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CG Weather Update: छत्‍तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदला, जानें ताजा अपडेट…

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मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में अभी तक 14 जिलों में कम वर्षा, 12 जिलों में सामान्य वर्षा और एक जिले में अति कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा के आसार है। साथ ही शुक्रवार से अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी।

बीते कुछ दिनों से प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला है और विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। इसके चलते अधिकतम तापमान में गिरावट भी आ रही है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार मानसून द्रोणिका बीकानेर, गुना, मंडल, रायपुर और उसके बाद दक्षिण पूर्व की ओर पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी तक 2.1 किमी ऊंचाई तक है। इसके प्रभाव से गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा के आसार है। साथ ही कुछ क्षेत्रों में बिजली भी गिर सकती है।

बीजापुर में सर्वाधिक 1386.8 मिमी बारिश

प्रदेश में अभी तक बीजापुर में सर्वाधिक 1386.8 मिमी वर्षा हुई है,जो सामान्य से 18 फीसद ज्यादा है। इसी प्रकार सरगुजा में 412.2 मिमी वर्षा हुई है,जो सामान्य से 61 फीसद कम है और इस जिले में अति कम वर्षा हुई है। रायपुर जिले में वर्षा की स्थिति सामान्य है,यहां 966.8 मिमी बारिश हुई है।

International Literacy Day 2023: 8 सितंबर को मनाया जाएगा 58 वां विश्व साक्षरता दिवस, जानें इस साल क्या है थीम…

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International Literacy Day 2023। पूरी दुनिया में हर साल 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। आपको बता दें कि International Literacy Day मनाने की शुरुआत साल 1966 में यूनेस्को द्वारा की गई थी और इसके बाद 8 सितंबर 1966 को दुनिया में पहली बार International Literacy Day दिवस मनाया गया था।

इस साल 8 सितंबर को 58वां साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है।

किसलिए मनाते हैं विश्व साक्षरता दिवस

भारत सहित दुनिया के कई देशों में शिक्षा पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में देश के हर नागरिक को शिक्षा प्राप्त करने के लिए जागरूक करना ही International Literacy Day का मुख्य उद्देश्य है। भारत में इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से ‘सर्व शिक्षा अभियान‘ बीते कई सालों से चलाया जा रहा है और साक्षरता की दिशा में इस अभियान ने सराहनीय काम किया है।

ऐसे हुई थी विश्व साक्षरता दिवस की शुरुआत

1965 में तेहरान में दुनियाभर के शिक्षा मंत्रियों का एक विश्व सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसी सम्मेलन में हर साल 8 सितंबर को International Literacy Day मनाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद इस प्रस्ताव को 1966 में यूनेस्को के 73वें सत्र में एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने अपना लिया गया था।

International Literacy Day पर इस साल की थीम

दुनिया भर में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए UNESCO द्वारा एक नई Theme घोषित की जाती है, जिसके आधार पर दुनिया भर में International Literacy Day मनाया जाता है। इस साल यूनेस्को ने विश्व साक्षरता दिवस 2023 की थीम ‘परिवर्तनशील दुनिया के लिए साक्षरता को बढ़ावा देना: टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाजों की नींव का निर्माण करना’ घोषित की है। वहीं बीते साल 2022 में विश्व साक्षरता दिवस की थीम “ट्रांसफॉर्मिंग लिटरेसी लर्निंग स्पेसेस” थी।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

World Cup 2023: BCCI ने 4 लाख टिकट बेचने का किया ऐलान, जानें कब शुरू होगी बिक्री, कैसे खरीद सकेंगे?

