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इन देशों में भारतीय बन जाते हैं लखपति, यहां भारत के रुपए की वैल्यू कितनी ज्यादा है. आइए इन देशों के बारे में जानते हैं!

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इन देशों में भारतीय बन जाते हैं लखपति, यहां भारत के रुपए की वैल्यू कितनी ज्यादा है. आइए इन देशों के बारे में जानते हैं!

क्या कभी आपने सोचा है कि भारत के 500 या 2000 रुपये लेकर आप किसी और देश में लखपति जैसे महसूस कर सकते हैं? ये सिर्फ कहने की बात नहीं है बल्कि एक हकीकत है. दुनिया में कई ऐसी कमजोर करेंसियां हैं जहां भारतीय रुपया इतना ताकतवर होता है कि आपकी जेब में रखे कुछ हजार रुपये वहां के लाखों में बदल जाते हैं.

आइए इन देशों के बारे में जानते हैं और पता करते हैं कि यहां भारत के रुपए की वैल्यू कितनी ज्यादा है.

ईरान ईरान की करेंसी ईरानी रियाल को दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में गिना जाता है. यहां 1 भारतीय रुपया लगभग 490 से 500 रियाल के बराबर होता है. यानी अगर आप सिर्फ 10,000 रुपये लेकर ईरान जाते हैं तो आपके पास करीब 50 लाख रियाल होंगे.

वियतनाम वियतनाम की करेंसी का नाम है डोंग, और इसकी गिनती भी दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी में होती है. 1 भारतीय रुपया यहां पर करीब 300 वियतनामी डोंग के बराबर है. सरकार जानबूझकर इसकी वैल्यू कम रखती है ताकि देश का एक्सपोर्ट बढ़ सके. लेकिन इस वजह से भारतीय यात्रियों के लिए ये जगह एक बेमिसाल डेस्टिनेशन बन जाती है.

इंडोनेशिया इंडोनेशियाई करेंसी रुपिया नाम से जानी जाती है लेकिन इसकी वैल्यू भारतीय रुपये से काफी कम है. यहां पर 1 भारतीय रुपया आपको 185 से 190 इंडोनेशियाई रुपिया दिला सकता है. खास बात यह है कि इंडोनेशिया की इकोनॉमी कमजोर नहीं है, लेकिन फिर भी करेंसी वैल्यू कम है. इसलिए अगर आप यहां 5000 रुपये लेकर जाएं, तो आपके पास लगभग 9 लाख रुपिया होंगे.

लाओस लाओस की करेंसी किप भी दुनिया की सबसे सस्ती करेंसी में गिनी जाती है. यहां 1 भारतीय रुपया आपको 250 से 260 किप दिला सकता है. लाओस एक छोटा और खूबसूरत देश है जो अभी भी विकासशील है. भारतीय पर्यटकों के लिए ये जगह बेहद सस्ती है जहां वे कम पैसे में नेचर और हिस्ट्री का शानदार अनुभव ले सकते हैं.

गिनी (अफ्रीका) अफ्रीका का देश गिनी, जहां एक भारतीय रुपया करीब 100 गिनी फ्रैंक के बराबर होता है. इस देश में बॉक्साइट और लौह अयस्क जैसे बहुमूल्य संसाधन होने के बावजूद करेंसी काफी कमजोर है. राजनीतिक अस्थिरता और इंफ्रास्टक्चर की कमी इसकी प्रमुख वजहें मानी जाती हैं. लेकिन अगर आप अफ्रीकी कल्चर और वाइल्डलाइफ को करीब से देखना चाहते हैं, तो गिनी एक किफायती और यूनीक डेस्टीनेशन हो सकता है.

“हैदराबाद गजट का महाराष्ट्र के मराठा आरक्षण से क्या है कनेक्शन? जिसके कारण सरकार को माननी पड़ी मांग”

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“हैदराबाद गजट का महाराष्ट्र के मराठा आरक्षण से क्या है कनेक्शन? जिसके कारण सरकार को माननी पड़ी मांग”

मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को मनोज जरांगे की 8 में से 6 मांगे मान लीं. इसके साथ आंदोजन और भूख हड़ताल खत्म हो गई. जो 5 मांगें मानी गई हैं उसमें हैदराबाद गजट को लागू करने का फैसला, 15 दिन में सतारा और औंध गजट्स को 15 दिन में लागू करने की बात, मृतकों के परिवारों को 15 करोड़ की मदद और नौकरी.

