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आज से बार-बार फास्टैग रिचार्ज कराने से मिली आजादी……₹3,000 में इतने टोल होंगे पार

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हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है. अब बार-बार फास्टैग (FASTag) रिचार्ज कराने की टेंशन खत्म हो गई है, क्योंकि सिर्फ 3,000 रुपये में एनुअल पास बनवाकर आप साल भर टोल टैक्स आसानी से चुका सकेंगे. एनएचएआई (NHAI) ने यह सुविधा उन लोगों के लिए शुरू की है, जो अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करते हैं और बार-बार बैलेंस खत्म होने की समस्या झेलते हैं.

फास्टैग एनुअल पास लेने के बाद तय शर्तों और सीमाओं के भीतर, आपके FASTag से सीधे टोल भुगतान होता रहेगा और आपको हर यात्रा से पहले रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फिलहाल यह सुविधा चुनिंदा टोल प्लाजा पर लागू होगी, लेकिन आने वाले समय में इसे देशभर में विस्तार दिया जा सकता है.
क्या है FASTag Annual Pass?
यह पास प्राइवेट और नॉन-कमर्शियल गाड़ियों जैसे कार, जीप और वैन के लिए है. 3,000 रुपये की एकमुश्त रकम में नेशनल हाईवे (NH) और नेशनल एक्सप्रेसवे (NE) पर 200 बार टोल पार कर सकते हैं. इसकी वैधता एक साल या 200 क्रॉसिंग, जो पहले पूरा हो. यह केवल NHAI की ओर से ऑपरेट टोल प्लाजा पर लागू होगी. स्टेट हाईवे या प्राइवेट टोल पर सामान्य FASTag दरें लागू होंगी.
  • पॉइंट-आधारित टोल: हर क्रॉसिंग एक ट्रिप गिनी जाएगी; राउंड ट्रिप में 2 ट्रिप.
  • क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम: एक एंट्री-एग्जिट जोड़ी एक ट्रिप मानी जाएगी.
पास खत्म होने पर FASTag सामान्य पे-पर-यूज मोड में वापस आ जाएगा और इसे ₹3,000 में फिर से रिन्यू किया जा सकता है.

कैसे बनवाएं?
  • प्लेटफॉर्म: राजमार्ग यात्रा ऐप या NHAI/MoRTH वेबसाइट के जरिए आवेदन करें.
  • लॉगिन: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या व्हीकल रजिस्ट्रेशन और FASTag ID डालें.
  • पेमेंट: UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से ₹3,000 का भुगतान.
  • एक्टिवेशन: भुगतान के 2-24 घंटे में पास एक्टिवेट, SMS से सूचना मिलेगी.
जरूरी दस्तावेज
  • व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
  • मालिक का पासपोर्ट साइज फोटो
  • KYC दस्तावेज (पहचान और पता प्रमाण)
स्टेटस कैसे चेक करें?
  • राजमार्ग यात्रा ऐप या NHAI वेबसाइट पर बचे हुए ट्रिप देखें.
  • SMS अपडेट के लिए ‘BAL PAS’ को 14434 पर भेजें.

आज मिलेंगे ट्रंप और पुतिन….अलास्का को कभी न्यूक्लियर बम से उड़ा देना चाहता था अमेरिका, 1958 का वो घातक प्लान

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डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन 15 अगस्त को अलास्का के एंकरेज में मिलने वाले हैं. इसे दोनों के बीच आगे की बातचीत का पहला स्टेप माना जा रहा है. ट्रंप कह चुके हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता ‘तुरंत शांति समझौता’ करवाना है. अगर यह मीटिंग सही दिशा में बढ़ी, तो वे सीधे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को भी बातचीत में शामिल करने के लिए कॉल करेंगे. लेकिन इसी अलास्का का एक ऐसा किस्सा है, जिसे सुनकर हैरानी होती है. 1958 में अमेरिका ने एक ऐसा प्लान बनाया था, जिसमें इस जमीन के एक हिस्से को छह न्यूक्लियर बम से उड़ाकर आर्टिफिशियल हार्बर बनाने की सोच थी.