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World Cup 2023: भारत में 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले विश्व कप 2023 के लिए टिकटों की बिक्री एक बार फिर शुरू होने वाली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी (BCCI) ने बुधवार को फैंस के लिए यह खुशखबरी दी है।

बीसीसीआई की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में बताया गया है कि कि जिन वेन्यू पर मुकाबले होना है, वहां के स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से चर्चा की गई है। जिसके बाद लगबग 4 लाख टिकटों की बिक्री की जाएगी।

दरअसल, साल 2011 के बाद भारत में वनडे विश्व कप का आयोजन होना है। इसे लेकर फैंस में जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। टिकटों की बिक्री के दूसरे फेज में वह लोग भी टिकट खरीद सकेंगे, जिन्हें पहले राउंड में किसी भी कारण बस टिकट नहीं मिल पाया था। भारत में 5 अक्टूबर से 19 नवंबर के बीच वर्ल्ड कप का आयोजन किया जाना है। इसका शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया गया है।

कब शुरू होगी विश्व कप के टिकटों की बिक्री

विश्व कप के मैचों के लिए टिकटों की सामान्य बिक्री 8 सितंबर को भारतीय समय के हिसाब से रात 8 बजे से शुरू होगी। फैंस https://tickets.cricketworldcup.com बेवसाइट्स पर जाकर टिकट बुक कर सकेंगे।

बीसीसीआई ने विज्ञप्ति में क्या कहा?

बीसीसीआई की तरफ से जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया ‘दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमी अब साल की सबसे बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए अपनी जगह पक्की कर सकते हैं। आठ सितंबर 2023 को भारतीय समयानुसार रात आठ बजे से सभी मैचों के टिकटों की बिक्री शुरू होगी। प्रशंसक आधिकारिक वेबसाइट https://tickets.cricketworldcup.com पर जाकर टिकट खरीद सकते हैं। समय आने पर प्रशंसकों को टिकटों की बिक्री के अगले चरण की जानकारी दी जाएगी।’

मोहन भागवत ने बताया कब तक लागू रहेगा आरक्षण सिस्टम, अखंड भारत पर दिया बड़ा बयान

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RSS chief Mohan Bhagwat on Reservations: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर जारी घमासान के बीच बुधवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे समाज में भेदभाव मौजूद है, जब तक असमानता बनी रहेगी, आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने अखंड भारत की परिकल्पना पर भी प्रतिक्रिया दी। संघ प्रमुख ने कहा कि यदि आज से अखंड भारत की दिशा में काम शुरू कर दो तो बूढ़े होने तक सपना पूरा हो जाएगा।

2 हजार सालों तक झेली यातना

नागपुर के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हमने अपने ही साथी मनुष्यों को सामाजिक व्यवस्था में पीछे रखा। हमने उनकी परवाह नहीं की और यह 2000 वर्षों तक जारी रहा। जब तक हम उन्हें समानता प्रदान नहीं करते, तब तक कुछ विशेष उपाय करने होंगे और आरक्षण उनमें से एक है। भेदभाव होने तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। आरएसएस में हम संविधान में दिए गए आरक्षण को पूरा समर्थन देते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव मौजूद है, भले ही हम इसे देख न सकें।

उन्होंने कहा कि अगर समाज के जिन वर्गों को भेदभाव का सामना करना पड़ा, वे 2000 वर्षों तक पीड़ित रहे, तो हम (जिन्हें भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा) अगले 200 सालों तक क्या कुछ परेशानी नहीं झेल सकते हैं।

जो लोग अलग हुए, उन्हें अब गलती का एहसास

एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वह ठीक-ठीक नहीं बता सकते कि अखंड भारत कब अस्तित्व में आएगा। लेकिन अगर आप इसके लिए काम करते रहेंगे, तो आप बूढ़े होने से पहले इसे साकार होता हुआ देखेंगे। क्योंकि हालात ऐसे बन रहे हैं कि जो लोग भारत से अलग हो गए, उन्हें लगता है कि उन्होंने गलती की है। उन्हें लगता है कि हमें फिर से भारत होना चाहिए था। वे कहते हैं सोचते हैं कि भारत बनने के लिए उन्हें मानचित्र पर रेखाओं को मिटाने की आवश्यकता है। लेकिन ऐसा नहीं है। भारत बनना भारत की प्रकृति को स्वीकार करना है।

क्या संघ ने नहीं फहराया ध्वज?