इसके अलावा 58 लाख कुनबी नोंदी ग्राम पंचायत स्तर पर लगेंगी और वंशावली (शिंदे) समिति को ऑफिस और समय मिलेगा.

वहीं जिन 2 मांगों पर सरकार ने इनकार किया है, उसमें सगे-सोयरे प्रमाण पत्र की जांच शुरू करने की मांग और मराठा-कुनबी पर सरकार एक आदेश निकलाने की मांग थी. महाराष्ट्र सरकार द्वारा मानी गई इन 5 मांगों से हैदराबाद गजट चर्चा में आ गया है. जानिए क्या है हैदराबाद गजट, इसका महाराष्ट्र और मराठा आरक्षण से क्या है कनेक्शन.

क्या है हैदराबाद गजट? आसान शब्दों में समझें तो यह हैदराबाद की रियासत की ओर से जारी होने वाला नोटिफिकेशन (अधिसूचना) है. नोटिफिकेशन में कुनबी यानी किसान जाति को पिछड़ा बताया गया था. इसकी वजह थी इनका सामाजिक और आर्थिकतौर से पिछड़ा होना. अब मराठा आरक्षण के आंदोलन में इसे मुद्दा बनाया गया है. महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने कहा है कि हैदराबाद गजट को लागू करने की मांग मान ली है.

हालांकि, सरकार का कहना है कि हर मराठा को कुनबी घोषित करना कानूनी तौर पर आसान काम नहीं है. इस पूरी प्रक्रिया में दो माह का समय लगेगा. वहीं, आरक्षण पर आवाज उठाने वाले जरांगे पाटिल का कहना है कि अगर किसी के रिश्तेदार को कुनबी प्रमाणपत्र मिला है तो बाकी परिवार को भी यह जरूर मिलना चाहिए.

हैदराबाद गजट का महाराष्ट्र से कनेक्शन मनोज जरांगे ने साफतौर पर कहा है कि अब मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठाओं को आरक्षण का फायदा मिलेगा. इससे सीधेतौर पर उन्हें OBC आरक्षण के तहत शिक्षा और नौकरियों फायदा मिलेगा. अब सवाल है कि हैदराबाद के निजाम की अधिसूचना का महराष्ट्र से कनेक्शन क्या है?

इसका कनेक्शन उस दौर से है जब देश आजाद नहीं हुआ था. मराठवाड़ा में महाराष्ट्र के 8 जिले शामिल हैं, लेकिन आजादी से पहले यह हैदराबाद की रियासत का हिस्सा हुआ करता था. हैदराबाद के तत्कालीन निजाम ने 1918 में आदेश दिया था जिसे हैदराबाद गजट के नाम से जाना जाता है.

क्या फायदा होगा? मनोज जरांगे ने मांग की थी कि हैदराबाद गजट को प्रमाण मानते हुए महाराष्ट्र सरकार मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठा समाज को कुनबी होने का प्रमाण पत्र दे. सरकार ने ऐसा मानते हुए समाज को कुनबी जाति का दर्जा दे दिया है. इससे उन्हें शिक्षा और नौकरी में ओबीसी आरक्षण का फायदा मिलेगा.

इससे मराठा समाज को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी. हालांकि, इसकी पूरी प्रक्रिया के लिए सरकार ने दो माह का समय मांगा है, लेकिन सरकार ने सतारा और औंध गैजेटियर का कानूनी अध्ययन कर 15 दिन में इस पर कोई निर्णय लेने की बात कही है.

कब अलग हुआ मराठवाड़ा? 1948 तक मराठवाड़ा क्षेत्र निज़ाम के हैदराबाद राज्य का हिस्सा हुआ करता था. 17 सितम्बर 1948 को भारत सरकार ने ऑपरेशन पोलाे चलाया और निजामशाही और उनके अत्याचारों का अंतर किया. हैदराबाद राजय को प्रशासनिक रूप से बांटा गया. 1 नवंबर 1956 को स्टेट रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट लागू हुआ. इसके तहत भाषा को आधार बनाते हुए राज्यों का पुनर्गठन हुआ. इस तरह मराठवाड़ा, जहां मुख्य भाषा मराठी थी उसे हैदराबाद से अलग करके महाराष्ट्र में शामिल किया गया. तेलुगू भाषा इलाके आंध्र प्रदेश, कन्नड़ भाषी कर्नाटक (तब मैसूर) में चले गए. इस तरह हैदराबाद गजट मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चर्चा में आया.