1958 में अमेरिकी एटॉमिक एनर्जी कमीशन (AEC) ने दावा किया कि अलास्का के नॉर्थ-वेस्ट कोस्ट पर एक हार्बर बनाने में बस कुछ सेकंड लगेंगे. तरीका? केप थॉम्पसन और चुकोची सी के बीच जमीन में छह न्यूक्लियर बम गाड़कर एक साथ ब्लास्ट करना. इनका विस्फोट नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराए गए बमों से करीब आठ गुना ज्यादा ताकतवर होता. उनका मानना था कि अगर ब्लास्ट सही मौसम में, बर्फ की परत के बीच किया जाए तो रेडिएशन का असर बहुत कम होगा और लोकल हंटिंग सीजन पर सिर्फ कुछ हफ्तों का असर पड़ेगा.

इस प्रोजेक्ट का नाम था ‘प्रोजेक्ट चेयरियट’. यह सिर्फ अलास्का तक सीमित नहीं था. AEC की बड़ी सोच ‘प्रोजेक्ट प्लोशेयर’ का यह पहला प्रयोग होना था, जिसमें न्यूक्लियर पावर का इस्तेमाल मॉडर्न इंजीनियरिंग और डेवलपमेंट के लिए किया जाना था. सबसे बड़ा सपना था एक नया ‘सी-लेवल कैनाल’ बनाना, जो पनामा कैनाल के मुकाबले ज्यादा तेज और सिक्योर हो. उस समय पनामा कैनाल में जहाजों को ऊपर-नीचे करने के लिए लॉक सिस्टम था, जिससे यात्रा में 12 घंटे तक लग जाते थे. किसी एक लॉक के खराब होते ही यह पूरी तरह बेकार हो सकता था.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैज्ञानिकों ने सोचना शुरू किया कि न्यूक्लियर बम सिर्फ जंग जीतने के लिए नहीं, बल्कि धरती का नक्शा बदलने के लिए भी इस्तेमाल हो सकते हैं. ‘प्रोजेक्ट प्लोशेयर’ के आइडिया में नदियों का रुख मोड़ना, छोटे भूकंप पैदा करके बड़े भूकंप रोकना, रेगिस्तानों में पानी भरना और बड़े लेवल पर कैनाल बनाना जैसे प्लान शामिल थे. हाइड्रोजन बम के जनक एडवर्ड टेलर ने तो यहां तक कह दिया था, ‘अगर आपका पहाड़ सही जगह नहीं है, तो हमें बस एक कार्ड भेज दो.’

प्रोजेक्ट चेयरियट के लिए चुना गया इलाका अलास्का के इन्‍यूपियात जनजाति का घर था. AEC का मानना था कि यहां कम आबादी होने से रिस्क कम होगा. लेकिन लोकल लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया. उन्हें पता था कि 1954 में बिकिनी एटोल में हुए न्यूक्लियर टेस्ट के बाद रेडिएशन ने वहां के लोगों और नेचर को कितना नुकसान पहुंचाया था. उनका डर था कि रेडिएशन से उनके शिकार, मछलियां और पीने का पानी हमेशा के लिए दूषित हो जाएंगे.

लोकल विरोध के चलते प्रोजेक्ट दो साल टल गया. इस दौरान एनवायरनमेंटल स्टडी हुई, जिसमें साफ हुआ कि अगर हवा का रुख बदल गया तो रेडिएशन सीधे हंटिंग और नेस्टिंग एरिया में फैलेगा. पानी भी जहरीला हो जाएगा. एक और रिपोर्ट में पाया गया कि यहां के लोग पहले से ही सोवियत न्यूक्लियर टेस्ट के रेडिएशन का शिकार थे, क्योंकि कैरिबू (जिसे वे खाते थे) मॉस और लाइकेन खाते थे, जिनमें रेडिएशन जमा था.

1961 तक यह मामला मीडिया में छा गया और अमेरिका में पहली बार बड़े पैमाने पर एनवायरनमेंटल मूवमेंट खड़ा हो गया. इसी बीच AEC ने न्यू मैक्सिको में ‘प्रोजेक्ट ग्नोम’ किया, जिसमें ब्लास्ट पूरी तरह कंटेन करने की कोशिश नाकाम रही. रेडिएशन फैलने से लोगों और जानवरों को हटाना पड़ा और महीनों तक क्लीन फीड देना पड़ा. इससे प्रोजेक्ट चेयरियट के खिलाफ विरोध और भड़क गया.

