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गुजरात में भारी बारिश से हाहाकार, रेगिस्तान बना समुद्र, हाई अलर्ट पर कई बांध

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उत्तर भारत में क्या पहाड़, क्या मैदान बारिश का कहर जारी है. बाढ़ और बारिश से लोगों का बुरा हाल है. पहाड़ों पर फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड (भूस्ख्लन) से हजारों लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं. कई लोगों की मौत हो गई. पंजाब से लेकर दिल्ली तक बाढ़ से बुरा हाल है. वहीं, फिलहाल उत्तर भारत के मैदानी भागों में कुछ राहत है, मगर उत्तरी गुजरात और दक्षिण पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी है. वजह, दोनों राज्यों के ऊपर बना मौसम प्रणाली का एक नया डीप डिप्रेशन. दोनों राज्यों में बीते कई दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने आज भी दोनों राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.
गुजरात के बनसकांठा में भारी बारिश से हाहाकार
गुजरात के बनासकांठा जिले में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही थमने की नाम नहीं ले रही हैं. मौसम विभाग ने 8 सितंबर 2025 को जिले में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट जारी किया है. सुइगाम में पिछले 24 घंटों में 16.5 इंच बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते नडाबेट का रेगिस्तानी इलाका समुद्र में तब्दील हो गया है. भारी बारिश के कारण सुइगाम पल्ली के खेत पानी से लबालब हो गए हैं, और कई गांवों की सड़कें बह गई हैं. जिला प्रशासन ने एहतियातन सभी स्कूल, कॉलेज, और आंगनवाड़ी केंद्रों को 8 सितंबर को बंद करने के निर्देश दिए हैं.

दांतीवाड़ा बांध के जलस्तर में बढ़ने से हाई अलर्ट

जिले की जीवन रेखा माने जाने वाले दांतीवाड़ा बांध के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने व्हाइट अलर्ट जारी किया है, ताकि बांध से पानी छोड़ने की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों को पहले से सतर्क किया जा सके. प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं, और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में बारिश की तीव्रता बढ़ने की आशंका जताई है, जिसके चलते जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें अलर्ट मोड पर हैं.

बंगाल की खाड़ी में ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से पूर्वी राज्यों में आज यानी सोमवार, 10, 11, 12,13 सितंबर तक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है. साथ ही मौसम विभाग ने बिहार और ओडिशा में बिजली के साथ बारिश की संभावना जताई है. दिल्ली-एनसीआर में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद अभी तक राहत है, बारिश की कोई चेतावनी नहीं जारी की गई है.
खतरे के निशान से नीचे यमुना
फिलहाल दिल्लीवालों के लिए राहत की खबर है. राजधानी दिल्ली में लगातार 9 दिनों तक खतरे के निशान से ऊपर उफान मार रही यमुना शांत हुई है. 9 दिन के बाद यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आया है. दिल्ली में यमुना के पानी और बाढ़ को मॉनिटर कर रहे बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बताया कि रात 10 बजे दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर 205.32 मीटर दर्ज किया गया. बता दें कि अगस्त के आखिर और इस महीने की शुरुआत में दिल्ली और पहाड़ों पर भारी बारिश के बाद यमुना लगातार खतरे के निशान 205.33 मीटर से ऊपर बह रही थी. दिल्ली और एनसीआर के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए थे. हालांकि, दिल्ली में फिलहाल बारिश से राहत है. मौसम विभाग ने बताया कि अभी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है.

दिल्ली में खतरा टला मगर…
दिल्ली में बाढ़ का खतरा टल गया है. मगर, पंजाब और पहाड़ों पर बाढ़ और बारिश का रौद्र रूप जारी है. मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में बताया कि 8 यानी आज, 12, और 13 को उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश होने की संभावना है. वहीं, उत्तराखंड के उत्तरकाशी के नौंगाव में बादल फटने हुई. नौगांव खड़ का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे बाजार की सड़कें पानी से लबालब हो गईं और कई दुकानों में पानी घुस गया.
पहाड़ों पर नहीं टला खतरा
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार को 7 सितंबर की शाम भारी बारिश के बाद हॉस्पिटल रोड पर अचानक आए फ्लैश फ्लड ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया. बाढ़ के पानी ने सड़कों और आसपास के क्षेत्रों को डुबो दिया, जिससे यातायात ठप हो गया. उधर, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में चेनानी रोड पर बली नाला इलाके में भारी भूस्खलन के कारण सड़क पूरी तरह बंद हो गई. इस घटना में कई यात्री फंसे हुए हैं, और हालात बेहद खतरनाक और जानलेवा बताए जा रहे हैं. प्रशासन ने लोगों से इधर रास्ते से यात्रा न करने की अपील की है. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं और लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है.