“अमेरिका के खिलाफ नहीं रची जा रही कोई साजिश, ट्रंप के दावे को क्रेमलिन ने किया खारिज”

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“अमेरिका के खिलाफ नहीं रची जा रही कोई साजिश, ट्रंप के दावे को क्रेमलिन ने किया खारिज”

चीन में विक्ट्री डे परेड के दौरान 20 से ऊपर देशों के राष्ट्र अध्यक्ष इकट्ठा हुए थे. इस दौरान पूरी दुनिया की नजर उत्तर कोरिया के किम जोंग यून और रूस के व्लादिमीर पुतिन पर थी. किम जोंग, पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक साथ शी जिनपिंग के साथ विक्ट्री डे परेड में शामिल हुए.

इससे पहले, ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चीन के शी जिनपिंग को संबोधित करते हुए लिखा था, ‘कृपया व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं दें, क्योंकि आप संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.’

क्रेमलिन अधिकारी यूरी उशाकोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बीजिंग की सैन्य परेड में तीनों नेताओं द्वारा वाशिंगटन के खिलाफ साजिश रचने के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी नेता शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन अमेरिका के खिलाफ कोई साजिश नहीं रच रहे हैं.

ट्रंप की व्यक्तिगत भूमिका को हर कोई समझता है- क्रेमलिन उन्होंने एक मीडिया के जवाब में कहा, ‘मैं कहना चाहता हूं कि किसी का भी (अमेरिका के खिलाफ) साजिश रचने का इरादा नहीं था. इसके अलावा, मैं यह कह सकता हूं कि आज के वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका, ट्रंप प्रशासन और राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत भूमिका को हर कोई समझता है.’

चीन विक्ट्री डे परेड चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने बुधवार को जापानी आक्रमण के खिलाफ चीनी पीपुल्स युद्ध और विश्व विरोधी फासीवादी युद्ध में जीत की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर पर बड़े पैमाने पर सैन्य परेड का आयोजन किया. जिसमें पाकिस्तान, उत्तर कोरिया, रूस समेत करीब 23 देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया. ये परेड अमेरिका के सामने चीन का शक्ति प्रदर्शन भी समझी जा रही है.

: राहुल गांधी की याचिका पर इलाहाबाद HC ने सुरक्षित रखा फैसला, कहां का और क्या था मामला ?

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: राहुल गांधी की याचिका पर इलाहाबाद HC ने सुरक्षित रखा फैसला, कहां का और क्या था मामला ?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज बुधवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. राहुल गांधी ने वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट के स्पेशल जज के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है.

राहुल गांधी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस समीर जैन ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि फैसला सुनाए जाने तक, स्पेशल जज (एमपी-एमएलए कोर्ट) के आदेश पर रोक रहेगी.

कोर्ट के फैसले के खिलाफ HC गए थे राहुल एमपी-एमएलए कोर्ट के स्पेशल जज ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग से जुड़ी एक याचिका को नए सिरे से सुनवाई करने के लिए एसीजेएम कोर्ट के पास भेज दिया था जिसके खिलाफ कांग्रेस नेता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया. यह मामला अमेरिका में सिखों को लेकर पिछले साल 2024 में दिए गए एक बयान से जुड़ा है.

वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा नाम के एक शख्स ने वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) के समक्ष आवेदन किया था जिसने पिछले साल 28 नवंबर को इस केस की सुनवाई करने के बाद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाले आवेदन को खारिज कर दिया था. तब कोर्ट ने कहा था कि यह भाषण अमेरिका में दिया गया था, इसलिए यह मामला उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है.

कहां का और क्या था मामला कोर्ट की ओर से याचिका खारिज किए जाने को नागेश्वर मिश्रा ने पुनरीक्षण अदालत के समक्ष चुनौती दी जिसने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली और एसीजेएम कोर्ट को इस मामले में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश भी दिया.

मामला पिछले साल सितंबर का है. अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए अच्छा माहौल नहीं है. उनके इस बयान पर देश में भारी विरोध हुआ और इसे भड़काऊ तथा विभाजनकारी बताया गया.