1962 में AEC ने चुपचाप प्रोजेक्ट चेयरियट ड्रॉप कर दिया. करीब एक दशक बाद पूरा प्लोशेयर प्रोग्राम बंद हो गया. लेकिन न्यूक्लियर पावर को क्रिएटिव तरीके से इस्तेमाल करने का आइडिया आज भी कभी-कभी सामने आता है. एलन मस्क ने मंगल को रहने लायक बनाने के लिए थर्मोन्यूक्लियर ब्लास्ट का सुझाव दिया है, तो ट्रंप ने तूफानों को रोकने के लिए ‘न्यूक्स’ इस्तेमाल करने की बात की थी.

किश्तवाड़ के चशोती में बादल फटने से आई ऐसी तबाही, मलबों में दफ्न हो गईं जिंदगियां, अब तक 47 की मौत

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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में गुरुवार को बड़ी तबाही आई. किश्तवाड़ के सुदूर पहाड़ी गांव चशोती में गुरुवार दोपहर बादल फटने से चीख-पुकार मच गई. किश्तवाड़ में उस जगह बादल फटा, जहां मचैल माता मंदिर जाने का रास्ता है. चशोती गांव में बादल फटने से अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है. अभी मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है. मरने वालों में सीआईएसएफ के दो जवान भी शामिल हैं, जबकि कई अब भी फंसे हैं. मलबों से जिंदगियों को बचाने की कोशिश जारी है. गुरुवार को चशोती गांव में सूर्यास्त होने तक बचावकर्मियों ने कड़ी मेहनत से मलबे के ढेर से 167 लोगों को बाहर निकाला. इनमें से 38 की हालत गंभीर है. जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती गई और आशंका है कि यह और बढ़ सकती है.
दरअसल, किश्तवाड़ के मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते के चशोती गांव में यह आपदा दोपहर 12 बजे से एक बजे के बीच आई. हादसे के समय मचैल माता यात्रा के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे. साढ़े नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर तक जाने के लिए श्रद्धालु चशोती गांव तक वाहन से पहुंच सकते हैं, उसके बाद उन्हें 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है. कुछ लोगों का कहना है कि सैकड़ों यात्री उस वक्त उस गांव में मौजूद थे, जहां बादल फटा.
चशोती गांव किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है. यहां श्रद्धालुओं के लिए लगाया गया एक लंगर (सामुदायिक रसोईघर) इस घटना से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ. बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आ गई और दुकानों एवं एक सुरक्षा चौकी सहित कई इमारतें बह गईं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बात कर केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया. शाह ने कहा कि एनडीआरएफ की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई हैं और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि बचाव कार्यों के लिए जम्मू-कश्मीर के भीतर और बाहर से संसाधन जुटाए जा रहे हैं. फिलहाल श्री मचैल यात्रा को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया है. राहत और बचाव कार्य में दर्जनों टीमें लगी हुई हैं, लेकिन ऊबड़-खाबड़ इलाका और लगातार हो रही बारिश ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बना रही है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.


क्यों प्रसिद्ध है माता मचैल मंदिर

Kishtwar Cloudburst Latest Updates: माता मचैल की पवित्र यात्रा में इस वर्ष न केवल जम्मू के श्रद्धालु शामिल हुए, बल्कि मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से भी भक्त मां के चमत्कारी दर्शन के लिए पहुंचे थे. पंजाब के जालंधर और मध्यप्रदेश के कुछ लोग भी इस घटना में लापता हैं. मचैल माता का यह अद्वितीय मंदिर भारत में एकमात्र ऐसा स्थान माना जाता है, जहां मां साक्षात् दर्शन देती हैं- किसी के लिए कंगन हिलाकर, किसी के लिए नथनी या घुंघरू हिलाकर. कई विशेषज्ञ इस रहस्य को जानने का प्रयास कर चुके, परंतु कोई भी इस दिव्य चमत्कार का रहस्य नहीं सुलझा पाया. साल में केवल डेढ़ से दो माह तक चलने वाली इस यात्रा का भक्त पूरे वर्ष बेसब्री से इंतजार करते हैं. 2025 की यात्रा सुखद चल रही थी, पर अचानक बादल फटने से बड़ा हादसा हो गया. कई श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई, कई घायल हुए और कुछ लापता हैं. अब हर भक्त मां के चरणों में प्रार्थना कर रहा है कि सभी घायलों और लापता श्रद्धालुओं की रक्षा हो.

