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“अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात क्षेत्र में हलचल”

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“अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात क्षेत्र में हलचल”

अमेरिका द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने की संभावना ने भारतीय निर्यातकों के बीच गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। इसका सबसे तीव्र प्रभाव तमिलनाडु जैसे राज्य पर पड़ रहा है, जो अपने मजबूत विनिर्माण और निर्यात ढांचे के लिए जाना जाता है और जिसकी अर्थव्यवस्था बड़ी हद तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।

अमेरिका की नई टैरिफ नीति और उसका असर हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ को मौजूदा 25% से बढ़ाकर 50% तक ले जाने की योजना बना रहा है। इसका दुष्परिणाम भारत जैसे साझेदार देशों पर पड़ रहे हैं। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20% है, जबकि तमिलनाडु के मामले में यह आंकड़ा 31% तक पहुंच जाता है। इस आधार पर साफ है कि टैरिफ में कोई भी बढ़ोतरी तमिलनाडु के निर्यातकों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी।

किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में चिंता जताई है कि यह टैरिफ वृद्धि तमिलनाडु के श्रम-प्रधान उद्योगों को गहरा झटका दे सकती है। राज्य का वस्त्र उद्योग, जो भारत के कुल वस्त्र निर्यात का 28% हिस्सा बनाता है, विशेष रूप से संकट में है। इस क्षेत्र में लगभग 75 लाख लोग कार्यरत हैं, और अनुमान है कि टैरिफ वृद्धि के चलते करीब 30 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

आर्थिक और सामाजिक असर निर्यात पर बढ़ता बोझ राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लाखों परिवारों की आजीविका पर असर डालेगा। विदेशी बाजारों में तमिलनाडु के उत्पाद कम प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे खरीददार अन्य विकल्पों की तलाश कर सकते हैं। इससे उत्पादन घटेगा, ऑर्डर रद्द होंगे और नौकरियों में कटौती की स्थिति बन सकती है।

राज्य की चिंता, राष्ट्रहित में समर्थन मुख्यमंत्री स्टालिन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अमेरिका के साथ संतुलित व्यापार संबंधों के समर्थन में हैं और केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहल का सम्मान करते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि तमिलनाडु की आर्थिक संरचना अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर है, और इसीलिए केंद्र को राज्य की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने होंगे

स्टालिन की केंद्र से प्रमुख मांगें विशेष वित्तीय राहत पैकेज: कोविड काल की तर्ज पर, कर्ज की मूलधन अदायगी पर रोक दी जाए ताकि उद्योगों को कुछ राहत मिल सके।

GST ढांचे में सुधार: खासकर मानव-निर्मित फाइबर उद्योग के लिए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को खत्म करके समान दर (5%) लागू की जाए।

कपास पर आयात शुल्क हटाना: जिससे वस्त्र उद्योग को सस्ता कच्चा माल मिल सके और वह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे।

ब्याज अनुदान योजना: प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए विशेष ब्याज सब्सिडी दी जाए।

एफटीए और द्विपक्षीय समझौते: अमेरिकी बाजार जैसे उच्च शुल्क वाले बाजारों में जोखिम को कम करने के लिए वैकल्पिक व्यापार समझौतों पर तेजी से काम हो।

“8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट”

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“8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट”

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग एक बार फिर उम्मीदों का केंद्र बनता जा रहा है। खासतौर पर एक मुद्दा जो लंबे समय से चर्चा में है। वह है पेंशन कम्युटेशन की अवधि को मौजूदा 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग। यह मुद्दा न केवल कर्मचारियों के लिए आर्थिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह सरकार की पेंशन नीतियों की पारदर्शिता और न्यायसंगतता पर भी प्रश्न उठाता है।

क्या होता है पेंशन कम्युटेशन? जब कोई केंद्रीय कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, तो उसे यह विकल्प दिया जाता है कि वह अपनी मासिक पेंशन का एक हिस्सा अधिकतम 40% एकमुश्त राशि के रूप में ले सकता है। इसे पेंशन कम्युटेशन कहा जाता है। इसके बदले उसकी मासिक पेंशन में तय अनुपात में कटौती कर दी जाती है। मौजूदा नियमों के अनुसार, यह कटौती 15 साल तक लागू रहती है। उसके बाद, पूरी पेंशन बिना कटौती के बहाल कर दी जाती है।