नागेश्वर मिश्रा ने राहुल के इस बयान के खिलाफ वाराणसी के सारनाथ थाना में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वहां पर कामयाबी नहीं मिली. इसके बाद नागेश्वर ने राहुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को लेकर कोर्ट में आवेदन दाखिल किया. लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह याचिका खारिज कर दी. 28 नवंबर, 2024 को कोर्ट ने यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज कर दिया कि चूंकि यह मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा हुआ है तो यह उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है.

याचिका खारिज होने के बाद वाराणसी निवासी नागेश्वर ने सेशंस कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका लगाई जिसे कोर्ट की ओर से इस साल 21 जुलाई को स्वीकार कर लिया गया. हालांकि राहुल गांधी ने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसमें यह दलील दी गई कि वाराणसी के कोर्ट का आदेश गलत, अवैध और उसके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है.

“Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में इन दालों का सेवन करने से बचें, जानें धार्मिक महत्व और नियम”

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“Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में इन दालों का सेवन करने से बचें, जानें धार्मिक महत्व और नियम”

साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर, रविवार के दिन से हो रही है. पितृपक्ष पूरे 15 दिन तक चलते हैं यानी भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से अमावस्या तिथि तक. इस दौरान पितरों का श्राद्ध कर्म किया जाता है.

जिन दल को पितृपक्ष के दौरान खाने पर मनाही होती है वह तामसिक गुणों से युक्त होती है और श्राद्ध के दौरान पवित्रता को भंग करती हैं इसलिए इन दल को खाने से परहेज करनी चाहिए.

मसूर दाल की दाल का सेवन पितृपक्ष के दौरान नहीं करना चाहिए. मसूर दाल को शास्त्रों में तामसिक भोजन माना गया है. इसका सेवन पवित्रता को भंग करता है और पितृ दोष का कारण बन सकता है.

उड़द दाल की दाल भी तामसिक गुणों वाली मानी जाती है, जिसके सेवन से पितरों की आत्मा को तृप्ति नहीं मिलती और श्राद्ध का फल प्रभावित हो सकता है. इसीलिए उड़द की दाल का सेवन ना करें.

चना और इससे बने उत्पाद, जैसे सत्तू, बेसन को पितृ पक्ष में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पवित्रता को कम करता है और पितरों को अप्रसन्न कर सकता है.

ऑपरेशन ब्लैक फ़ॉरेस्ट’ में वीर जवानों ने शौर्यपूर्ण प्रदर्शन कर अभियान को सफल बनाया, सभी सुरक्षाबलों के जवानों को हृदय से बधाई…

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कर्रेगुट्टालु पहाड़ी पर चले अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन ब्लैक फ़ॉरेस्ट’ में वीर जवानों ने शौर्यपूर्ण प्रदर्शन कर अभियान को सफल बनाया, सभी सुरक्षाबलों के जवानों को हृदय से बधाई.

नक्सलियों के विरुद्ध अभियान के इतिहास में ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के दौरान जवानों का शौर्य और पराक्रम एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा.

जब तक सभी नक्सली या तो आत्मसमर्पण न कर दें, पकड़े न जाएँ या समाप्त न हो जाएँ, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, भारत को नक्सलमुक्त बनाकर ही रहेंगे.

गर्मी, ऊँचाई और हर कदम पर IED के खतरों के बावजूद सुरक्षाबलों ने बुलंद हौसले से अभियान को सफल बनाकर नक्सलियों का बेस कैंप समाप्त किया.

कर्रेगुट्टालु पहाड़ी पर नक्सलियों के मैटीरियल डंप और सप्लाई चेन को सुरक्षाबलों के जवानों ने पराक्रम से नष्ट कर दिया.

नक्सलविरोधी अभियानों में गंभीर शारीरिक क्षति उठाने वाले सुरक्षाबलों के जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए मोदी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है.

नक्सलविरोधी अभियानों के कारण पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक के क्षेत्र में साढ़े 6 करोड़ लोगों के जीवन में नया सूर्योदय हुआ है.

मोदी सरकार का  संकल्प है, 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त कर देंगे.

