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लोकसभा चुनाव 2024 : पीएम का शपथ ग्रहण समारोह 8 जून को तय किया गया है, होगा भव्य समारोह!

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लोकसभा चुनाव 2024 : पीएम का शपथ ग्रहण समारोह 8 जून को तय किया गया है, होगा भव्य समारोह!

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में एनडीए को बहुमत मिला है और बीजेपी एक बार फिर से सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार शपथ लेने वाले हैं।

पीएम के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी कड़ी में शपथ ग्रहण की तारीख भी सामने आ गई है।

8 जून को होगा शपथ समारोह

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पीएम का शपथ ग्रहण समारोह 8 जून को तय किया गया है। 8 जून शनिवार के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार राष्ट्रपति भवन में शपथ लेने वाले हैं।

दरबार हॉल में होती है सेरेमनी

आमतौर पर पीएम का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित किया जाता है। मगर 2019 में करीब 3 हजार से ज्यादा लोगों ने पीएम के शपथ ग्रहण में हिस्सा लिया था। जिसकी वजह से शपथ सेरेमनी राष्ट्रपति भवन के बाहर आयोजित की गई थी। मगर इस बार पीएम दरबार हॉल में शपथ लेंगे या नहीं? इसपर अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

तीसरी बार शपथ लेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी देश के दूसरे पीएम हैं जो लगातार तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेने वाले हैं। इससे पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू ने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। बता दें कि पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से तीसरी बार सांसद बने हैं। उन्होंने कांग्रेस के अजय राय को डेढ़ लाख वोटों से शिकस्त दी है। वहीं आखिरी नतीजों में एनडीए को 292 सीटें मिली हैं, जिसमें अकेले बीजेपी ने 240 सीटों पर जीत दर्ज की है।

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा, क्या खत्म है मायावती की राजनीति?

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लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा, क्या खत्म है मायावती की राजनीति?

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा प्रमुख मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले ने उनकी पार्टी का यूपी में पूरी तरह से सफाया हो गया है.

बीएसपी को अपने अब तक के सियासी इतिहास में सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा है. बसपा 10 से फिर एक बार शून्य पर सिमट गई. बीएसपी के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह भी है कि उससे दलित वोटबैंक छिटक गया. सूबे में कभी दलितों की एकछत्र नेता रहीं मायावती 2024 के चुनाव में 10 फीसदी से कम वोट लेने में कामयाब हो पाईं तो दूसरी तरफ दलित राजनीति उभरते चेहरे चंद्रशेखर नगीना से सांसद बनने में कामयाब रहे. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती की सियासत खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है?

बसपा संस्थापक कांशीराम ने उत्तर प्रदेश में दलित राजनीतिक चेतना जगाने का काम किया, जिसका नतीजा रहा कि मायावती 1995 में मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रही. 2007 में बसपा ने पूर्ण बहुमत के साथ यूपी में सरकार बनाने में सफल रही, लेकिन यहीं से मायावती का सियासी आधार खिसकना भी शुरू हुआ. साल 2012 में सत्ता गंवाने के बाद से बसपा सियासी हाशिए पर चलती चली जा रही है, उसने मायावती को बेचैन कर दिया है. 2022 में बसपा के एक विधायक का जीतना और 2024 में खाता न खुलना. यूपी की सियासत में मायावती एक अदना सी प्लेयर बन गई हैं.

गठबंधन न करने का मायावती को नुकसान

2024 के नतीजों से साफ जाहिर है कि मायावती को गठबंधन न करने का नुकसान हुआ है. 2019 में मायावती की बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया. इसका असर यह हुआ कि 2014 में जीरो पर आउट हुई बसपा ने 2019 में 10 सीटों पर जीत दर्ज कर ली. मायावती का वोट प्रतिशत भी 20 फीसदी के करीब पहुंच गया था. लेकिन 2022 का चुनाव मायावती अकेले लड़ीं और करीब 13 फीसदी वोट पाकर सिर्फ एक सीट जीत पाईं.