कर्मचारियों की मुख्य आपत्तियाँ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार इस एकमुश्त दी गई राशि को ब्याज सहित लगभग 11 साल में ही वसूल कर लेती है। फिर भी पेंशन कटौती की अवधि 15 साल क्यों रखी गई है? कर्मचारियों का तर्क है कि यह न केवल आर्थिक रूप से अनुचित है, बल्कि यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर एक प्रकार का अनावश्यक बोझ भी है।

8वें वेतन आयोग में दोबारा उठी मांग अब जब 8वें वेतन आयोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने की कगार पर है और इसकी संदर्भ शर्तें (ToR – Terms of Reference) तय की जानी हैं, कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे को फिर से प्रमुखता से उठाया है। यदि यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तीन साल पहले ही उनकी पूरी पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी, जिससे उन्हें वित्तीय राहत मिल सकती है।

इस सन्दर्भ में आगे क्या होगा? अब सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग और सरकार के रुख पर टिकी हैं। यदि यह मांग मानी जाती है, तो यह न केवल कर्मचारियों के लिए एक बड़ा राहत कदम होगा, बल्कि यह सरकार की एक सकारात्मक छवि भी बनाएगा जो अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक भलाई को महत्व देती है।

“Ration Card: 1.17 करोड़ लोगों का कटगा राशन कार्ड, सरकार ने शुरू की बड़ी कार्रवाई”

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“Ration Card: 1.17 करोड़ लोगों का कटगा राशन कार्ड, सरकार ने शुरू की बड़ी कार्रवाई”

देशभर में मुफ्त राशन योजना का लाभ उठाने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें राशन कार्ड सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने पहली बार विभिन्न सरकारी डेटाबेस को मिलाकर एक ऐसी सूची तैयार की है, जिसमें उन लोगों को शामिल किया गया है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत मिलने वाले मुफ्त अनाज के हकदार नहीं हैं।

कौन हैं अपात्र? सरकार द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, करीब 1.17 करोड़ राशन कार्ड धारकों को अपात्र माना गया है। इनमें से: 94.71 लाख लोग आयकर दाता हैं, 17.51 लाख के पास चार पहिया वाहन है, और 5.31 लाख कंपनियों में निदेशक के रूप में सूचीबद्ध हैं। इन आंकड़ों को आयकर विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के डेटा से मिलाकर तैयार किया गया है।

क्यों हटाए जा रहे हैं कार्ड? NFSA के नियमों के अनुसार, जिन परिवारों की वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक है, जिनके पास कार या अन्य चार पहिया वाहन हैं, या जो आयकर देते हैं, वे इस योजना के अंतर्गत मुफ्त राशन के पात्र नहीं माने जाते। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में ऐसे लोग अब तक इस लाभ का फायदा उठाते रहे हैं।

राज्यों को 30 सितंबर तक की डेडलाइन केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे 30 सितंबर 2025 तक इन अपात्र लाभार्थियों का सत्यापन कर राशन कार्ड को रद्द करें। ‘राइटफुल टारगेटिंग डैशबोर्ड’ नामक पोर्टल पर यह पूरी जानकारी API आधारित प्रणाली के जरिए राज्यों को उपलब्ध कराई जा रही है।

डेटा की सफाई और जरूरतमंदों को मौका खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इस पहल को “लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) की पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम” बताया है। उनका कहना है कि इससे उन लोगों को योजना में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो वास्तव में इसके हकदार हैं लेकिन अब तक सूची से बाहर थे।

अब तक कितने लाभार्थी? NFSA के तहत वर्तमान में देशभर में 19.17 करोड़ राशन कार्ड सक्रिय हैं, जिनसे करीब 76.10 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। हालांकि, योजना की अधिकतम सीमा 81.35 करोड़ लोगों के लिए निर्धारित है। यानी अब भी लाखों जरूरतमंद लोगों को जोड़े जाने की संभावना है, जो इस डेटा सफाई के बाद साकार हो सकती है।

पहले भी हो चुकी है छंटनी यह पहला मौका नहीं है जब फर्जी या अपात्र कार्डों पर कार्रवाई की गई हो। 2021 से 2023 के बीच भी सरकार ने 1.34 करोड़ फर्जी राशन कार्ड रद्द किए थे।

