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“‘अबकी बार मोदी सरकार’, स्लोगन देने वाले एड गुरु पीयूष पांडे का निधन, भारतीय विज्ञापन जगत को बड़ा झटका”

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भारतीय विज्ञापन जगत को बड़ा झटका लगा है. एड गुरु के नाम से मशहूर पीयूष पांडे का निधन हो गया है. उन्होंने 70 साल की उम्र में मुंबई में आखिरी सांस ली. हालांकि मौत के कारण का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है.

पीयूष पांडे ने ‘ अबकी बार मोदी सरकार ‘ और ‘ ठंडा मतलब कोका कोला ‘ समेत कई मशहूर विज्ञापन लिखे थे.

पीयूष ने 27 साल की उम्र में विज्ञापन जगत की दुनिया में कदम रखा था. उन्होंने अपने भाई प्रसून पांडे के साथ ही करियर की शुरुआत की थी. दोनों रेडियो जिंगल्स के लिए अपनी आवाज दिया करते थे. उन्होंने 1982 में विज्ञापन कंपनी ओगिल्वी के साथ काम करना शुरू किया. इसके बाद 1994 में उन्हें ओगिल्वी के बोर्ड में नॉमिनेट किया गया. अहम बात यह है कि उन्हें 2016 में भारत सरकार ने पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया.

पीयूष गोयल ने पीयूष पांडे के निधन पर शेयर की इमोशनल पोस्ट

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पीयूष पांडे के निधन पर दुख जाहिर किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, ” पद्मश्री पीयूष पांडे के निधन पर दुख जाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. विज्ञापन जगत में एक अभूतपूर्व व्यक्तित्व, उनकी रचनात्मक प्रतिभा ने कहानी कहने की कला को नई परिभाषा दी और हमें कभी न भूलने वाली कहानियां दीं.”

उन्होंने लिखा,” मेरे लिए वे एक ऐसे मित्र थे जिनकी प्रतिभा उनकी प्रामाणिकता, गर्मजोशी और बुद्धिमता से झलकती थी. मैं हमारी आकर्षक बातचीत को हमेशा संजो कर रखूँगा. वे अपने पीछे एक गहरा शून्य छोड़ गए हैं, जिसे भरना मुश्किल होगा. उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदना. ओम शांति!”

हंसल मेहता ने जताया दुख

फिल्ममेकर हंसल मेहता समेत सिनेमा जगत के कई दिग्गजों ने पीयूष पांडे के निधन पर दुख जाहिर किया है. हंसल मेहता ने एक्स पर लिखा, ” फेविकोल का जोड़ टूट गया. आज एड वर्ल्ड ने अपना ग्लू खो दिया. ”

बता दें कि पीयूष पांडे ने कोका कोला कंपनी के लिए ‘ ठंडा मतलब कोका कोला ‘ , कैडबरी के लिए , ‘ कुछ मीठा हो जाए ‘ समेत कई और मशहूर विज्ञापन लिखे थे.

“112 Drug Samples Fail Quality Tests: बाजार में बिक रहीं ये 112 दवाएं कर देंगी बीमार, यह मेडिसिन तो निकली नकली”

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मरीजों की सेहत को दुरुस्त करने वाली दवाइयों की क्वालिटी को लेकर सरकार ने चौंकाने वाली जानकारी दी है. दरअसल, सितंबर 2025 के दौरान बाजार में दवाओं की जांच की गईं, जिनमें 112 दवाओं के सैंपल क्वालिटी चेक में फेल हो गए.

इसका मतलब यह है कि मरीजों को ठीक करने वाली ये 112 दवाएं उन्हें बीमार कर सकती हैं. इन 112 में 52 सैंपल्स की जांच सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेट्रीज ने की, जबकि 60 सैंपल्स को स्टेट लैब्स ने ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) यानी मानक गुणवत्ता से कम पाया. वहीं, छत्तीसगढ़ में दवा का एक सैंपल नकली भी पाया गया. यह जानकारी हेल्थ मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने गुरुवार को दी.

क्या हैं NSQ दवाइयां?