2024 में भी मायावती अकेले लड़ीं. उनके पास INDIA गठबंधन में शामिल होने का कांग्रेस की ओर से लगातार ऑफर था, लेकिन वह नहीं मानी. इतना ही नहीं मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने भी 2024 में गठबंधन के साथ उतरने का सुझाव दिया था. इसके लिए उन्होंने एक इंटरनल सर्वे का भी हवाला देते हुए कहा था कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो बसपा 45 सीटें देशभर में जीत सकती है. आकाश आनंद की बात को न ही बसपा प्रमुख ने तवज्जे दिया और न ही पार्टी के नेताओं ने अहमियत दी. अब नतीजे आए तो इसे मायावती की चूक की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि बसपा का न केवल जीरो पर आउट हुई, बल्कि उसका वोट शेयर भी 3 फीसदी गिर गया. पूरे देश में बसपा का वोट प्रतिशत 1.5 फीसदी के करीब गिरा है. मायावती के वोट प्रतिशत में गिरावट इस ओर इशारा करती है कि अब दलितों का भी बसपा से मोहभंग हो रहा है.

दलितों पर मायावती की पकड़ हो रही है ढीली

यूपी में दलितों की सबसे बड़ी नेता मायावती मानी जाती थीं, लेकिन चुनाव दर चुनाव उनका वोटबैंक छिटकता जा रहा है. यूपी में दलितों की आबादी करीब 20 फीसदी है. इस वोटबैंक को बसपा का बेस वोट माना जाता था, लेकिन इस वोटबैंक में पहले बीजेपी और अब सपा ने बड़ी सेंधमारी कर दी है. पिछले 10 साल में पासी का एक बड़ा वोटबैंक बीजेपी के साथ जुड़ा है, जबकि इस चुनाव में कुछ जाटव वोट सपा की तरफ खिसक गया. यानि मायावती का दलित वोट बंट गया है.

जमीनी कार्यकर्ताओं से कटती गईं मायावती

यूपी में बसपा के ढलान की सबसे बड़ी वजह मायावती का जमीनी कार्यकर्ता से जुड़ाव कम होना है. पिछले 10 सालों में मायावती जमीन से कटती चली गई और बसपा जमीन पर आती चली गई. इस बीच कई पुराने बसपा नेताओं ने पार्टी छोड़ी दी और सबका आरोप था कि बसपा अब बीजेपी की बी-टीम बन गई है. अखिलेश यादव ने इसका फायदा उठाया और बसपा के बड़े नेताओं को सपा में शामिल करा लिया. इनमें लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, बाबू सिंह कुशवाहा शामिल हैं.

बसपा के कैडर टूटने का असर पार्टी पर पड़ा और उसकी जमीन पर पकड़ ढीली पड़ने लगी. इसका नतीजा हुआ कि 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा महज एक सीट जीत पाई और 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा अपना खाता नहीं खोल पाई. हालांकि बसपा के पास अभी भी करीब 10 फीसदी वोट बना हुआ है. ऐसे में यह कहना गलत होगा कि मायावती की राजनीति खत्म हो गई है.

Loksabha Election Result 2024 : कांग्रेस को कितनी सीटों पर मिली जीत, देखिए पूरी लिस्ट…

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Loksabha Election Result 2024 : कांग्रेस को कितनी सीटों पर मिली जीत, देखिए पूरी लिस्ट…

लोकसभा चुनाव-2024 कांग्रेस के लिए यादगार रहा. वो एक बार फिर से खड़ी होती नजर आ रही है. 2014 और 2019 के मुकाबले कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है.

उसने 99 सीटों पर जीत हासिल की है. उसकी सीटें लगभग डबल हो गई हैं. 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने 52 सीटों पर जीत हासिल की थी. कांग्रेस ने यूपी में भी बेहतर प्रदर्शन किया है. यहां पर उसके खाते में 6 सीटें आई हैं.

चुनाव आयोग के मुताबिक, बीजेपी को 240 और कांग्रेस को 99 सीट पर विजयी घोषित किया गया है. लोकसभा में 543 सदस्य हैं, लेकिन सूरत से बीजेपी उम्मीदवार मुकेश दलाल के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद 542 सीट के लिए मतगणना हुई. यूपी, राजस्थान और हरियाणा में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर हुआ है.