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में भारी मुठभेड़, लश्कर आतंकी ढेर, एक जवान भी घायल

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दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के गुड्डर इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भारी मुठभेड़ हुई. इस दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को ढेर कर दिया. इस मारे गए आतंकी की पहचान आमिर डार के रूप में हुई है. सोपियां जिले का रहने वाला डार लश्कर ए तैयबा से जुड़ा बताया जा रहा है. वहीं आतंकियों की गोलीबारी में सेना के एक जेसीओ के भी घायल होने की खबर है. हालांकि इस बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
दरअसल खुफिया इनपुट मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था. खुद को घिरा हुआ देखकर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. इसके बाद जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी फायरिंग की और मुठभेड़ शुरू हो गई. सुरक्षाबलों ने इलाके को पूरी तरह से घेर लिया है और अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं ताकि आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिल सके.
आतंकियों के साथ इस मुठभेड़ पर कश्मीर ज़ोन पुलिस ने ट्वीट कर बताया, ‘विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, कुलगाम के गुड्डर जंगल में मुठभेड़ शुरू हो गई है. जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और CRPF की SOG काम पर हैं. आगे की जानकारी बाद में दी जाएगी.’

कश्मीर सहित 5 राज्यों में टेरर फंडिंग पर NIA का प्रहार
उधर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू की है. अधिकारियों के मुताबिक, एनआईए की टीमें देशभर में छापेमारी कर रही हैं. जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर समेत पांच राज्यों में कुल 22 ठिकानों पर यह तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
यह तलाशी अभियान उन मामलों से जुड़ा है जिनमें देशविरोधी गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क की फंडिंग व साजिश के सुराग मिले हैं. अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, संदिग्ध दस्तावेज़ और कुछ अहम सबूतों को खंगाला जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई आतंकियों और उनके स्थानीय नेटवर्क को कमजोर करने और उनकी साजिशों को नाकाम करने के मकसद से की जा रही है.

पहले गवर्नर की BJP विधायकों से मुलाकात, फिर PM मोदी का दौरा… मणिपुर से हटेगा राष्ट्रपति शासन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिंसा प्रभावित मणिपुर के दौरे से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. पीएम मोदी के 13 सितंबर के दौरे से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है. रविवार को राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह सहित 20 भाजपा विधायकों से मुलाकात की. 40 मिनट तक चले इस बैठक में मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल, डीजीपी राजीव सिंह और सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह जैसे वरिष्ठ नौकरशाह भी मौजूद थे. इसके बाद से राजनीतिक पंडित ये कयास लगा रहे हैं कि 7 महीने से मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन हटया जा सकता है.
एक सप्ताह पहले भी राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यब्रत सिंह से मुलाकात की थी. राज्यपाल भल्ला की एक हफ्ते पहले 14 भाजपा विधायकों के साथ सिक्रेट मुलाकात ने पीएम के दौरे से पहले राज्य में राजनीतिक स्थिरता की संभावनाओं को बढ़ा दिया है. मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुए मेइतेई-कुकी जातीय हिंसा के बाद से स्थिति तनावपूर्ण है. इस जातीय हिंसा में अब 260 से अधिक लोग मारे जाने की संभावना जताई जा रही है. साथ ही इस हिंसा ने हजारों परिवारों को विस्थापित कर टेंटों में जिंदगी गुजारने पर मजबूर कर दिया है.

पीएम के दौरे से पहले बढ़ी सरगर्मी
भाजपा की राज्य इकाई को पार्टी नेतृत्व से आधिकारिक सूचना मिली है कि पीएम मोदी 13 सितंबर को मणिपुर का दौरा करेंगे. एक भाजपा विधायक ने बताया कि पीएम मिजोरम से मणिपुर पहुंचेंगे और सबसे पहले चुराचांदपुर जाएंगे, जहां वे जातीय हिंसा से विस्थापित लोगों से मुलाकात करेंगे. इसके बाद इंफाल में कांगला किले में करीब 15,000 लोगों की सभा को संबोधित करेंगे. पीएम का यह दौरा मणिपुर में मई 2023 के बाद पहला होगा. इसे हिंसा प्रभावित राज्य में शांति और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, पीएम मणिपुर पुलिस मुख्यालय और सिविल सचिवालय जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचों का उद्घाटन भी कर सकते हैं.
कांग्रेस की मांग पर नया मास्टरस्ट्रोक

मणिपुर में 9 फरवरी को एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है. 60 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है. हालांकि, भाजपा के पास विधानसभा में पूर्ण बहुमत है, फिर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ताजा चुनाव कराने की मांग की है. कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने के किसी भी सुझाव का विरोध किया है.
नई सरकार की होगी गठन या…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले और राज्यपाल की सक्रियता सेकुछ विधायकों ने नई सरकार के गठन की संभावना पर चर्चा की. हालांकि, उन्होंने विधायकों की राज्यपाल से बैठक की गोपनियता को कायम रखा. एक विधायक ने निराशा जताते हुआ कहा कि उनकी ही पार्टी प्रशासन ने पीएम के दौरे की योजना में विधायकों की सलाह को शामिल नहीं किया. मणिपुर में कांगला किले और चुराचांदपुर में पीस ग्राउंड पर भव्य तैयारियां चल रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. यह दौरा मणिपुर के लिए राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.

