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लेह में Gen-Z के विरोध के बाद लगा कर्फ्यू, CRPF की 8 कंपनियां तैनात

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केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा की मांग उठ रही है. बुधवार को शुरू हुआ आंदोलन अचानक से हिंसा, आगजनी और झड़प में बदल गया. इसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 90 के करीब लोग घायल हो गई. लद्दाख में शांति बहाल के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने लेह शहर में कर्फ्यू सख्ती से लागू कर दिया. लेह एपेक्स बॉडी (लैब) द्वारा लद्दाख के लिए छठी अनुसूची के विस्तार और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बुधवार को बुलाए गए बंद के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि, ‘कर्फ्यू वाले इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है. कहीं से भी किसी घटना की सूचना नहीं है.’ वर्तमान स्थिति को देखते हुए लेह के जिला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोनक ने शुक्रवार से दो दिन के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है. जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे.

हड़ताल हिंसा बढ़ने के कारण जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी 14 दिन की भूख हड़ताल को बीच में ही खत्म कर दिया. उन्होंने हिंसा की निंदा की. वांगचुक ने कहा, ‘यह लद्दाख के लिए सबसे दुखद दिन है… पिछले पांच सालों से हम जिस रास्ते पर चल रहे थे, वह शांतिपूर्ण था.’ उन्होंने युवाओं से अपील की कि ‘हिंसा तुरंत बंद करें क्योंकि यह हमारे आंदोलन को नुकसान पहुंचाती है.’
वांगचुक पर सरकार का आरोप

केंद्र सरकार ने इस अशांति के लिए वांगचुक को ही जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि यह भीड़ द्वारा की गई हिंसा उनके ‘भड़काऊ बयानों’ से प्रेरित थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. मंत्रालय ने कहा कि पुलिस विदेशी तत्वों की संभावित भागीदारी की जांच कर रही है क्योंकि घायलों में से तीन नेपाली नागरिक थे. वहीं, वांगचुक ने गृह मंत्रालय के आरोपों को बलि का बकरा बनाने की रणनीति बताया. उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की मूल समस्याओं से निपटने को टालना है.

अमेरिकी F-104 पर पाक ने दिखाई अकड़, तो MiG-21 ने दिखाया असली दम

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करीब 62 साल पहले की बात है, जब पाकिस्तान को अमेरिका से मिला F-104 स्टारफाइटर उसका घमंड का सबब बन गया था. पाकिस्तान इस फाइटर जेट के दम पर भारत को आंखें दिखाने लगा था. लेकिन जब भारत ने अमेरिका से F-104 की बात की, तो अमेरिका ने नाक-भौं सिकोड़ ली. फिर भारत ने ऐसा आसमान का ‘सिकंदर’ खोज निकाला, जिसने अपनी ताकत और चपलता से न सिर्फ पाकिस्तान का गुरूर तोड़ा, बल्कि दुनिया को दिखा दिया कि असली ताकत क्या होती है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत के लेजेंडरी सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21की, जिसने छह दशकों तक आसमान में तिरंगे का परचम लहराया. अब आसमान का यह सिकंदर अपनी आखिरी उड़ान की तैयारी में है, क्योंकि भारतीय वायुसेना अपने आखिरी मिग-21 स्क्वाड्रन को आज यानी 26 सितंबर 2025 को रिटायर करने जा रही है. आइए, इस विदाई के इस मौके पर जानते हैं कि कैसे मिग-21 ने दुश्मनों को धूल चटाई और भारत का नाम रौशन किया.
‘फिशबेड’ जो बना आसमान का बादशाह
1960 के दशक में जब मिग-21 भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ, तो ये सोवियत यूनियन (आज का रूस) का बनाया फाइटर जेट एकदम सुपरस्टार बन गया. नाटो ने इसे ‘फिशबेड’ का नाम दिया था, लेकिन भारत के लिए ये था हमारा ‘सिकंदर’. छोटा, हल्का, और मैक 2 की रफ्तार से उड़ने वाला ये जेट उस जमाने का रॉकस्टार था. इसकी खासियत थी इसकी सादगी और ताकत. इसे उड़ाना आसान था, मेंटेनेंस सस्ता था और युद्ध में ये दुश्मन के लिए काल बन जाता था. 1963 में भारत ने इसे अपनी वायुसेना में शामिल किया और फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसे लाइसेंस के तहत बनाना शुरू किया. बस, यहीं से मिग-21 की कहानी भारत में हिट हो गई.