कितनी सीटों पर मिली जीत

  • उत्तर प्रदेश-6
  • दिल्ली-0
  • कांग्रेस-3
  • बिहार-3
  • छत्तीसगढ़-1
  • गोवा-1
  • गुजरात-1
  • हरियाणा-5
  • झारखंड-2
  • कर्नाटक-9
  • केरल-14
  • लक्षद्वीप-1
  • महाराष्ट्र-13
  • मणिपुर-2
  • मेघालय-1
  • ओडिशा-1
  • राजस्थान-8
  • तमिलनाडु-9
  • तेलंगाना-8
  • बंगाल-1

राहुल गांधी ने इस साल के लोकसभा चुनाव परिणामों में कांग्रेस की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा से पार्टी के संगठनों को प्रेरित किया है. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक प्रमुख चुनौती के रूप में पेश किया गया.

दोनों यात्राओं ने कई मायनों में 2024 के चुनाव के लिए कांग्रेस के अभियान की नींव रखी और राहुल गांधी को उनकी पिछली विफलताओं के बावजूद चुनावी लड़ाई के केंद्र में खड़ा कर दिया. मंगलवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राहुल गांधी ने संविधान की एक प्रति के साथ लोकतंत्र को बचाने के लिए भारत के लोगों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, भारत के लोगों ने संविधान और लोकतंत्र को बचाया है. देश की वंचित और गरीब आबादी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ी है. 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान उनका ध्यान उन मुद्दों पर केंद्रित था जो लोगों के लिए मायने रखते थे.

”चुनाव नतीजों के बाद सीटों की संख्या पर आया मोदी का पहला बयान”

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”चुनाव नतीजों के बाद सीटों की संख्या पर आया मोदी का पहला बयान”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इससे पहले अपने आखिरी कैबिनेट की बैठक में चुनावी नतीजों पर पीएम मोदी ने कहा कि हार जीत राजनीति का हिस्सा है. नंबर गेम चलता रहता है.

पीएम मोदी ने मंत्री परिषद के सहयोगियों से ये भी कहा कि हमने दस साल अच्छा काम किया आगे भी करेंगे. पीएम ने कहा कि हम सत्ता, संगठन, हर जगह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे हैं और आगे भी उतरेंगे. आप सभी ने अच्छे से काम किया बहुत मेहनत की. इस दौरान पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए सभी का मनोबल बढ़ाया और सबको धन्यवाद कहा.

अपने दम बीजेपी को नहीं मिला बहुमत

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाई. मगर एनडीए ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. नतीजों के बाद आज पटना, हैदराबाद से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज हो गई है. दिल्ली में बैठकों का दौरा जारी है. फाइनल रिजल्ट में NDA को 292 सीटें मिली हैं जबकि INDIA के हिस्से 234 सीटें आई हैं. वहीं, अन्य के खाते में 17 सीटें गई हैं. वहीं, अगर BJP और कांग्रेस की बात करें तो सत्ताधारी दल को 240 और कांग्रेस को 99 सीटें मिली हैं.

हम नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ेंगे- मोदी

मंगलवार को नतीजे घोषित होने के बाद शाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी मुख्यालय से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जनता ने तीसरी बार एनडीए पर विश्वास जताया है. भारत के इतिहास में ये एक अभूतपूर्व पल है. मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम नई ऊर्जा, नई उमंग, नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ेंगे. सभी कार्यकर्ताओं ने समर्पण भाव से अथक मेहनत की है, मैं इसके लिए उनका अभिनंदन करता हूं.

अखिलेश का क्लस्टर फॉर्मूला, जिसने उन्हें यूपी में बना दिया मैन ऑफ द मैच, 20 साल बाद सपा को मिली सबसे बड़ी जीत…

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अखिलेश का क्लस्टर फॉर्मूला, जिसने उन्हें यूपी में बना दिया मैन ऑफ द मैच, 20 साल बाद सपा को मिली सबसे बड़ी जीत…

हली बार रिजल्ट के दिन अखिलेश यादव अपने घर पर ही रहे. एक बार भी वे समाजवादी पार्टी ऑफिस नहीं गए, पर लगातार वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे. अपने घर से ही लगातार निर्देश देते रहे.

ये सिलसिला देर रात तक चलता रहा. फर्रुखाबाद में समाजवादी पार्टी करीब दो हजार वोटों से हार गई. पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगा गड़बड़ी की गई है. अखिलेश ने ही सबको शांत कराया. करीब 32 साल पुरानी समाजवादी पार्टी का लोकसभा चुनाव में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है.

अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी ने 38 सीटें जीत ली. साल 2004 के चुनाव में समाजवादी पार्टी को 35 सीटें मिली थीं. तब मुलायम सिंह यादव पार्टी के कर्ताधर्ता थे. लगातार चार चुनावों में हार के बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे, पर इस बार के लोकसभा चुनाव में वही अखिलेश यादव मैन ऑफ द मैच हैं. अकेले अपने दम पर उन्होंने बीजेपी को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने से रोक दिया.

इस बार के चुनाव के लिए अखिलेश यादव का फार्मूला रहा PDA (पीडीए). करीब सात महीने पहले उन्होंने इसकी घोषणा की थी. पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक को साथ लेकर चुनाव में उतरने की योजना बनी. अखिलेश को लगा कि अल्पसंख्यक के नाम पर बीजेपी मुसलमानों की आड़ में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर सकती है.

फिर उन्होंने PDA के A को कभी अगड़ा बताया तो कभी आधी आबादी मतलब महिलाएं. इसी फार्मूले पर अखिलेश यादव ने टिकट बांटे. इस बार ‘MY’ वाले सालों पुराने सामाजिक समीकरण को तिलांजलि दे दी गई. मुस्लिम और यादव तो हर हाल में समाजवादी पार्टी के साथ रहेंगे. इस सोच के आधार पर अखिलेश यादव ने इस बार के चुनाव में अपनी रणनीति बदल ली.

गैर यादव पिछड़ों और दलितों पर रहा फोकस

अखिलेश यादव का पूरा फोकस अब गैर यादव पिछड़ों और दलितों पर आ गया. ये कोशिश उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भी की थी. लेकिन इस बार सोशल इंजीनियरिंग करते समय अखिलेश ने क्लस्टर फार्मूला लगा दिया. मतलब हर इलाके के लिए एक अलग सामाजिक समीकरण बनाया. लोकसभा की एक सीट पर पटेल उम्मीदवार दिया तो बगल वाली सीटों पर आबादी के हिसाब से कहीं निषाद तो कहीं बिंद तो कहीं कुशवाहा प्रत्याशी दिए. सोशल इंजीनियरिंग का ये डबल डोज सुपरहिट रहा. मेनका गांधी के खिलाफ उन्होंने गोरखपुर से लाकर निषाद उम्मीदवार दे दिया. राम भुआल निषाद ने सुल्तानपुर में मेनका गांधी को हरा दिया. इसी तरह के कई प्रयोग अखिलेश ने किए.

उम्मीदवारों के चयन ने जीत को की पक्की

फैजाबाद लोकसभा सीट सुरक्षित नहीं है. लेकिन यहां उन्होंने एक दलित नेता अवधेश पासी को टिकट दे दिया. अयोध्या भी फैजाबाद लोकसभा सीट में है. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को बीजेपी ने बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था. लेकिन फैजाबाद में कुछ और ही नारे लग रहे थे. न अयोध्या न काशी, अबकी बार अवधेश पासी. समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद पासी बिरादरी के हैं. फैजाबाद के बगल वाली अंबेडकर नगर सीट पर कुर्मी और सुल्तानपुर में निषाद कैंडिडेट था. पिछड़े, अति पिछड़े और दलित समाज के साथ मुसलमान और यादव समाज के लोगों ने फैजाबाद से अवधेश प्रसाद की जीत पक्की कर दी.

चार पार्टियों के साथ किया गठबंधन

बीजेपी ने सामाजिक समीकरण का विस्तार करने के लिए यूपी में चार पार्टियों के साथ गठबंधन किया है. जाट वोट के लिए आरएलडी, निषाद वोट के लिए निषाद पार्टी, राजभर वोट के लिए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और पटेल कुर्मी वोट के लिए अपना दल. पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने भी इसी तरह का फार्मूला बनाया था. पर इस बार उनकी रणनीति बदल गई थी. बाहरी के बदले उन्होंने अपने को आजमाने की तैयारी कर ली थी. पल्लवी पटेल ने उनका साथ छोड़ दिया था. ऐसे में अखिलेश यादव ने इस बार गैर यादव पिछड़ी बिरादरी के लोगों को दिल खोल कर टिकट दिया. पटेल कुर्मी समाज के 10 कुशवाहा – शाक्य -सैनी बिरादरी के 6 नेताओं को टिकट दिया. इसी तरह निषाद जाति के 5 उम्मीदवार दिए. दलितों में उन्होंने पासी बिरादरी के 7 और जाटव समाज के 6 नेताओं को टिकट दिए. मायावती जाटव बिरादरी से हैं. यूपी के 11 प्रतिशत जाटव पिछले कई सालों से मायावती को वोट करते रहे हैं. पर अखिलेश यादव ने इस बार इन पर दॉंव लगाया और वे कामयाब भी रहे.

