघ ने कहा कि एलबी संवर्ग के शिक्षक 1995-98 से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनके सेवा गणना में अनदेखी की जा रही है। इसके कारण उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे कई शिक्षक सेवानिवृत्त होने के बाद आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कुछ शिक्षक तो मजदूरी करने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है।

राजनीतिक वादों का उल्‍लेख
छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ ने यह भी बताया कि भा.ज.पा. सरकार ने 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने घोषणा पत्र में सहायक शिक्षकों के लिए वेतन विसंगति दूर करने, क्रमोन्नति वेतनमान देने और पेंशन बहाली की बात की थी। हालांकि, चुनावी वादे पूरे होने में दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इन मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

आंदोलन की रणनीति
17 जनवरी को होने वाले आंदोलन में प्रदेश के सभी शिक्षक संगठन के सदस्य शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ ने अपने सभी जिला और विकासखंड अध्यक्षों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इस आंदोलन में अधिक से अधिक शिक्षक साथी शामिल हों।

यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों के लिए और राज्य सरकार से वादों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ का यह समर्थन आंदोलन को और भी मजबूत बना रहा है, और शिक्षक समुदाय सरकार से अपने अधिकारों को लेकर ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहा है।

सीआरसी में दिव्यांगजनों के लिए बांस शिल्प कला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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राजनांदगांव। दिव्यांगजन कौशल विकास, पुनर्वास एवं सशक्तिकरण समेकित क्षेत्रीय केन्द्र (सीआरसी), ठाकुरटोल में व्यावसायिक विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के लिए 8 से 20 जनवरी 2026 तक बांस शिल्प कला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को स्वरोजगार उन्मुख कौशल प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर तथा आत्मविश्वासी बनाना है। प्रशिक्षण में बच्चों और युवाओं को बांस से टोकरी, सजावटी आइटम, लैंप सहित विभिन्न आकर्षक उत्पाद बनाने की कला सिखाई जा रही है।

प्रशिक्षण में शामिल दिव्यांग बच्चे उत्साहपूर्वक सीख रहे हैं। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में यह शिविर दिव्यांगजनों के कौशल विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

सीआरसी अधिकारियों ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल कौशल प्रदान करना नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। शिविर के समापन पर प्रतिभागियों को अपने बनाए हुए उत्पादों की प्रदर्शनी और मूल्यांकन का अवसर भी मिलेगा।

यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर प्राप्त करने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

जिले में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति विशेष प्रयास, 1775 महिलाओं का हुआ सोनोग्राफी

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राजनांदगांव। जिले में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी और उपचार के लिए विशेष प्रयास किए हैं। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच, उपचार, दवाई और स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

सोनोग्राफी के लिए नि:शुल्क व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए नि:शुल्क सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराई है। अब तक जिले में कुल 1775 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं पंजीकृत की गई हैं, जिनमें से 1725 महिलाओं का सोनोग्राफी किया जा चुका है। शेष 50 महिलाओं का सोनोग्राफी शनिवार को किया जाएगा।

सोनोग्राफी केंद्रों पर विशेष आयोजन

आज कुल 58 गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क सोनोग्राफी कराया गया, जिसमें सुन्दरा अस्पताल, हाईटेक डायग्नोस्टिक, भारत डायग्नोस्टिक और विधि डायग्नोस्टिक जैसे प्रमुख केंद्रों पर यह कार्य किया गया। इनमें से घुमका विकासखंड के 17, डोंगरगांव विकासखंड के 10, डोंगरगढ़ विकासखंड के 12 और शहरी क्षेत्र के 9 महिलाओं का सोनोग्राफी हुआ। इसके अलावा, छुरिया क्षेत्र से 10 गर्भवती महिलाओं का भी नि:शुल्क सोनोग्राफी किया गया।

स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और मितानिनों का योगदान

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए प्रत्येक सप्ताह दूरभाष के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली जा रही है और आवश्यक सलाह दी जा रही है। इसके अलावा, प्रसव के 15 दिन पहले मितानिनों द्वारा गर्भवती महिलाओं के घर-घर जाकर नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी गर्भवती महिला को समय रहते चिकित्सीय सहायता मिल सके।

नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा

स्वास्थ्य विभाग द्वारा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी सेंटर लाने के लिए नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा भी प्रदान की जा रही है। यह सेवा विकासखंड और शहरी क्षेत्रों से महिलाओं को अस्पतालों तक लाने में सहायक बन रही है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