फुस्‍स निकला पाकिस्तान का F-104 स्‍टारफाइटर
पाकिस्तान को अमेरिका से मिला F-104 स्टारफाइटर उस वक्त बहुत हाइप में था. इसे ‘मिसाइल विद ए मैन’ कहकर प्रचारित किया गया था. तेज रफ्तार तो थी, लेकिन इसकी डिजाइन में वो बात नहीं थी. F-104 के पतले, सीधे पंख इसे स्पीड तो देते थे, लेकिन हवा में अठखेलियां करने और टर्न लेने में ये मिग-21 से कोसों पीछे था. 1971 के भारत-पाक युद्ध में मिग-21 ने F-104 को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान की सारी हेकड़ी निकल गई.

मिग-21 ने अपनी 23एमएम मिसाइल से चार F-104 को धूल चटा दी. पूरी दुनिया में F-104 को ‘द विडोमेकर’ कहा जाने लगा, क्योंकि ये जेट क्रैश होने के लिए कुख्यात हो गया था. युद्ध के बाद पाकिस्तान ने अपने सारे F-104 रिटायर कर दिए, क्योंकि वो मिग-21 की चपलता, बेहतर टर्न रेट और आसान मेंटेनेंस के सामने टिक ही नहीं पाए.
सस्ता, मस्त, ताकतवर और मस्तमौला था अपना मिग-21
मिग-21 की सबसे बड़ी खूबी थी इसकी किफायती कीमत और आसान रखरखाव. जहां F-104 को चलाने के लिए भारी-भरकम इन्फ्रास्ट्रक्चर चाहिए था, वहीं मिग-21 को कम संसाधनों में भी ऑपरेट किया जा सकता था. इसका ट्यूमांस्की R-25 इंजन इतना दमदार था कि कम ऊंचाई पर 97.4 किलोन्यूटन की ताकत देता था. मिग-21 की डेल्टा विंग डिजाइन इसे तेज उड़ान और फुर्तीले टर्न की ताकत देती थी. यही वजह थी कि 1971 के युद्ध में मिग-21 ने न सिर्फ F-104 को हराया, बल्कि बांग्लादेश की आजादी में भी बड़ा रोल अदा किया.
ढाका के गवर्नर हाउस पर मिग-21 की रॉकेट स्ट्राइक ने पाकिस्तानी नेतृत्व को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. इतना ही नहीं, 1999 के करगिल युद्ध और 2019 के बालाकोट हमले में भी मिग-21 ने अपनी ताकत दिखाई. बालाकोट में तो मिग-21 ने पाकिस्तान के F-16 को भी चित कर दिया था.
क्यों है मिग-21 इतना खास?
मिग-21 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि भारत की वायुसेना का गौरव था. इसने न सिर्फ युद्ध के मैदान में कमाल दिखाया, बल्कि भारत को आत्मनिर्भरता की राह पर भी आगे बढ़ाया. एचएएल ने इसे देश में बनाकर दिखाया कि भारत किसी से कम नहीं. इसकी सादगी, ताकत और फुर्ती ने इसे दुनिया के बेस्ट फाइटर जेट्स में शुमार किया.
लेकिन अब वक्त बदल रहा है. मिग-21 का जमाना धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. भारतीय वायुसेना अब राफेल, तेजस और सु-30 जैसे आधुनिक जेट्स की तरफ बढ़ रही है. मिग-21 का आखिरी स्क्वाड्रन आज यानी 26 सितंबर 2025 रिटायर होने वाला है. लेकिन इस जटायु की कहानी हमेशा भारतीय वायुसेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएगी.