हेल्थ मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि हर महीने दवाइयों की क्वालिटी चेक की जाती है. इसके लिए सेंट्रल और स्टेट की लैब्स में सैंपल्स टेस्ट किए जाते हैं. सितंबर में हुई इस जांच में कुल 112 दवाइयों के सैंपल मानक गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे. NSQ का मतलब है कि ये दवाइयां एक या उससे ज्यादा क्वालिटी पैरामीटर्स में फेल हो गईं. इनमें दवा का असर करने वाला तत्व सही मात्रा में नहीं था या कोई और कमी थी.

अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि यह खराबी सिर्फ उन सैंपल्स के बैच में थी, जिनकी जांच की गई. इसका मतलब यह नहीं कि उस कंपनी की दूसरी दवाइयां या उनके अन्य बैच भी खराब हैं. लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह जांच सिर्फ एक खास बैच की थी. मार्केट में उपलब्ध दूसरी दवाइयों पर इसका असर नहीं है.

एक दवा मिली नकली

इन 112 सैंपल्स के अलावा छत्तीसगढ़ में एक दवा का सैंपल नकली पाया गया। इस दवा को ऐसी कंपनी ने बनाया था, जिसके पास लाइसेंस ही नहीं था. इस कंपनी ने किसी दूसरी कंपनी के ब्रांड नेम का गलत इस्तेमाल किया. इसका मतलब यह है कि यह दवा पूरी तरह फर्जी थी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है.

हर महीने होती है जांच

दवाइयों का क्वालिटी चेक रेगुलर प्रोसेस है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) हर महीने दवाइयों के सैंपल्स की जांच करता है. इसके बाद जो दवाइयां क्वालिटी टेस्ट में फेल हो जाती हैं या नकली पाई जाती हैं, उनकी लिस्ट CDSCO की वेबसाइट पर डाली जाती है. सितंबर 2025 की इस लिस्ट में कुल 112 NSQ सैंपल्स और एक नकली दवा शामिल है.

ऐसी दवाओं से कैसे बचें?

पर्चे की जांच करें: दवा खरीदने से पहले उसका बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग डेट चेक करें. CDSCO की वेबसाइट पर जाकर आप NSQ दवाइयों की लिस्ट देख सकते हैं.

लाइसेंस्ड दुकान से खरीदें: हमेशा किसी विश्वसनीय और लाइसेंस्ड मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदें.

डॉक्टर से सलाह लें: अगर आपको दवा की क्वालिटी पर शक हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

“बिहार चुनाव 2025: AAP का बड़ा ऐलान, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को 3000 महीना”

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2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग दलों की ओर से वादे किए जा रहे हैं. इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) की बिहार इकाई ने विधानसभा चुनाव को लेकर बीते गुरुवार (23 अक्टूबर, 2025) को अपना घोषणा पत्र जारी किया.

इसमें कई लुभावने वादे जनता से किए गए हैं.

घोषणापत्र में वादा किया गया है कि सरकार बनने पर 300 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी. अभी तक तेजस्वी यादव यह कहते आ रहे हैं कि महागठबंधन की सरकार बनी तो 200 यूनिट बिजली फ्री होगी. यानी आम आदमी पार्टी एक कदम आगे चल रही है.

माफ होंगे सारे पुराने बिजली बिल

इसके साथ ही यह भी वादा किया गया है कि बिजली के जो पुराने बिल हैं वो सारे माफ कर दिए जाएंगे. सोलर सब्सिडी योजना भी लागू होगी. आम आदमी पार्टी ने महिलाओं का पूरा ख्याल रखा है. वादा किया गया है कि सरकारी बसों में महिलाएं मुफ्त में यात्रा करेंगी.

10 लाख तक मिलेगा ब्याज मुक्त लोन

दूसरी ओर मैया सम्मान योजना के तहत हर माह महिलाओं को तीन हजार रुपये दिए जाएंगे. इसके अलावा 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त लोन की सुविधा दी जाएगी. वहीं रसोइयों और सहायिकाओं को 12,000 प्रतिमाह वेतन मिलेगा.