विभागीय मॉनिटरिंग और समन्वय

इस कार्यक्रम की मॉनिटरिंग विकासखंड स्तर पर खंड चिकित्सा अधिकारी और ब्लॉक प्रोग्राम यूनिट द्वारा की जा रही है, ताकि योजना के तहत किसी भी प्रकार की कोताही न हो।

स्वास्थ्य अधिकारी का बयान

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने कहा कि यह योजना मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच और उपचार से उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और इससे जिले में मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है।

सकारात्मक परिणाम की उम्मीद

स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में जिले में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और भी अधिक कमी आएगी, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी।

गर्भवती महिलाओं के लिए यह पहल निश्चित रूप से उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो रही है, और कलेक्टर के निर्देश पर किए जा रहे इस कार्य से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

राजनांदगांव में एकीकृत किसान पोर्टल पर रकबा संशोधन का कार्य तेज, किसानों को मिल रही राहत

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राजनांदगांव। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी महाभियान में किसानों को आ रही तकनीकी समस्याओं का निराकरण करने के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर रकबा संशोधन का कार्य तेजी से चल रहा है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार राजस्व विभाग के अधिकारी और पटवारी किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान कर रहे हैं। अब तक लगभग 150 किसानों की तकनीकी समस्याओं का समाधान किया गया है।

एकीकृत किसान पोर्टल के तहत किसानों के खसरा, रकबा सुधार, कैरी फारवर्ड, फसल विवरण, नवीन पंजीयन, वारिसान पंजीयन, वन पट्टा और त्रुटि सुधार से संबंधित विभिन्न प्रकार के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनका निराकरण किया जा रहा है। किसानों को धान बिक्री के दौरान सही रकबा और फसल विवरण दर्ज न होने की समस्याएं आ रही थीं, जिनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

किसानों ने खुशी जाहिर की

ग्राम मनगटा के किसान श्री अमर कुमार साहू ने बताया कि पहले उनके द्वारा 26 क्विंटल धान के बदले गलती से 14 क्विंटल का टोकन कट गया था, जिससे उनकी धान बिक्री में परेशानी आ रही थी। आवेदन के बाद समस्या का समाधान हो गया और 9 दिसम्बर को उन्होंने अपने धान की बिक्री कर ली। वहीं, ग्राम गठुला के किसान श्री जशवंत निर्मलकर ने रकबा संशोधन करवाया, क्योंकि उनकी 1.5 एकड़ भूमि में त्रुटिपूर्ण फसल विवरण था। अब उन्होंने 129 क्विंटल का टोकन प्राप्त किया और अपनी धान बिक्री की तैयारी कर रहे हैं।

ग्राम भंवरमरा के किसान श्री रामअवतार सिंह ने भी रकबा संशोधन कराकर अपनी समस्या का समाधान किया। उन्होंने बताया कि पहले उनके 4 एकड़ कृषि भूमि में केवल 51 डिसमिल रकबे का धान दिख रहा था, लेकिन आवेदन के बाद दो टोकन मिले और 19 दिसम्बर को 60 क्विंटल और 6 जनवरी को 18.4 क्विंटल धान की बिक्री कर ली।

अब तक लगभग 150 किसानों को मिल चुकी राहत

जिला खाद्य अधिकारी श्री रविन्द्र सोनी ने जानकारी दी कि राजस्व विभाग द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन के आधार पर एकीकृत किसान पोर्टल में सभी प्रकार के विवरणों में संशोधन किए जा रहे हैं। इसके अलावा, किसानों से अपील की जा रही है कि वे खसरा, रकबा सुधार, कैरी फारवर्ड और फसल विवरण जैसी त्रुटियों को 31 जनवरी 2026 तक सुधार लें।

कृषकों से अनुरोध किया गया है कि 15 जनवरी 2026 तक कैरी फारवर्ड, वन अधिकार पट्टाधारी किसानों का नवीन पंजीयन करवा लें और त्रुटिपूर्ण पंजीयन को निरस्त कर नवीन पंजीयन कराएं।

समिति लॉगइन में किया गया संशोधन

सभी समितियों में समिति लॉगइन में संशोधन का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके। इस प्रक्रिया के तहत समस्त कृषि समितियों में कलेक्टर की अनुशंसा के बाद सभी प्रकार के पंजीकरण और रकबा सुधार किए जाएंगे।

उम्मीद जताई जा रही है कि किसान एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान कर धान बिक्री की प्रक्रिया को और सरल बना सकेंगे।