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सावरकर को भारत रत्न दिलाना है तो BJP से बात करें, संजय राउत ने मोहन भागवत पर कसा तंज…

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शिवसेना (UBT ) के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को भाषणों में मुद्दा उठाने के बजाय भाजपा सरकार से सीधे विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने के लिए कहना चाहिए।

राउत ने कहा, ‘जब केंद्र में उनकी ही सरकार है और स्वयंसेवक सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर हैं, तो सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया जाता , लाखों स्वयंसेवकों ने इस सरकार को सत्ता में लाने के लिए काम किया है। मोहन भागवत को यह बात सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से कहनी चाहिए, न कि मंच से भाषण में।’

यह मुद्दा तब प्रमुखता में आया जब आरएसएस प्रमुख ने मुंबई में ‘100 ईयर्स ऑफ संघ जर्नी-न्यू होराइजन्स” कार्यक्रम में कहा कि सावरकर को भारत रत्न देने से इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।राउत ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के ढांचे की भी आलोचना की और अच्छे दिन नहीं आने के लिए संघ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को तो’अच्छे दिन मिले, लेकिन देश को नहीं। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका की शर्तों के आगे झुक गया है और इसकी जिम्मेदारी संघ नेतृत्व को लेनी चाहिए।

संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क लगाएगा, जिसमें वस्त्र, चमड़ा, प्लास्टिक-रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर और कुछ मशीनरी शामिल हैं। विपक्ष ने इस समझौता ढांचे की आलोचना करते हुए कहा है कि इसके तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम करेगा। साथ ही अमेरिका से आने वाले कई खाद्य और कृषि उत्पादों-जैसे ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स आदि पर भी टैरिफ में कटौती या समाप्ति की जाएगी।

राउत ने आरएसएस शताब्दी कार्यक्रम में गायक अदनान सामी की उपस्थिति पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अदनान सामी के पिता 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाक वायुसेना में थे और पठानकोट एयरबेस हमले से जुड़े थे। उन्होंने सवाल उठाया, ”ऐसे व्यक्ति के परिवार से जुड़े शख्स को सम्मानित कर किस तरह की देशभक्ति दिखाई जा रही है।”

शिल्पा शेट्टी पर भी निशाना

राउत ने कहा, ‘एक अभिनेत्री वहां खड़ी होकर ‘आई लव भागवत’ कह रही थीं, जबकि उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के मामले में लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। इतना ही नहीं, उनके पति पर अश्लील फिल्म बनाने से जुड़े एक गंभीर मामले का आरोप है। ऐसे संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले लोगों को आमंत्रित कर संघ किस तरह का चरित्र प्रस्तुत कर रहा है , जो लोग बैंक ऋण में चूक करते हैं और कानून के खिलाफ हैं, वे संघ के मंच पर आकर अपने पापों को ढकने की कोशिश कर रहे हैं।’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम में ऐसे लोगों को महत्व दिया गया जिन पर आर्थिक अनियमितताओं या अन्य गंभीर मामलों के आरोप रहे हैं। राउत ने कहा कि जिन प्रतिष्ठित व्यक्तियों के परिवारों का स्वतंत्रता संग्राम से संबंध रहा, जैसे जावेद अख्तर या शाहरुख खान, उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘हम संघ का सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह विवादित पृष्ठभूमि वाले लोगों को महत्व दिया जा रहा है, उससे नैतिक पतन झलकता है।’

दुनिया में मचा हाहाकार तो भारत के पास कितने दिन का पेट्रोल भंडार, सरकार ने बताया…

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पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि वैश्विक उथल-पुथल की किसी स्थिति में उत्पन्न मांग को पूरा करने के लिए भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 74 दिनों के लिए पर्याप्त है।

पुरी उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश के लिए, जो तेज गति से विकास कर रहा है, व्यवहार्य और सुरक्षित तेल भंडार आवश्यक है, ताकि वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में वह कमजोर स्थिति में नहीं हो। उन्होंने कहा कि भारत के पश्चिमी तट के साथ-साथ पूर्वी तट पर भी तेलशोधक संयंत्र हैं।

पुरी ने कहा, ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, आज हम विश्व में कच्चे तेल के तीसरे सबसे बड़े उपभोक्ता हैं। कच्चे तेल की हमारे पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी शोधन क्षमता है। वर्तमान में लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो बढ़कर 32 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। और, हम विश्व में पेट्रोलियम उत्पादों के पांचवें सबसे बड़े निर्यातक भी हैं।’