इसके अलावा फ्री कोचिंग, ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे. बेटी प्रोत्साहन योजना को लागू किया जाएगा. इसके तहत 10वीं पास बेटियों को एक लाख और 12वीं पास को दो लाख रुपये दिए जाएंगे. वहीं ग्रेजुएशन होने पर पांच लाख की आर्थिक मदद की जाएगी.

यह भी संकल्प लिया गया है कि दिल्ली और पंजाब के मॉडल पर हर पंचायत में आधुनिक स्कूल बनेगा. स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक लैब्स, प्रशिक्षित और प्रेरित शिक्षक की सुविधा होगा. इसके अलावा बिहार के युवाओं को कोचिंग के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. फ्री में SSC/UPSC/NEET/JEE की वे कोचिंग कर सकेंगे.

“Chhath Puja 2025: कौन है छठी मैया, जाने सुख-समृद्धि और संतान की रक्षा करने वाली देवी का रहस्य!”

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Chhath Puja 2025: छठ पूजा का महापर्व इस साल 25 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसका समापन 28 अक्टूबर को होगा. यह त्योहार 4 दिन तक मनाया जाता है. जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की विशेष पूजा की जाती है.

इस पर्व को व्रती अपने संतान के स्वास्थय, सफलता और लंबी आयु की मनोरथ के लिए रखती है.

कई लोग यह व्रत रख तो लेते हैं, मगर उन्हें इस महापर्व के बारे में नहीं पता होता, कि संतान की रक्षा करने वाली यह छठी मैया कौन है या उनका क्या महत्व है? आइए जानते है.

छठी मैया किस की है बहन?

हिंदू धर्म में छठी मैया को भगवान सूर्यदेव की बहन माना जाता है. यह संतानों की दीर्घ आयु, स्वास्थ्य, सफलता और सुरक्षा की देवी मानी गई हैं. छठी मैया को देवी षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है.

इनका यह नाम रखे जाने के पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसमें बताया गया है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि को बनाया, तब उन्होंने संतानों की रक्षा और वृद्धि के लिए देवी षष्ठी को निर्मित किया. तब से ही माता षष्ठी को हर नवजात बच्चे की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है.

इनकी पूजा नवजात बच्चे के जन्म के छठे दिन कि जाती है.

छठी मैया और सूर्य देव का संबंध

छठ पूजा में छठी मैया और सूर्य देव की उपासना की जाती है. आराधना के वक्त व्रती महिलाएं जल, फल और अर्घ्य अर्पित करती हैं. ऐसी मान्यता है कि इनके आशीर्वाद से बच्चे निरोगी, लंबी आयु और भाग्यशाली बनते हैं. इस महापर्व के वक्त सूर्य की ऊर्जा और प्रकृति के तत्वों से पवित्रता का मिलन होता है, जिससे जीवन में नई चेतना आती है.

छठ पूजा के चार दिन

  1. नहाय-खाय (25 अक्टूबर)

इस दिन व्रती स्नान कर घर की सफाई करके पवित्र करती हैं. इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत होती है.

  1. खरना (26 अक्टूबर)

दूसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर छठी मैया को अर्पित करती हैं.

  1. संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर)

तीसरे दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और सूर्यदेव व छठी मैया से परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.

  1. उषा अर्घ्य (28 अक्टूबर

अंतिम दिन व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं. इसके साथ ही व्रत का विधिवत समापन होता है और भक्त एक-दूसरे को बधाई देते हैं.

“किसानों के लिए फायदे का सौदा, इस योजना में 50% सस्ते मिल रहे खेती-किसानी के औजार, जल्दी करें अप्लाई”

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देश में करोड़ों की संख्या में किसान रहते हैं. जिनके केन्द्र सरकार और देश के अलग-अलग राज्यों की सरकारें बहुत सी योजनाएं चलाती हैं. जिनसे किसानों को सहायता दी जा सके. हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए खास योजना लेकर आई है.

इस योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, स्प्रेयर, मल्टी क्रॉप थ्रेशर और पावर टिलर जैसे जरूरी कृषि यंत्र 50 से 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी पर दिए जा रहे हैं.