“भारत पर क्‍या है नए टैरिफ का खतरा? अमेरिका रूस और उसके तेल खरीदारों पर बढ़ा रहा दबाव”

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“भारत पर क्‍या है नए टैरिफ का खतरा? अमेरिका रूस और उसके तेल खरीदारों पर बढ़ा रहा दबाव”

अमेरिका और भारत के संबंधों में एक नया मोड़ आया है। पहले दोनों देशों के बीच कुछ नरमी देखी गई थी, लेकिन अब अमेरिकी अधिकारी रूस के तेल राजस्व पर दबाव बनाने की बात कर रहे हैं क्योंकि रूस को चीन और भारत जैसे देशों में खरीदार मिल रहे हैं।

वहीं रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर और प्रतिबंध लगाने की अपनी तैयारी की ओर इशारा किया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवाल पर ट्रंम्‍प ने कहा बस “हां, मैं तैयार हूं”।

हालांकि ट्रम्प ने इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा। व‍हीं इसके कुछ घंटे पहले ये खुलासा हुआ है कि अमेरिका मॉस्को और उसके तेल खरीदारों, जैसे भारत, पर और अधिक शुल्क और अन्य दबाव डालने की दिशा में बढ़ रहा है।

ट्रम्प के इस हां से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अधिक प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था, जिसमें भारत प्रमुख रूप से शामिल था। उनका लक्ष्य रूसी अर्थव्यवस्था को “पतन” की ओर धकेलना था।

पुतिन को बातचीत के लिए मजबूर करना है बेसेंट ने तर्क दिया कि केवल इसी तरह का पतन व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए मजबूर कर सकता है। अलास्का में पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन के बावजूद, ट्रम्प की शांति मध्यस्थता अब तक काम नहीं आई है, बल्कि युद्ध और बढ़ गया है।

यह नए घटनाक्रम राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच प्रेस और सोशल मीडिया के माध्यम से आपसी सराहना के ठीक दो दिन बाद आया है। बेसेंट ने “रूसी तेल खरीदने वाले देशों” का उल्लेख करते हुए किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन भारत इस मुद्दे पर अमेरिकी शुल्कों का सबसे बड़ा लक्ष्य है।

एनबीसी से बात करते हुए बेसेंट ने कहा, “यदि अमेरिका और यूरोपीय संघ अधिक प्रतिबंधों के साथ आते हैं, और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर और अधिक द्वितीयक शुल्क लगाते हैं, तो रूसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ढह जाएगी और इससे राष्ट्रपति पुतिन बातचीत की मेज पर आएंगे।”

युद्ध की शुरुआत से ही रूस अमेरिका और यूरोप दोनों के कड़े प्रतिबंधों के अधीन है, लेकिन उसने भारत, चीन और अन्य जगहों पर अपने तेल और गैस के लिए ग्राहक ढूंढ लिए हैं, जिससे उसका राजस्व बढ़ रहा है।

‘नेतन्याहू को रोको’, अपने ही PM के खिलाफ क्यों भड़की Israel की जनता? ट्रंप से लगाई गुहार अमेरिका भारत पर लगा रहा ये आरोप उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस सहित शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका इस राजस्व धारा पर दबाव बनाना चाहता है। इसीलिए उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को “मोदी का युद्ध” कहा है, और ट्रम्प ने खुद भारत पर “रूसी युद्ध मशीन को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया है।

भारत पर लगाए गए शुल्क पुतिन के खिलाफ “दबाव” हैं वेंस ने साफ तौर पर कहा है कि भारत पर लगाए गए शुल्क पुतिन के खिलाफ “दबाव” हैं। भारत ने 25% “दंडात्मक” शुल्क (जिसका अर्थ है अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर कुल 50% अमेरिकी आयात शुल्क) के तर्क पर सवाल उठाया है और तर्क दिया है कि वह केवल अपने संप्रभु राष्ट्रीय हित में तेल खरीद रहा है। इस बीच, रविवार को यूक्रेन में युद्ध और गंभीर हो गया क्योंकि रूस ने कीव में मुख्य सरकारी परिसर पर बमबारी की।

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में होगी ‘मॉक’ वोटिंग, विपक्षी सांसद लेंगे हिस्सा

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विपक्षी सांसदों को नौ सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव की मतदान प्रक्रिया के बारे में सोमवार को जानकारी दी जाएगी. ‘इंडिया’ गठबंधन के सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति चुनाव की मतदान प्रक्रिया के बारे में जानकारी दिए जाने के बाद सोमवार को दोपहर करीब ढाई बजे संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में ‘मॉक’ मतदान कराया जाएगा.
सूत्रों ने कहा कि सोमवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विपक्षी सांसदों के लिए संसदीय सौध में डिनर का आयोजन करने वाले थे, लेकिन इसे अब देश में बाढ़ की स्थिति के चलते रद्द कर दिया गया है.
नौ सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन और विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है. इस बार दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं. राधाकृष्णन तमिलनाडु से जबकि रेड्डी तेलंगाना से हैं.