उन्होंने कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी प्रकार की उथल-पुथल की स्थिति में, हमारे पास अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद हो। उन्होंने कहा कि आईईए के अनुसार, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के तहत करीब 90 दिनों का भंडार होना चाहिए।

पुरी ने कहा कि भारत अपने भंडार का आकलन अपने तेलशोधक संयंत्रों में भी करता है। उन्होंने कहा कि अगर देश के कुल भंडारों को एक साथ देखें तो यह 74 दिनों के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि आदर्श रूप से, यह 90 दिनों का होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘मंत्री के रूप में, मैं 74 दिनों के भंडार के साथ सुरक्षित महसूस करता हूं। लेकिन, हम भविष्य में इसे और बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।’ पुरी ने कहा, ‘कुल मिलाकर, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार आर्थिक स्थिरता का बहुत महत्वपूर्ण घटक है। यह हमारी ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक है।’

इसके अलावा, उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) नामक विशेष कदम के जरिए आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन स्थानों पर 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की कुल क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाएं स्थापित की हैं। इन भंडारों में उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा बाजार की स्थितियों के आधार पर बदलती रहती है।

भारत करे BRICS की अध्यक्षता; रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, पाकिस्तान का भी जिक्र…

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रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सोमवार को कहा कि भारत की अध्यक्षता में हम ब्रिक्स और उनके एजेंडे का पूरा समर्थन करेंगे। एक इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि आज के समय को देखते हुए भारत का एजेंडा बेहद प्रासंगिक, तार्किक है।

वह आतंकवाद और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है। लावरोव ने कहा कि मेरी राय में भारत की अध्यक्षता में जो एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा है, वह भविष्य की तैयारी और वर्तमान चुनौतियों का समाधान करता है। हम इसका सक्रिय रूप से समर्थन करेंगे।

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का जोर आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर है जो बेहद जरूरी भी है। क्योंकि इस समय विश्व के कई हिस्से आतंकवाद प्रभावित हैं। अफगानिस्तान सीमा, भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान गलियारे के साथ-साथ अन्य जगहों पर आतंकी गतिविधियां देखी जा रही है।

यह प्राथमिकता हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ मिलकर एक वैश्विक आतंकवाद विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसका मसौदा पहले ही तैयार हो चुका है, हालांकि अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है।

लावरोव ने कहा, भारत की अध्यक्षता खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों, सूचना प्रौद्योगिकी, को प्राथमिकता देती है। भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस को आमंत्रित किया गया है, और हम एजेंडे में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

ट्रेनों में चल रहा है जातिवाद; संसदीय समिति ने ऐसा क्यों कहा? रेलवे की तीखी आलोचना…

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भारतीय रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने सोमवार को आयोजित अपनी बैठक में केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली इस समिति ने रेलवे में व्याप्त स्वच्छता सुविधाओं को लेकर जाति व्यवस्था जैसी टिप्पणी की है, जहां प्रीमियम ट्रेनों में बेहतर सुविधाएं हैं।

जबकि सामान्य यात्री ट्रेनें उपेक्षित हैं। समिति 2023 के लिए भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता और सफाई पर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट की समीक्षा कर रही थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में रेलवे बोर्ड का प्रतिनिधित्व चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सतीश कुमार ने किया।

बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने रेलवे की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार, एक भाजपा सदस्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रेनों में एक तरह का जातिवाद दिखाई देता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वंदे भारत जैसी प्रीमियम सेवाओं में बेहतर लिनेन और स्वच्छ कोच मिलते हैं, जबकि नियमित यात्री ट्रेनों की हालत इसके उलट होती है।

समिति के कड़े रुख का सामना करते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने सफाई में कई प्रणालीगत और संरचनात्मक चुनौतियों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि सीमित ठहराव, कर्मचारियों की भारी कमी, बजट की कमी और यात्रियों की अत्यधिक संख्या स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों में बाधक हैं।

PAC ने नहीं माना बहाना

समिति के सदस्यों ने रेलवे द्वारा दिए गए इन तर्कों को खारिज कर दिया। सूत्रों ने बताया कि पैनल का मानना है कि ये समस्याएं वर्षों से चली आ रही हैं और अब तक इनका ठोस समाधान निकाला जाना चाहिए था।