योजना के जरिए खेती को आसान बनाना, समय बचाना और उत्पादन बढ़ाना. किसान इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा किसान आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करें जिससे उनकी मेहनत कम हो और कमाई बढ़े. जानें कैसे और कब तक कर सकते हैं आवदेन.

कृषि औजार पर आधी कीमत में छूट

यूपी सरकार की इस योजना के तहत किसानों को तरह-तरह के मार्डन औजार बेहद कम दामों में मिलेंगे. ट्रैक्टर, रोटावेटर, हैरो, स्प्रेयर, थ्रेशर जैसे औजार खेती में बड़ी मदद करते हैं. पहले जो काम घंटों में होता था. अब मिनटों में हो सकता है. सरकार किसानों को 50% तक की सब्सिडी दे रही है. जिससे वह आसानी से यह औजार खरीद सकें.

कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद के मुताबिक योजना का उद्देश्य किसानों को तकनीक से जोड़ना और खेती को लाभदायक बनाना है. किसान किसी भी अधिकृत विक्रेता से कोई भी औजार खरीद सकते हैं और बिल को कृषि विभाग में जमा करके सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं.

कैसे करें आवेदन और मिलेगी कितनी छूट?

इस स्कीम के जरिए सब्सिडी लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रोसेस 15 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और 29 अक्टूबर रात 12 बजे तक चलेगी. सभी किसान विभाग की वेबसाइट agridarshan.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं या नजदीकी CSC केंद्र जाकर भी प्रोसेस पूरी कर सकते हैं.

छोटे औजार के लिए कोई टोकन मनी नहीं लगेगी. जबकि 10000 से 50000 रुपये तक के औजारों पर 2500 रुपये और लाखों रुपये के यंत्रों पर 5000 रुपये तक टोकन मनी देनी होगी. योजना का फायदा पाने के बाद किसान अपनी पसंद की दुकान से यंत्र खरीद सकते हैं. इसके बाद वह इनवॉइस जमा करके सब्सिडी हासिल कर सकते हैं.

“PhonePe और Google Pay के लिए खतरे की घंटी, Arattai के बाद अब Zoho लाएगी UPI ऐप”

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Arattai ऐप और Ulaa ब्राउजर के साथ धूम मचाने वाली जोहो अब पेटीएम और फोनपे जैसी ऐप्स के पसीने छुड़ाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, जोहो अब UPI-बेस्ड कंज्यूमर पेमेंट प्लेटफॉर्म Zoho Pay लॉन्च करेगी, जो पेटीएम, फोनपे और गूगल पे की सीधी टक्कर देगा.

बता दें कि जोहो की Arattai ऐप को WhatsApp के मेड इन इंडिया ऑल्टरनेटिव के तौर पर देखा जा रहा है और पिछले कुछ दिनों से इसके डाउनलोड होने की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसी तरह Ulaa ब्राउजर भी गूगल क्रोम को कड़ी टक्कर दे रहा है.

स्टैंडअलोन ऐप होगी Zoho Pay रिपोर्ट्स के अनुसार, Zoho Pay एक स्टैंडअलोन ऐप होगी और इसे Arattai मैसेंजर में भी इंटीग्रेट किया जा सकता है. इससे व्हाट्सऐप की तरह Arattai यूजर्स को भी एक ही ऐप में चैटिंग और पेमेंट दोनों ऑप्शन मिल जाएंगे. जोहो के पास पहले से ही पेमेंट-एग्रीगेटर लाइसेंस है और वह जोहो बिजनेस के जरिए बिजनेस पेमेंट ऑफर कर रही है. अब UPI पेमेंट इकोसिस्टम में आने से मार्केट में मुकाबला बढ़ेगा और पहले से अपने पैर जमा चुकी कंपनियों को भी नई चुनौती मिलेगी.

कब तक लॉन्च होने की उम्मीद?

अभी तक Zoho Pay ऐप के लॉन्च होने की डेट सामने नहीं आई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि अगली तिमाही में इसे लॉन्च किया जा सकता है. फिलहाल इस ऐप की टेस्टिंग चल रही है और इसे एंड्रॉयड के साथ-साथ iOS के लिए भी लॉन्च किया जाएगा.