देशभर में बढ़ी लेकिन दिल्‍ली में घट गई वाहनों की संख्‍या, 7 साल में 40 फीसदी गिरावट, अब 1000 लोगों पर कितनी कार

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देश के अन्‍य छोटे-बड़े शहरों में जहां वाहनों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है, वहीं राजधानी दिल्‍ली में इसकी संख्‍या में बड़ी गिरावट आई है. दिल्ली में प्रति 1,000 व्यक्तियों पर वाहनों की संख्या 2015-16 के 530 से घटकर 2023-24 में 373 रह गई. इस दौरान सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आई और यह साल 2015 के 8,085 से घटकर साल 2022 में 5,560 रह गईं. आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय ने अपने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं की वजह से वाहनों की संख्‍या घटाने में मदद मिली है.
निदेशालय की ओर से सतत विकास लक्ष्यों की स्थिति पर हाल ही में जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि डीटीसी और क्लस्टर बसों का बेड़ा 2015-16 के 5,842 से बढ़कर 2023-24 में 7,485 हो गया. हालांकि, इसी अवधि में औसत दैनिक सवारियों की संख्या 45.9 लाख से घटकर 42.4 लाख रह गई. दिल्ली मेट्रो में औसत दैनिक यात्री संख्या 2015-16 के 26.2 लाख से बढ़कर 2023-24 में 57.8 लाख हो गई. वाहनों की संख्‍या घटाने में सबसे अहम भूमिका मेट्रो की ही रही है.

आधी आबादी तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा
रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में 42.95 प्रतिशत आबादी की पहुंच सार्वजनिक परिवहन की सुविधा तक थी, लेकिन 2022-23 में यह आंकड़ा घटकर 40.80 प्रतिशत रह गया. हालांकि, 2023-24 में 45.83 प्रतिशत आबादी के पास सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो गई. रिपोर्ट में यह उम्‍मीद लगाई गई है कि साल 2030 तक सरकार को सभी के लिए सुरक्षित, किफायती, सुलभ और टिकाऊ परिवहन प्रणालियों तक पहुंच प्रदान करना चाहिए. साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार पर भी जोर दिया जाना चाहिए.

हादसों में आई गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में प्रति 1,000 जनसंख्या पर वाहनों की संख्या 530 से घटकर 2022-23 में 370 रह गई. हालांकि, साल 2023-24 में मामूली रूप से बढ़कर 373 हो गई. इसके साथ ही रिपोर्ट से पता चलता है कि साल 2015 में जहां 8,085 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, वहीं साल 2021 में इनकी संख्‍या घटकर 4,720 रह गई. हालांकि, साल 2022 में यह संख्या फिर बढ़कर 5,560 हो गई.

दिल्‍ली में कितने वाहन
साल 2023 के अंत तक दिल्ली में कुल 79.5 लाख वाहन पंजीकृत थे, जिनमें से 20.7 लाख निजी कारें थीं. सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक समय दिल्‍ली में करीब 1.5 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत थे. यह संख्‍या मुंबई, कोलकाता और चेन्‍नई शहर के कुल वाहनों के करीब-करीब बराबर है. हालांकि, हालिया आंकड़े साफ बताते हैं कि अब इसकी संख्‍या में काफी गिरावट आ चुकी है.

CG: दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर 1000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चालू रखने का आदेश…

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दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर 1000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चालू रखने का आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सीबीआइ पांच फरवरी 2020 को भोपाल में दर्ज एफआइआर के साथ आगे कार्रवाई करेगी। तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार द्वारा राज्य में सीबीआई जांच पर रोक लगाए जाने के कारण उक्त प्रकरण मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया था।

दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले की सीबीआइ जांच चालू रखने का आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सीबीआइ पांच फरवरी 2020 को भोपाल में दर्ज एफआइआर के साथ आगे कार्रवाई करेगी।

यदि एफआइआर दर्ज नहीं की गई है तो सीबीआइ को एफआइआर दर्ज होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर राज्यभर में संबंधित विभाग, संगठन और कार्यालयों से प्रासंगिक मूल रिकार्ड जब्त करना होगा। तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार द्वारा राज्य में सीबीआइ जांच पर रोक लगाए जाने के कारण उक्त प्रकरण मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया था।

न्यायमूर्ति प्रार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की खंडपीठ ने इस मामले को प्रणालीगत भ्रष्टाचार (सिस्टमेटिक करप्शन) का बताते हुए कहा कि इसमें उच्च स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता महसूस की गई।