मुंबई में भारी बारिश से हाहाकार: मोनोरेल ट्रैक पर फंसी दो ट्रेनें, 780 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया”

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मुंबई में भारी बारिश से हाहाकार: मोनोरेल ट्रैक पर फंसी दो ट्रेनें, 780 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया”

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण मंगलवार शाम शहर की मोनोरेल सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। भीड़ से भरी दो मोनोरेल ट्रेनें एलिवेटेड ट्रैक पर फंस गईं जिससे उनमें सवार 780 से अधिक यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई।

हालांकि अग्निशमन विभाग और बचाव टीमों की त्वरित कार्रवाई से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बीच ट्रैक पर अटकी मोनोरेल, यात्रियों में दहशत यह घटना मैसूर कॉलोनी और भक्ति पार्क के बीच हुई। भारी बारिश की वजह से बिजली सप्लाई बाधित हो गई जिससे दो मोनोरेल ट्रेनें रुक गईं। ट्रेनों में सवार यात्री घबराहट में नीचे कूदने लगे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने तुरंत ट्रैक के नीचे जंपिंग शीट बिछा दीं ताकि अगर कोई यात्री कूदे तो उसे चोट न लगे।

मोनोरेल के अंदर एसी बंद होने से कई यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत हुई और कुछ बेहोश भी हो गए। हालांकि सिर्फ एक यात्री को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जिसकी हालत अब स्थिर है।

खिड़कियां तोड़कर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन मुंबई अग्निशमन विभाग के प्रमुख रवींद्र अंबुलगेकर ने बताया कि मैसूर कॉलोनी के पास फंसी एक मोनोरेल से 582 यात्रियों को सीढ़ी लगाकर बचाया गया जबकि 200 अन्य यात्रियों को दूसरी मोनोरेल से निकाला गया जिसे खींचकर पास के वडाला स्टेशन तक लाया गया।

बचाव दल ने मोनोरेल की खिड़कियां तोड़कर और दरवाजे खोलकर सबसे पहले महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बाहर निकाला। बाद में युवाओं को बचाया गया। बचाए गए 23 यात्रियों में दम घुटने के लक्षण थे जिनका मौके पर ही इलाज किया गया और उन्हें बाद में घर जाने दिया गया।

“अच्छी खबर: RBI के अनुमान से भी बेहतर रही देश की GDP, आर्थिक मोर्चे पर भारत ने मारी बाजी!”

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“अच्छी खबर: RBI के अनुमान से भी बेहतर रही देश की GDP, आर्थिक मोर्चे पर भारत ने मारी बाजी!”

भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।

यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से ज़्यादा है। किन सेक्टरों में हुई बढ़त? रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में थोड़ी धीमी वृद्धि देखी गई है, वहीं सेवा क्षेत्र ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है।

सेवा क्षेत्र: इस सेक्टर में 8.3 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 7.3 प्रतिशत से कहीं बेहतर है। इसका मतलब है कि सेवा क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को मज़बूती दी है।

कृषि और उद्योग: कृषि क्षेत्र में विकास दर 5.4% से गिरकर 4.5% और औद्योगिक क्षेत्र में 6.5% से गिरकर 4% रहने की संभावना है।

दर्दनाक हादसा: पिकअप और कैंटर की भीषण टक्कर, 4 मजदूरों की मौके पर मौत, कई घायल सरकार के खर्च और निवेश में बढ़ोतरी आर्थिक विकास में सरकार का खर्च भी एक बड़ा कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पूंजीगत खर्च में 52% की बढ़ोतरी की है, जो 2.8 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच गया है। इसी तरह, राज्य सरकारों ने भी पूंजीगत खर्च में 23% की वृद्धि दर्ज की है।

इसके अलावा, नई परियोजनाओं में भी ज़बरदस्त उछाल आया है। इस तिमाही में नई परियोजनाओं का कुल मूल्य दोगुना होकर 5.8 ट्रिलियन रुपये हो गया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में सिर्फ 3 ट्रिलियन रुपये था। यह दिखाता है कि देश में निवेश का माहौल बेहतर हो रहा है। कुल मिलाकर, पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

“सट्टेबाजी वाले ऐप्स पर स्ट्राइक की तैयारी, संसद में बिल होगा पेश. Dream11 पर भी संकट !”