समिति ने सभी क्षेत्रों में समय-समय पर स्वच्छता ऑडिट करने की सिफारिश की है। शिकायतों के निपटान के समेकित डेटा के अभाव का हवाला देते हुए पैनल ने रेलवे को एक व्यापक डिजिटल डैशबोर्ड बनाए रखने का निर्देश दिया है। सदस्यों ने सभी ट्रेनों के लिए एक समान यात्री शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। समिति ने सुझाव दिया कि स्वच्छता प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न जोनों के लिए दंड और प्रोत्साहन के बीच संतुलन बनाया जाए। पैनल ने ट्रेनों में मिलने वाले कंबल और चादर की गुणवत्ता सुधारने के लिए लॉन्ड्री प्रबंधन का विस्तृत अध्ययन करने को कहा है।

चेयरमैन सतीश कुमार ने पैनल को जानकारी दी कि ट्रेनों को साफ रखने के प्रयासों के तहत रेलवे ने कई स्थानों पर क्विक-वाटरिंग स्टेशन (तेजी से पानी भरने वाले स्टेशन) शुरू किए हैं, विशेष रूप से सीमित ठहराव वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए। समिति ने इन स्टेशनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने की सिफारिश की है। साथ ही, पैनल ने स्वच्छता के लिए आवंटित बजट को बढ़ाने का भी आग्रह किया है।

ज्ञात हो कि भारतीय रेलवे प्रतिदिन 12,541 यात्री ट्रेनों का संचालन करता है, जिससे 7,364 से अधिक स्टेशनों पर 1.75 करोड़ से अधिक यात्री सफर करते हैं।

तो इस वजह से बन पाई भारत-US ट्रेड डील पर बात, डोनाल्ड ट्रंप के दूत ने किसे दिया क्रेडिट?

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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अंतरिम समझौते पर सहमति बनने के बाद अमेरिका की ओर से बड़ा बयान आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ की।

इस दौरान गोर की तरफ से इस ट्रेड डील का क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अच्छे संबंधों को दिया गया। अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि पिछले हफ्ते घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के पूरा होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती को जाता है।

अमेरिकी राजदूत नेवयहां नई दिल्ली में उनके आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बातें कही हैं। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। रिसेप्शन के दौरान गोर ने कहा कि वाइट हाउस में ट्रंप प्रशासन भारत को ध्यान में रख रहा है। गोर ने कहा, “मुझे यहां आए हुए अभी एक महीने से थोड़ा ज्यादा हुआ है, और हमने आते ही काम शुरू कर दिया। वाइट हाउस भारत को ध्यान में रख रहा है।” ट्रंप के दूत ने आगे कहा, “हमारे राष्ट्रपति भारत को तवज्जो दे रहे हैं। और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ती की वजह से, हम आखिरकार एक व्यापार समझौता कर पाए।” बता दें कि गोर ने बीते 14 जनवरी को अपना पदभार संभाला था, जिसके बाद वह भारत में अमेरिका के 27वें राजदूत बन गए।

अंतरिम व्यापार समझौते में क्या-क्या?

इससे पहले भारत और अमेरिका ने बीते शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की थी जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं।

अमेरिका ने हटाया अतिरिक्त आयात शुल्क

दोनों देशों के एक संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। बयान के मुताबिक, ”अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।” इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रूसी तेल की खरीद पर पिछले वर्ष अगस्त में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है।

निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। शुल्क में कमी से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, हस्तशिल्प उत्पाद जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयों, रत्नों और हीरों, तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ को और बढ़ावा मिलेगा।

भाजपा के असली भगवान ओवैसी, अलादीन का चिराग बनाकर वोट बटोरती है पार्टी: कांग्रेस CM ‘

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि पार्टी AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी को भगवान राम से भी ज्यादा अहमियत देती है और वोट जीतने के लिए ओवैसी का इस्तेमाल करती है।

उन्होंने कहा है कि ओवैसी ही भाजपा के असली लाइफलाइन हैं।

सोमवार को एक प्रेस मीट में तेलंगाना के CM ने कहा, “यह भारतीय जनता पार्टी का इतिहास है। अगर आप इसे एनालाइज करें, तो उनके लिए सिर्फ एक ही भगवान हैं, असदुद्दीन ओवैसी। वे यूं ही भगवान राम का नाम लेते हैं, लेकिन वे हर दिन जिसके आगे झुकते हैं, वह असदुद्दीन ओवैसी हैं।” उनकी लाइफलाइन खुद असदुद्दीन ओवैसी हैं। देखिए वे कितनी बार राम का नाम याद करते हैं और कितनी बार ओवैसी का नाम याद करते हैं। इसकी पड़ताल होनी चाहिए।”

रेवंत रेड्डी ने आगे कहा कि भाजपा ओवैसी को अलादीन के चिराग की तरह इस्तेमाल कर रह। उन्होंने कहा, “हर बार वे असदुद्दीन ओवैसी को अलादीन का जादुई चिराग बनाकर वोट मांगते हैं। आखिर सरकार तो आपकी ही है ना? अगर असदुद्दीन ओवैसी इतने विलेन हैं, तो आप उन्हें कंट्रोल क्यों नहीं कर पा रहे हैं?”