इस मामले तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री वर्तमान में भाजपा विधायक रेणुका सिंह, तत्कालीन मुख्य सचिव व सेवानिवृत्त आइएएस विवेक ढांड, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडे, पीपी श्रोती समेत कई नाम जांच के घेरे में हैं।

इस मामले में सीबीआइ जांच पर रोक लगाने के लिए ढांड व अन्य सुप्रीम कोर्ट गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने याचियों को हाई कोर्ट में ही अपना पक्ष रखने को कहा था। इस बीच सीबीआइ ने हाई कोर्ट के अंतिम आदेश के प्रतिक्षा में जांच स्थगित कर दी थी।

2004 में छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए स्टेट रिसोर्स सेंटर (एसआरसी) की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य दिव्यांगों को तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता प्रदान करना था।

2012 में इसी के अंतर्गत फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीआरआरसी) की स्थापना की गई, जिसका कार्य दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि ये संस्थाएं केवल कागजों पर ही सक्रिय थीं और सरकारी फंड का दुरुपयोग किया जा रहा था।

रायपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने 2018 में इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन संस्थाओं में कर्मचारियों की नियुक्ति किए बिना ही उनके नाम पर वेतन निकाला जा रहा था।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उसके नाम पर भी फर्जी रिकार्ड बनाकर वेतन निकाला गया, जबकि उसने कभी वहां कार्य नहीं किया। इस घोटाले की कुल राशि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

 

75 साल की है सीमा… D. Raja 76 की उम्र में फिर बने CPI के महासचिव, उम्र पर विवाद के बीच पार्टी ने दिखाया भरोसा

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कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने अपने 25वें कांग्रेस अधिवेशन के दौरान एक अहम फैसला लिया है. पार्टी ने डी. राजा को फिर से अपना राष्ट्रीय महासचिव चुना है. हालांकि, इस फैसले पर पार्टी की केरल यूनिट ने आपत्ति जताई थी, क्योंकि पार्टी में 75 साल की उम्र सीमा का नियम है और डी. राजा इस साल 76 साल के हो चुके हैं. इसके बावजूद, पार्टी की नेशनल काउंसिल ने निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया है.
डी. राजा का राजनीतिक सफर
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, डी. राजा साल 2019 में महासचिव बने थे, जब पूर्व महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था. इसके बाद 2022 में विजयवाड़ा में हुए कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें फिर से चुना गया था. बता दें कि डी. राजा पहले दलित नेता हैं, जिन्होंने किसी वामपंथी पार्टी की सर्वोच्च कमान संभाली है.

यह फैसला CPI(M) यानी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के रुख से बिल्कुल अलग है. CPI(M) ने 75 साल की उम्र सीमा को सख्ती से लागू किया है. इसी वजह से मदुरै में इस साल हुए सम्मेलन में कई बड़े नेताओं जैसे प्रकाश करात, बृंदा करात, माणिक सरकार और सुरज्या कांता मिश्र को पॉलित ब्यूरो से हटना पड़ा. हालांकि, एक अपवाद के तौर पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (79 वर्ष) को पद पर बनाए रखा गया.
अन्य दावेदार और महिला नेतृत्व की संभावना
डी. राजा के अलावा, इस पद के लिए CPI केरल राज्य सचिव बिनॉय विश्वम और AITUC (CPI का ट्रेड यूनियन संगठन) की महासचिव अमरजीत कौर भी दावेदार थीं. अगर अमरजीत कौर चुनी जातीं तो वह भारत में किसी वामपंथी पार्टी की पहली महिला प्रमुख होतीं.
नई टीम और प्रस्ताव
पार्टी ने अधिवेशन के दौरान संगठनात्मक ढांचे को नया रूप देते हुए 11 सदस्यीय राष्ट्रीय सचिवालय और 31 सदस्यीय कार्यकारी समिति की घोषणा की है. इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए हैं. इनमें प्रमुख रूप से पाकिस्तान के साथ अटारी-वाघा और अन्य सीमा मार्गों से व्यापार को बहाल करने की मांग शामिल रही. इसके अलावा, पार्टी ने उन सभी कैदियों की रिहाई की भी मांग की, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है. ये प्रस्ताव पार्टी की सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सक्रियता और जनता से जुड़े सवालों को प्राथमिकता देने की दिशा को दर्शाते हैं.
BJP-RSS के खिलाफ मोर्चा
CPI ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में साफ किया कि वह भाजपा और RSS के खिलाफ वैचारिक और सैद्धांतिक संघर्ष को और तेज करेगी. पार्टी ने कहा कि आने वाले बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वामपंथी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा प्रयास करेगी. वहीं केरल में वाम मोर्चे की जीत सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी.
बेरोजगारी और शिक्षा पर चिंता
अधिवेशन में पार्टी ने बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा क्षेत्र में गिरावट पर गहरी चिंता जताई है. CPI ने कहा कि देश में बढ़ते केंद्रीकरण और अधिनायकवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ वाम और लोकतांत्रिक ताकतों की एकता बेहद जरूरी है.