उपराष्ट्रपति चुनाव को विपक्ष ने वैचारिक लड़ाई बताया है, जबकि संख्याबल सत्तारूढ़ राजग के पक्ष में है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी राज्यसभा महासचिव पी. सी. मोदी ने कहा है कि मतदान मंगलवार को संसद भवन के कमरा संख्या एफ-101, वसुधा में होगा. मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे समाप्त होगा.

राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, ‘‘भारत के उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल होते हैं. राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी निर्वाचक मंडल में शामिल होने के पात्र हैं और इसलिए, चुनाव में भाग लेने के हकदार हैं.’’
बयान के अनुसार, “उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए निर्वाचन अधिकारी एवं राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी द्वारा संसद भवन में मतदान के लिए इंतजाम के किए जा रहे हैं.” इसमें कहा गया, “मतगणना उसी दिन शाम 6 बजे शुरू होगी और उसके तुरंत बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे.”
राधाकृष्णन तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रहे हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं, जबकि रेड्डी उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं. रेड्डी (79) जुलाई 2011 में शीर्ष अदालत से सेवानिवृत्त हुए थे. वह एक वरिष्ठ न्यायविद हैं. उन्होंने एक फैसले में, नक्सलियों से लड़ने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गठित सलवा जुडूम को असंवैधानिक घोषित कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में रेड्डी ने विदेश में बैंक खातों में अवैध रूप से रखे गए बेहिसाबी धन को वापस लाने के लिए सभी कदम उठाने के वास्ते एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया था.
सत्रहवें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए, निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (वर्तमान में पांच सीट रिक्त हैं), राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (वर्तमान में एक सीट रिक्त है) शामिल हैं. निर्वाचक मंडल में कुल 788 सदस्य (वर्तमान में 781) हैं.

उपराष्ट्रपति चुनाव पर गरमा रहा सियासी माहौल – NDA बनाम INDIA ब्लॉक, कौन बाजी मारेगा? होने वाली है बड़ी बैठक…

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उपराष्ट्रपति चुनाव पर गरमा रहा सियासी माहौल – NDA बनाम INDIA ब्लॉक, कौन बाजी मारेगा? होने वाली है बड़ी बैठक…

भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गए हैं। 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले आरएसएस पृष्ठभूमि के नेता सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है।

वहीं विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारकर इस मुकाबले को टक्करदार बना दिया है।

कागजों पर आंकड़े एनडीए के पक्ष में साफ दिखाई देते हैं, लेकिन 100 से ज्यादा सांसदों की ‘चुप्पी’ ने सत्ता पक्ष की नींद उड़ा दी है। सवाल यह है कि क्या ये ‘100’ अनिश्चित सांसद विपक्ष के लिए गेमचेंजर साबित होंगे? आइए संसद के नंबर को समझने की कोशिश करते हैं।

क्यों खामोश हैं NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन? फिलहाल हैं कहां? चुनाव के नजदीक आते ही उठे सवाल

▶️ NDA का दांव सीपी राधाकृष्णन: तमिलनाडु और ‘गोंडर कार्ड’ सीपी राधाकृष्णन न सिर्फ आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ चेहरा हैं, बल्कि वे तमिलनाडु की गोंडर जाति से आते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर तमिलनाडु में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है, जहां अब तक पार्टी को खास सफलता नहीं मिली है।राधाकृष्णन का गैर-विवादित चेहरा, राज्यपाल के तौर पर अनुभव और कोयंबटूर जैसे संवेदनशील इलाकों में संगठन मजबूत करने की उनकी क्षमता उन्हें एक सुरक्षित विकल्प बनाती है।

▶️ बी. सुदर्शन रेड्डी विपक्ष का “सरप्राइज पैकेज” विपक्ष ने लंबे मंथन के बाद पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी पर दांव खेला। शुरुआत में आईएसआरओ वैज्ञानिक मायलस्वामी अन्नादुरई और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी के नाम भी चर्चा में थे। लेकिन आखिरकार रेड्डी को मैदान में उतारा गया। विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई केवल “उम्मीदवार” की नहीं, बल्कि एक आइडियोलॉजिकल बैटल है। रेड्डी खुद भी लगातार मीडिया से संवाद कर रहे हैं, सांसदों से मिल रहे हैं और हर मंच पर एनडीए उम्मीदवार की ‘खामोशी’ पर सवाल उठा रहे हैं।

“उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: क्या 100 ‘अनिश्चित’ सांसद NDA की जीत पर लगा देंगे ग्रहण? विपक्ष ने बढ़ाई टेंशन”