”CG: “कागज मिटाओ, अधिकार चुराओ. आदिवासियों के वन अधिकार पट्टे गायब करने पर राहुल गांधी का BJP पर हमला”

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के कम से कम तीन जिलों में वितरित हजारों वन अधिकार पट्टे गायब होने का आरोप लगाया. राहुल गांधी ने द हिंदू में प्रकाशित खबर को सोशल साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “कागज मिटाओ, अधिकार चुराओ” बहुजनों के दमन के लिए भाजपा ने यह नया हथियार बना लिया है.

उन्होंने कहा कि कहीं वोटर लिस्ट से दलितों, पिछड़ों के नाम कटा देते हैं, तो कहीं आदिवासियों के वन अधिकार पट्टों को ही गायब करवा देते हैं. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बस्तर में 2,788 और राजनांदगांव में आधे से ज्यादा – छत्तीसगढ़ में इस तरह हज़ारों वन अधिकार पट्टों का रिकॉर्ड अचानक लापता कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए वन अधिकार अधिनियम बनाया – भाजपा उसे कमज़ोर कर उनका पहला हक छीन रही है. हम ऐसा नहीं होने देंगे – आदिवासी इस देश के पहले मालिक हैं और हम हर हाल में उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे.

छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में वन अधिकार पट्टे गायब

छत्तीसगढ़ के कम से कम तीन जिलों में वितरित हजारों वन अधिकार पट्टे पिछले 17 महीनों में राज्य सरकार के आदिवासी कल्याण विभाग के रिकॉर्ड से विभिन्न बिंदुओं पर गायब हो गए हैं. राज्य सरकार के अधिकारियों ने दावा किया कि पहले के उच्च आंकड़े “गलत सूचना और रिपोर्टिंग में त्रुटि” के कारण गलत थे, जिन्हें अब ठीक कर दिया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि उदाहरण के लिए, बस्तर जिले में, जनवरी 2024 तक व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर) अधिकारों की कुल संख्या 37,958 थी, जो मई 2025 तक घटकर 35,180 रह गई, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है.

राहुल गांधी का बीजेपी सरकार पर हमला इसी तरह, राजनांदगांव जिले में, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) अधिकारों की कुल संख्या पिछले साल एक महीने के भीतर आधी होकर 40 से 20 रह गई. बीजापुर जिले में, मार्च 2024 तक 299 सीएफआरआर अधिकार वितरित किए गए थे; अगले महीने तक यह घटकर 297 रह गए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नक्सलवाद मुक्त घोषित किए गए तीन जिलों में, एफआरए का कार्यान्वयन धीमा रहा है, यह डेटा दर्शाता है. बस्तर में, आईएफआर शीर्षकों की संख्या में 2,700 से अधिक की गिरावट आई थी, हालांकि जनवरी 2024 और मई 2025 के बीच 12 और सीएफआरआर शीर्षक जोड़े गए थे.

दंतेवाड़ा में, सीएफआरआर शीर्षकों में कोई वृद्धि नहीं हुई, जबकि 55 आईएफआर शीर्षकों की शुद्ध वृद्धि हुई थी. मोहला-मानपुर जिले में, कोई नया आईएफआर शीर्षक वितरित नहीं किया गया, जबकि उसी समयावधि में दो सीएफआरआर शीर्षक जोड़े गए. बस्तर जिले में, आईएफआर दावे भी मई 2025 तक लगभग 3,000 कम हो गए, जबकि जनवरी 2024 तक 51,303 दावे दायर किए गए थे.

“कौन होगा अगला उपराष्ट्रपति? भाजपा की तरफ इन दो नामों की चर्चा तेज, एक तो बोला जा रहा है प्रबल दावेदार”

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देश में उपराष्ट्रपति पद का चुनाव अब बेहद नजदीक है। 9 सितंबर को वोटिंग होगी और उसी दिन नतीजे भी आ जाएंगे। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 21 अगस्त और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 25 अगस्त है।

यह चुनाव इसलिए चर्चा में है क्योंकि जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

NDA ने साफ कर दिया है कि उम्मीदवार का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा लेंगे। इस बार भाजपा का ही उम्मीदवार बनने की संभावना ज्यादा है। दौड़ में कई नाम हैं, लेकिन दो नेता सबसे आगे बताए जा रहे हैं-थावरचंद गहलोत और ओम माथुर।

Vice President: कौन होगा अगला उपराष्ट्रपति? रेस में इस नेता का नाम सबसे आगे, जल्द होगा बड़ा ऐलान