बंगाल की खाड़ी में उठा बवंडर, ओडिशा-आंध्र में हाई अलर्ट, IMD का मूसलाधार बारिश की चेतावनी

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मौसम विभाग ने शुक्रवार 26 सितंबर को देश के विभिन्न हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और गरज के साथ तेज हवाओं के चलने की संभावना जताई है. पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में 30 सितंबर तक भरी बारिश की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, वीकेंड पर मुंबई और महाराष्ट्र के अलग अलग हिस्सों में बारिश की संभावना है. वहीं, गोवा और कोंकण में भी बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने बताया कि 2013 के बाद पहली बार दिल्ली से मानसून की विदाई 24 सितंबर को हुई. 2024 में दिल्ली से मानसून की विदाई 2 अक्टूबर को हुआ था. मौसम विभाग ने आने वाले 24 घंटे में बिहार और उत्तर प्रदेश को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की है.
दिल्ली से आखिरकार मानसून की विदाई हो गई. 13 साल में पहली बार 24 सितंबर 2025 को दिल्ली से मानसून की विदाई हुई. पिछले साल, मानसून दिल्ली से 2 अक्टूबर को विदा हुआ था. दिल्ली से सबसे लेट मानसून की विदाई 17 अक्टूबर 2013 को हुई थी, जो 22 अक्टूबर को दक्षिण प्रायद्वीप पर उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन के लगभग बराबर थी. दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछली बार 2012 में इसी दिन, 24 सितंबर को विदा हुआ था. इस मानसून सीज़न में दिल्ली में 41% ज़्यादा बारिश हुई है. बेस स्टेशन सफदरजंग स्टेशन पर हर मानसून महीने में औसत से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई. यहां पर 640.4 मिलीमीटर के सामान्य बारिश के मुकाबले 902.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे नें अंडमान-निकोबार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, केरल और तेलंगाना में बारिश की संभावना जताया है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़, झारखंड, गंगा के पश्चिमी भाग, दक्षिण-पूर्व मध्य प्रदेश, तटीय कर्नाटक और तटीय आंध्र प्रदेश बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने बिहार और उत्तर प्रदेश (यूपी)के लिए बारिश की कोई चेतावनी नहीं जारी की है. बिहार और यूपी के कई हिस्सों में आसमान साफ रहने और तेज धूप की संभावना है. मौसम विभाग के ताजा रिपोर्ट में के अनुसार, दिन के समय धूप खिले रहने संभावना है. हालांकि, तेज गति की हवाओं से धूप का असर कम होते दिखेगा, मगर उमस लोग बेहाल रहेंगे.
पश्चिमी तट पर होगी बारिश?

मौसम विभाग ने पश्चिमी तटीय इलाकों में आज भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, हाराष्ट्र, कोंकण, गोवा और गुजरात के इलाकों में 26 सितंबर से 1 अक्टूबर तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ कई जगहों पर मूसलाधार बारिश की संभावना है. मराठवाड़ा में अगले दो दिनों तक और गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ जिलों में 28 से 30 सितंबर तक बहुत भारी बारिश की संभावना है. कोंकण, गोवा और पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में 27 से 28 सितंबर तक बेहद भारी बारिश की संभावना है. मध्य महाराष्ट्र में भी इस दौरान भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी.
नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में मूसलाधार बारिश
मौसम विभाग ने नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में हल्की बारिश के दौर जारी रहने की संभावना जताई है. असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 29 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. प्रायद्वीपीय भारत में तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, माहे, आंध्र प्रदेश और यानम में 27 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है. तेलंगाना में आज मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है. आंध्र प्रदेश और यानम में 26 सितंबर को ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है. उत्तर कर्नाटक में 26 से 29 सितंबर और दक्षिणी कर्नाटक में 26 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है.