संविधान बदलने का मुद्दा बीजेपी पर पड़ा भारी

बीजेपी ने अखिलेश यादव को अपने गेम में फंसाने की बहुत कोशिशें की. राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में क्यों नहीं जायेंगे. इस पर बहुत विवाद हुआ. लेकिन चुनाव में ये बीजेपी का ये दांव नहीं चला. अखिलेश यादव लगातार अपने पिच पर डटे रहे. बेरोजगारी, मंहगाई, पेपरलीक के मुद्दे उठाते रहे. आंटा के साथ डेटा मुफ्त में देने का वादा करते रहे. बीजेपी के चार सौ पार के नारे को अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने संविधान बचाने की लड़ाई बना दी. गांव-गांव तक ये बात फैल गई कि बीजेपी की सरकार बनी तो फिर संविधान बदल जाएगा. दलितों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार सफाई दी. लेकिन ये बात लोगों के दिमाग में घर कर चुकी थी. यही वजह है कि मायावती के वोटरों ने भी अखिलेश यादव का साथ दे दिया. यूपी की राजनीति में ये एक बड़ी टर्निंग प्वाइंट है. आकाश आनंद के एपिसोड के बाद बीएसपी की छवि कुछ हद तक बीजेपी की ‘बी’ टीम की बन चुकी थी. ऐसे में कांग्रेस से गठबंधन ने सोने में सुहागे का काम किया

”रायबरेली लोकसभा सीट से करीब 4 लाख मतों से जीते राहुल गांधी”

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”रायबरेली लोकसभा सीट से करीब 4 लाख मतों से जीते राहुल गांधी”

त्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में इस बार अप्रत्याशित परिणाम सामने आया है और केंद्र तथा राज्य में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी को जोर का झटका लगा है. जबकि साल 2017 के बाद फिर से मिलकर चुनावी मैदान में उतरे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को इस बार शानदार जीत हाथ लगी है.

ये दोनों दल इस बार इंडिया गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़े और 80 में से 43 सीटों पर जीत हासिल की है, इसमें सबसे अहम सीटों में से एक सीट है रायबरेली. इस सीट से पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी जीत मिली है.

लोकसभा चुनाव के लिए पर्चा दाखिल के अंतिम दौर में राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश में अमेठी सीट की जगह रायबरेली सीट से मैदान में उतारने का फैसला लिया गया. कांग्रेस का यह फैसला काम कर गया और राहुल गांधी को यहां पर आसान जीत मिल गई. राहुल ने 6,87,649 वोट हासिल किया तो उनके प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट आए. मतगणना शुरू होने के साथ ही लगातार बढ़त बनाए रखने वाले राहुल गांधी ने अंत में 3,90,030 मतों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल कर लिया. वह लगातार पांचवीं बार सांसद चुने गए हैं. वह वायनाड से भी चुनाव जीत गए हैं.

मां सोनिया ने बेटे के लिए छोड़ी सीट

राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2004 से की. इस दौरान उन्होंने पहली बार अमेठी लोकसभा सीट से चुनावी किस्मत आजमाई थी. साल 2004 में उनकी मां सोनिया गांधी ने बेटे के लिए अमेठी छोड़ दी. तब के चुनाव में उन्हें पहली बार जीत मिली. फिर वह 2009 और 2014 के चुनाव में भी विजयी हुए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में तो राहुल ने अमेठी सीट से ही बीजेपी नेता स्मृति इरानी को हराया था.

हालांकि 2019 के चुनाव में एक बार फिर दोनों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, लेकिन इस बार यह लड़ाई बेहद कांटे की रही और अंत तक चले संघर्ष में उन्हें स्मृति इरानी के हाथों हार मिली. राहुल ने अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ा था और वहां पर 4,31,770 मतों के अंतर से सीपीआई के प्रत्याशी पीपी सुनीर को हरा दिया. इस तरह से वह लगातार चौथी बार सांसद चुने गए.