थावरचंद गहलोत: अनुभव और जातीय समीकरण में फिट कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत (77) भाजपा के सीनियर और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। वे राज्यसभा में सदन के नेता रह चुके हैं और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। भाजपा की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य रह चुके गहलोत दलित समुदाय से आते हैं और प्रशासनिक अनुभव भी रखते हैं।

थावरचंद गहलोत का राजनीतिक सफर 1980: पहली बार विधायक बने

  • 1990: मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री
  • 1996: पहली बार लोकसभा पहुंचे (शाजापुर, म.प्र.)
  • 1998: दोबारा लोकसभा जीती
  • 1999: तीसरी बार लोकसभा सदस्य और भाजपा संसदीय दल के चीफ व्हिप
  • 2002: भाजपा के राष्ट्रीय सचिव, पूर्वोत्तर प्रभारी
  • 2004: चौथी बार लोकसभा, भाजपा उपाध्यक्ष
  • 2012: राज्यसभा सदस्य
  • 2014: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री
  • 2018: दूसरी बार राज्यसभा सदस्य
  • 2019: राज्यसभा में सदन के नेता
  • 2021: कर्नाटक के राज्यपाल नियुक्त

कौन बनेगा भारत का अगला उपराष्ट्रपति? 5 नेता के नाम वाइस प्रेसिडेंट की रेस में आगे ,फाइनल फैसला मोदी के हाथ में

ओम माथुर: मोदी-शाह के करीबी रणनीतिकार

सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर (73) राजस्थान से आते हैं और भाजपा संगठन के कद्दावर चेहरे हैं। वे गुजरात चुनाव के समय प्रभारी रहे, जब मोदी मुख्यमंत्री थे, और अमित शाह के भी भरोसेमंद माने जाते हैं। आरएसएस में प्रचारक रह चुके माथुर संगठन कौशल और राजनीतिक रणनीति में माहिर हैं।

ओम माथुर का राजनीतिक सफर

  • 1972: आरएसएस प्रचारक
  • 1988: भाजपा में शामिल
  • 1990: राजस्थान भाजपा के महासचिव
  • 2002: भाजपा के केंद्रीय प्रभारी
  • 2004: भाजपा के राष्ट्रीय सचिव
  • 2005: भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव
  • 2008: राजस्थान भाजपा अध्यक्ष
  • 2008: राज्यसभा सदस्य
  • 2014: भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
  • 2016: दूसरी बार राज्यसभा सदस्य
  • 2024: सिक्किम के राज्यपाल

उपराष्ट्रपति के अन्य संभावित दावेदार

हरिवंश नारायण सिंह – राज्यसभा उपसभापति, जेडीयू नेता, NDA सहयोगियों में स्वीकार्य चेहरा।

आचार्य देवव्रत – गुजरात के राज्यपाल, पूर्व हरियाणा राज्यपाल, शिक्षा व संस्कृति से गहरा जुड़ाव, आरएसएस पृष्ठभूमि।

वीके सक्सेना – दिल्ली के उपराज्यपाल, प्रशासनिक अनुभव, स्वदेशी आंदोलन से जुड़े। मनोज सिन्हा – जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल, अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रशासनिक स्थिरता में अहम भूमिका। शेषाद्रि चारी – पूर्व आरएसएस प्रचारक, भाजपा के वैचारिक रणनीतिकार, विदेश नीति और सुरक्षा मामलों में गहरी समझ।

उपराष्ट्रपति कैसे चुने जाते हैं? निर्वाचक मंडल का गठन – लोकसभा व राज्यसभा के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य शामिल होते हैं। चुनाव की अधिसूचना – निर्वाचन आयोग तारीखें जारी करता है।

नामांकन प्रक्रिया – उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसद प्रस्तावक और 20 सांसद समर्थक के रूप में चाहिए। प्रचार – केवल सांसद ही मतदाता होते हैं, इसलिए प्रचार सीमित दायरे में होता है।

मतदान – सांसद मतपत्र पर प्रत्याशियों को प्राथमिकता क्रम (1, 2, 3…) में अंकित करते हैं।

गिनती और परिणाम – 50% से ज्यादा वैध वोट पाने वाला उम्मीदवार विजेता घोषित होता है।

वीके सक्सैना ही उप राष्ट्रपति बनेंगे; कुछ गेस करो मोदी जी को कोई समझ पाया है और ना समझ पाएगा जब नाम आएगा तो सब ताज्जुब करेंगे।

 

“वो पांच बातें जो बन सकती हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का हिस्सा”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे. यह 12वां मौका होगा, जब पीएम मोदी लालकिले से देश को संबोधित करेंगे.