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“सट्टेबाजी वाले ऐप्स पर स्ट्राइक की तैयारी, संसद में बिल होगा पेश. Dream11 पर भी संकट !”

केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी दी, जिसे जल्द ही लोकसभा में पेश किया जाएगा।

इस विधेयक का उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को कानूनी दायरे में लाना, सट्टेबाजी और जुए से संबंधित ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना और युवाओं को इनके नकारात्मक प्रभावों से बचाना है। क्रिकेट टीम बनाने वाली ड्रीम11 जैसे गेमिंग एप पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। ऑनलाइन गेमिंग में बेटिंग को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा और इसके तहत सात साल की कैद और 10 लाख तक के जुर्माने का प्रविधान किया जा रहा है।

सट्टेबाजी ऐप्स पर सख्त कार्रवाई नए विधेयक में सट्टेबाजी और जुए से जुड़े ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्त पाबंदी का प्रावधान है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे गेम्स, जो वित्तीय नुकसान, व्यसन, डेटा गोपनीयता उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जोखिमों को बढ़ावा देते हैं, पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके साथ ही, सेलिब्रिटी और सार्वजनिक हस्तियों द्वारा सट्टेबाजी या जुए से जुड़े ऐप्स का प्रचार करने पर भी रोक लगेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से युवाओं को भ्रामक प्रचार से बचाने के लिए उठाया गया है। आपको बता दें कि बीते 4 से 5 सालों में 1400 से अधिक एप को प्रतिबंधित किया जा चुका है।

धोखाधड़ी और सामाजिक प्रभाव पर चिंता ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के बढ़ते चलन ने सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को जन्म दिया है। हाल ही में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) जैसे कई अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स की जांच शुरू की, जिन पर करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और उपयोगकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी का आरोप है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि 1867 का सार्वजनिक जुआ अधिनियम अब अप्रासंगिक हो चुका है और ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए नए कानून की आवश्यकता है। कोर्ट ने सरकार को एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया है जो इस दिशा में विधायी व्यवस्था सुझाए।

नए नियमों का ढांचा प्रस्तावित कानून में ऑनलाइन गेमिंग को ‘गेम्स ऑफ स्किल’ और ‘गेम्स ऑफ चांस’ में वर्गीकृत करने का प्रावधान है। गेम्स ऑफ स्किल, जैसे कि फंतासी स्पोर्ट्स, को वैध माना जाएगा, जबकि सट्टेबाजी और जुआ आधारित गेम्स पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार ने पहले ही 2023 में आईटी नियमों में संशोधन कर स्व-नियामक संस्थाओं (एसआरओ) की स्थापना को अनिवार्य किया था, जो यह निर्धारित करती हैं कि कोई गेम वैध है या नहीं। नए विधेयक में इन नियमों को और सख्त करने की योजना है।

राज्य और केंद्र का सहयोग ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को नियंत्रित करना केंद्र और राज्यों दोनों का विषय है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, लेकिन ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स और वीपीएन के उपयोग ने इन प्रयासों को कमजोर किया। केंद्र सरकार अब एक राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत कानून लाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे अवैध गेमिंग और सट्टेबाजी पर प्रभावी रोक लग सके।

उम्मीदें और चुनौतियां यह विधेयक ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का प्रयास है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करने में तकनीकी और कानूनी चुनौतियां आ सकती हैं, खासकर ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने में। फिर भी, सरकार का यह कदम युवाओं को व्यसन और धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

“सियासी संग्राम.उपराष्ट्रपति चुनाव की सज चुकी बिसात : राधाकृष्णन और रेड्डी…कौन देगा किसको मात”

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“सियासी संग्राम.उपराष्ट्रपति चुनाव की सज चुकी बिसात : राधाकृष्णन और रेड्डी…कौन देगा किसको मात”

रोचक बात ये हैं कि इस बार दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से नई दिल्ली । संसद के दोनों सदनों में चल रहे गतिरोध के बीच इंडी गठबंधन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है।

उनका मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से होगा। विपक्ष दवारा रेडडी के नाम का ऐलान करने के बाद अब ये तय हो गया हैं कि इंडी गठबंधन उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए को वॉक ओवर नहीं देने जा रहा है। इस ऐलान के बाद अब उपराष्ट्रपति चुनाव काफी रोचक हो गया है।

