विजया एकादशी का महत्व;
13 फरवरी को मनाई जाएगी विजया एकादशी
विजया एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने लंका पर विजय पाने के लिए इसी दिन का व्रत किया था।
2026 में यह पर्व 13 फरवरी को मनाया जाएगा। यदि आप अपने जीवन में बाधाओं को दूर करना चाहते हैं और सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस दिन कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक है।
विजया एकादशी पर क्या करें?
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं।
इस दिन सामर्थ्य अनुसार अन्न, जल या गर्म कपड़ों का दान करें। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना उत्तम माना जाता है।
संभव हो तो रात में सोएं नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन करते हुए भगवान का ध्यान करें।
विजया एकादशी पर क्या न करें?
एकादशी के दिन चावल खाना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है।
इस दिन प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का सेवन न करें।
एकादशी का व्रत संयम का प्रतीक है। इस दिन किसी को अपशब्द न बोलें, गुस्सा न करें और न ही किसी की बुराई करें।
भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजन के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
इस दिन दिन के समय सोने से बचें और अपना समय प्रभु की भक्ति में लगाएं।