उम्मीद की जा रही है कि अपने भाषण में वो देश के लिए कई तरह की घोषणाएं करेंगे. इससे पहले 2024 के स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने, 2047 तक भारत का विकसित राष्ट्र बनाने, 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की दावेदारी करने और 6जी फोन सेवाएं शुरू करने जैसी घोषणाएं की थीं. पीएम मोदी ने एक अगस्त को ट्वीट कर लोगों से अपने भाषण के लिए सुझाव मांगे थे. उन्होंने कहा था कि लोगों के सुझावों को अपने भाषण में शामिल करेंगे. आइए देखते हैं कि इस बार पीएम मोदी लालकिले की प्राचीर से क्या घोषणाएं कर सकते हैं.

तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत इस साल मई में जापान को पछाड़ कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. अब भारत की नजर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर लगी हुई है. जर्मनी अभी चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत की कोशिश अगले दो-तीन साल में जर्मनी को पछाड़ने की है. साल 2015 में देश की अर्थव्यवस्था 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी. यह 2025 में बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर की हो गई है. मतलब की अर्थव्यवस्था का साइज करीब दो गुना बढ़ा है. जानकारों का कहना है कि जीडीपी का विकास अगर इसी रफ्तार से होता रहा तो 2028 में अर्थव्यवस्था का आकार 5.5 ट्रिलियन डॉलर का हो जाएगा. इसके बाद भारत जर्मनी को पछाड़ कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. आईएमएफ ने 2025 में जर्मनी की अर्थव्यस्था के शून्य के रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद जताई है. 2026 में यह 0.9 फीसदी हो सकता है. इसे देखते हुए भारत के तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना जोरों पर है. उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले से इस लक्ष्य को हासिल करने का खाका खीचें.

किसानों की बात अमेरिका काफी समय से भारत से अपना कृषि क्षेत्र खोलने की मांग कर रहा है. इसके लिए वह कई तरह के दवाब बना रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है. लेकिन भारत ने भी कह दिया है कि वो अपने किसानों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है. संसद में पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही उन्हें अपने निजी संबंधों की कीमत चुकानी पड़े वो अपने किसानों और पशुपालकों का अहित नहीं होने देंगे. ट्रंप के टैरिफ वॉर और उसकी भारत के कृषि क्षेत्र पर लगी हुई नजर को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी इस दिशा में कोई घोषणा करें.

चुनावी राज्यों को सौगात इस साल बिहार विधानसभा का चुनाव होना है. बिहार में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष सुप्रीम कोर्ट, संसद और सड़क पर तक लड़ाई लड़ रहा है. इसके अलावा अगले साल मई तक असम,तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल के चुनाव होने हैं. ये इन पांच राज्यों के चुनाव अगले साल के स्वतंत्रता दिवस से पहले ही हो जाएंगे. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी लालकिले से अपने भाषण इन चुनावी राज्यों के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं. इससे पहले सरकार ने इस साल के बजट में बिहार के लिए कई तरह की घोषणाएं की थी.

युवाओं पर नजर सरकार ने इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के तहत प्रशिक्षण हासिल कर रहे युवाओं को आमंत्रित किया है. पीएमआईएस से जुड़े देश भर से 100 से अधिक प्रशिक्षुओं को आमंत्रित किया गया है. ये प्रशिक्षु 14 से 16 अगस्त तक अलग-अलग कार्यक्रमों में भाग लेंगे. इस तैयारी को देखते हुए कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण के दौरान युवाओं के लिए किसी बड़ी योजना का ऐलान कर सकते हैं, जो आज देश की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा हैं. ऐसा वो पहले भी कर चुके हैं.

जम्मू कश्मीर के लिए क्या होगा बड़ा ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में से एक है जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति. यह फैसला मोदी सरकार ने 2019 में लिया था.लेकिन इसके साथ ही राज्य से पूर्ण राज्य का दर्जा वापस लेकर केंद्रशासित राज्य बना दिया था. इसके बाद से ही राज्य के राजनीतिक दल राज्य के पूर्ण दर्ज की बहाली की मांग कर रहे हैं. इसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी लालकिले से जम्मू कश्मीर के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं. राज्य को कोई बड़ा आर्थिक पैकेज भी दिया जा सकता है.