Vice President Election India 2025: : संसद का नंबर गेम, किसके पास कितनी ताकत? उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले संसद में मौजूदा संख्या और गठबंधनों की ताकत को समझना जरूरी है। आइए एक नजर डालते हैं।

लोकसभा की कुल सीटें: 543 इस समय वर्तमान में लोकसभा की एक 1 सीट (पश्चिम बंगाल की बशीरहाट) खाली है। यानी फिलहाल लोकसभा में 542 सांसद मौजूद हैं।

राज्यसभा की कुल सीटें: 245 इस समय वर्तमान में राज्यसभा में कुल 245 सीटों में से 6 सीटें खाली हैं (4 जम्मू-कश्मीर, 1 झारखंड और 1 पंजाब)। यानी फिलहाल राज्यसभा में 239 सांसद सक्रिय हैं। इस तरह दोनों सदनों को मिलाकर वर्तमान में निर्वाचित सांसदों की कुल संख्या 782 है।

जीत के लिए जरूरी आंकड़ा: किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कुल सांसदों के आधे से अधिक यानी 391 वोट चाहिए।

▶️ गठबंधनों की लोकसभा-राज्यसभा में मौजूदा ताकत  एनडीए (NDA) लोकसभा में: 293 सांसद राज्यसभा में: 134 सांसद कुल मिलाकर: लगभग 427 सांसदों का समर्थन।

विपक्ष (INDIA ब्लॉक) लोकसभा में: 249 सांसद राज्यसभा में: 106 सांसद कुल मिलाकर: लगभग 355 सांसदों का समर्थन।

एनडीए के पास इस समय आराम से बहुमत (391 से ऊपर) हासिल करने लायक सांसद हैं। विपक्ष INDIA ब्लॉक सिर्फ 37 सांसदों से बहुमत से पीछे है। लेकिन खेल यहीं दिलचस्प हो जाता है, क्योंकि क्रॉस वोटिंग और 100+ अनिश्चित सांसदों की चुप्पी इस चुनाव को रोमांचक बना रही है।

▶️ 100 सांसदों की “चुप्पी” बनी टेंशन रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 100 से 130 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक खुलकर अपना पत्ता नहीं खोला है। इनमें छोटे दलों, निर्दलीय और कुछ असंतुष्ट सांसद शामिल हैं। हालांकि जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी के पास 15 सांसद हैं, जिन्होंने NDA को सपोर्ट करने का वादा किया है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इंडिया ब्लॉक को समर्थन देने का वादा किया है।

विपक्ष इन्हीं 100 सांसदों को साधने में जुटा है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेता दावा कर रहे हैं कि वे इस ‘अनिश्चित’ वोट बैंक को अपनी तरफ मोड़कर मुकाबले को रोमांचक बना सकते हैं। 2022 में उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था। यानी इतिहास गवाही देता है कि सभी सांसद वोटिंग में एकजुट नहीं होते। यही डर एनडीए के माथे पर शिकन की वजह है।

अगस्त 2022 में जगदीप धनखड़ ने भारी बहुमत से उपराष्ट्रपति चुनाव जीता था। उस समय एनडीए के पास न सिर्फ नंबर थे बल्कि विपक्ष बिखरा हुआ था। 2025 की तस्वीर अलग है -विपक्ष एकजुट है और NDA के भीतर भी “चुप” सांसदों का सवाल उठ रहा है।

क्या ये 100 सांसद NDA की जीत पर ग्रहण लगाएंगे? या फिर मोदी-शाह-राजनाथ की रणनीति एक बार फिर विपक्ष की चाल को नाकाम कर देगी? 9 सितंबर को तस्वीर साफ होगी, लेकिन अभी के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव का रोमांच अपने चरम पर है।

भारत के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो अब तक केवल चार बार उपराष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए हैं। 1952 से 1962 तक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन लगातार दो बार निर्विरोध उपराष्ट्रपति बने। 1952 में जनाब शेख खादिर हुसैन ने अपना नामांकन वापस ले लिया था, जिसके बाद राधाकृष्णन अकेले प्रत्याशी रह गए। इसके बाद, 1979 में देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश मो. हिदायतुल्लाह निर्विरोध उपराष्ट्रपति चुने गए।

IMD! राजस्थान और बिहार से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR तक अलग-अलग मौसम का असर देखने को मिलेगा।

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IMD! राजस्थान और बिहार से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR तक अलग-अलग मौसम का असर देखने को मिलेगा।

Aaj ka Mausam (Weather Forecast Today): सितंबर का महीना बारिश और बदलते मौसम का मिला-जुला असर लेकर आया है। कभी झमाझम बारिश तो कभी उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग (IMD) ने 8 सितंबर को कई राज्यों के लिए नया अलर्ट जारी किया है।

इसमें राजस्थान और बिहार से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR तक अलग-अलग मौसम का असर देखने को मिलेगा।