UPI से होता है सबसे ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन

भारत का डिजिटल पेमेंट नेटवर्क दुनिया में सबसे ज्यादा एक्टिव है. यहां UPI के जरिए सबसे ज्यादा डिजिटल पेमेंट होती है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में UPI के जरिए 17,221 करोड़ ट्रांजेक्शन हुई थी, जबकि 2019 में यह संख्या 1,079 करोड़ थी. इन ट्रांजेक्शन की टोटल वैल्यू देखी जाए तो 2019 में 18.4 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ था, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 247 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ.

“दिवाली पर दिल्ली वालों ने जमकर छलकाए जाम, सरकार का भर दिया खजाना”

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Delhi Liquor sale 2025: इस त्योहारी सीजन देश की राजधानी दिल्ली में लोगों ने जमकर शराब पी है. जिससे दिल्ली सरकार को टैक्स के रुप में करोड़ो रुपए की कमाई हुई. साथ ही, पिछले साल की तुलना में रिटेल शराब बिक्री से हुई कमाई में 15 प्रतिशत का इजाफा भी देखने को मिला.

यानी कि, त्योहारी सीजन में दिल्ली वालों ने सरकार का खजाना भर दिया. हाल में ही दिल्ली सरकार की ओर से इस संबंध में एक डेटा जारी किया गया है. डेटा के अनुसार त्योहारी सीजन में शराब बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिली. सिर्फ दिवाली के दौरान ही सरकार को रिटेल शराब बिक्री से 600 करोड़ रुपए का रेवेन्यू प्राप्त हुआ.

रेवेन्यू टारगेट पूरा करने की बढ़ी उम्मीद

सरकार के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) से सरकार को 4,192.86 करोड़ रुपए का रेवेन्यू प्राप्त हुआ. पिछले साल इस अवधि में यह आंकड़ा 3,731.79 करोड़ रुपए था. जो कि 461.07 करोड़ रुपए के अंतर को दिखाता है. आबकारी विभाग को उम्मीद है कि, त्योहारी सीजन में बढ़ी इस बिक्री से वे 6000 करोड़ रुपए की रेवेन्यू के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है.

सरकार का 15 फीसदी रेवेन्यू बढ़ा

सिर्फ दिवाली के दौरान दिल्ली सरकार को रिटेल शराब ब्रिकी से लगभग 600 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला. जो पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत की तेजी को दिखाता है. जिससे सरकार को उम्मीद है कि, वे जल्द ही अपने शराब बिक्री से होने वाले रेवेन्यू के लक्ष्य को पूरा कर लेंगे. साथ ही, आने वाले नवंबर और दिसंबर महीने में शादियों का सीजन शुरु हो जाएगा. अक्सर देखा जाता है कि, शादी-विवाह के सीजन में शराब की खपत और बिक्री बढ़ जाती है. दिल्ली सरकार को आने वाले 2 महीनों में अच्छी रेवेन्यू की कमाई हो सकती है.

“आईफोन 19 का न करें इंतजार, आईफोन 18 के बाद सीधा 20 लॉन्च करेगी ऐप्पल, सामने आ गई वजह”

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आईफोन को लेकर ऐप्पल फिलहाल बदलाव के दौर से गुजर रही है. आईफोन 17 सीरीज के प्रो मॉडल्स में लंबे समय बाद नया डिजाइन देखने को मिला है. इसी तरह कंपनी ने इस सीरीज में अपने अब तक के सबसे पतले मॉडल आईफोन एयर को भी लॉन्च किया है.

अगले साल आईफोन 18 सीरीज में फोल्डेबल आईफोन उतार सकती है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उसके बाद कंपनी आईफोन 19 सीरीज को पूरी तरह स्किप कर सकती है. आइए इसके पीछे का कारण जानते हैं.

आईफोन 19 सीरीज क्यों नहीं लाएगी ऐप्पल?