इंडी गठबंधन ने बी सुदर्शन रेड्डी को चुनाव में उतर कर एनडीए उम्मीददवारा को सीधी चुनौती दे दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों की गठबंधन के अलावा कई दूसरे दल जो कि वर्तमान में एनडीए और इंडी में शामिल नहीं है। उपराष्ट्रपति चुनाव में किसका साथ देते हैं।

जहां 79 साल के रेड्‌डी गुवाहाटी हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं। वे आंध्र प्रदेश निवासी हैं। 2007 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। खास बात है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए दोनों ही उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। रिटायर जस्टिस रेड्डी आंध्रप्रदेश से, जबकि सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं।

दोनों 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करने वाले है। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर को वोटिंग होगी। उसी दिन काउंटिंग भी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है। 25 अगस्त तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकती है। उपराष्ट्रपति का चुनाव जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई की रात अचानक इस्तीफा देने की वजह से हो रहा है। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

एनडीए के उम्मीदवार का जीतना तय लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या वर्तमान में 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में 245 सांसद हैं। वहां 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास 129 सांसद हैं। यह मानकर कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले है। इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था।

“इस देश में नया कानून: जुमे की नमाज न पढ़ने पर होगी दो साल की जेल, भरना पड़ेगा जुर्माना. सोशल मीडिया पर बढ़ी नाराजगी”

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“इस देश में नया कानून: जुमे की नमाज न पढ़ने पर होगी दो साल की जेल, भरना पड़ेगा जुर्माना. सोशल मीडिया पर बढ़ी नाराजगी”

मलेशिया के तेरेंगानु राज्य में अब जुमे की नमाज छोड़ना लोगों को मुश्किल में डाल सकता है। राज्य सरकार ने कहा है कि वह शरिया कानून को पूरी तरह लागू करने वाली है। नए नियम के तहत अगर कोई मुस्लिम पुरुष बिना किसी सही वजह के जुमे की नमाज नहीं पढ़ता, तो उसे दो साल तक जेल हो सकती है।

इस फैसले को मलेशिया जैसे विविध संस्कृति वाले देश में धार्मिक कट्टरता की तरफ बढ़ता कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के शासन में इस तरह की सख्त धार्मिक नीतियां पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं। कुछ समय पहले एक पुराने मंदिर को हटाकर उसकी जगह मस्जिद बनाई गई, जिसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री ने किया था।

नमाज न पढ़ने पर होगी जेल और लगेगा जुर्माना साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक, तेरेंगानु राज्य में अब पहली बार जुमे की नमाज छोड़ने पर सजा हो सकती है। अगर कोई बिना सही वजह के नमाज में नहीं जाता, तो उसे 3,000 रिंगित (लगभग 61,000 रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जेल हो सकती है, या दोनों सजा मिल सकती है। राज्य के सूचना और शरिया मंत्री मुहम्मद खलील अब्दुल हादी ने बताया कि इस कानून का मकसद लोगों को यह समझाना है कि जुमे की नमाज सिर्फ एक धार्मिक काम नहीं, बल्कि मुसलमानों की जिम्मेदारी भी है।

पहले क्या था नियम? पहले तेरेंगानु में सिर्फ उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती थी जो लगातार तीन बार जुमे की नमाज छोड़ते थे। लेकिन अब नियम और ज्यादा कड़े कर दिए गए हैं। इसे राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है क्योंकि यह राज्य पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी का मुख्य क्षेत्र है। पार्टी सोचती है कि सख्त इस्लामी कानून लागू करने से वह मुस्लिम समुदाय में अपनी पकड़ और मजबूत कर पाएगी।

तेरेंगानु में करीब 12 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 99% से ज्यादा मलय मुसलमान हैं। यह मलेशिया का अकेला ऐसा राज्य है जहां विधानसभा में कोई विपक्ष नहीं है। 2022 के चुनाव में पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी ने सभी 32 सीटें जीत ली थीं। अगले दो साल में फिर से चुनाव होने वाले हैं, इसलिए पार्टी पर पिछली जीत को दोहराने का दबाव है।