इस दावे के बारे में एक सवाल पर कि आरएसएस ने 1950 से 2002 तक यहां महल क्षेत्र में अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया था, भागवत ने कहा कि हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को हम जहां भी हों, राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। नागपुर में महल और रेशिमबाग में हमारे दोनों परिसरों में ध्वजारोहण किया जा रहा है। लोगों को हमसे यह सवाल नहीं पूछना चाहिए। इसके बाद उन्होंने 1933 में जलगांव के पास कांग्रेस के तेजपुर सम्मेलन के दौरान की एक घटना को याद किया जब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 80 फीट के खंभे पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।

उन्होंने बताया, करीब 10,000 की भीड़ के सामने झंडा बीच में फंस गया, लेकिन एक युवक आगे आया। खंभे पर चढ़ गया और उसे छुड़ा लिया। भागवत ने दावा किया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने युवाओं को अगले दिन सम्मेलन में अभिनंदन के लिए उपस्थित होने के लिए कहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि युवा आरएसएस की ‘शाखा’ में शामिल हुए थे।

आरएसएस प्रमुख ने कहा, जब (आरएसएस संस्थापक) डॉ केशव बलिराम हेडगेवार को यह पता चला, तो वह युवक के घर गए और उसकी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि युवक का नाम किशन सिंह राजपूत है।

उन्होंने कहा कि आरएसएस उस समय से ही राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़ा रहा है जब पहली बार उसे किसी समस्या का सामना करना पड़ा था। हम भी इन दो दिनों (15 अगस्त और 26 जनवरी) पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। जब राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की बात आती है, तो हमारे स्वयंसेवक सबसे आगे रहे हैं और अपना जीवन देने के लिए तैयार रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी आसियान-भारत,पूर्वी एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने इंडोनेशिया पहुंचे

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जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आसियान-भारत बैठक और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बृहस्पतिवार सुबह इंडोनेशिया पहुंच गए। इस दौरान प्रधानमंत्री सामरिक रूप से अहम क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भारत की साझेदारी के संबंध में चर्चा करेंगे।

मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘जकार्ता पहुंच गया हूं। आसियान से संबंधित बैठकों तथा इस धरती को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न नेताओं से मुलाकात करने को लेकर उत्सुक हूं।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आसियान से जुड़ी बैठकों में हिस्सा लेने के लिए जकार्ता पहुंच गए। यह अहम क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर आसियान और ईएएस के नेताओं के साथ जुड़ने का अवसर है।” जकार्ता के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ‘आसियान’ के साथ जुड़ाव को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक ‘महत्वपूर्ण स्तंभ’ करार दिया और कहा कि पिछले वर्ष हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी ने दोनों पक्षों के संबंधों में नई ऊर्जा का संचार किया है। इंडोनेशिया, ‘आसियान’ (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। आसियान को क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है और भारत तथा अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देश इसके संवाद भागीदार हैं। बैठक के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समयानुसार पूर्वाह्न 11 बजकर 45 मिनट पर दिल्ली के लिए रवाना होंगे और वीरवार शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट पर दिल्ली पहुंचेंगे। अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ बैठक भी शामिल है। जी-20 शिखर सम्मेलन नौ और 10 सितंबर को नयी दिल्ली में आयोजित होने वाला है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत अन्य नेता विकासशील और विकसित देशों की बैठक में हिस्सा लेंगे।

UPI ATM: कार्ड की झंझट खत्म! अब UPI के जरिए ATM से निकलेगा पैसा, जानिए कैसे!

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UPI Using ATM: भारत का पहला UPI एटीएम लॉन्च हो चुका है. हिताची लिमिटेड की सहायक कंपनी हिताची पेमेंट सर्विसेज ने UPI ATM को लॉन्च किया है. इस सुविधा की मदद से अब बिना डेबिट या एटीएम कार्ड के आप यूपीआई के जरिए पैसा एटीएम से निकाल पाएंगे.