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर सेक्टर-24 में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज के संयुक्त मुख्यालय भवन का शिलान्यास किया।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर सेक्टर-24 में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज के संयुक्त मुख्यालय भवन का शिलान्यास किया।

रजत जयंती वर्ष और गणेश चतुर्थी जैसे पावन अवसर पर सम्पन्न इस समारोह में उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और भवन का थ्री-डी मॉडल अनावृत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भवन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता को नई ऊँचाई देगा, तीनों पावर कंपनियों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और उपभोक्ताओं को एक ही छत के नीचे सभी सेवाएँ उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने इस अवसर पर एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत मौलश्री  पौधरोपण किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 25 वर्षीय यात्रा यह प्रमाण है कि जब संकल्प और संवेदनशीलता साथ चलें तो परिणाम ऐतिहासिक होते हैं। वर्ष 2000 में प्रदेश केवल 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन करता था, आज यह क्षमता बढ़कर 30 हजार मेगावाट हो गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में 1320 मेगावाट क्षमता के नए संयंत्र का शुभारंभ इस उपलब्धि को और सुदृढ़ करने वाला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह प्रगति हर नागरिक के विश्वास, मेहनत और भागीदारी का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में सम्पन्न उनकी जापान और दक्षिण कोरिया यात्रा ने यह अनुभव कराया कि छत्तीसगढ़ अब वैश्विक स्तर की अधोसंरचना और कार्यसंस्कृति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। संयुक्त मुख्यालय भवन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन का निर्माण गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए, ताकि यह ऊर्जा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बने।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नई उद्योग नीति के अंतर्गत पावर सेक्टर में हाल ही में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप आने वाले वर्षों में 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन संभव होगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल प्रदेशवासियों को 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराएगी बल्कि पड़ोसी राज्यों की ज़रूरतें भी पूरी करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने छत्तीसगढ़ को मुफ्त बिजली की ओर तेजी से अग्रसर कर दिया है और अब दूरस्थ अंचलों तक इस योजना का लाभ पहुँच रहा है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को राज्य निर्माण में उनके योगदान के लिए नमन किया। उन्होंने कहा कि लगभग 270 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन ग्रीन एनर्जी आधारित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री सुनील सोनी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त मुख्यालय भवन 10,017 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नौ मंजिला स्वरूप में निर्मित होगा। इसमें  छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड और पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के लिए तीन अलग-अलग टॉवर होंगे। 1300 कर्मचारियों की क्षमता वाले इस भवन में 210 सीटों का प्रेक्षागृह, कर्मचारियों के लिए जिम, दो मंजिला बेसमेंट पार्किंग, मैकेनिकल स्टैक पार्किंग और ई-व्हीकल चार्जिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह भवन बीईई की पाँच सितारा और गृहा की फाइव स्टार ग्रीन रेटिंग मानकों के अनुरूप निर्मित होगा तथा भवन प्रबंधन प्रणाली से इसका संपूर्ण संचालन होगा।

नवा रायपुर में बन रहा यह अत्याधुनिक भवन मंत्रालय, संचालनालय और पुलिस मुख्यालय के समीप होने से अंतर्विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ करेगा तथा प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र को नई ऊँचाई प्रदान करेगा।

“‘अनंत चतुर्दशी’ को गणेश जी के विसर्जन से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कहीं कोई गलती न हो जाए”

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“‘अनंत चतुर्दशी’ को गणेश जी के विसर्जन से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कहीं कोई गलती न हो जाए”

Ganesh Visarjan 2025: रिद्धि-सिद्धि का दाता भगवान श्री गणेश जी का गणेशोत्सव का समापन होने का वक्त आ गया है और पूरे देशभर में विसर्जन की तैयारियां जोरों पर हैं। जैसा कि आप जानते है कि अनंत चतुर्दशी का पर्व हर गणेशोत्सव का अंतिम दिन भी होता है, जब भक्त गणपति बप्पा को धूमधाम से विदा करते हैं।

इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने के साथ-साथ गणपति विसर्जन का भी विशेष महत्व होता हैं। लेकिन इस दौरान कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए। ऐसे में आइए जानते है गणपति विसर्जन के दौरान किन गलतियों को करने से बचना चाहिए?