2019 की तरह 2024 में भी 2 जगह

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को हुआ था. 2019 की तरह इस बार भी वह 2 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरे. रायबरेली के अलावा वायनाड सीट से भी अपनी किस्मत आजमाई. राहुल को यहां पर भी खास चुनौती नहीं मिली और वह आसान मुकाबले में चुनाव जीत गए.

हालांकि 2019 के चुनाव में राहुल को वायनाड सीट से 7,06,367 वोट मिले थे और वह 4,31,770 मतों के अंतर से जीत मिली थी. लेकिन इस बार न सिर्फ उनका वोट प्रतिशत घटा बल्कि जीत का अंतर भी कम हो गया. राहुल को कुल 6,47,445 वोट मिले और उन्होंने सीपीआई की प्रत्याशी एन्नी राजा को 3,64,422 मतों के अंतर से हराया. यहां पर बीजेपी का प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा और उन्हें 1,41,045 वोट मिले.

देहरादून से हुई शुरुआती शिक्षा

राहुल 2019 से लेकर 2024 तक वायनाड सीट से सांसद रहे. वह दिसंबर 2017 से जुलाई 2019 तक कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे. तब के आम चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

दिल्ली में पैदा हुए राहुल गांधी की शुरुआती शिक्षा देहरादून में हुई. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. लेकिन इस बीच उनके पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा वजहों से वह फ्लोरिडा चले गए और रोलिंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की. वह अविवाहित हैं.

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद राहुल ने लंदन में एक कंपनी में नौकरी भी की. बाद में वह स्वदेश लौट आए और मुंबई में आईटी फर्म का गठन किया. फिर कुछ समय बदराहुल गांधी साल 2004 में राजनीति में आए और पहली बार 14वें आम चुनाव में अमेठी से सांसद बने. 2017 में वह मां सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता बने और 2019 के भारतीय आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व किया. इस दौरान कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बदतर रहा. इस चुनाव में खुद राहुल गांधी भी अपनी परंपरागत सीट अमेठी हार गए. ऐसे में राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

देशभर में निकाली भारत जोड़ो यात्रा

राहुल गांधी अपने भाषणों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमला करते रहे हैं. उनके भाषणों में बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे रहे हैं. राहुल गांधी पर नेशनल हेराल्ड केस में वित्तीय अनियमितता करने के आरोप भी लगे. उनसे इस में केंद्रीय एजेंसियों ने पूछताछ भी की. पिछले साल गुजरात की एक अदालत ने अप्रैल 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान मोदी सरनेम को लेकर की गई टिप्पणी पर 2 साल के कारावास की सजा सुनाई थी. कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई थी. लेकिन हाईकोर्ट की ओर से निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया गया.

राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा को लेकर भी सुर्खियों में रहे. 7 सितंबर 2022 को राहुल ने तमिलनाडु के कन्याकुमारी शहर से यह यात्रा शुरू की थी लोगों से संवाद करते और रैलियों को संबोधित करते हुए कश्मीर तक पैदल गए. कई महीनों तक चली उनकी यह यात्रा 29 जनवरी 2023 को लाल चौक श्रीनगर में संपन्न हुई. साल 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के नाम से एक और यात्रा शुरू की.

Lok Sabha Election Results 2024: ग्रहों की मानें तो एनडीए और इंडिया के लिए आज का दिन खास है. आज बड़े उलटफेर होने की ख़बरे आ सकती है.

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Lok Sabha Election Results 2024: ग्रहों की मानें तो एनडीए और इंडिया के लिए आज का दिन खास है. आज बड़े उलटफेर होने की ख़बरे आ सकती है.

पॉलिटिक्स की दृष्टि से आने वाले दो दिन बहुत ही महत्वपूर्ण हैं.

ग्रहों की गणना से मानें तो इन दो दिनों में चौंकाने वाली चीजें घटित हो सकती हैं. लेकिन आज का दिन भी कम महत्वपूर्ण नहीं है, इस दिन की स्थिति क्या रहेगी, समझते हैं.

लोकसभा चुनाव के नीतेज घोषित होने के बाद भी दलों ने राजनैतिक बिसात बिछा दी है. हर कोई एक दूसरे की चाल को समझने में लगा है. आज ग्रह नक्षत्रों की चाल कुछ खास है.