कहीं भारी बारिश का मंजर तो कहीं हल्की बूंदाबांदी का सिलसिला लोगों की दिनचर्या पर असर डाल सकता है। खास बात यह है कि बिहार में अगले कुछ दिनों तक आफत भरी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। जबकि राजस्थान और उत्तराखंड में भी भारी से भारी बारिश का अनुमान है।

अलग-अलग जगहों के लिए अलर्ट मौसम विभाग ने 8 सितंबर को देश के कई हिस्सों के लिए अलर्ट जारी किया है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और मध्य महाराष्ट्र में भी हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। दिल्ली-एनसीआर में भी बूंदाबांदी होने की उम्मीद है। यहां तापमान दिन में 34 से 36 डिग्री और रात में 23 से 25 डिग्री रह सकता है।

‘परदे के विलेन, रियल लाइफ हीरो’, एक बार फिर मसीहा बनकर उभरे सोनू सूद, बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचे पंजाब बिहार में आफत भरी बारिश का खतरा बिहार में मॉनसून दोबारा पूरी ताकत के साथ लौट रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में आसमान से बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश का खतरा रहेगा। इस सीजन में अब तक 227 लोगों की मौत हो चुकी है। 13 सितंबर तक पूरे राज्य में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका है।

आज कहां होगी बारिश आज भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और उत्तर बिहार के जिलों समेत 25 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इनमें से 19 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का भी खतरा है, जिस पर येलो अलर्ट जारी किया गया है। पटना और गया समेत 13 जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।

यूपी में भी बरसात का दौर उत्तर प्रदेश में मौसम अलग-अलग रूप दिखा रहा है। कहीं बारिश हो रही है तो कहीं उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग ने बताया कि 8 से 10 सितंबर तक झमाझम बारिश होगी और 10 सितंबर से गरज-चमक के साथ तेज बारिश का नया दौर शुरू होगा।

दिल्ली से सटे जिलों के लिए चेतावनी नोएडा, बागपत और गाजियाबाद में बारिश के चलते खास अलर्ट जारी किया गया है। 12 सितंबर को पूर्वी यूपी के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी यूपी में भी गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। अगले सात दिन तक मौसम का यही हाल रहने की संभावना है।

उत्तराखंड में रुक-रुक कर होगी बारिश उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में आज रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है। मानसून के दौरान राज्य को पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा है और फिलहाल प्रशासन टूटी सड़कों को दुरुस्त करने में जुटा है।

राजस्थान के कई जिलों में अलर्ट राजस्थान में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी दी है। राजसमंद, जालोर, सिरोही, उदयपुर, डुंगरपुर, पाली, जोधपुर और बाड़मेर जिलों में तेज बारिश की संभावना है। जयपुर में आज अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री रहेगा। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी, महागठबंधन और एनडीए- रैलियों और बैठकों से लेकर रणनीति

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी, महागठबंधन और एनडीए- रैलियों और बैठकों से लेकर रणनीति

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी अपने चरम पर है। रैलियों और बैठकों से लेकर रणनीति और सोशल मीडिया तक, हर स्तर पर दलों की सक्रियता बढ़ गई है। लेकिन इस चुनाव का सबसे अहम सवाल जनता के मूड से ज्यादा अब सीट बंटवारे के समीकरण पर टिक गया है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों खेमों में सीट शेयरिंग पर गुत्थी उलझी हुई है।

महागठबंधन: आठ दल और अनगिनत दावेदारी

महागठबंधन में इस बार राजद, कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा, माकपा और भाकपा-माले पहले से शामिल थे। अब पशुपति कुमार पारस की रालोजपा और झामुमो भी इसमें जुड़ गए हैं। इसके साथ ही गठबंधन का आकार तो बड़ा हुआ है, लेकिन सीटों का समीकरण और जटिल हो गया है। राजद भले ही सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर नेतृत्व कर रही हो, मगर सहयोगियों की मांगें इतनी ऊंची हैं कि सभी को संतुष्ट करना लगभग असंभव दिखता है।

कांग्रेस और भाकपा-माले पहले से ही ज्यादा सीटों की मांग पर अड़ी हुई हैं। झामुमो की नजर आदिवासी बहुल इलाकों-चकाई, कटोरिया और इसी तरह की सीटों पर है। उसकी मांग 12 सीटों तक पहुंच गई है, जबकि उसे 4 से 6 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। रालोजपा आधा दर्जन सीटों की दावेदारी कर रही है, लेकिन शायद 2-3 सीटों से ही संतुष्ट होना पड़े।

मुकेश सहनी की वीआईपी भी महागठबंधन का अहम हिस्सा है। वे सार्वजनिक मंचों पर बार-बार कहते हैं कि “सबकुछ ठीक चल रहा है”, लेकिन अंदरखाने उनकी महत्वाकांक्षाएं बड़ी हैं। सहनी उपमुख्यमंत्री पद तक का दावा करने का संकेत दे चुके हैं। इन हालात में महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कांग्रेस को भी खुश रखें, वाम दलों की महत्वाकांक्षाओं को भी सीमित करें और नए सहयोगियों को भी सम्मानजनक जगह दें।