गणपति विसर्जन के दौरान किन गलतियों को करने से बचना चाहिए नदी- तालाबों को गंदा न करें ज्योतिषयों के अनुसार,गणपति विसर्जन के दौरान गणपति की मूर्तियों को सीधे नदियों या तालाबों में न विसर्जित करें। आजकल पर्यावरण की रक्षा के लिए कृत्रिम टैंक या घर में ही विसर्जन की परंपरा अपनाई जाती है। इससे जल प्रदूषण नहीं होता हैं।

नशा करके विसर्जन गणपति विसर्जन के दिन नशे का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। इस दिन पूरी तरह से सात्विक रहना चाहिए और शुद्ध मन से भगवान की विदाई करनी चाहिए।

अखंडित मूर्ति गणपति विसर्जन के दौरान एक बात का विशेष ध्यान रखें कि विसर्जन के लिए ले जाने से पहले मूर्ति खंडित न हो। खंडित मूर्ति का विसर्जन करना अशुभ माना जाता है।

सीधा पानी में विसर्जन न करें गणपति विसर्जन के दौरान मूर्ति को सीधे पानी में फेंकने या डालने की बजाय, उसे धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक जल में प्रवाहित करें। ऐसा करने से यह एक सम्मानजनक विदाई होगी।

गणपति विसर्जन के दौरान पूजा सामग्री यानी फुल-माला, कपड़े, नारियल या मिठाई जैसी चीजों को पानी में न बहाएं। इन्हें साफ जगह या किसी पवित्र वृक्ष की जड़ में रखें।

जानिए क्या है गणपति विसर्जन का महत्व हिन्दू धर्म में जिस प्रकार गणेशोत्सव का पर्व पूरे धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ठीक उसी प्रकार गणपति विसर्जन भी होता हैं। अनंत चतुर्दशी का दिन, गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का समापन होता हैं।

इस दिन किया गया विसर्जन सिर्फ एक मूर्ति का विसर्जन नहीं, बल्कि अपने सभी दुखों और परेशानियों को भगवान के साथ विसर्जित करने का प्रतीक भी माना जाता हैं। इसलिए, इस विदाई को पूरी श्रद्धा, सम्मान और सही विधि-विधान के साथ करा जाता है, ताकि बप्पा अगले साल फिर से हमारे घर आ सकें।

भारत को रिझाने के लिए रूस ने घटाए तेल के दाम…

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भारत को रिझाने के लिए रूस ने घटाए तेल के दाम…

डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगातार दबाव बना रहे हैं। रूस से तेल खरीदने पर वे नैतिकता का हवाला देते हुए भारत को चेतावनी दे रहे हैं और टैरिफ़ का हथियार दिखा रहे हैं। लेकिन पुतिन का रवैया बिल्कुल उल्टा है—मानो उन्होंने ट्रंप को चिढ़ाने की ठान ली हो।

तियानजिन (चीन) में मोदी और पुतिन की मुलाकात के बाद रूस ने भारत के लिए ऐसा ऑफर रखा है, जिसे देखकर अमेरिका असहज हो उठा। रूस ने कच्चे तेल की कीमत में 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल तक की अतिरिक्त छूट देने का ऐलान कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक भारी-भरकम टैरिफ़ थोप दिया है।

रूस की नई पेशकश ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि रूस का यूराल क्रूड सितंबर-अक्टूबर की डिलीवरी के लिए और सस्ता किया गया है। जुलाई तक यह छूट सिर्फ 1 डॉलर थी, जो पिछले हफ़्ते बढ़ाकर करीब 2.50 डॉलर और अब 3-4 डॉलर तक पहुँच गई है।

अमेरिकी टैरिफ़ का झटका अमेरिका ने शुरुआत में 25% टैरिफ़ लगाया, जिसे बाद में दोगुना कर 50% कर दिया गया। उनका तर्क है कि भारत रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। भारत ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए साफ कहा कि यह ‘दोहरा मानदंड’ है, क्योंकि यूरोप और अमेरिका खुद भी रूस से सामान आयात करते हैं। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने दो टूक कहा कि भारत अपनी ज़रूरत और राष्ट्रीय हितों के मुताबिक वहीं से तेल खरीदेगा, जहाँ बेहतर सौदा मिलेगा।

मोदी-पुतिन मुलाकात और कार डिप्लोमेसी SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की खास बातचीत हुई। शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद दोनों एक ही कार से द्विपक्षीय बैठक स्थल तक पहुँचे। सूत्रों के मुताबिक, पुतिन ने मोदी का इंतज़ार तक किया ताकि वे उनकी कार में शामिल हो सकें। रास्ते में दोनों नेताओं ने करीब 50 मिनट तक गहन चर्चा की और फिर बैठक स्थल पहुंचे। मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पुतिन के साथ हर बातचीत उपयोगी और ज्ञानवर्धक होती है।