प्लस माइनस करने में गुजरेगा दिन
पंचांग के अनुसार इस दिन शाम 7 बजकर 57 मिनट तक चतुर्दशी की तिथि रहेगी. इसके बाद अमावस्या की तिथि आरंभ हो जाएगी. हिंदू पौराणिक ग्रंथों में इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है.

इसी तिथि को अनंत चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली भी मनाई जाती है. इस तिथि को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर भी देखा जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था.

5 जून की चतुर्दशी सभी दलों के नेताओं के लिए विशेष है. इस दिन वे रणनीति बनाने में व्यस्त रहेगें. उन लोगों को सफलता मिलेगी जो सच्चे मन से लोगों की भलाई के लिए प्रयासरत है, स्वार्थ की भावना से किए गए कार्य और लिए गए निर्णय फलिभूत नहीं होगें.

इस तिथि के देवता गणेश जी हैं. गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. ये दिन गुणा गणित का रहेगा. सफल वही होगा जो जिस पर गणपति बप्पा की कृपा रहेगी. वहीं जिन लोगों की कुंडली और राजनैतिक दलों की कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत है उन्हे विशेष सफलता मिल सकती है.

आज अमावस की रात

5-6 जून को अमावस्या (Amavasya June 2024) की तिथि रहेगी. पंचांग के अनुसार 5 की शाम से ही अमावस की तिथि प्रारंभ हो जाएगी. कह सकते हैं आज अमावस की रात भी है. अमावस की रात ही में कुछ ऐसा होगा, जो नई सरकार के गठन में अहम रोल निभाएगा. ज्येष्ठ का महीना चल रहा है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि को ही शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है.

शनि जयंती (Shani Jayanti 2024) पड़ने के कारण 5-6 जून का दिन सभी पार्टियों के लिए विशेष रहेगा. 2024 में शनि प्रभावी हैं. शनि न्याय के कारक हैं. राजनीति में ये जनता, मजदूर और कमजोर तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं.

हिंदू नववर्ष के अनुसार इस वर्ष राजा मंगल तो शनि (Shani Dev) मंत्री की भूमिका में हैं. इसलिए ये तो तय है कि जो भी दल सरकार बनाए वो कमजोर वर्गों की राजनीति करने वाले दलों को अनदेखा नहीं कर पाएगा.

मध्य प्रदेश में CM मोहन ने रचा इतिहास, आजादी के बाद पहली बार सभी 29 सीटों पर BJP का कब्जा…

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मध्य प्रदेश में CM मोहन ने रचा इतिहास, आजादी के बाद पहली बार सभी 29 सीटों पर BJP का कब्जा…

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने यूपी, बिहार तक रोड शो और प्रचार-प्रसार किया, लेकिन मध्य प्रदेश में अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी. कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इतिहास रच दिया है.

आजादी के बाद से पहली बार ऐसा मौका आया है, जब मध्य प्रदेश में सभी 29 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराया है.

देश की आजादी के बाद से ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी का लोकसभा चुनाव में अच्छा और बुरा वक्त रहा, मगर यह पहला मौका आया जब मध्य प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीत दर्ज करवा दी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव का इस चुनाव परिणाम से पार्टी में कद बढ़ गया है.

हालांकि, 29 लोकसभा सीट को जीतने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कांग्रेस के गढ़ में लगातार सेंध लगाई. छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर कांग्रेस विधायक कमलेश प्रताप शाह को बीजेपी ज्वाइन कराई गई. इसके बाद महापौर को भी बीजेपी में लाया गया. इतना ही नहीं कांग्रेस के दो और मौजूदा विधायक चुनाव के पहले बीजेपी में शामिल हो गए. इससे लगातार बीजेपी का पलड़ा भारी होता चला गया.

42 विधायक तमाम बड़े नेता बीजेपी में शामिल
लोकसभा चुनाव मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद लोकसभा चुनाव के पहले तक भारतीय जनता पार्टी ने 42 विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद और कांग्रेस के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर शामिल कांग्रेस नेताओं को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलवा दी. मध्य प्रदेश में पहली बार वार्ड और तहसील स्तर तक सदस्यता अभियान चला कर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं तक सभी को बीजेपी में शामिल करने का अभियान चलाया गया.