2026 में ऐप्पल आईफोन 18 सीरीज को लॉन्च करेगी. उससे अगले साल यानी 2017 में पहले आईफोन की लॉन्चिंग को 20 साल पूरे हो जाएंगे. इस खास मौके पर ऐप्पल 19 सीरीज को स्किप करते हुए सीधा आईफोन 20 सीरीज उतारेगी. आईफोन 20 सीरीज को भी खास बनाने के लिए ऐप्पल ने पूरी तैयारी कर ली है. इस सीरीज में पहली बार फुल डिस्प्ले वाला फोन मिलेगा. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईफोन 20 प्रो की स्क्रीन पर डायनामिक आईलैंड या नोच जैसा कोई कटआउट नहीं होगा और न ही इस पर कोई बैजल होंगे. प्रो मॉडल्स फुल स्क्रीन के साथ लॉन्च होंगे और फ्रंट से देखने पर ऐप्पल वॉच की तरह ग्लास का सिंगल पीस नजर आएगा.

पहले भी ऐसा कर चुकी है ऐप्पल

यह पहली बार नहीं होने जा रहा, जब ऐप्पल ने कोई सीरीज स्किप की है. 2017 में आईफोन की लॉन्चिंग का एक दशक पूरा होने के मौके पर कंपनी ने आईफोन 9 सीरीज लॉन्च नहीं की थी. इस सीरीज को स्किप करते हुए ऐप्पल ने आईफोन 8 सीरीज के बाद सीधा आईफोन 10 सीरीज लॉन्च की थी. इसी ट्रेंड को जारी रखते हुए ऐप्पल 2027 में 19 सीरीज को छोड़कर 20 सीरीज लॉन्च कर सकती है.

नीतीश पर निर्भरता, नेतृत्व का भी संकट; भाजपा के लिए आज भी अभेद्य दुर्ग है बिहार…

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बिहार में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। दो चरणों में चुनाव संपन्न होंगे। इस चुनाव में भाजपा और जेडीयू नीत गठबंधन एनडीए का आरजेडी-कांग्रेस नीत महागठबंधन से मुकाबला है।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने इस लड़ाई को तृकोणीय बनाने की कोशिश की है। एनडीए की बात करें तो इसका नेतृत्व इस चुनाव में भी नीतीश कुमार ही कर रहे हैं। भाजपा की निर्भरता अभी भी जेडीयू के मुखिया पर बनी हुई है।

बिहार के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो 1990 तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा। बीच में केवल दो छोटे अंतराल (1967-72 और 1977-80) को छोड़कर। यही कारण है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा (BJP) अब तक बिहार में पूरे राज्य में व्यापक जनसमर्थन नहीं बना सकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरे कार्यकाल और पड़ोसी उत्तर प्रदेश में 2017 से भाजपा सरकार होने के बावजूद बिहार भाजपा के लिए अब भी एक ‘अभेद्य दुर्ग’ बना हुआ है।

नीतीश पर निर्भर भाजपा

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक प्रेम कुमार मणि कहते हैं, “बिहार में कम्युनिस्ट, समाजवादी और जनसंघ/भाजपा का उदय कांग्रेस के प्रभुत्व वाले दौर में एक साथ हुआ। फिर भी भाजपा ‘संपूर्ण बिहार’ की पार्टी नहीं बन सकी। नीतीश कुमार पर 20 वर्षों से निर्भर रहना इस बात का सबूत है।”

उन्होंने बताया कि शाहाबाद (भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर) और मगध (औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल) जैसे क्षेत्र समाजवादी और वामपंथी आंदोलनों के केंद्र रहे हैं। भाजपा की 2020 विधानसभा चुनाव में यहां की 21 सीटों में सिर्फ दो पर जीत और पिछले लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाना इसकी सीमा दर्शाता है। मणि कहते हैं, “कोसी बेल्ट (सहरसा, सुपौल, मधेपुरा) में नीतीश प्रभावशाली हैं, जबकि लालू प्रसाद यादव अब भी अपने मूल मुस्लिम-यादव वोट बैंक पर कायम हैं। इन परिस्थितियों में भाजपा को बिहार में सत्ता साझेदारी की जरूरत बनी हुई है।”