सोशल मीडिया पर नाराजगी इस कानून की सोशल मीडिया पर भी आलोचना हो रही है। मलेशियाई वकील अजीरा अजीज ने कहा कि यह नियम कुरान के उस नियम के खिलाफ है जिसमें लिखा है कि “धर्म में जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि जुमे की नमाज जरूरी है, लेकिन इसे अपराध बनाना सही नहीं है। जागरूकता और शिक्षा से ही लोग इसे समझ सकते हैं। एक और व्यक्ति, अहमद अजहर ने कहा कि मलेशिया के सभी लोग अपनी आवाज़ उठाएं, नहीं तो हम भी तालिबान जैसे कट्टर हो जाएंगे।

”CG: गजेंद्र यादव को मिली स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी. देखें लिस्ट.. ”

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”CG: गजेंद्र यादव को मिली स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी. देखें लिस्ट.. ”

नए मंत्रियों में गुरु खुशवंत साहेब को कौशल तकनीक शिक्षा एवं रोजगार के साथ अनुसूचित जाति विभाग, राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व जबकि गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि विधाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

गुरु खुशवंत को मिला कौशल, रोजगार और अनुसूचित जाति विभाग, राजेश अग्रवाल को सौंपा गया पर्यटन और धर्मस्व मंत्रालय, गजेंद्र यादव को मिली शिक्षा, ग्रामोद्योग और विधि जिम्मेदारी.

रायपुर: आज सुबह मंत्रीपद की शपथ लेने वाले तीन नए मंत्रियों के बीच विभागों का आबंटन कर दिया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्वीट कर जानकारी दी है। नए मंत्रियों में गुरु खुशवंत साहेब को कौशल तकनीक शिक्षा एवं रोजगार के साथ अनुसूचित जाति विभाग, राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व जबकि गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि विधाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। देखें लिस्ट..
श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री – सामान्य प्रशासन, खनिज साधन, ऊर्जा, जनसंपर्क, जल संसाधन, विधानमंडल, सुशासन एवं अभिनवकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, जन शिकायत एवं निवारण, अन्य विभाग जो किसी मंत्री को आबंटित न हो।

श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री – लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खेल एवं युवा कल्याण।
श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री – गृह, जल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी।
श्री रामविचार नेताम, मंत्री – आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जल प्रौद्योगिकी, मत्स्य पालन, पशुधन विकास।
श्री दयालदास बघेल, मंत्री – खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण।
श्री केदार कश्यप, मंत्री – वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य।
श्री लखन लाल देवांगन, मंत्री – वाणिज्य एवं उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी), श्रम।
श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्री – लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास, 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन।
श्री ओ.पी. चौधरी, मंत्री – वित्त, वाणिज्यिक कर (आबकारी को छोड़कर), आवास एवं पर्यावरण, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी।
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मंत्री – महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण।
श्री टंकाराम वर्मा, मंत्री – राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा।
श्री गजेंद्र यादव, मंत्री – स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य।
श्री गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री – कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास।
श्री राजेश अग्रवाल, मंत्री – पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व।

CG: चना की आवश्यक मात्रा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा ई-ऑक्शन प्लेटफार्म के माध्यम से खरीदी जाएगी, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दी जानकारी…

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CG: चना की आवश्यक मात्रा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा ई-ऑक्शन प्लेटफार्म के माध्यम से खरीदी जाएगी, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दी जानकारी…

सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दी जानकारी…

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 19 अगस्त को राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। डिप्टी सीएम अरुण साव ने कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा निर्णय लिया है कि राज्य के अनुसूचित क्षेत्र एवं माडा पॉकेट (Mada Pocket) क्षेत्र में रहने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) के अंतर्गत हर माह वितरित किए जाने वाले 2 किलो चना की आवश्यक मात्रा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा NeML ई-ऑक्शन प्लेटफार्म के माध्यम से खरीदी जाएगी। यह खरीदी वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 0.25 प्रतिशत या इससे कम ट्रांजेक्शन/ सर्विस चार्ज (Transaction / ServiceCharges) पर की जाएगी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने कहा है कि जुलाई 2025 से नवंबर 2025 तक जिन हितग्राहियों ने चना नहीं लिया है, उन्हें पात्रतानुसार यह चना दिसंबर 2025 तक वितरित कर दिया जाए।