होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नाकेबंदी को तोड़ने के लिए खाड़ी देश अब सैन्य विकल्पों की तरफ बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। खाड़ी के अहम मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात ने सहयोगी देशों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बनाई जा रही समुद्री सेना में शामिल होने को तैयार है।
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब खाड़ी देस और उनके पश्चिमी सहयोगी दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक के जरिए शिपिंग को बहाल किए जाने के तरीके पर विचार कर रहे हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स ने मामले से परिचित तीन लोगों का हवाला देते हुए बताया कि UAE को बताया कि वह होर्मुज खोलने के लिए बनाई जाने वाली किसी भी सेना में शामिल होगा। इसके अलावा अबू धाबी अपनी नौसेना भी तैनात कर सकता है। UAE एक बड़ा गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
होर्मुज पर ईरान की नाकेबंदी
अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान की IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य के चोकपॉइंट की नाकेबंदी कर दी है।
ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों से इस संकरे जलमार्ग में जहाजों को निशाना बनाया है, जिसके चलते शिपिंग लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है।
युद्ध शुरू होने के बाद से जहाजों की आवाजाही में लगभग 90 फीसदी की गिरावट आई है।
इस रास्ते पर नाकेबंदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है क्योंकि इस जलमार्ग से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।
होर्मुज की नाकेबंदी का UAE और दूसरे खाड़ी देशों की तेल आधारिक अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
ईरान के साथ टकराव मकसद नहीं
इस प्रयास से जुड़े एक व्यक्ति के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा ध्यान व्यापक अंतरराष्ट्रीय ताकत बनाने पर है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद ईरान के साथ जंग करना नहीं है। ईरान ने तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के खिलाफ जंग छेड़ दी है और अब लोगों को इसके खिलाफ खड़ा होना होगा।
ईरान को लेकर खाड़ी देशों का डर
खाड़ी देशों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ सकती है कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर सकता है। हालिया संघर्ष के दौरान जहाजों को सुरक्षित गुजरने की मंजूरी देने के लिए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने टोल वसूलना शुरू किया है। बताया गया है कि बडे तेल टैंकरों को होर्मुज पार करने के लिए 20 लाख डॉलर देने पड़े हैं। इन घटनाक्रमों ने खाड़ी के देशों की टेंशन बढ़ा दी है।