एनडीए: अपने ही घर में बढ़ी तनातनी दूसरी ओर, एनडीए में भी स्थिति बिल्कुल आसान नहीं है। चिराग पासवान इस बार 40 से अधिक सीटों की मांग पर अड़े हैं। वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी 20 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं है। उपेंद्र कुशवाहा की भी जातीय आधार पर प्रभाव वाली सीटों पर मजबूत दावेदारी है।

भाजपा और जेडीयू के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इन दावेदारियों को किस तरह संतुलित करें। अगर सहयोगियों को उनकी अपेक्षा के अनुसार सीटें नहीं मिलतीं, तो बगावत और असंतोष की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता।

समीकरण बदल सकते हैं नए खिलाड़ी इस बार के चुनाव में दो नाम ऐसे हैं जिन पर सबकी नजर है। एक प्रशांत किशोर और दूसरा नाम तेज प्रताप यादव का है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक PK अभी तक किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बने हैं। उनकी रणनीति अगर सही वक्त पर आई तो कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।

लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव राजद से लगातार नाराज़ चल रहे हैं, तेज प्रताप अगर अंत तक मनाए नहीं गए तो महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है। बिहार चुनाव 2025 की तस्वीर यह साफ कर रही है कि असली लड़ाई केवल जनता को रिझाने की नहीं है। यह चुनाव गठबंधन के भीतर तालमेल और सीट बंटवारे के संतुलन की भी परीक्षा है।

महागठबंधन और एनडीए- दोनों खेमों में पेंच फंसना तय महागठबंधन और एनडीए – दोनों खेमों में पेंच फंसना तय है। अगर सहयोगियों को नाराज़ किया गया तो वे बगावत कर सकते हैं, और अगर उनकी हर मांग मान ली गई तो बड़े दलों की सीटें घट जाएंगी। ऐसे में राजनीतिक गणित पूरी तरह से बदल सकता है।

यही वजह है कि बिहार की सियासत में आज हर किसी की निगाहें प्रशांत किशोर और तेज प्रताप यादव जैसे अनिश्चितता के केंद्रों पर भी टिकी हैं। कुल मिलाकर, 2025 का बिहार चुनाव सीटों की गिनती से कहीं ज्यादा गठबंधन की जोड़-तोड़ और अंदरूनी राजनीति का इम्तिहान साबित होगा।

“15 सिंतबर को PM Modi देंगे सीमांचल और कोसी को बड़ा तोहफा, रेल कनेक्टिविटी के ज़रिए चुनावी जंग की तैयारी”

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“15 सिंतबर को PM Modi देंगे सीमांचल और कोसी को बड़ा तोहफा, रेल कनेक्टिविटी के ज़रिए चुनावी जंग की तैयारी”

बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर बड़े तोहफों के साथ राज्य की जनता के बीच पहुंचने वाले हैं। 15 सितंबर को पीएम मोदी पूर्णिया से चार नई ट्रेनों का शुभारंभ कर सकते हैं।

इनमें जोगबनी-दानापुर वंदे भारत एक्सप्रेस, मुजफ्फरपुर-हैदराबाद अमृत भारत एक्सप्रेस, सहरसा-अमृतसर अमृत भारत एक्सप्रेस और जोगबनी-इरोड अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।

”यह कार्यक्रम न सिर्फ पूर्वोत्तर बिहार की रेल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि लोकसभा और अब विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते कदमों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा।”

उत्तर बिहार को वंदे भारत और अमृत भारत का बड़ा तोहफा जोगबनी-दानापुर वंदे भारत एक्सप्रेस से कोसी, मिथिलांचल और तिरहुत इलाके के लोगों को तेज और आरामदायक यात्रा की सुविधा मिलेगी। यह ट्रेन पटना (दानापुर) को सीमांचल और नेपाल बॉर्डर से सीधा जोड़ेगी। मुजफ्फरपुर-हैदराबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पहली बार सीधे बिहार के उत्तर-मध्य क्षेत्र को दक्षिण भारत के आईटी और रोजगार हब हैदराबाद से जोड़ेगी।

अब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। सहरसा-अमृतसर अमृत भारत एक्सप्रेस सीमांचल और कोसी को सीधे पंजाब से जोड़ते हुए कामगारों और छात्रों को बड़ी राहत देगी। जोगबनी-इरोड (तमिलनाडु) अमृत भारत एक्सप्रेस लंबी दूरी के यात्रियों के लिए क्रांतिकारी कदम होगा।