“घुसपैठियों की अब खैर नहीं, हर राज्य में बनेंगे डिटेंशन सेंटर, Immigration and Foreigners Act के सख्त प्रावधान देश में लागू”

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“घुसपैठियों की अब खैर नहीं, हर राज्य में बनेंगे डिटेंशन सेंटर, Immigration and Foreigners Act के सख्त प्रावधान देश में लागू”

भारत सरकार ने हाल ही में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 लागू किया है, जिसके तहत देश में विदेशियों के प्रवेश और उनके ठहराव से जुड़े नियम और कड़े कर दिए गए हैं। यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा, संवेदनशील सीमा क्षेत्रों और सामाजिक व्यवस्था को मज़बूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

संदेश साफ है—भारत अब अपनी सुरक्षा नीति में किसी भी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिन विदेशियों पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, जासूसी, आतंकवाद, हत्या, बलात्कार, बाल तस्करी या किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव जैसे गंभीर अपराध साबित होते हैं, उन्हें भारत में आने या रहने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

निरुद्ध केंद्र और बायोमेट्रिक प्रक्रिया कानून के तहत सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे विदेशियों को रखने के लिए निरुद्ध केंद्र (डिटेंशन कैंप) स्थापित करने का आदेश दिया गया है, जब तक कि उन्हें देश से बाहर न भेज दिया जाए। इसके अलावा, किसी भी वीज़ा आवेदक—चाहे वह प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) कार्डधारक ही क्यों न हो—को वीज़ा जारी करने या पंजीकरण से पहले अपनी बायोमेट्रिक जानकारी देना अनिवार्य होगा।

यदि कोई विदेशी अवैध रूप से भारत में पाया जाता है, तो उसे निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक होल्डिंग सेंटर में ही रखा जाएगा और उसकी आवाजाही सीमित कर दी जाएगी। सीमा सुरक्षा बल और तटरक्षक बल को भी अवैध प्रवेश रोकने और उनकी पहचान केंद्र सरकार के पोर्टल पर दर्ज करने का दायित्व सौंपा गया है।

किन गतिविधियों पर लगेगी रोक? गृह मंत्रालय के अनुसार, किसी विदेशी को भारत में प्रवेश या ठहराव से इन कारणों से रोका जा सकता है:

आतंकवादी या विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होना या आर्थिक मदद करना मादक पदार्थों और मन:प्रभावी ड्रग्स की तस्करी मानव तस्करी और बाल शोषण साइबर अपराध, नकली दस्तावेज़ों या क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी धोखाधड़ी नकली मुद्रा का लेन-देन साथ ही, रोजगार वीज़ा वाले विदेशी बिना अनुमति बिजली, जल आपूर्ति या पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े निजी उपक्रमों में काम नहीं कर पाएंगे।

मीडिया और पर्वतारोहण पर नई शर्तें कोई भी विदेशी भारत में फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, टीवी शो, वेब सीरीज़ या किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन हेतु कंटेंट तभी बना सकेगा, जब उसके पास केंद्र सरकार की लिखित अनुमति होगी। इसी तरह, भारत में किसी भी पर्वत शिखर पर चढ़ाई करने के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चढ़ाई करने वालों को मार्ग का विवरण, एक संपर्क अधिकारी की नियुक्ति और संचार उपकरणों की जानकारी भी सरकार को देनी होगी।

प्रतिबंधित क्षेत्र और विशेष नियम हर विदेशी नागरिक को किसी संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने के लिए परमिट लेना होगा। हालाँकि, अफगानिस्तान, चीन और पाकिस्तान मूल के व्यक्तियों को इन क्षेत्रों में प्रवेश की इजाज़त बिल्कुल नहीं दी जाएगी। इन क्षेत्रों में पूरा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड और सिक्किम शामिल हैं, साथ ही जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के कुछ हिस्से भी इसमें आते हैं।

नई नीति का संदेश यह कानून दर्शाता है कि भारत अब विदेशियों की गतिविधियों को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपना रहा है। बढ़ते आतंकी नेटवर्क, साइबर अपराध और अवैध आव्रजन जैसी चुनौतियों ने सरकार को और सतर्क कर दिया है। हालांकि, चिंता यह भी है कि इतने कड़े प्रावधानों का असर कहीं भारत की ‘सॉफ्ट पावर’—शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान—पर न पड़े। इसलिए सरकार के सामने असली चुनौती यही होगी कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करते हुए वैध और निर्दोष विदेशियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।