भारत के लोगों को यह सुविधा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सहयोग से UPI एटीएम का व्हाइट लेबल एटीएम (WLA) के रूप में इसे पेश किया गया है. यह एटीएम यूजर्स को मल्टीपल अकाउंट से यूपीआई ऐप के जरिए पेमेंट करने की सुविधा देती है.

फ्रॉड रोकने में होगी मददगार

यह नॉन बैंकिंग संस्थाओं की ओर से संचालित होगा. यह केवल नया अनुभव ही नहीं देगा, बल्कि बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पैसा निकालने की लिमिट बढ़ा देगी. इसके अलावा, यूपीआई एटीएम को कार्ड स्किमिंग जैसे वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में एक सकारात्मक उपाय के रूप में देखा जा रहा है.

यूपीआई एटीएम कैसे करेगा काम

मुंबई के ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में रविसुतंजनी कुमार की ओर से एक वीडियो डेमो शेयर किया गया है, जिसमें यूपीआई एटीएम को एक टच पैनल के रूप में देखा जा सकता है. दाईं ओर यूपीआई कार्डलेस कैश पर टैप करने से एक और विंडो ओपन होता है, जिसमें कैश रकम का विकल्प जैसे 100 रुपये, 500 रुपये, 1000 रुपये, 2000 रुपये, 5000 रुपये और अन्य राशियों के लिए एक बटन ​दिया है. इसका चयन करने के बाद स्क्रीन पर क्यूआर कोड आता है.

अब किसी भी यूपीआई ऐप का उपयोग करके आपको स्कैन करना होगा. कोड स्कैन होने के बाद यूजर्स को अपना वांछित बैंक अकाउंट चुनने और ​कंफर्म पर क्लिक करने के लिए कहा जाएगा. अब कैश निकालने के लिए पुष्टि करना होगा. इसके बाद यूपीआई पिन दर्ज करना होगा. ऐसा करने के बाद यूपीआई संदेश भेजा जाएगा कि ट्रांजेक्शन होने जा रहा है. इसके बाद एटीएम आपका पैसा निकाल देगा.

UPI एटीएम एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर बनाया गया है. अब तक हिताची पेमेंट सर्विसेज एकमात्र WLA ऑपरेटर है, जो कैश जमा भी प्रदान करता है और 3000 से अधिक एटीएम स्थानों के नेटवर्क तक पहुंच रखता है.

Jawan Release Celebration: ‘जवान’ का तूफान, शाहरुख खान की एंट्री पर झूम उठे फैंस, वायरल हो रहे वीडियोज

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Jawan: बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की मचअवेटेड फिल्म ‘जवान’ का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ. एटली की फिल्म आज 7 सितंबर को पूरे देशभर में रिलीज हो चुकी है. शाहरुख के चाहने वाले ‘जवान’ का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने के लिए बताब थे.

फिल्म की जबरदस्त एडवांस बुकिंग के बाद आलम ऐसा है कि बीती रात से ही थिएटर्स के बाहर भयंकर भीड़ देखी जा रही है. इतना ही नहीं, शाहरुख के फैंस उनके फिल्म को सेलिब्रेट करने के लिए थिएटर्स के बाहर ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचे हैं.

शाहरुख की एंट्री पर झूमे फैंस
वहीं थिएटर के अंदर के कुछ वीडियोज सामने आए हैं, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. इन वायरल वीडियोज में फैंस अपने चहेते सुपरस्टार की एंट्री पर खुशी से झूमते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं शाहरुख खान के लिए फैंस की दीवानगी देखने लायक है. पूरा थिएटर शाहरुख की एंट्री पर झूमता हुआ नजर आ रहा है. थिएटरर्स में लोग अपनी सीटों से उठकर फिल्म के गानों पर डांस करते हुए नजर रहे हैं.