बॉर्डर पर पकड़ा गया ISI का जासूस, आई लव मोहम्‍मद पर नहीं थम रहा विवाद

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राजस्‍थान से लगते पाकिस्‍तान सीमा पर आईएसआई का एक एजेंट पकड़ा गया है. बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह बॉर्डर पार जानकारी भेज रहा था. वहीं, आई लव मोहम्‍मद पर देशभर में मचा बवाल थम नहीं रहा है. विभिन्‍न राज्‍यों की पुलिस अलर्ट पर है और चौकसी रख रही है.

डोनाल्ड ट्रंप ने दवा पर लगाया 100% टैरिफ, भारत पर क्या होगा असर, भारतीय कंपनियों लिए है झटका

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अमेरिका का टैरिफ बम लगातार फट रहा है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी दवा पर टैरिफ लगाया है. डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ऐलान किया कि फार्मा प्रोडक्ट्स यानी दवाओं के आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगेगा. विदेशी दवाओं पर यह टैरिफ 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम से फार्मा इंडस्ट्री में हड़कंप मचने की संभावना है. ट्रंप ने ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पादों के आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है. यह टैरिफ तभी माफ किया जाएगा, अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निर्माण शुरू करें. अब सवाल है कि क्या भारत पर ट्रंप के इस फैसले का असर होगा? क्या भारतीय कंपनियों के लिए यह झटका है?
सबसे पहले ट्रंप ने जो ऐलान किया है, उसे जान लेते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दवाओं पर टैरिफ की जानकारी दी. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा, ‘1 अक्टूबर 2025 से हम किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाएंगे, जब तक कि कोई कंपनी अमेरिका में अपना दवा निर्माण संयंत्र स्थापित नहीं कर रही हो. निर्माण का अर्थ होगा भूमिपूजन या निर्माणाधीन. इसलिए अगर निर्माण शुरू हो गया है, तो इन दवा उत्पादों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद.’
भारतीय कंपनियों के लिए झटका?

जी हां, भारतीय दवा कंपनियों के लिए यह टैरिफ एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा फार्मा निर्यात बाजार है. अमेरिका में सस्ती जेनेरिक दवाओं की भारी मांग रहती है. यही कारण है कि भारत पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दवाइयों पर 100% घोषित टैरिफ मुख्यतः ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर केंद्रित है. इन पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबदबा है. मगर जेनरिक और विशेष दवाओं पर भी असर पड़ने की संभावना बनी हुई है, जिसका बादशाह भारत है. यहां यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका भारतीय दवा कंपनियों का बड़ा बाजार है. खासकर सस्ती जेनरिक दवाओं के लिए. अगर टैरिफ 1 अक्टूबर से लागू होता है तो भारतीय कंपनियों को इसका नुकसान हो सकता है.

भारत पर कितना असर?
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो भारत ने 2025 की पहली छमाही में ही अमेरिका में 3.7 बिलियन डॉलर ( करीब 32,505 करोड़ रुपये) का दवा निर्यात किया है. साल 2024 में भारत ने अमेरिका को 3.6 अरब डॉलर (करीब 31,626 करोड़ रुपये) मूल्य की दवाएं निर्यात कीं. प्रमुख भारतीय कंपनियां जैसे डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो फार्मा जैसे कंपनियां लंबे समय से अमेरिकी बाजार से लाभान्वित हो रही हैं. ये कंपनियां दवा के मामले में बहुत हद तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं. इन कंपनियों का बड़ा हिस्सा राजस्व अमेरिका से आता है. अगर टैरिफ लगता है तो उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