मुजफ्फरपुर को मिली पहली अमृत भारत एक्सप्रेस मुजफ्फरपुर के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है। यहां से पहली बार सीधी अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू होगी, जो सीधे हैदराबाद तक जाएगी। इस ट्रेन से औसतन 3 से 5 हजार यात्रियों को सीधा लाभ होगा। यह कनेक्टिविटी बिहार के युवाओं को दक्षिण भारत में रोजगार, शिक्षा और बिज़नेस के नए अवसरों से जोड़ेगी।

सहरसा की दूसरी अमृत भारत सहरसा से पहले से ही लोकमान्य तिलक (मुंबई) के लिए अमृत भारत एक्सप्रेस चल रही है। अब अमृतसर के लिए दूसरी ट्रेन मिलने से यहां के यात्रियों की लंबी दूरी की यात्रा और भी आसान होगी। कोसी क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों और विद्यार्थियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।

नेपाल कनेक्टिविटी और व्यापारिक फायदे जोगबनी से वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस का परिचालन नेपाल के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। नेपाल बॉर्डर से जुड़ा यह इलाका अब सीधे पटना, दिल्ली, हैदराबाद और दक्षिण भारत से जुड़ जाएगा। इससे व्यापार, पर्यटन और सीमा पार आवाजाही को भी नया आयाम मिलेगा।

चुनावी तोहफा और राजनीतिक संदेश पिछले दौरे में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार को कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी। अब चार नई ट्रेनों की शुरुआत को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। यह कदम उत्तर बिहार और सीमांचल के मतदाताओं को सीधा संदेश देता है कि केंद्र सरकार उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं पर गंभीर है।

रेल जैसी बुनियादी सुविधा, जो रोज़मर्रा की जिंदगी और पलायन से जुड़ी है, चुनावी मैदान में बीजेपी को बढ़त दिला सकती है। सीमांचल और कोसी जैसे क्षेत्र जहां एनडीए कमजोर रहा है, वहां यह ट्रेनों का तोहफा सीधा चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा सिर्फ रेल कनेक्टिविटी का विस्तार नहीं है, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाताओं को दिया गया एक बड़ा चुनावी संदेश है। नई ट्रेनों से जहां यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, वहीं यह बिहार को दक्षिण और उत्तर भारत के साथ मजबूती से जोड़ेगा। रेल की इन नई सौगातों से कोसी, मिथिलांचल, सीमांचल और तिरहुत के लोग तो खुश होंगे ही, साथ ही बीजेपी को भी चुनावी लाभ मिलने की संभावना है।

“सुदर्शन रेड्डी या राधाकृष्णन? उपराष्ट्रपति चुनाव में किसके समर्थन में वोट करेगी ओवैसी की पार्टी AIMIM”

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“सुदर्शन रेड्डी या राधाकृष्णन? उपराष्ट्रपति चुनाव में किसके समर्थन में वोट करेगी ओवैसी की पार्टी AIMIM”

एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को समर्थन देने का ऐलान किया है. ओवैसी ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद बी सुदर्शन रेड्डी से बात की और उन्हें शुभकामनाएं दीं.

लोकसभा में एआईएमआईएम का इस समय ओवैसी ही नेतृत्व कर रहे हैं.

असद ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि तेलंगाना सीएमओ ने उनसे बात कर रेड्डी के समर्थन का अनुरोध किया था. उन्होंने लिखा, “तेलंगाना सीएमओ ने मुझसे बात की और अनुरोध किया कि हम जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद के लिए समर्थन दें. एआईएमआईएम जस्टिस रेड्डी का समर्थन करेगी, जो हमारे साथी हैदराबादी और एक सम्मानित ज्यूरीस्ट हैं.”

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुदर्शन रेड्डी विपक्षी इंडिया ब्लॉक (INDIA Bloc) की तरफ से उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार हैं. 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव से पहले बीते महीने में विपक्षी दलों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठक कर रेड्डी के नाम पर सहमति जताई थी.

बी सुदर्शन रेड्डी ने सभी दलों से मांगा समर्थन उम्मीदवार घोषित होने के बाद बी सुदर्शन रेड्डी ने सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील की थी. उन्होंने कहा, “मैं सभी पार्टियों से अपील करता हूं कि वे मुझे समर्थन दें. मैं एनडीए (NDA) की पार्टियों से भी आग्रह करता हूं कि वे मुझे समर्थन दें.”

सर्वसम्मति से INDIA के कैंडिडेट बनाए गए सुदर्शन रेड्डी सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी का ऐलान विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद किया गया था, जिसमें साझा उम्मीदवार पर चर्चा की गई थी. इस निर्णय को विपक्ष की ओर से एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

ओवैसी का समर्थन रेड्डी की उम्मीदवारी को और मजबूती प्रदान करता है, खासकर हैदराबाद और तेलंगाना से उनके संबंधों को देखते हुए. अब देखना होगा कि 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष रेड्डी के समर्थन को किस हद तक एकजुट कर पाता है. उनका सामने एनडीए की तरफ से महाराष्ट्र के गवर्नर सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है.