ओपनिंग पर करेगी रिकॉर्ड तोड़ कमाई
‘पठान’ के बाद शाहरुख खान को एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक्शन करते हुए देखना फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है. इस फिल्म की चर्चा पूरे देशभर में है. वहीं जन्माष्टमी के साथ-साथ लोगों के बीच किंग खान का भी क्रेज साफ नजर आ रहा है. कई लोग तो कृष्ण भगवान की फोटो के साथ शाहरुख की तस्वीर लगाए थिएटर के बाहर घूम रहे हैं. इन सब से बीच एक चीज तो साफ है कि फिल्म अपने ओपनिंग डे पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली है.

MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस नेता के जरिए दांव खेलेगी कांग्रेस, होंगी 40 से ज्यादा रैलियां…

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MP: मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जोकि लेकर कांग्रेस ने कमर कस ली है. जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं.

बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी का पूरा फोकस मध्य प्रदेश पर ही होगा. जानकारी के अनुसार चुनावी समर में प्रियंका गांधी प्रदेश में 40 से ज्यादा रैली और सभाएं करेंगी. बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश चुनाव को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूरी प्लानिंग बना ली है. इस प्लानिंग के तहत कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है.

बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी मध्य प्रदेश में 40 से ज्यादा सभा और रैली करेंगी. माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी हर दूसरे दिन मध्य प्रदेश में रहेंगी, इस दौरान वे एक दिन में 2 से 3 रैलियां करेंगी. कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की प्लानिंग बनी है जिसके अनुसार राहुल गांधी को राजस्थान और तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई है. जबकि प्रियंका गांधी को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रियंका गांधी के साथ कई बार राहुल गांधी भी साथ नजर आएंगे. इस दौरान प्रियंका गांधी के साथ राहुल गांधी भी जनसभा को संबोधित करेंगे. बताया जा रहा है कि चुनावों की घोषणा होते ही प्रियंका गांधी के मध्य प्रदेश दौरे शुरु हो जाएंगे.

प्रियंका ने दी है 5 गारंटी
बता दें मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने 5 गारंटी दी हैं. इन गारंटियों में हर परिवार को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, ग्रेजुएट बेरोजगार को 3 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता और डिप्लोमा होल्डर्स को 1500 रुपए महीने भत्ता, परिवार की एक महिला को 2 हजार रुपए के अलावा गरीब व्यक्ति को हर महीने 10 किलो मुफ्त अनाज, महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त सफर शामिल है.

RSS चीफ मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान पर टीएस सिंहदेव बोले- उनका अनुभव ठीक नहीं रहा…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता और डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने प्रतिक्रिया दी है. डिप्टी सीएम ने बिहार चुनाव से पहले मोहन भागवत के बयान का जिक्र किया है.

उन्होंने यह भी मांग की है कि केंद्र सरकार को विशेष सत्र का एजेंडा बताना चाहिए.

डिप्टी सीएम ने मोहन भागवत के बयान पर कहा कि बिहार चुनाव से पहले भागवत जी का बयान आया था उनका अनुभव ठीक नहीं रहा. विशेष सत्र के मुद्दे पर सिंहदेव ने कहा कि हम लोग इतंजार कर रहे है की कहीं संविधान में फेरबदल न कर दिया जाये ये लोग कब क्या करेंगें पता नहीं. सरकार को सत्र का एजेंडा बताना चाहिए.

बता दें आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि जबतक समाज में भेदभाव है, तबतक आरक्षण जारी रहना चाहिए. उन्होंने महाराष्ट्र स्थित नागपुर में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि भेदभाव भले ही नजर नहीं आये लेकिन यह समाज में व्याप्त है.