आइडियोलॉजिकल गरीबी की हद- रेड्डी

रेड्डी ने आगे AIMIM की निंदा के लिए भी BJP की आलोचना की। उन्होंने कहा, “डेमोक्रेसी में AIMIM भी एक पॉलिटिकल पार्टी है जो चुनाव लड़ती है। जहां वे जीतते हैं, जीतते हैं। जहां वे हारते हैं, हारते हैं। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और यहां तक ​​कि पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ा, जहां उन्होंने पांच सीटें जीतीं। वे भी एक पॉलिटिकल ऑर्गनाइजेशन हैं, एक पॉलिटिकल पार्टी हैं। लेकिन आप कब तक उनके नाम पर वोट मांगते रहेंगे? धार्मिक नफरत भड़काकर, कुछ पॉलिटिकल पार्टियों के नेताओं को राक्षस बताकर और उसके जरिए पॉलिटिकल रूप से जिंदा रहने की कोशिश करना आइडियोलॉजिकल गरीबी की हद है। तेलंगाना के लोगों को सोच समझ कर वोट देना चाहिए।”

अमेरिका से ट्रेड डील के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप के इस प्लान को झटका देगा भारत, बैठक से इनकार…

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अमेरिका के साथ भारत ने ट्रेड डील कर ली है। इसके साथ ही अब तक 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ कम होकर 18 पर्सेंट पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसका ऐलान किया था। इसके बाद से ही माना जा रहा है कि भारत और अमेरिका के संबंध सुधर गए हैं, लेकिन इसके बाद भी भारत ने डोनाल्ड ट्रंप को गाजा पीस प्लान पर करारा झटका देने की तैयारी कर ली है।

सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से 19 फरवरी को होने वाली इस मीटिंग से दूर रहने का ही फैसला लिया गया है। गाजा पीस बोर्ड की पहली बैठक 19 फरवरी को होने वाली है। ट्रंप की ओर से शुरू किए गए बोर्ड ऑफ पीस का यह पहला जुटान है, जिसमें कई देशों के पहुंचने की संभावना है।

इसके बाद भी भारत की ओर से इससे दूरी बनाए रखने का ही इरादा नजर आ रहा है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार अब भी भारत सरकार की ओर से ट्रंप के प्रस्ताव का अध्ययन ही किया जा रहा है। इस मामले में भारत सबसे पहले बैठक में पहुंचने वाले देशों में शुमार नहीं होना चाहता। भारत की यह कोशिश है कि पहले कुछ बड़े देश इसका हिस्सा बन जाएं, उसके बाद ही इस संबंध में कोई फैसला लिया जाए। हाल ही में अरब लीग के देशों के विदेश मंत्रियों के साथ भारत की मीटिंग थी। इसमें भी ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर बात हुई थी। इस बोर्ड में कई अरब देश शामिल हैं, लेकिन उन्होंने अब तक इस मीटिंग में शामिल होने को लेकर फैसला नहीं लिया है।

इस दौरान भारत ने अरब लीग के देशों से उनके विचार जाने। इन देशों का कहना था कि वे भले ही बोर्ड के मेंबर बन गए हैं, लेकिन भविष्य की रणनीति के बारे में अभी विचार करना है। इस महीने के आखिर तक पीएम नरेंद्र मोदी खुद इजरायल जाने वाले हैं। ऐसे में यह मसला वहां भी एजेंडा बन सकता है। बता दें कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे विवाद को लेकर भारत की राय टू-नेशन सॉलूशन वाली रही है।

ट्रंप के बोर्ड में क्या है पाकिस्तान और तुर्की वाली परेशानी

दरअसल भारत की ओर से इस बोर्ड में शामिल होने के पीछे एक हिचक भी है। अमेरिका के इस बोर्ड में पाकिस्तान और तुर्की पहले ही शामिल हो चुके हैं। कश्मीर मसले पर इन दोनों देशों के साथ भारत का विवाद बना हुआ है। ऐसे में गाजा के मसले पर इनका शामिल होना भी अखरने वाली बात है। यही नहीं पाकिस्तान को इसका हिस्सा बनाए जाने से इजरायल भी सहज नहीं है।

ED के सामने पेश नहीं हुईं टीना अंबानी, 40 हजार करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में होनी थी पूछताछ