मजबूत होंगे भारत-रूस के रिश्ते… रूस के डिप्टी पीएम दिमित्री से मिले PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विश्व खाद्य भारत 2025 कार्यक्रम के इतर रूसी उप-प्रधानमंत्री दिमित्री पात्रुशेव से मुलाकात की. इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में किया. प्रधानमंत्री मोदी और रूसी उप-प्रधानमंत्री पात्रुशेव दोनों ने कृषि, उर्वरक, खाद्य प्रसंस्करण और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया.
अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “विश्व खाद्य भारत 2025 में रूस के उप-प्रधानमंत्री दिमित्री पात्रुशेव से मिलकर खुशी हुई. हमने कृषि, उर्वरक और खाद्य प्रसंस्करण में हमारे लाभकारी सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की.” प्रधानमंत्री ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी हार्दिक बधाई दी और कहा कि वह 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं.
गुरुवार सुबह नोएडा में उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्घाटन करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रूस इस आयोजन का देश-साझेदार है और यह व्यापार मेला दोनों देशों के बीच “समय-परीक्षित साझेदारी को और मज़बूत” करने का प्रमाण है. हाल के हफ़्तों में व्हाइट हाउस ने नई दिल्ली पर मास्को के साथ अपने संबंधों को कम करने, खासकर रूसी कच्चे तेल की ख़रीद को रोकने का दबाव डाला है.

दिसंबर में द्विपक्षीय वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की संभावना के साथ, नई दिल्ली-मास्को संबंध उत्साहजनक बने रहने की उम्मीद है. कृषि और कृषि-उत्पाद पोर्टफोलियो देखने वाले रूसी उप-प्रधानमंत्री पात्रुशेव इस हफ़्ते भारत की यात्रा पर थे.

व्हाइट हाउस ने रूसी तेल ख़रीदने के सवाल पर भारत पर दबाव बनाए रखा है, लेकिन यह भी संकेत दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही मुलाक़ात कर सकते हैं, संभवतः पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान, जो 26 से 28 अक्टूबर तक मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित होगा.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह भी संकेत दिया गया है कि ट्रंप क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे, जो इस साल के अंत में या 2026 की शुरुआत में आयोजित होने की संभावना है.

छत्तीसगढ़ के विक्रेताओं को इतने करोड़ का ऑर्डर, स्व-सहायता समूहों और बुनकरों को भी अवसर…

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जैम पोर्टल पर छत्तीसगढ़ ने 87,873 करोड़ और मध्यप्रदेश ने 38,027 करोड़ के ऑर्डर हासिल किए। एमएसएमई, स्टार्टअप और महिला उद्यमियों को भी फायदा।

देश में सरकारी खरीदी के तहत जेम पोर्टल पर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश का जलवा है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सबसे आगे हैं। इन दो राज्यों को अब तक जैम के जरिए 1.25 लाख करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर मिल चुके हैं। इसमें छत्तीसगढ़ को 87,873 करोड़ और मध्यप्रदेश को 38,027 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं।

छत्तीसगढ़ के विक्रेताओं को इतने करोड़ का ऑर्डर

यह जानकारी गुरुवार को जैम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने दी। उन्होंने पत्रकारवार्ता करके बताया कि छत्तीसगढ़ के विक्रेताओं को 87,873 करोड़ के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। इसमें एमएसएमई का योगदान 48,575 करोड़, स्टार्टअप का 420 करोड़, महिला उद्यमियों का 1,242 करोड़ और अनुसूचित जाति-जनजाति विक्रेताओं का 199 करोड़ है।

मध्यप्रदेश के विक्रेताओं को जेम के माध्यम से अब तक 38,027 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इसमें एमएसएमई का योगदान 26,937 करोड़, स्टार्टअप का 1,584 करोड़, महिला उद्यमियों का 3,197 करोड़ और अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमियों का 1,306 करोड़ है।

स्व-सहायता समूहों और बुनकरों को भी अवसर

जेम स्टार्टअप, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों, बुनकरों और एफपीओ के लिए आठ समर्पित वोकल फॉर लोकल आउटलेट और क्यूरेटेड मार्केट पेजों के माध्यम से अवसरों का विस्तार भी कर रहा है। एक प्रगतिशील राजस्व नीति के साथ जहां 97 प्रतिशत ऑर्डर लेन-देन शुल्क से मुक्त हैं और नए विक्रेताओं के लिए कॉशन मनी की आवश्यकता को माफ कर दिया गया है। ऐसे में देशभर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भागीदारी को सरल, अधिक समावेशी और किफायती बनाया गया है।