उन्होंने कहा, ‘सामाजिक व्यवस्था में हमने अपने बंधुओं को पीछे छोड़ दिया. हमने उनकी देखभाल नहीं की और यह 2000 सालों तक चला. जबतक हम उन्हें समानता नहीं प्रदान कर देते हैं तबतक कुछ विशेष उपचार तो होने ही चाहिए और आरक्षण उनमें एक है . इसलिए आरक्षण तबतक जारी रहना चाहिए जबतक ऐसा भेदभाव बना हुआ है. संविधान में प्रदत्त आरक्षण का हम संघवाले पूरा समर्थन करते हैं.’

सरसंघचालक ने कहा कि यह केवल वित्तीय या राजनीतिक समानता सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि सम्मान देने के लिए भी है. उन्होंने कहा कि भेदभाव झेलने वाले समाज के कुछ वर्गों ने 2000 सालों तक यदि परेशानियां उठायी हैं तो ‘क्यों न हम ( जिन्होंने भेदभाव नहीं झेली है) और 200 साल कुछ दिक्कतें उठा सकते हैं?’

घोसी का वोटिंग ट्रेंड क्या कहता है? जानिए 9 फीसदी कम मतदान से बीजेपी या सपा किसे फायदा और नुकसान

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उत्तर प्रदेश के घोसी और उत्तराखंड के बागेश्वर सहित 6 राज्यों की 7 विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है. अब नतीजों का इंतजार है. ऐसे में सभी की निगाहें घोसी उपचुनाव पर लगी हैं, क्योंकि एनडीए बनाम INDIA गठबंधन की लड़ाई है.

एनडीए से बीजेपी के दारा सिंह चौहान और विपक्षी गठबंधन INDIA से सपा के सुधाकर सिंह की बीच सीधा मुकाबला है. घोसी उपचुनाव के वोटिंग पैटर्न को देखें तो 2022 के चुनाव की तुलना में सवा 8 फीसदी कम वोटिंग हुई है. ऐसे में कम वोटिंग बीजेपी के दारा सिंह के लिए चिंता बढ़ाएगी या फिर सपा के सुधाकर के लिए संजीवनी?

घोसी विधानसभा उपचुनाव में मतदाताओं का उत्साह नहीं दिखा और 50.30 फीसदी ही वोटिंग हो सकी. चुनाव आयोग के लिहाज से 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में घोसी सीट पर 58.53 फीसदी मतदान हुआ था. इस लिहाज से देखें तो इस बार 8.23 फीसदी वोटिंग कम हुई है. कम मतदान किसके लिए टेंशन का सबब बनेगा ये तो शुक्रवार को मतगणना के दिन ही पता चल सकेगा. हालांकि, सपा और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन साथ ही कम वोटिंग के नफा और नुकसान का भी आकलन करने में जुटे हैं. ऐसे में दारा सिंह से लेकर सुधाकर सिंह की धड़कने बढ़ी हुई हैं.

घोसी का वोटिंग पैटर्न क्या कहता है?

घोसी विधानसभा उपचुनाव में 8.23 फीसदी कम वोटिंग हुई है, जिसे लेकर सपा और बीजेपी दोनों की चिंताए बढ़ी हुई हैं. वोटिंग पैटर्न और ट्रेंड को देखें तो राजनीतिक पंडित यह मानते हैं कि भारी मतदान और उनके बदलाव के संकेत होते हैं जबकि कम वोटिंग को सरकार और विधायक के प्रति मतदाताओं की नाराजगी के तौर पर देखा जाता है. हालांकि, घोसी सीट के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो उपचुनाव में हमेशा से 8 से 9 फीसदी कम ही वोटिंग रही है.

2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर फागू चौहान विधायक बने थे, उस समय घोसी सीट पर 58.89 फीसदी वोटिंग हुई थी. फागू
चौहान ने राज्यपाल बनने के बाद विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया था, उसके बाद 2019 में हुए उपचुनाव में 51.93 फीसदी फीसदी वोटिंग हुई थी. इस तरह से उपचुनाव में 7 फीसदी कम मतदान रहा था. इस बार भी उपचुनाव में यही ट्रेंड दिखा है और करीब सवा 8 फीसदी वोटिंग कम हुई है.

