राज्यसभा में उठी महत्वपूर्ण चिंता
बुधवार को राज्यसभा में एक संवेदनशील मुद्दा प्रस्तुत किया गया। इसमें सुझाव दिया गया कि विदेश यात्रा करने वाले व्यक्तियों से एफिडेविट लिया जाए।
इस एफिडेविट के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेश जाने वाले युवा अपने माता-पिता की देखभाल करेंगे और उनसे नियमित संपर्क बनाए रखेंगे।
बुजुर्गों की देखभाल का मुद्दा
राज्यसभा में बताया गया कि हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां विदेश में रहने वाले युवाओं ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेहत का ध्यान नहीं रखा। यहां तक कि कुछ माता-पिता की मृत्यु होने पर भी उनके बच्चे वापस नहीं लौटे। भाजपा सांसद राधा मोहनदास अग्रवाल ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि देश में लगभग साढ़े तीन करोड़ लोग विदेशों में निवास करते हैं, जिनमें से कई के माता-पिता भारत में हैं।
सरकारी कानून की कमी
अग्रवाल ने सदन में बताया कि कई माता-पिता ने अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी है। उन्होंने इंदौर और दिल्ली की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ माता-पिता की मृत्यु के बाद भी उनके बच्चे वापस नहीं आए, जिससे उनका अंतिम समय अकेलेपन में बीता। उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007, अभी भी पूरी तरह से प्रभावी नहीं है।
एफिडेविट का सुझाव
अग्रवाल ने सुझाव दिया कि विदेश जाने वाले व्यक्तियों से एफिडेविट लिया जाए, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि वे अपने माता-पिता की देखभाल करेंगे, स्वास्थ्य बीमा कराएंगे और नियमित संपर्क बनाए रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा प्रमाण हर छह महीने में नहीं मिलता, तो भारत सरकार को उनके पासपोर्ट निरस्त करने का अधिकार होना चाहिए।
बुजुर्गों की सुरक्षा की आवश्यकता
अग्रवाल ने सदन से आग्रह किया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए ताकि देश के वरिष्ठ नागरिकों को अकेलेपन और अनदेखी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि विदेश में पढ़ाई करने वाले बच्चों के माता-पिता अक्सर अपने सुख को त्यागकर उन्हें विदेश भेजते हैं। समय के साथ, उनका अपने माता-पिता के प्रति लगाव कम होता जाता है।
अंतिम समय में बच्चों की अनुपस्थिति
उन्होंने इंदौर की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक व्यक्ति के माता-पिता की मृत्यु के बाद उनके बच्चे 20 दिन तक लौटकर नहीं आए। ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे बुजुर्गों का जीवन दुखदायी हो जाता है।
सरकार से अपील
अग्रवाल ने विदेश मंत्री से अनुरोध किया कि विदेश जाने वाले व्यक्तियों से एक एफिडेविट लिया जाए, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि वे अपने माता-पिता की देखभाल के लिए एक निश्चित राशि भेजेंगे और नियमित रूप से उनसे संपर्क करेंगे।