“नक्सल मोर्चे के शेरदिल सपूतों को राष्ट्रपति का वीरता पदक, सुकमा और दंतेवाड़ा मुठभेड़ों के जांबाज होंगे सम्मानित”

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“स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर की निगाहें छत्तीसगढ़ के उन बहादुर जवानों पर हैं, जिन्होंने नक्सल मोर्चे पर अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया. राष्ट्रपति द्वारा इन जांबाज पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया जा रहा है.

सुकमा के रणबांकुरे 7 मई 2023 को सुकमा जिले के थाना भेड़ी क्षेत्र के ग्राम डोरासेपुंग में पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में तीन माओवादी मारे गए और भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए. इस साहसिक अभियान के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा, उप निरीक्षक संदीप कुमार और आरक्षक मडकम पाणे को वीरता पदक प्रदान किया जाएगा.

इसके अलावा, 12 अगस्त 2020 को थाना चिंतलनार के ग्राम पुटुमपाड़ मेकलरजुड़ में चार माओवादियों को ढेर करने वाले आरक्षक मडकम हुस्मा, मडकम हुगा, वास्सु हुगा और सहायक आरक्षक रोशन गुट्टा भी इस सम्मान के हकदार बने हैं.

शहादत को सलाम 25 फरवरी 2023 को थाना अरनपुर क्षेत्र में हुए नक्सली हमले में सजनी रामूराम नाग, आरक्षक कुंगमा माडवी और आरक्षक वांगो भीमा शहीद हो गए थे. इन्हें मरणोपरांत वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा.

दंतेवाड़ा के जाबांज 20 अप्रैल 2021 को थाना अरनपुर क्षेत्र में मुठभेड़ में एक माओवादी को मार गिराने वाले प्रधान आरक्षक सूरज मरकाम और आरक्षक माडवी सन्नू को यह सम्मान मिलेगा. वहीं, 13 जनवरी 2021 को टेटेकटेंगु-माजुम में मुठभेड़ में एक माओवादी को ढेर करने वाले सीसी कोरौ सिंह और आरक्षक पुसुले देवायण को भी वीरता पदक से नवाज़ा जाएगा.

देश के लिए गर्व का क्षण इन वीर सपूतों ने कठिन जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और गोलियों की बौछार के बीच अपनी जान की परवाह न करते हुए डटकर मुकाबला किया. उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है. राष्ट्रपति का यह सम्मान नक्सल मोर्चे पर तैनात हर उस जवान के जज्बे को सलाम है, जो मातृभूमि की रक्षा के लिए हर पल तैयार खड़ा है.

“ऑपरेशन सिन्दूर’ के लिए BSF के 16 कर्मी वीरता पदक से सम्मानित, पूरी सूची देखें”

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अद्वितीय वीरता और पराक्रम का प्रदर्शन करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सोलह कर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। बीएसएफ, पाकिस्तान से लगी भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार है।

यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में 7 से 10 मई तक पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इस हमले में ऑपरेशन सिंदूर के तहत 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

इस स्वतंत्रता दिवस पर, 16 बहादुर सीमा प्रहरियों (सीमा प्रहरियों) को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके अदम्य साहस और अद्वितीय पराक्रम के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया जा रहा है। बीएसएफ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा ये पदक भारत की प्रथम रक्षा पंक्ति: सीमा सुरक्षा बल में राष्ट्र के विश्वास और भरोसे का प्रमाण हैं।

Indian Air Force के S-400 ने 300 किलोमीटर दूर से लक्ष्य भेद कर विश्व रिकॉर्ड बनायाः

16 बीएसएफ कर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया गया पदक विजेताओं में एक डिप्टी कमांडेंट रैंक का अधिकारी, दो सहायक कमांडेंट और एक इंस्पेक्टर शामिल हैं।