भूमिहारों में दिखा कम उत्साह, मुस्लिमों की लंबी कतार

भूमिहार बहुल खुंखदवा और काछीकला में वोटिंग कम हुई है जबकि मुस्लिम बहुल जमालपुर और मिर्जापुर में मतदान काफी रही. इसी तरह मुस्लिम बहुल कोपागंज में कम वोटिंग रही तो राजभर और ओबीसी बहुल गांव धवरियासाथ में भी मतदाताओं में उत्साह नहीं दिखा. अगर ऐसे ही वोटिंग पैटर्न रहा तो बीजेपी के दारा सिंह चौहान की राह काफी मुश्किलों भरी हो सकती है.

2019 के उपचुनाव में बीजेपी के विजय राजभर जीतने में कामयाब रहे थे, लेकिन इस बार के उपचुनाव में बीजेपी ने दारा सिंह चौहान को उतारा था, जो सपा से 2022 में विधायक बने थे और बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने दारा सिंह के जरिए नोनिया कार्ड चला है, जो 2022 के चुनाव में सपा के साथ चला गया था. इसके अलावा राजभर वोटों को जोड़ने के लिए सुभासपा के अध्यक्ष ओपी राजभर को भी लगाया गया था. इस लिहाज से दारा सिंह चौहान अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे और साथ ही बीजेपी के सत्ता में होने का भी उन्हें लाभ मिलने की उम्मीद है.

उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी को लाभ

उपचुनाव में अक्सर देखा गया है कि सत्ता में रहने वाली पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिलती है, इस लिहाज से दारा सिंह चौहान को जीत मिलने की उम्मीद दिख रही है, लेकिन घोसी के सियासी समीकरण और उनके बाहरी होने का खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ सकता है. सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह क्षेत्रीय हैं और 2012 में इस सीट से विधायक रह चुके हैं. इतना ही नहीं निर्दलीय लड़कर भी 60 हजार के करीब वोट हासिल करने में वो कामयाब रहते हैं. इतना ही नहीं सपा ने सवर्ण कैंडिडेट उतारकर ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार वोटों को भी साधे रखने की कवायद की है.

घोसी सीट पर जिस तरह से एक लाख से ज्यादा मुस्लिम मतदाता, 65 हजार यादव और 38 हजार राजपूत वोटर हैं, उसके चलते सुधाकर सिंह के लिए जीत की उम्मीद दिखती है और सपा भी इसी समीकरण के लिहाज पर जीत की आस लगाए हुए है, लेकिन वोटिंग के दौरान जिस तरह से सपा ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम और यादव समुदाय बहुल वाले बूथों पर वोटिंग डालने नहीं दिया गया है. ऐसे में करीब 8 फीसदी वोटिंग का कम होना, सपा के लिए चिंता बढ़ा सकती है.

बसपा के चुनाव न लड़ने का फायदा किसे?

घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा ने अपना कैंडिडेट नहीं उतारा जबकि इससे पहले तक हर चुनाव लड़ती रही है. 2017, 2022 के विधानसभा 2019 के उपचुनाव और उससे पहले भी बसपा अपना उम्मीदवार उतारती रही है. बसपा को औसतन करीब 55 हजार वोट मिलते रहे हैं, लेकिन मायावती घोसी सीट पर ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से ही कैंडिडेट लड़ाती रही है. ऐसे में बसपा के चुनावी मैदान में न होने से एक तरफ सपा को मुस्लिम वोटों के फायदा मिलने की उम्मीद दिख रही है तो दलित वोटों में बिखराव दिखा है. इस तरह से बसपा का वोट बैंक घोसी में किंगमेकर की भूमिका में है, जिसे साधने के लिए सपा और बीजेपी दोनों ने ही पूरी ताकत झोंकी थी. ऐसे में दलित वोटों के झुकाव घोसी सीट पर जीत की उम्मीद बना है.