1950 के दशक में भारतीय जनसंघ ने 1952 और 1957 के चुनावों में एक भी सीट नहीं जीती थी। पहली सफलता 1962 में मिली, जब उसने तीन सीटें सिवान, मुंगेर और नवादा जीतीं। 1967 में कांग्रेस विरोधी लहर के दौरान समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया और आरएसएस प्रमुख एम. एस. गोलवलकर की समझदारी से संयुक्त विधायक दल (SVD) सरकार बनी। इसमें जनसंघ को 26 सीटें मिलीं और तीन मंत्री रामदेव महतो, विजय कुमार मित्रा और रुद्र प्रताप सारंगी बने।

1977 में जेपी आंदोलन के बाद जनसंघ, लोकदल और समाजवादी दलों का विलय होकर जनता पार्टी बनी, जिसने 325 में से 214 सीटें जीतीं और कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बने। 1980 में भाजपा के रूप में पुनर्गठित जनसंघ को अगले तीन चुनावों (1980, 1985, 1990) में सीमित सफलता मिली। 1990 के बाद लालू प्रसाद यादव के उभार ने भाजपा को और पीछे धकेल दिया।

भाजपा को वास्तविक राजनीतिक बढ़त तब मिली जब उसने नीतीश कुमार की जेडीयू से गठबंधन किया। 2000 में एनडीए को बहुमत न मिलने के बावजूद सरकार बनी पर संख्या बल की कमी से सात दिन में गिर गई। इसके बाद 2005 में भाजपा-जेडीयू गठबंधन ने सत्ता संभाली और भाजपा धीरे-धीरे राज्य में मजबूत हुई। लेकिन आज भी पार्टी को नीतीश पर निर्भर रहना पड़ता है।

नेतृत्व का संकट

भाजपा के एक धड़े का मानना है कि बिहार में पार्टी की सीमित पकड़ का कारण है स्थानीय नेतृत्व की कमी है। कभी कैलाशपति मिश्र, ठाकुर प्रसाद, गोविंदाचार्य और अश्विनी कुमार जैसे नेता पार्टी का चेहरा थे पर अब वैसा प्रभावशाली नेतृत्व नहीं बचा। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “सुशील कुमार मोदी के बाद हम लगातार प्रयोग कर रहे हैं। तारकिशोर प्रसाद, रेणू देवी, सम्राट चौधरी या विजय सिन्हा कोई भी नीतीश कुमार के स्तर पर नहीं टिक पाया। हम नेतृत्वहीन हो गए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “2014 की मोदी लहर के बाद भी 2015 विधानसभा चुनाव में हमें सिर्फ 53 सीटें मिलीं। 2020 में 74 सीटें जीतने के बावजूद हमने मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार को दे दिया। अब अगर जेडीयू को 55-60 सीटें मिलती हैं तो नीतीश कुमार ही फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।”

CG: मेडिकल एजुकेशन सेक्टर में बड़ी उपलब्धि, 61 नई सीटों की स्वीकृति, राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं जनता तक पहुंचेंगी…

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छत्तीसगढ़ में मेडिकल एजुकेशन सेक्टर में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानि एनएमसी ने राज्य के विभिन्न शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमडी-एमएस (चिकित्सा स्नातकोत्तर) की 61 नई सीटों की स्वीकृति प्रदान की है।

इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर कहा कि छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह ऐतिहासिक कदम है। नई पीजी सीटों की स्वीकृति से राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं जनता तक पहुंचेंगी। यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

राज्य सरकार का मानना है कि इन नई सीटों से न केवल मेडिकल शिक्षा को बल मिलेगा बल्कि प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ सेवाएं भी और अधिक सुलभ होंगी।

आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग शिखा राजपूत तिवारी के मुताबिक, नई स्वीकृत सीटों के बाद अब राज्य में कुल 377 शासकीय पीजी सीटें उपलब्ध हो गई हैं। पहले यह संख्या 316 थी। वहीं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में कुल 186 सीटें हैं।

नई स्वीकृत सीटें– 

  1. छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर – 21 सीटें
  2. भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव – 7 सीटें
  3. बलिराम कश्यप स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, जगदलपुर – 8 सीटें
  4. लखीराम अग्रवाल स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायगढ़ – 12 सीटें
  5. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, कोरबा – 13 सीटें