सब इंस्पेक्टर व्यास देव कांस्टेबल सुद्दी राभा अभिषेक श्रीवास्तव, सहायक कमांडेंट कांस्टेबल भूपेंद्र बाजपेयी कांस्टेबल राजन कुमार कांस्टेबल बसवराज शिवप्पा सुनकड़ा हेड कांस्टेबल बृज मोहन सिंह कांस्टेबल देपेश्वर बर्मन इंस्पेक्टर उदय वीर सिंह रवींद्र राठौर, उप कमांडेंट इंस्पेक्टर देवी लाल हेड कांस्टेबल साहिब सिंह कांस्टेबल कंवराज सिंह एएसआई राजप्पा बी टी कांस्टेबल मनोहर क्साल्क्सो आलोक नेगी, सहायक कमांडेंट वीरता पदक (जीएम) वीरता के दुर्लभ विशिष्ट कार्य और वीरता के विशिष्ट कार्य के आधार पर क्रमशः जीवन और संपत्ति की रक्षा करने, या अपराध को रोकने या अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए प्रदान किए जाते हैं, जिसमें संबंधित अधिकारी के दायित्वों और कर्तव्यों के संबंध में जोखिम का अनुमान लगाया जाता है।

Operation Sindoor पर KBC एपिसोड विवाद में घिरा, शो में महिला सैन्य अधिकारियों की वर्दी में मौजूदगी पर उठे सवाल 1,090 कर्मियों को वीरता एवं सेवा पदक से सम्मानित किया गया स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर पुलिस, अग्निशमन, गृह रक्षक और नागरिक सुरक्षा (एचजी एवं सीडी) तथा सुधारात्मक सेवाओं के कुल 1090 कर्मियों को वीरता एवं सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

इनमें से 233 कर्मियों को वीरता पदक (जीएम), 99 कर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम) और 758 कर्मियों को सराहनीय सेवा पदक (एमएसएम) से सम्मानित किया गया है। इन 233 वीरता पुरस्कारों में से अधिकांश में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के 54 कर्मी, जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के 152 कर्मी, पूर्वोत्तर के 3 कर्मी और अन्य क्षेत्रों के 24 कर्मी शामिल हैं जिन्हें उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित किया जा रहा है।

“भारत-अमेरिका टैरिफ वॉर के बीच आई अबतक की सबसे सनसनीखेज खबर, जानकर हिल जाएंगे डोनाल्ड ट्रम्प”

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अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते पर लंबी बातचीत के बावजूद कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल भारत पर 25 प्रतिशत का आधार शुल्क लगाया, बल्कि रूस से सस्ता तेल खरीदने पर दंड स्वरूप 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की भी घोषणा की।

हालाँकि, यह अतिरिक्त शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है, बल्कि 27 अगस्त से लागू होना है। भारत की आर्थिक मजबूती पर रिपोर्ट इस बीच, एक ऐसी रिपोर्ट आई है, जो भारत की बढ़ती आर्थिक मजबूती को दर्शाती है, और जिसे देखकर अमेरिकी राष्ट्रपति भी हैरान हो सकते हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के निदेशक यिफार्न फूका का कहना है कि अमेरिकी शुल्क से भारत की आर्थिक वृद्धि प्रभावित नहीं होगी, क्योंकि भारत एक व्यापार-उन्मुख अर्थव्यवस्था नहीं है। उन्होंने बुधवार को कहा कि भारत की ‘सॉवरेन रेटिंग’ का परिदृश्य सकारात्मक बना रहेगा। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने पिछले साल मई में मजबूत आर्थिक वृद्धि का हवाला देते हुए भारत की सॉवरेन रेटिंग को ‘बीबीबी-‘ से बढ़ाकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया था।

इस पर असर क्यों नहीं पड़ेगा? यह पूछे जाने पर कि क्या टैरिफ लगाने से भारत के सकारात्मक दृष्टिकोण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के निदेशक ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसका भारत की आर्थिक वृद्धि पर कोई प्रभाव पड़ेगा क्योंकि भारत बहुत अधिक व्यापार-उन्मुख अर्थव्यवस्था नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में निर्यात के मामले में भारत की अमेरिका पर निर्भरता देखें, तो यह लगभग 2 प्रतिशत ही है। एसएंडपी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के बराबर है।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के तिरंगे फहराने वाले आदेश पर मस्जिदों को क्यों ऐतराज?

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छत्तीसगढ़ के वक्फ बोर्ड ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य की सभी मस्जिद, मदरसों, दरगाहों के मुख्य द्वार पर तिरंगा फहराने का आदेश दिया, इस आदेश की एक कॉपी भी दिखाई गई, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज के ध्वजारोहण का उल्लेख है, हालांकि, छत्तीसगढ़ की कुछ मस्जिदों और मदरसों को इस आदेश पर आपत्ति है, उनका कहना है कि मस्जिदों पर तिरंगा फहराने का फैसला सही नहीं है.