27 सीटों पर ही कांग्रेस ने भाग्य आजमाया
मध्य प्रदेश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ जब भारतीय जनता पार्टी के सामने कांग्रेस ने केवल 27 सीटों पर ही चुनाव लड़ा. खजुराहो लोकसभा सीट पर जहां “इंडिया” गठबंधन के प्रत्याशी ने नामांकन भरने में गलती कर दी, जिसके चलते उनका नामांकन निरस्त हो गया. वहीं इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी ने बीजेपी को समर्थन दे दिया. इस प्रकार आजादी के बाद से पहली बार केवल 27 सीट पर ही कांग्रेस चुनाव लड़ पाई.

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी राउज ऐवन्यू कोर्ट ने खारिज…

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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी राउज ऐवन्यू कोर्ट ने खारिज…

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी राउज ऐवन्यू कोर्ट ने खारिज कर दी है. उन्होंने शराब नीति मामले में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी.

इसी के साथ राउज एवेन्यू कोर्ट ने 14 दिनों के लिए अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी. हिरासत 19 जून तक बढ़ाई गई है. सीएम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया.

21 दिनों के लिए बाहर आए थे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल को ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी को सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए 21 दिनों की अंतरिम जमानत दी और कहा कि वो दो जून को सरेंडर करें.

कोर्ट ने इसके साथ ही शर्त लगाई कि वो सीएम दफ्तर नहीं जाएंगे और न ही कोई सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करेंगे. जरूरत पड़ने पर उन्हें उप-राज्यपाल से इजाजत लेनी होगी.

अंतरिम जमानत के दौरान ही स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सीएम केजरीवाल ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की अपील की. इसके लिए उन्होंने बाद में राउज एवेन्यू कोर्ट में भी याचिका दाखिल की. सुनवाई के दौरान ईडी ने उनकी याचिका का विरोध किया. अब अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है.

आम आदमी पार्टी का आरोप

बता दें कि दिल्ली आबकारी नीति को आम आदमी पार्टी (आप) राजनीतिक साजिश बताती रही है. पार्टी का कहना है कि बीजेपी आप को खत्म करना चाहती है. सीएम ने भी लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान हर मंच से ये आरोप लगाए. सरेंडर करने से पहले सीएम केजरीवाल ने कहा कि उन्हें ये नहीं पता है कि अब वो जेल से कब बाहर आएंगे.

Lok Sabha Elections Result 2024: PM पद से इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी का पहला रिएक्शन, एनडीए की बैठक में सरकार के गठन को लेकर चर्चा…

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Lok Sabha Elections Result 2024: PM पद से इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी का पहला रिएक्शन, एनडीए की बैठक में सरकार के गठन को लेकर चर्चा…

नरेंद्र मोदी ने बुधवार (5 जून) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रधानमंत्री से अपना इस्तीफा सौंप दिया. आज शाम होने वाली एनडीए की बैठक में सरकार के गठन को लेकर चर्चा होनी है.

इस बीच मंत्रिपरिषद की मीटिंग में मोदी ने कहा कि राजनीति में उतार चढ़ाव तो आता रहता है. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया.

दरअसल, मंगलवार (4, जून) को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. NDA गठबंधन को 293 सीटों पर जीत मिली है. जबकि इंडिया गठबंधन ने 234 सीटो पर बाजी मारी है. नतीजे आने के एक दिन बाद बुधवार (5, जून) को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के पद से से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मु को सौंप दिया है.

मोदी का विपक्ष पर हमला

नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने का काम किया. आगे भी और बेहतर करेंगे. उन्होंने कहा कि जीते हम हैं, लेकिन दूसरे वाले उछल रहे हैं. हमारी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है.

सरकार बनाने के लिए बैठकों का दौर शुरू

NDA और इंडिया अलायंस की सरकार बनाने को लेकर अलग-अलग बैठकें भी होनी है. चुनाव के नतीजे आने के बाद अब नई सरकार बनाने की कवायद तेज हो चुकी है. हालांकि, दोनों और से बयानों का दौर भी चल पड़ा है. NDA तीसरी बार सरकार बनाने का दावा पेश कर रहा है. तो वहीं इंडिया अलायंस की ओर से भी दावे किए जा रहे हैं.

NDA के साथ ही रहेंगे नीतीश और चंद्रबाबू नायडू

इस बीच जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू NDA की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं. नीतीश कुमार ने BJP को समर्थन देने के पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सरकार बनेगी. वहीं, चंद्रबाबू नायडू ने भी NDA में बने रहने की बात कही है.