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बिजनेसमैन अनिल अंबानी की पत्नी टीना अंबानी ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी लगभग 40,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में टीना अंबानी को नया समन जारी करेगी। प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

समाचार एजेंसी PTI के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि SIT का नेतृत्व संघीय जांच एजेंसी की मुख्यालय जांच इकाई (HIU) में अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें आधा दर्जन अन्य जांचकर्ता शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ADAG के खिलाफ मामलों की समीक्षा करने के बाद उठाया गया है।

पिछले सप्ताह, सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को एक SIT गठित करने का निर्देश दिया था जो मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र, त्वरित और निष्पक्ष जांच करेगी। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कथित सांठगांठ, मिलीभगत और साजिश की जांच करने और अपनी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए कहा था।

ईडी पिछले साल से अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। अब तक एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIRs) दर्ज की हैं। इसके अलावा, 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क भी की गई है।

अनिल अंबानी से पिछले साल उनकी समूह की कंपनियों के कथित बैंक ऋण अनियमितताओं के लिए ईडी द्वारा पूछताछ की गई थी। कंपनी के एक पूर्व शीर्ष कार्यकारी और RCOM के पूर्व अध्यक्ष, पुनीत गर्ग को हाल ही में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने अतीत में किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

“ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर कांग्रेस को TMC से झटका, साइन करने से इनकार”

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस को टीएमसी से बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस सांसदों ने बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर साइन कर दिए हैं तो वहीं टीएमसी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है।

सूत्रों की मानें तो अगर लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने का मौका दे दिया जाता है तो कांग्रेस यह अविश्वास प्रस्ताव वापस ले लेगी। समाजवादी पार्टी, डीएमके ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

सूत्रों ने बताया कि सोमवार शाम तक प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर 102 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए थे, हालांकि विपक्ष के एक प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हस्ताक्षर नहीं किए। विपक्षी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के कई सांसदों के साथ ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

आज ही लोकसभा सचिवालय को सौंपा जा सकता है नोटिस

सूत्रों ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को सौंपा जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष को ”बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने”, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सदन में की गई टिप्पणियों को लेकर उन पर कार्रवाई शुरू नहीं करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना साक्ष्य के आरोप लगाए जाने के मामले में अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव के लिए नोटिस देने पर विचार किया जा रहा है।

बैठक में शामिल थी टीएमसी

सोमवार को हुई विपक्ष की बैठक में तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शप) सहित कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। बीते दो फरवरी को, राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने तथा अन्य मुद्दों पर सदन में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है।

लोकसभा में हंगामा

मंगलवार को भी लोकसभा की कार्रवाई शुरू होते ही हंगामा होने लगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.। एसपी सांसद इकरा हुसैन ने सवाल किया था लेकिन हंगामे की वजह से संबंधित मंत्री जवाब नहीं दे पाई और पीठासीन पीसी मोहन ने कार्यवाही स्थगित करदी। आम तौर पर लोकसभा अध्यक्ष ही प्रश्नकाल के दौरान चेयर पर होते हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ना बोलने देने का आरोप लगाते हुए 2 फरवरी से ही सदन में हंगामा कर रहे हैं। पिछले सप्ताह 8 सांसदों को इस सत्र के लिए निलंबित भी कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में मत लड़ो राजनीतिक लड़ाई, हिमंत सरमा के खिलाफ याचिका पर बोले

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भाषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इसपर भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कई बार राजनीतिक जंग सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाती है।

उन्होंने इस याचिका पर विचार करने की बात कही है। विपक्ष ने सरमा के अल्पसंख्यकों पर निशाना लगाते वीडियो और भाषण पर आपत्ति जताई थी।

शीर्ष न्यायालय में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा, ‘परेशानी यह है कि जब चुनाव आते हैं, जो कई बार उन्हें यहां सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है। हम इसे देखेंगे।’

अदालत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया नेता एनी राजा की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने सीएम सरमा के 27 जनवरी को दिए भाषण पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत पहुंचे एडवोकेट निजाम पाशा ने कहा, ‘मीलॉर्ड राजनीतिक दल के सदस्य की तरफ से हेट स्पीच के खिलाफ एक याचिका दाखिल हुई है। एक वीडियो भी है, जिसमें मुख्यमंत्री अल्पसंख्यकों पर निशाना लगाते नजर आ रहे हैं।’

जमीयत भी पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सरमा के भाषण के खिलाफ 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि विशेष रूप से उच्च संवैधानिक पद पर आसीन किसी व्यक्ति की तरफ से दिए गए इस तरह के बयानों को राजनीतिक बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।